Qaiyimal liyunzira baasan shadeedam mil ladunhu wa yubashshiral mu'mineenal lazeena ya'maloonas saalihaati anna lahum ajran hasanaa
बल्कि हर तरह से सधा ताकि जो सख्त अज़ाब ख़ुदा की बारगाह से काफिरों पर नाज़िल होने वाला है उससे लोगों को डराए और जिन मोमिनीन ने अच्छे अच्छे काम किए हैं उनको इस बात की खुशख़बरी दे की उनके लिए बहुत अच्छा अज्र (व सवाब) मौजूद है
Maa lahum bihee min 'ilminw wa laa li aabaaa'ihim; kaburat kalimatan takhruju min afwaahihim; iny yaqooloona illaa kazibaa
न तो उन्हीं को उसकी कुछ खबर है और न उनके बाप दादाओं ही को थी (ये) बड़ी सख्त बात है जो उनके मुँह से निकलती है ये लोग झूठ मूठ के सिवा (कुछ और) बोलते ही नहीं
Nahnu naqussu 'alaika naba ahum bilhaqq; innahum fityatun aamanoo bi Rabbihim wa zidnaahum hudaa
(ऐ रसूल) अब हम उनका हाल तुमसे बिल्कुल ठीक तहक़ीक़ातन (यक़ीन के साथ) बयान करते हैं वह चन्द जवान थे कि अपने (सच्चे) परवरदिगार पर ईमान लाए थे और हम ने उनकी सोच समझ और ज्यादा कर दी है
Wa rabatnaa 'alaa quloo bihim iz qaamoo faqaaloo Rabbunaa Rabbus samaawaati wal ardi lan nad'uwa min dooniheee ilaahal laqad qulnaaa izan shatataa
और हमने उनकी दिलों पर (सब्र व इस्तेक़लाल की) गिराह लगा दी (कि जब दक़ियानूस बादशाह ने कुफ्र पर मजबूर किया) तो उठ खड़े हुए (और बे ताम्मुल (खटके)) कहने लगे हमारा परवरदिगार तो बस सारे आसमान व ज़मीन का मालिक है हम तो उसके सिवा किसी माबूद की हरगिज़ इबादत न करेगें
Haaa'ulaaa'i qawmunat takhazoo min dooniheee aalihatal law laa yaatoona 'alaihim bisultaanim baiyin; faman azlamu mimmaniftaraa 'alal laahi kazibaa
अगर हम ऐसा करे तो यक़ीनन हमने अक़ल से दूर की बात कही (अफसोस एक) ये हमारी क़ौम के लोग हैं कि जिन्होनें ख़ुदा को छोड़कर (दूसरे) माबूद बनाए हैं (फिर) ये लोग उनके (माबूद होने) की कोई सरीही (खुली) दलील क्यों नहीं पेश करते और जो शख़्श ख़ुदा पर झूट बोहतान बाँधे उससे ज्यादा ज़ालिम और कौन होगा
Wa izi'tazal tumoohum wa maa ya'budoona illal laaha faawooo ilal kahfi yanshur lakum Rabbukum mir rahmatihee wa yuhaiyi' lakum min amrikum mirfaqa
(फिर बाहम कहने लगे कि) जब तुमने उन लोगों से और ख़ुदा के सिवा जिन माबूदों की ये लोग परसतिश करते हैं उनसे किनारा कशी करली तो चलो (फलॉ) ग़ार में जा बैठो और तुम्हारा परवरदिगार अपनी रहमत तुम पर वसीह कर देगा और तुम्हारा काम में तुम्हारे लिए आसानी के सामान मुहय्या करेगा
Wa tarash shamsa izaa tala'at tazaawaru 'an kahfihim zaatal yameeni wa izaa gharabat taqriduhum zaatash shimaali wa hum fee fajwatim minh; zaalika min Aayaatillaah; mai yahdil laahu fahuwal muhtad, wa mai yudlil falan tajida lahoo waliyyam murshidaa
(ग़रज़ ये ठान कर ग़ार में जा पहुँचे) कि जब सूरज निकलता है तो देखेगा कि वह उनके ग़ार से दाहिनी तरफ झुक कर निकलता है और जब ग़ुरुब (डुबता) होता है तो उनसे बायीं तरफ कतरा जाता है और वह लोग (मजे से) ग़ार के अन्दर एक वसीइ (बड़ी) जगह में (लेटे) हैं ये ख़ुदा (की कुदरत) की निशानियों में से (एक निशानी) है जिसको हिदायत करे वही हिदायत याफ्ता है और जिस को गुमराह करे तो फिर उसका कोई सरपरस्त रहनुमा हरगिज़ न पाओगे
Wa tahsabuhum ayqaazanw wa hum ruqood; wa nuqallibuhum zaatal yameeni wa zaatash shimaali wa kalbuhum baasitun ziraa'ayhi bilwaseed; lawit tala'ta 'alaihim la wallaita minhum firaaranw wa lamuli'ta minhum rubaa
तू उनको समझेगा कि वह जागते हैं हालॉकि वह (गहरी नींद में) सो रहे हैं और हम कभी दाहिनी तरफ और कभी बायीं तरफ उनकी करवट बदलवा देते हैं और उनका कुत्ताा अपने आगे के दोनो पाँव फैलाए चौखट पर डटा बैठा है (उनकी ये हालत है कि) अगर कहीं तू उनको झाक कर देखे तो उलटे पाँव ज़रुर भाग खड़े हो और तेरे दिल में दहशत समा जाए
Wa kazaalika ba'asnaahum liyatasaaa'aloo bainahum; qaala qaaa'ilum minhum kam labistum qaaloo labisnaa yawman aw ba'da yawm; qaaloo Rabbukum a'almu bimaa labistum fab'asooo ahadakum biwariqikum haazihee ilal madeenati falyanzur ayyuhaaa azkaa ta'aaman falyaatikum birizqim minhu walyatalattaf wa laa yush'iranna bikum ahadaa
और (जिस तरह अपनी कुदरत से उनको सुलाया) उसी तरह (अपनी कुदरत से) उनको (जगा) उठाया ताकि आपस में कुछ पूछ गछ करें (ग़रज़) उनमें एक बोलने वाला बोल उठा कि (भई आख़िर इस ग़ार में) तुम कितनी मुद्दत ठहरे कहने लगे (अरे ठहरे क्या बस) एक दिन से भी कम उसके बाद कहने लगे कि जितनी देर तुम ग़ार में ठहरे उसको तुम्हारे परवरदिगार ही (कुछ तुम से) बेहतर जानता है (अच्छा) तो अब अपने में से किसी को अपना ये रुपया देकर शहर की तरफ भेजो तो वह (जाकर) देखभाल ले कि वहाँ कौन सा खाना बहुत अच्छा है फिर उसमें से (ज़रुरत भर) खाना तुम्हारे वास्ते ले आए और उसे चाहिए कि वह आहिस्ता चुपके से आ जाए और किसी को तुम्हारी ख़बर न होने दे
Innahum iny yazharoo 'alaikum yarjumookum aw yu'eedookum fee millatihim wa lan tuflihooo izan abadaa
इसमें शक़ नहीं कि अगर उन लोगों को तुम्हारी इत्तेलाअ हो गई तो बस फिर तुम को संगसार ही कर देंगें या फिर तुम को अपने दीन की तरफ फेर कर ले जाएँगे और अगर ऐसा हुआ तो फिर तुम कभी कामयाब न होगे
Wa kazaalika a'sarnaa 'alaihim liya'lamooo anna wa'dal laahi haqqunw wa annas Saa'ata laa raiba feehaa iz yatanaaza'oona bainahum amrahum faqaalub noo 'alaihim bunyaanaa; Rabbuhum a'lamu bihim; qaalal lazeena ghalaboo 'alaaa amrihim lanat takhizanna 'alaihim masjidaa
और हमने यूँ उनकी क़ौम के लोगों को उनकी हालत पर इत्तेलाअ (ख़बर) कराई ताकि वह लोग देख लें कि ख़ुदा को वायदा यक़ीनन सच्चा है और ये (भी समझ लें) कि क़यामत (के आने) में कुछ भी शुबहा नहीं अब (इत्तिलाआ होने के बाद) उनके बारे में लोग बाहम झगड़ने लगे तो कुछ लोगों ने कहा कि उनके (ग़ार) पर (बतौर यादगार) कोई इमारत बना दो उनका परवरदिगार तो उनके हाल से खूब वाक़िफ है ही और उनके बारे में जिन (मोमिनीन) की राए ग़ालिब रही उन्होंने कहा कि हम तो उन (के ग़ार) पर एक मस्जिद बनाएँगें
Sa yaqooloona salaasatur raabi'uhum kalbuhum wa yaqooloona khamsatun saadisuhum kalbuhum rajmam bilghaib; wa yaqooloona sab'atunw wa saaminuhum kalbuhum; qur Rabbeee a'lamu bi'iddatihim maa ya'lamuhum illaa qaleel; falaa tumaari feehim illaa miraaa'an zaahiranw wa laa tastafti feehim minhum ahadaa
क़रीब है कि लोग (नुसैरे नज़रान) कहेगें कि वह तीन आदमी थे चौथा उनका कुत्ताा (क़तमीर) है और कुछ लोग (आक़िब वग़ैरह) कहते हैं कि वह पाँच आदमी थे छठा उनका कुत्ताा है (ये सब) ग़ैब में अटकल लगाते हैं और कुछ लोग कहते हैं कि सात आदमी हैं और आठवाँ उनका कुत्ताा है (ऐ रसूल) तुम कह दो की उनका सुमार मेरा परवरदिगार ही ख़ब जानता है उन (की गिनती) के थोडे ही लोग जानते हैं तो (ऐ रसूल) तुम (उन लोगों से) असहाब कहफ के बारे में सरसरी गुफ्तगू के सिवा (ज्यादा) न झगड़ों और उनके बारे में उन लोगों से किसी से कुछ पूछ गछ नहीं
Illaaa any yashaaa'al laah; wazkur Rabbaka izaa naseeta wa qul 'asaaa any yahdiyani Rabbee li aqraba min haazaa rashadaa
मगर इन्शा अल्लाह कह कर और अगर (इन्शा अल्लाह कहना) भूल जाओ तो (जब याद आए) अपने परवरदिगार को याद कर लो (इन्शा अल्लाह कह लो) और कहो कि उम्मीद है कि मेरा परवरदिगार मुझे ऐसी बात की हिदायत फरमाए जो रहनुमाई में उससे भी ज्यादा क़रीब हो
Qulil laahu a'lamu bimaa labisoo lahoo ghaibus samaawaati wal ardi absir bihee wa asmi'; maa lahum min doonihee minw waliyyinw wa laa yushriku fee hukmihee ahadaa
(ऐ रसूल) अगर वह लोग इस पर भी न मानें तो तुम कह दो कि ख़ुदा उनके ठहरने की मुद्दत से बखूबी वाक़िफ है सारे आसमान और ज़मीन का ग़ैब उसी के वास्ते ख़ास है (अल्लाह हो अकबर) वो कैसा देखने वाला क्या ही सुनने वाला है उसके सिवा उन लोगों का कोई सरपरस्त नहीं और वह अपने हुक्म में किसी को अपना दख़ील (शरीक) नहीं बनाता
Watlu maaa oohiya ilaika min Kitaabi Rabbika laa mubaddila li Kalimaatihee wa lan tajida min doonihee multahadaa
और (ऐ रसूल) जो किताब तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वही के ज़रिए से नाज़िल हुईहै उसको पढ़ा करो उसकी बातों को कोई बदल नहीं सकता और तुम उसके सिवा कहीं कोई हरगिज़ पनाह की जगह (भी) न पाओगे
Wasbir nafsaka ma'al lazeena yad'oona Rabbahum bilghadaati wal'ashiyyi yureedoona Wajhahoo wa laa ta'du 'aynaaka 'anhum tureedu zeenatal hayaatid dunyaa wa laa tuti' man aghfalnaa qalbahoo 'an zikrinaa wattaba'a hawaahu wa kaana amruhoo furutaa
और (ऐ रसूल) जो लोग अपने परवरदिगार को सुबह सवेरे और झटपट वक्त शाम को याद करते हैं और उसकी खुशनूदी के ख्वाहाँ हैं उनके उनके साथ तुम खुद (भी) अपने नफस पर जब्र करो और उनकी तरफ से अपनी नज़र (तवज्जो) न फेरो कि तुम दुनिया में ज़िन्दगी की आराइश चाहने लगो और जिसके दिल को हमने (गोया खुद) अपने ज़िक्र से ग़ाफिल कर दिया है और वह अपनी ख्वाहिशे नफसानी के पीछे पड़ा है और उसका काम सरासर ज्यादती है उसका कहना हरगिज़ न मानना
Wa qulil haqqu mir Rabbikum faman shaaa'a falyu minw wa man shaaa'a falyakfur; innaaa a'tadnaa lizzaalimeena Naaran ahaata bihim suraadiquhaa; wa iny yastagheesoo yaghaasoo bimaaa'in kalmuhli yashwil wujooh' bi'sash-sharaab; wa saaa'at murtafaqaa
और (ऐ रसूल) तुम कह दों कि सच्ची बात (कलमए तौहीद) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (नाज़िल हो चुकी है) बस जो चाहे माने और जो चाहे न माने (मगर) हमने ज़ालिमों के लिए वह आग (दहका के) तैयार कर रखी है जिसकी क़नातें उन्हें घेर लेगी और अगर वह लोग दोहाई करेगें तो उनकी फरियाद रसी खौलते हुए पानी से की जाएगी जो मसलन पिघले हुए ताबें की तरह होगा (और) वह मुँह को भून डालेगा क्या बुरा पानी है और (जहन्नुम भी) क्या बुरी जगह है
Ulaaa'ika lahum Jannaatu 'Adnin tajree min tahtihimul anhaaru yuhallawna feehaa min asaawira min zahabinw wa yalbasoona siyaaban khudram min sundusinw wa istabraqim muttaki'eena feehaa 'alal araaa'ik; ni'mas sawaab; wa hasunat murtafaqaa
ये वही लोग हैं जिनके (रहने सहने के) लिए सदाबहार (बेहश्त के) बाग़ात हैं उनके (मकानात के) नीचे नहरें जारी होगीं वह उन बाग़ात में दमकते हुए कुन्दन के कंगन से सँवारे जाँएगें और उन्हें बारीक रेशम (क्रेब) और दबीज़ रेश्म (वाफते)के धानी जोड़े पहनाए जाएँगें और तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होगें क्या ही अच्छा बदला है और (बेहश्त भी आसाइश की) कैसी अच्छी जगह है
Wadrib lahum masalar rajulaini ja'alnaa li ahadihimaa jannataini min a'naabinw wa hafafnaahumaa binakhilinw wa ja'alnaa bainahumaa zar'aa
और (ऐ रसूल) इन लोगों से उन दो शख़्शों की मिसाल बयान करो कि उनमें से एक को हमने अंगूर के दो बाग़ दे रखे है और हमने चारो ओर खजूर के पेड़ लगा दिये है और उन दोनों बाग़ के दरमियान खेती भी लगाई है
Wa dakhala jannatahoo wa huwa zaalimul linafsihee qaala maaa azunnu an tabeeda haaziheee abadaa
और ये बातें करता हुआ अपने बाग़ मे भी जा पहुँचा हालॉकि उसकी आदत ये थी कि (कुफ्र की वजह से) अपने ऊपर आप ज़ुल्म कर रहा था (ग़रज़ वह कह बैठा) कि मुझे तो इसका गुमान नहीं तो कि कभी भी ये बाग़ उजड़ जाए
Qaala lahoo saahibuhoo wa huwa yuhaawiruhooo akafarta billazee khalaqaka min turaabin summa min nutfatin summa sawwaaka rajulaa
उसका साथी जो उससे बातें कर रहा था कहने लगा कि क्या तू उस परवरदिगार का मुन्किर है जिसने (पहले) तुझे मिट्टी से पैदा किया फिर नुत्फे से फिर तुझे बिल्कुल ठीक मर्द (आदमी) बना दिया
Wa law laaa iz dakhalta jannataka qulta maa shaaa'al laahu laa quwwata illaa billaah; in tarani ana aqalla minka maalanw wa waladaa
और जब तू अपने बाग़ में आया तो (ये) क्यों न कहा कि ये सब (माशा अल्लाह ख़ुदा ही के चाहने से हुआ है (मेरा कुछ भी नहीं क्योंकि) बग़ैर ख़ुदा की (मदद) के (किसी में) कुछ सकत नहीं अगर माल और औलाद की राह से तू मुझे कम समझता है
Fa'asaa Rabeee any yu'tiyani khairam min jannatika wa yursila 'alaihaa husbaanam minas samaaa'i fatusbiha sa'eedan zalaqaa
तो अनक़ीरब ही मेरा परवरदिगार मुझे वह बाग़ अता फरमाएगा जो तेरे बाग़ से कहीं बेहतर होगा और तेरे बाग़ पर कोई ऐसी आफत आसमान से नाज़िल करे कि (ख़ाक सियाह) होकर चटियल चिकना सफ़ाचट मैदान हो जाए
Wa uheeta bisamarihee faasbaha yuqallibu kaffaihi 'alaa maaa anfaqa feehaa wa hiya khaawiyatun 'alaa 'urooshihaa wa yaqoolu yaalaitanee lam ushrik bi Rabbeee ahadaa
(चुनान्चे अज़ाब नाज़िल हुआ) और उसके (बाग़ के) फल (आफत में) घेर लिए गए तो उस माल पर जो बाग़ की तैयारी में सर्फ (ख़र्च) किया था (अफसोस से) हाथ मलने लगा और बाग़ की ये हालत थी कि अपनी टहनियों पर औंधा गिरा हुआ पड़ा था तो कहने लगा काश मै अपने परवरदिगार का किसी को शरीक न बनाता
Wadrib lahum masalal hayaatid dunyaa kamaaa'in anzalnaahu minas samaaa'i fakhtalata bihee nabaatul ardi fa asbaha hasheeman tazroo hur riyaah; wa kaanal laahu 'alaa kulli shai'im muqtadiraa
और (ऐ रसूल) इनसे दुनिया की ज़िन्दगी की मसल भी बयान कर दो कि उसके हालत पानी की सी है जिसे हमने आसमान से बरसाया तो ज़मीन की उगाने की ताक़त उसमें मिल गई और (खूब फली फूली) फिर आख़िर रेज़ा रेज़ा (भूसा) हो गई कि उसको हवाएँ उड़ाए फिरती है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
Almaalu walbanoona zeenatul hayaatid dunya wal baaqiyaatus saalihaatu khairun 'inda Rabbika sawaabanw wa khairun amalaa
(ऐ रसूल) माल और औलाद (इस ज़रा सी) दुनिया की ज़िन्दगी की ज़ीनत हैं और बाक़ी रहने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब में उससे कही ज्यादा अच्छी हैं और तमन्नाएँ व आरजू की राह से (भी) बेहतर हैं
Wa yawma nusaiyirul jibaala wa taral arda baariza tanw wa hasharnaahum falam nughaadir minhum ahadaa
और (उस दिन से डरो) जिस दिन हम पहाड़ों को चलाएँगें और तुम ज़मीन को खुला मैदान (पहाड़ों से) खाली देखोगे और हम इन सभी को इकट्ठा करेगे तो उनमें से एक को न छोड़ेगें
Wa 'uridoo 'alaa Rabbika saffaa, laqad ji'tumoonaa kamaa khalaqnaakum awala marrah; bal za'amtum allannaj'ala lakum maw'idaa
सबके सब तुम्हारे परवरदिगार के सामने कतार पे क़तार पेश किए जाएँगें और (उस वक्त हम याद दिलाएँगे कि जिस तरह हमने तुमको पहली बार पैदा किया था (उसी तरह) तुम लोगों को (आख़िर) हमारे पास आना पड़ा मगर तुम तो ये ख्याल करते थे कि हम तुम्हारे (दोबारा पैदा करने के) लिए कोई वक्त ही न ठहराएँगें
Wa wudi'al kitaabu fataral mujrimeena mushfiqeena mimmaa feehi wa yaqooloona yaa wailatanaa maa lihaazal kitaabi laa yughaadiru saghee ratanw wa laa kabeeratan illaaa ahsaahaa; wa wajadoo maa 'amiloo haadiraa; wa laa yazlimu Rabbuka ahadaa
और लोगों के आमाल की किताब (सामने) रखी जाएँगी तो तुम गुनेहगारों को देखोगे कि जो कुछ उसमें (लिखा) है (देख देख कर) सहमे हुए हैं और कहते जाते हैं हाए हमारी यामत ये कैसी किताब है कि न छोटे ही गुनाह को बे क़लमबन्द किए छोड़ती है न बड़े गुनाह को और जो कुछ इन लोगों ने (दुनिया में) किया था वह सब (लिखा हुआ) मौजूद पाएँगें और तेरा परवरदिगार किसी पर (ज़र्रा बराबर) ज़ुल्म न करेगा
Wa iz qulnaa lilma laaa'ikatis judoo li Aadama fasajadooo illaaa Ibleesa kaana minal jinni fafasaqa 'an amri Rabbih; afatattakhizoonahoo wa zurriyatahooo awliyaaa'a min doonee wa hum lakum 'aduww; bi'sa lizzaalimeena badalaa
और (वह वक्त याद करो) जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया (ये इबलीस) जिन्नात से था तो अपने परवरदिगार के हुक्म से निकल भागा तो (लोगों) क्या मुझे छोड़कर उसको और उसकी औलाद को अपना दोस्त बनाते हो हालॉकि वह तुम्हारा (क़दीमी) दुश्मन हैं ज़ालिमों (ने ख़ुदा के बदले शैतान को अपना दोस्त बनाया ये उन) का क्या बुरा ऐवज़ है
Maaa ash hattuhum khalqas samaawaati wal ardi wa laa khalqa anfusihim wa maa kuntu muttakizal mudilleena 'adudaa
मैने न तो आसमान व ज़मीन के पैदा करने के वक्त उनको (मदद के लिए) बुलाया था और न खुद उनके पैदा करने के वक्त अौर मै (ऐसा गया गुज़रा) न था कि मै गुमराह करने वालों को मददगार बनाता
Wa Yawma yaqoolu naadoo shurakaaa'i yal lazeena za'amtum fada'awhum falam yastajeeboo lahum wa ja'alnaa bainahum maw biqaa
और (उस दिन से डरो) जिस दिन ख़ुदा फरमाएगा कि अब तुम जिन लोगों को मेरा शरीक़ ख्याल करते थे उनको (मदद के लिए) पुकारो तो वह लोग उनको पुकारेगें मगर वह लोग उनकी कुछ न सुनेगें और हम उन दोनों के बीच में महलक (खतरनाक) आड़ बना देंगे
Wa maa mana'an naasa any yu'minooo iz jaaa'ahumul hudaa wa yastaghfiroo Rabbahum illaaa an taatiyahum sunnatul awwaleena aw yaatiyahumul 'azaabu qubulaa
और जब लोगों के पास हिदायत आ चुकी तो (फिर) उनको ईमान लाने और अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ माँगने से (उसके सिवा और कौन) अम्र मायने है कि अगलों की सी रीत रस्म उनको भी पेश आई या हमारा अज़ाब उनके सामने से (मौजूद) हो
Wa maa nursilul mursaleena illaa mubashshireena wa munzireen; wa yujaadilul lazeena kafaroo bilbaatili liyudhidoo bihil haqqa wattakhazooo Aayaatee wa maaa unziroo huzuwaa
और हम तो पैग़म्बरों को सिर्फ इसलिए भेजते हैं कि (अच्छों को निजात की) खुशख़बरी सुनाएंऔर (बदों को अज़ाब से) डराएंऔर जो लोग काफिर हैं झूटी झूटी बातों का सहारा पकड़ के झगड़ा करते है ताकि उसकी बदौलत हक़ को (उसकी जगह से उखाड़ फेकें और उन लोगों ने मेरी आयतों को जिस (अज़ाब से) ये लोग डराए गए हॅसी ठ्ठ्ठा (मज़ाक) बना रखा है
Wa man azlamu mimman zukkira bi ayaati Rabbihee fa-a'rada 'anhaa wa nasiya maa qaddamat yadaah; innaa ja'alnaa 'alaa quloobihim akinnatan any yafqahoohu wa feee aazaanihim waqraa; wa in tad'uhum ilal hudaa falany yahtadooo izan abadaa
और उससे बढ़कर और कौन ज़ालिम होगा जिसको ख़ुदा की आयतें याद दिलाई जाए और वह उनसे रद गिरदानी (मुँह फेर ले) करे और अपने पहले करतूतों को जो उसके हाथों ने किए हैं भूल बैठे (गोया) हमने खुद उनके दिलों पर परदे डाल दिए हैं कि वह (हक़ बात को) न समझ सकें और (गोया) उनके कानों में गिरानी पैदा कर दी है कि (सुन न सकें) और अगर तुम उनको राहे रास्त की तरफ़ बुलाओ भी तो ये हरगिज़ कभी रुबरु होने वाले नहीं हैं
Wa Rabbukal Ghafooru zur rahmati law yu'aakhi zuhum bimaa kasaboo la'ajala lahumul 'azaab; bal lahum maw'idul lany yajidoo min doonihee maw'ilaa
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है अगर उनकी करतूतों की सज़ा में धर पकड़ करता तो फौरन (दुनिया ही में) उन पर अज़ाब नाज़िल कर देता मगर उनके लिए तो एक मियाद (मुक़र्रर) है जिससे खुदा के सिवा कहीें पनाह की जगह न पाएंगें
Wa iz qaalaa Moosaa lifataahu laaa abrahu hattaaa ablugha majma'al bahrayni aw amdiya huqubaa
(ऐ रसूल) वह वाक़या याद करो जब मूसा खिज़्र की मुलाक़ात को चले तो अपने जवान वसी यूशा से बोले कि जब तक में दोनों दरियाओं के मिलने की जगह न पहुँच जाऊँ (चलने से) बाज़ न आऊँगा
ख्वाह (अगर मुलाक़ात न हो तो) बरसों यूँ ही चलता जाऊँगा फिर जब ये दोनों उन दोनों दरियाओं के मिलने की जगह पहुँचे तो अपनी (भुनी हुई) मछली छोड़ चले तो उसने दरिया में सुरंग बनाकर अपनी राह ली
Qaala ara'ayta iz awainaaa ilas sakhrati fa innee naseetul hoota wa maaa ansaaneehu illash Shaitaanu an azkurah; wattakhaza sabeelahoo fil bahri'ajabaa
(यूशा ने) कहा क्या आप ने देखा भी कि जब हम लोग (दरिया के किनारे) उस पत्थर के पास ठहरे तो मै (उसी जगह) मछली छोड़ आया और मुझे आप से उसका ज़िक्र करना शैतान ने भुला दिया और मछली ने अजीब तरह से दरिया में अपनी राह ली
Qaala lahoo Moosaa hal attabi'uka 'alaaa an tu'allimani mimmaa 'ullimta rushdaa
और हमने उसे इल्म लदुन्नी (अपने ख़ास इल्म) में से कुछ सिखाया था मूसा ने उन (ख़िज्र) से कहा क्या (आपकी इजाज़त है कि) मै इस ग़रज़ से आपके साथ साथ रहूँ
आयत 67
قَالَ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِىَ صَبْرًۭا
Qaalaa innaka lan tastatee'a ma'iya sabraa
कि जो रहनुमाई का इल्म आपको है (ख़ुदा की तरफ से) सिखाया गया है उसमें से कुछ मुझे भी सिखा दीजिए खिज्र ने कहा (मै सिखा दूँगा मगर) आपसे मेरे साथ सब्र न हो सकेगा
आप मुझसे किसी चीज़ के बारे में न पूछियेगा ग़रज़ ये दोनो (मिलकर) चल खड़े हुए यहाँ तक कि (एक दरिया में) जब दोनों कश्ती में सवार हुए तो ख़िज्र ने कश्ती में छेद कर दिया मूसा ने कहा (आप ने तो ग़ज़ब कर दिया) क्या कश्ती में इस ग़रज़ से सुराख़ किया है
(ख़ैर ये तो हो गया) फिर दोनों के दोनों आगे चले यहाँ तक कि दोनों एक लड़के से मिले तो उस बन्दे ख़ुदा ने उसे जान से मार डाला मूसा ने कहा (ऐ माज़ अल्लाह) क्या आपने एक मासूम शख़्श को मार डाला और वह भी किसी के (ख़ौफ के) बदले में नहीं आपने तो यक़ीनी एक अजीब हरकत की
Qaala in sa altuka 'an shai'im ba'dahaa falaa tusaahibnee qad balaghta mil ladunnee 'uzraa
मूसा ने कहा (ख़ैर जो हुआ वह हुआ) अब अगर मैं आप से किसी चीज़ के बारे में पूछगछ करूँगा तो आप मुझे अपने साथ न रखियेगा बेशक आप मेरी तरफ से माज़रत (की हद को) पहुँच गए
Fantalaqaa hattaaa izaaa atayaaa ahla qaryatinis tat'amaaa ahlahaa fa abaw any yudaiyifoohumaa fawajadaa feehaa jidaarany yureedu any yanqadda fa aqaamah; qaala law shi'ta lattakhazta 'alaihi ajraa
ग़रज़ (ये सब हो हुआ कर फिर) दोनों आगे चले यहाँ तक कि जब एक गाँव वालों के पास पहुँचे तो वहाँ के लोगों से कुछ खाने को माँगा तो उन लोगों ने दोनों को मेहमान बनाने से इन्कार कर दिया फिर उन दोनों ने उसी गाँव में एक दीवार को देखा कि गिरा ही चाहती थी तो खिज्र ने उसे सीधा खड़ा कर दिया उस पर मूसा ने कहा अगर आप चाहते तो (इन लोगों से) इसकी मज़दूरी ले सकते थे
Qaala haazaa firaaqu bainee wa bainik; sa unabi 'uka bitaaweeli maa lam tastati' 'alaihi sabraa
(ताकि खाने का सहारा होता) खिज्र ने कहा मेरे और आपके दरमियान छुट्टम छुट्टा अब जिन बातों पर आप से सब्र न हो सका मैं अभी आप को उनकी असल हक़ीकत बताए देता हूँ
Ammas safeenatu fakaanat limasaakeena ya'maloona fil bahri fa arattu an a'eebahaa wa kaana waraaa' ahum malikuny yaakhuzu kulla safeenatin ghasbaa
(लीजिए सुनिये) वह कश्ती (जिसमें मैंने सुराख़ कर दिया था) तो चन्द ग़रीबों की थी जो दरिया में मेहनत करके गुज़ारा करते थे मैंने चाहा कि उसे ऐबदार बना दूँ (क्योंकि) उनके पीछे-पीछे एक (ज़ालिम) बादशाह (आता) था कि तमाम कश्तियां ज़बरदस्ती बेगार में पकड़ लेता था
Wa aammal ghulaamu fakaana abawaahu mu'minaini fakhasheenaaa any yurhiqa humaa tughyaananw wa kufraa
और वह जो लड़का जिसको मैंने मार डाला तो उसके माँ बाप दोनों (सच्चे) ईमानदार हैं तो मुझको ये अन्देशा हुआ कि (ऐसा न हो कि बड़ा होकर) उनको भी अपने सरकशी और कुफ़्र में फँसा दे
Wa ammal jidaaru fakaana lighulaamaini yateemaini fil madeenati wa kaana tahtahoo kanzul lahumaa wa kaana aboohumaa saalihan fa araada Rabbuka any yablughaaa ashuddahumaa wa yastakhrijaa kanzahumaa rahmatam mir Rabbik; wa maa fa'altuhoo 'an amree; zaalika taaweelu maa lam tasti' 'alaihi sabra
और वह जो दीवार थी (जिसे मैंने खड़ा कर दिया) तो वह शहर के दो यतीम लड़कों की थी और उसके नीचे उन्हीं दोनों लड़कों का ख़ज़ाना (गड़ा हुआ था) और उन लड़कों का बाप एक नेक आदमी था तो तुम्हारे परवरदिगार ने चाहा कि दोनों लड़के अपनी जवानी को पहुँचे तो तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी से अपना ख़ज़ाने निकाल ले और मैंने (जो कुछ किया) कुछ अपने एख्तियार से नहीं किया (बल्कि खुदा के हुक्म से) ये हक़ीक़त है उन वाक़यात की जिन पर आपसे सब्र न हो सका
Hattaaa izaa balagha maghribash shamsi wajadahaaa taghrubu fee 'aynin hami'a tinw wa wajada 'indahaa qawmaa; qulnaa yaa Zal Qarnaini immaaa an tu'az ziba wa immaaa an tattakhiza feehim husnaa
यहाँ तक कि जब (चलते-चलते) आफताब के ग़ुरूब होने की जगह पहुँचा तो आफताब उनको ऐसा दिखाई दिया कि (गोया) वह काली कीचड़ के चश्में में डूब रहा है और उसी चश्में के क़रीब एक क़ौम को भी आबाद पाया हमने कहा ऐ जुलकरनैन (तुमको एख्तियार है) ख्वाह इनके कुफ्र की वजह से इनकी सज़ा करो (कि ईमान लाए) या इनके साथ हुस्ने सुलूक का शेवा एख्तियार करो (कि खुद ईमान क़ुबूल करें)
Qaala amaa man zalama fasawfa nu'azzibuhoo summa yuraddu ilaa Rabbihee fa yu 'azzibuhoo azaaban nukraa
जुलकरनैन ने अर्ज़ की जो शख्स सरकशी करेगा तो हम उसकी फौरन सज़ा कर देगें (आख़िर) फिर वह (क़यामत में) अपने परवरदिगार के सामने लौटाकर लाया ही जाएगा और वह बुरी से बुरी सज़ा देगा
Wa ammaa man aamana wa 'amila saalihan falahoo jazaaa'anil husnaa wa sanaqoolu lahoo min amrinaa yusraa
और जो शख्स ईमान कुबूल करेगा और अच्छे काम करेगा तो (वैसा ही) उसके लिए अच्छे से अच्छा बदला है और हम बहुत जल्द उसे अपने कामों में से आसान काम (करने) को कहेंगे
यहाँ तक कि जब चलते-चलते आफताब के तूलूउ होने की जगह पहुँचा तो (आफताब) से ऐसा ही दिखाई दिया (गोया) कुछ लोगों के सर पर उस तरह तुलूउ कर रहा है जिन के लिए हमने आफताब के सामने कोई आड़ नहीं बनाया था
यहाँ तक कि जब चलते-चलते रोम में एक पहाड़ के (कंगुरों के) दीवारों के बीचो बीच पहुँच गया तो उन दोनों दीवारों के इस तरफ एक क़ौम को (आबाद) पाया तो बात चीत कुछ समझ ही नहीं सकती थी
Qaaloo yaa Zal qarnaini inna Yaajooja wa Maajooja mufsidoona fil ardi fahal naj'alu laka kharjan 'alaaa an taj'ala bainanaa wa bainahum saddas
उन लोगों ने मुतरज्जिम के ज़रिए से अर्ज़ की ऐ ज़ुलकरनैन (इसी घाटी के उधर याजूज माजूज की क़ौम है जो) मुल्क में फ़साद फैलाया करते हैं तो अगर आप की इजाज़त हो तो हम लोग इस ग़र्ज़ से आपसे पास चन्दा जमा करें कि आप हमारे और उनके दरमियान कोई दीवार बना दें
Qaala maa makkannee feehi Rabbee khairun fa-a'eenoonee biquwwatin aj'al bainakum wa bainahum radmaa
जुलकरनैन ने कहा कि मेरे परवरदिगार ने ख़र्च की जो कुदरत मुझे दे रखी है वह (तुम्हारे चन्दे से) कहीं बेहतर है (माल की ज़रूरत नहीं) तुम फक़त मुझे क़ूवत से मदद दो तो मैं तुम्हारे और उनके दरमियान एक रोक बना दूँ
(अच्छा तो) मुझे (कहीं से) लोहे की सिले ला दो (चुनान्चे वह लोग) लाए और एक बड़ी दीवार बनाई यहाँ तक कि जब दोनो कंगूरो के दरमेयान (दीवार) को बुलन्द करके उनको बराबर कर दिया तो उनको हुक्म दिया कि इसके गिर्द आग लगाकर धौको यहां तक उसको (धौंकते-धौंकते) लाल अंगारा बना दिया
Famas taa'ooo any yazharoohu wa mastataa'oo lahoo naqbaa
तो कहा कि अब हमको ताँबा दो कि इसको पिघलाकर इस दीवार पर उँडेल दें (ग़रज़) वह ऐसी ऊँची मज़बूत दीवार बनी कि न तो याजूज व माजूज उस पर चढ़ ही सकते थे और न उसमें नक़ब लगा सकते थे
Qaala haaza rahmatummir Rabbee fa izaa jaaa'a wa'du Rabbee ja'alahoo dakkaaa'a; wa kaana; wa du Rabbee haqqaa
जुलक़रनैन ने (दीवार को देखकर) कहा ये मेरे परवरदिगार की मेहरबानी है मगर जब मेरे परवरदिगार का वायदा (क़यामत) आयेगा तो इसे ढहा कर हमवार कर देगा और मेरे परवरदिगार का वायदा सच्चा है
Wa taraknaa ba'dahum Yawma'iziny yamooju fee ba'dinw wa nufikha fis Soori fajama'naahum jam'aa
और हम उस दिन (उन्हें उनकी हालत पर) छोड़ देंगे कि एक दूसरे में (टकरा के दरिया की) लहरों की तरह गुड़मुड़ हो जाएँ और सूर फूँका जाएगा तो हम सब को इकट्ठा करेंगे
Afahasibal lazeena kafarooo any yattakhizoo 'ibaadee min dooneee awliyaaa'; innaaa a'tadnaa jahannama lilkaafi reena nuzulaa
तो क्या जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया इस ख्याल में हैं कि हमको छोड़कर हमारे बन्दों को अपना सरपरस्त बना लें (कुछ पूछगछ न होगी) (अच्छा सुनो) हमने काफिरों की मेहमानदारी के लिए जहन्नुम तैयार कर रखी है
Ulaaa'ikal lazeena kafaroo bi aayaati Rabbihim wa liqaaa'ihee fahabitat a'maaluhum falaa nuqeemu lahum Yawmal Qiyaamati waznaa
यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयातों से और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया तो उनका सब किया कराया अकारत हुआ तो हम उसके लिए क़यामत के दिन मीजान हिसाब भी क़ायम न करेंगे
Zaalika jazaaa'uhum jahannamu bimaa kafaroo wattakhazooo Aayaatee wa Rusulee huzuwaa
(और सीधे जहन्नुम में झोंक देगें) ये जहन्नुम उनकी करतूतों का बदला है कि उन्होंने कुफ्र एख्तियार किया और मेरी आयतों और मेरे रसूलों को हँसी ठठ्ठा बना लिया
Qul law kaanal bahru midaadal lik Kalimaati Rabbee lanafidal bahru qabla an tanfada Kalimaatu Rabbee wa law ji'naa bimislihee madadaa
(ऐ रसूल उन लोगों से) कहो कि अगर मेरे परवरदिगार की बातों के (लिखने के) वास्ते समन्दर (का पानी) भी सियाही बन जाए तो क़ब्ल उसके कि मेरे परवरदिगार की बातें ख़त्म हों समन्दर ही ख़त्म हो जाएगा अगरचे हम वैसा ही एक समन्दर उस की मदद को लाँए
(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी तुम्हारा ही ऐसा एक आदमी हूँ (फर्क़ इतना है) कि मेरे पास ये वही आई है कि तुम्हारे माबूद यकता माबूद हैं तो वो शख्स आरज़ूमन्द होकर अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होगा तो उसे अच्छे काम करने चाहिए और अपने परवरदिगार की इबादत में किसी को शरीक न करें