1
الْحَمْدُ للَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا, وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें मारने के बाद ज़िन्दा किया और उसी की तरफ उठकर जाना है।) ........................... (1) बुखारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथ 11/113
स्रोत: Al-Bukhari, cf. Al-Asqalani, Fathul-Bari 11/113, Muslim 4/2083.
2
لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَريكَ لَهُ, لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ, وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ, سُبْحَانَ اللَّهِ, وَالْحَمْدُ للَّهِ, وَلاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ, وَاللَّهُ أَكبَرُ, وَلاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ, رَبِّ اغْفرْ لِي
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। उसी के लिए बादशाही है, उसी के लिए सब तारीफ़ है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। अल्लाह पाक है। सब तारीफ़ अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। अल्लाह सबसे बड़ा है। सर्वोच्च एवं महान अल्लाह की मदद के बिना न किसी चीज़ से बचने की ताकत है और न कुछ करने की शक्ति। ऐ मेरे रब! मुझे बख्श दे।) (1) ......................... (1) जो आदमी ये दुआ पढ़े, उसे माफ़ कर दिया जाता है, फिर यदि वो कोई दुआ करे तो उसकी दुआ क़बूल होती है। और अगर वो उठ खड़ा हो, वुज़ू करे और नमाज़ पढ़े, तो उसकी नमाज़ क़बूल होती है। बुख़ारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथ 3/39, हदीस संख्याः1154, आदि। शब्द इब्ने माजा के हैं। देखिएः सह़ीह़ इब्ने माजाः 2/335
स्रोत: Al-Bukhari, cf. Al-Asqalani, Fathul-Bari 3/39, Ibn Majah 2/335.
3
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي عَافَانِي فِي جَسَدِي, وَرَدَّ عَلَيَّ رُوحِي, وَأَذِنَ لي بِذِكْرِهِ
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने मेरे बदन को हर प्रकार की बीमारियों से पाक रखा, मेरे प्राण को मेरे शरीर में लौटा दिया और मुझे अपने ज़िक्र की इजाज़त दी।) (1) ............................ (1) तिर्मिज़ीः5/473, हदीस संख्याः3401 और देखिएः सह़ीह़-तिर्मिज़ीः3/144
स्रोत: At-Tirmizi 5/473, Al-Albani's Sahih Tirmithi 3/144.
4
إِنَّ فِي خَلْقِ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَاخْتِلاَفِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ لَآيَاتٍ لأُوْلِي الألْبَابِ * الَّذِينَ يَذْكُرُونَ اللَّهَ قِيَاماً وَقُعُوداً وَعَلَىَ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِي خَلْقِ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَذا بَاطِلاً سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ* رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ* رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِياً يُنَادِي لِلإِيمَانِ أَنْ آمِنُواْ بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الأبْرَارِ* رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَى رُسُلِكَ وَلاَ تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّكَ لاَ تُخْلِفُ الْمِيعَادَ* فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّي لاَ أُضِيعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَى بَعْضُكُم مِّن بَعْضٍ فَالَّذِينَ هَاجَرُواْ وَأُخْرِجُواْ مِن دِيَارِهِمْ وَأُوذُواْ فِي سَبِيلِي وَقَاتَلُواْ وَقُتِلُواْ لأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الأَنْهَارُ ثَوَاباً مِّن عِندِ اللَّهِ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الثَّوَابِ * لاَ يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ الَّذِينَ كَفَرُواْ فِي الْبِلاَدِ * مَتَاعٌ قَلِيلٌ ثُمَّ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ وَبِئْسَ الْمِهَادُ * لَكِنِ الَّذِينَ اتَّقَوْاْ رَبَّهُمْ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا نُزُلاً مِّنْ عِندِ اللَّهِ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ لِّلأَبْرَارِ * وَإِنَّ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَمَن يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِمْ خَاشِعِينَ لِلَّهِ لاَ يَشْتَرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ ثَمَناً قَلِيلاً أُوْلَئِكَ لَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ*يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُواْ اصْبِرُواْ وَصَابِرُواْ وَرَابِطُواْ وَاتَّقُواْ اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के फेर बदल में अक्लमन्दों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियॉ हैं जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का ज़िक्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फ़िक्र करते हैं और (बेसाख्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (उस में कुछ किसी की खुसूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहॉ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहॉ तो अच्छा ही बदला है (ऐ रसूल) काफ़िरों का शहरों शहरों चैन करते फिरना तुम्हे धोखे में न डाले ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं फिर तो (आख़िरकार) उनका ठिकाना जहन्नुम ही है और क्या ही बुरा ठिकाना है मगर जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की परहेज़गारी (इख्तेयार की उनके लिए बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारीं हैं और वह हमेशा उसी में रहेंगे ये ख़ुदा की तरफ़ से उनकी (दावत है और जो साज़ो सामान) ख़ुदा के यहॉ है वह नेको कारों के वास्ते दुनिया से कहीं बेहतर है और अहले किताब में से कुछ लोग तो ऐसे ज़रूर हैं जो ख़ुदा पर और जो (किताब) तुम पर नाज़िल हुई और जो (किताब) उनपर नाज़िल हुई (सब पर) ईमान रखते हैं ख़ुदा के आगे सर झुकाए हुए हैं और ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फ़ायदे) नहीं लेते ऐसे ही लोगों के वास्ते उनके परवरदिगार के यहॉ अच्छा बदला है बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब करने वाला है ऐ ईमानदारों (दीन की तकलीफ़ों को) और दूसरों को बर्दाश्त की तालीम दो और (जिहाद के लिए) कमरें कस लो और ख़ुदा ही से डरो ताकि तुम अपनी दिली मुराद पाओ
स्रोत: Qur'an Al-'Imran 3: 190-200, Al-Bukhari, cf. Al-Asqalani, Fathul-Bari 8/237, Muslim 1/530.