कैलेंडर
आगामी तिथियाँ
इस्रा और मेराज
पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मक्का से यरूशलम तक की चमत्कारी यात्रा और आसमानों पर उनके आरोहण की रात। इसी रात पाँच वक़्त की नमाज़ें फ़र्ज़ की गईं। यह अल्लाह की महानता पर चिंतन का अवसर है।
बराअत की रात
शाबान की 15वीं रात, जिसे माफ़ी की रात कहा जाता है। कई लोग इसे नमाज़, तौबा और क़ुरआन पढ़ने में बिताते हैं, रमज़ान की तैयारी करते हुए।
रमज़ान
इस्लामी कैलेंडर का नौवाँ महीना और भोर से सूर्यास्त तक रोज़े (सौम) का समय। मुसलमान खाने, पीने और बुरे कामों से परहेज़ करते हैं और अपने दिन नमाज़, क़ुरआन पढ़ने और दान में बिताते हैं। यह आत्मिक शुद्धि और अल्लाह से क़ुरबत का महीना है।
लैलतुल क़द्र
रमज़ान की आख़िरी दस रातों में क़द्र की रात, जब क़ुरआन का अवतरण शुरू हुआ। कहा जाता है कि इस रात की इबादत हज़ार महीनों से बेहतर है। यह दिल से दुआ, तौबा और माफ़ी माँगने का समय है।
ईद अल-फ़ित्र
रोज़ा खोलने का त्योहार जो रमज़ान के महीने का समापन करता है। यह ईद की नमाज़ से शुरू होता है और ज़रूरतमंदों को ज़कात अल-फ़ित्र देने, अपनों के साथ मिलने-जुलने और साझा भोजन से चिह्नित होता है। यह पूरे हुए रोज़े पर खुशी और शुक्र का दिन है।
अरफ़ा का दिन
ज़ुल-हिज्जा महीने का नौवाँ दिन — हज का चरमोत्कर्ष, जब हाजी अराफ़ात पर्वत पर दुआ में खड़े होते हैं। जो हज नहीं कर रहे, उनके लिए इस दिन का रोज़ा विशेष रूप से क़ीमती है। यह ईद अल-अज़हा की पूर्व संध्या है।
ईद अल-अज़हा
क़ुर्बानी का त्योहार, जो पैग़म्बर इब्राहीम की अल्लाह की राह में क़ुर्बानी की तत्परता की याद दिलाता है। ईद की नमाज़ और क़ुर्बानी अदा की जाती है, और गोश्त परिवार तथा ज़रूरतमंदों में बाँटा जाता है। यह हज के दिनों में पड़ता है।
मुहर्रम
इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना और नए हिजरी साल की शुरुआत। यह चार पवित्र महीनों में से एक है, जिनमें नेक काम करना और गुनाहों से बचना विशेष रूप से प्रोत्साहित है।
आशूरा
मुहर्रम महीने का दसवाँ दिन। नबी ﷺ की सुन्नत के अनुसार रोज़े का दिन — पैग़म्बर मूसा और उनकी क़ौम की निजात पर शुक्र के तौर पर। यह तौबा, रहमत और नेक कामों का समय है।
मौलिद अन-नबी
रबी अल-अव्वल महीने में पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ का जन्मदिन। कई देशों में इसे उनकी जीवनी पढ़कर, नेक काम करके और लोगों के प्रति उनकी शिक्षाओं और रहमत को याद करके मनाया जाता है।