Ataaa amrullaahi falaa tasta'jilooh; Subhaanahoo wa Ta'aalaa 'ammaa yushrikoon
ऐ कुफ्फ़ारे मक्का (ख़ुदा का हुक्म (क़यामत गोया) आ पहुँचा तो (ऐ काफिरों बे फायदे) तुम इसकी जल्दी न मचाओ जिस चीज़ को ये लोग शरीक क़रार देते हैं उससे वह ख़ुदा पाक व पाकीज़ा और बरतर है
Yunazzilul malaaa 'ikata birroohi min amrihee 'alaa mai yashaaa'u min 'ibaadiheee an anzirooo annahoo laaa ilaaha illaaa ana fattaqoon
वही अपने हुक्म से अपने बन्दों में से जिसके पास चाहता है 'वहीं' देकर फ़रिश्तों को भेजता है कि लोगों को इस बात से आगाह कर दें कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मुझी से डरते रहो
Wa tahmilu asqaalakum ilaa baladil lam takoonoo baaligheehi illaa bishiqqil anfus; inna Rabbakum la Ra'oofur Raheem
तो उनकी वजह से तुम्हारी रौनक़ भी है और जिन शहरों तक बग़ैर बड़ी जान ज़ोख़म में डाले बगैर के पहुँच न सकते थे वहाँ तक ये चौपाए भी तुम्हारे बोझे भी उठा लिए फिरते हैं इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा शफीक़ मेहरबान है
और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको मज़िले मक़सूद तक पहुँचा देता वह वही (ख़ुदा) है जिसने आसमान से पानी बरसाया जिसमें से तुम सब पीते हो और इससे दरख्त शादाब होते हैं
Yumbitu lakum bihiz zar'a wazzaitoona wanna kheela wal-a'naaba wa min kullis samaraat, inna fee zaalika la Aayatal liqawminy yatafakkaroon
जिनमें तुम (अपने मवेशियों को) चराते हो इसी पानी से तुम्हारे वास्ते खेती और जैतून और खुरमें और अंगूर उगाता है और हर तरह के फल (पैदा करता है) इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालो के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
Wa sakkhkhara lakumul laila wannahaara wash shamsa walqamara wannujoomu musakhkharaatum bi amrih; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy ya'qiloon
उसी ने तुम्हारे वास्ते रात को और दिन को और सूरज और चाँद को तुम्हारा ताबेए बना दिया है और सितारे भी उसी के हुक्म से (तुम्हारे) फरमाबरदार हैं कुछ शक़ ही नहीं कि (इसमें) समझदार लोगों के वास्ते यक़ीनन (कुदरत खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
Wa Huwal lazee sakhkharal bahra litaakuloo minhu lahman tariyyanw wa tastakhrijoo minhu hilyatan talbasoonahaa wa taral fulka mawaakhira feehi wa litabtaghoo min fadlihee wa la'allakum tashkuroon
कुछ शक़ नहीं कि इसमें भी इबरत व नसीहत हासिल करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानी है और वही (वह ख़ुदा है जिसने दरिया को (भी तुम्हारे) क़ब्ज़े में कर दिया ताकि तुम इसमें से (मछलियों का) ताज़ा ताज़ा गोश्त खाओ और इसमें से जेवर (की चीज़े मोती वगैरह) निकालो जिन को तुम पहना करते हो और तू कश्तियों को देखता है कि (आमद व रफत में) दरिया में (पानी को) चीरती फाड़ती आती है
Wa alqaa fil ardi rawaasiya an tameeda bikum wa anhaaranw wa sublulal la 'allakum tahtadoon
और (दरिया को तुम्हारे ताबेए) इसलिए (कर दिया) कि तुम लोग उसके फज़ल (नफा तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों को गाड़ दिया
आयत 16
وَعَلَٰمَٰتٍۢ ۚ وَبِٱلنَّجْمِ هُمْ يَهْتَدُونَ
Wa 'alaamaat; wa bin najmi hum yahtadoon
ताकि (ऐसा न हों) कि ज़मीन तुम्हें लेकर झुक जाए (और तुम्हारे क़दम न जमें) और (उसी ने) नदियाँ और रास्ते (बनाए)
Wa in ta'uddoo ni'matal laahi laa tuhsoohaa; innal laaha la Ghafoorur Raheem
तो क्या जो (ख़ुदा इतने मख़लूकात को) पैदा करता है वह उन (बुतों के बराबर हो सकता है जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते तो क्या तुम (इतनी बात भी) नहीं समझते और अगर तुम ख़ुदा की नेअमतों को गिनना चाहो तो (इस कसरत से हैं कि) तुम नहीं गिन सकते हो
Wallazeena yad'oona min doonil laahi laa yakhluqoona shai'anw wa hum yukhlaqoon
और जो कुछ तुम छिपाकर करते हो और जो कुछ ज़ाहिर करते हो (ग़रज़) ख़ुदा (सब कुछ) जानता है और (ये कुफ्फार) ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों को (हाजत के वक्त) पुकारते हैं वह कुछ भी पैदा नहीं कर सकते
Illahukum Ilaahunw Waahid; fallazeena laa yu'minoona bil Aakhirati quloobuhum munkiratunw wa hum mustakbiroon
(फिर क्या काम आएंगीं)तुम्हारा परवरदिगार यकता खुदा है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल ही (इस वजह के हैं कि हर बात का) इन्कार करते हैं और वह बड़े मग़रुर हैं
Liyahmilooo awzaarahum kaamilatany Yawmal Qiyaamati wa min awzaaril lazeena yudilloonahum bighairi 'ilm; alaa saaa'a maa yaziroon
(उनको बकने दो ताकि क़यामत के दिन) अपने (गुनाहों) के पूरे बोझ और जिन लोगों को उन्होंने बे समझे बूझे गुमराह किया है उनके (गुनाहों के) बोझ भी उन्हीं को उठाने पड़ेगें ज़रा देखो तो कि ये लोग कैसा बुरा बोझ अपने ऊपर लादे चले जा रहें हैं
Qad makaral lazeena min qablihim fa atal laahu bunyaa nahum minal qawaa'idi fakharra 'alaihimus saqfu min fawqihim wa ataahumul 'azaabu min haisu laa yash'uroon
बेशक जो लोग उनसे पहले थे उन्होंने भी मक्कारियाँ की थीं तो (ख़ुदा का हुक्म) उनके ख्यालात की इमारत की जड़ की तरफ से आ पड़ा (पस फिर क्या था) इस ख्याली इमारत की छत उन पर उनके ऊपर से धम से गिर पड़ी (और सब ख्याल हवा हो गए) और जिधर से उन पर अज़ाब आ पहुँचा उसकी उनको ख़बर तक न थी
Summa Yawmal Qiyaamati yukhzeehim wa yaqoolu aina shurakaaa'iyal lazeena kuntum tushaaaqqoona feehim; qaalal lazeena ootul 'ilma innal khizyal Yawma wassooo'a 'alal kaafireen
(फिर उसी पर इकतिफा नहीं) उसके बाद क़यामत के दिन ख़ुदा उनको रुसवा करेगा और फरमाएगा कि (अब बताओ) जिसको तुमने मेरा यशरीक बना रखा था और जिनके बारे में तुम (ईमानदारों से) झगड़ते थे कहाँ हैं (वह तो कुछ जवाब देगें नहीं मगर) जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म दिया गया है कहेगें कि आज के दिन रुसवाई और ख़राबी (सब कुछ) काफिरों पर ही है
Allazeena tatawaf faahu mul malaaa'ikatu zaalimeee anfusihim fa alqawus salama maa kunnaa na'malu min sooo'; balaaa innal laaha 'aleemum bimaa kuntum ta'maloon
वह लोग हैं कि जब फरिश्ते उनकी रुह क़ब्ज़ करने लगते हैं (और) ये लोग (कुफ्र करके) आप अपने ऊपर सितम ढ़ाते रहे तो इताअत पर आमादा नज़र आते हैं और (कहते हैं कि) हम तो (अपने ख्याल में) कोई बुराई नहीं करते थे (तो फरिश्ते कहते हैं) हाँ जो कुछ तुम्हारी करतूते थी ख़ुदा उससे खूब अच्छी तरह वाक़िफ हैं
Wa qeela lillazeenat taqaw maazaaa anzala Rabbukum; qaaloo khairaa; lillazeena absanoo fee haazihid dunyaa hasanah; wa la Daarul Aakhirati khair; wa lani'ma daarul muttaqeen
और जब परहेज़गारों से पूछा जाता है कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या नाज़िल किया है तो बोल उठते हैं सब अच्छे से अच्छा जिन लोगों ने नेकी की उनके लिए इस दुनिया में (भी) भलाई (ही भलाई) है और आख़िरत का घर क्या उम्दा है
Jannaatu 'Adniny yadkhuloonahaa tajree min tahtihal anhaaru lahum feehaa maa yashaaa'oon; kazaalika yajzil laahul muttaqeen
सदा बहार (हरे भरे) बाग़ हैं जिनमें (वे तकल्लुफ) जा पहुँचेगें उनके नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग जो चाहेगें उनके लिए मुयय्या (मौजूद) है यूँ ख़ुदा परहेज़गारों (को उनके किए) की जज़ा अता फरमाता है
(ये) वह लोग हैं जिनकी रुहें फरिश्ते इस हालत में क़ब्ज़ करतें हैं कि वह (नजासते कुफ्र से) पाक व पाकीज़ा होते हैं तो फरिश्ते उनसे (निहायत तपाक से) कहते है सलामुन अलैकुम जो नेकियाँ दुनिया में तुम करते थे उसके सिले में जन्नत में (बेतकल्लुफ) चले जाओ
Hal yanzuroona illaaa an taatiyahumul malaaa'ikatu aw yaatiya amru Rabbik; kazaalika fa'alal lazeena min qablihim; wa maa zalamahumul laahu wa laakin kaanoo anfusahum yazlimoon
(ऐ रसूल) क्या ये (अहले मक्का) इसी बात के मुन्तिज़र है कि उनके पास फरिश्ते (क़ब्ज़े रुह को) आ ही जाएँ या (उनके हलाक करने को) तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब ही आ पहुँचे जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं वह ऐसी बातें कर चुके हैं और ख़ुदा ने उन पर (ज़रा भी) जुल्म नहीं किया बल्कि वह लोग ख़ुद कुफ़्र की वजह से अपने ऊपर आप जुल्म करते रहे
Wa qaalal lazeena ashrakoo law shaaa'al laahu ma 'abadnaa min doonihee min shai'in nahnu wa laaa aabaaa'unaa wa laa harramnaa min doonihee min shai'; kazaalika fa'alal lazeena min qablihim fahal 'alar Rusuli illal balaaghul mubeen
और मुशरेकीन कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम ही उसके सिवा किसी और चीज़ की इबादत करते और न हमारे बाप दादा और न हम बग़ैर उस (की मर्ज़ी) के किसी चीज़ को हराम कर बैठते जो लोग इनसे पहले हो गुज़रे हैं वह भी ऐसे (हीला हवाले की) बातें कर चुके हैं तो (कहा करें) पैग़म्बरों पर तो उसके सिवा कि एहकाम को साफ साफ पहुँचा दे और कुछ भी नहीं
Wa laqad ba'asnaa fee kulli ummatir Rasoolan ani'budul laaha wajtanibut Taaghoota faminhum man hadal laahu wa minhum man haqqat 'alaihid dalaalah; faseeroo fil ardi fanzuroo kaifa kaana 'aaqibatul mukazzibeen
और हमने तो हर उम्मत में एक (न एक) रसूल इस बात के लिए ज़रुर भेजा कि लोगों ख़ुदा की इबादत करो और बुतों (की इबादत) से बचे रहो ग़रज़ उनमें से बाज़ की तो ख़ुदा ने हिदायत की और बाज़ के (सर) पर गुमराही सवार हो गई तो ज़रा तुम लोग रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (पैग़म्बराने ख़ुदा के) झुठलाने वालों को क्या अन्जाम हुआ
In tahris 'alaa hudaahum fa innal laaha laa yahdee mai yudillu wa maa lahum min naasireen
(ऐ रसूल) अगर तुमको इन लोगों के राहे रास्त पर जाने का हौका है (तो बे फायदा) क्योंकि ख़ुदा तो हरगिज़ उस शख़्श की हिदायत नहीं करेगा जिसको (नाज़िल होने की वजह से) गुमराही में छोड़ देता है और न उनका कोई मददगार है
Wa aqsamoo billaahi jahda aimaanihim laa yab'asul laahu mai yamoot; balaa wa'dan 'alaihi haqqanw wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon
(कि अज़ाब से बचाए) और ये कुफ्फार ख़ुदा की जितनी क़समें उनके इमकान में तुम्हें खा (कर कहते) हैं कि जो शख़्श मर जाता है फिर उसको ख़ुदा दोबारा ज़िन्दा नहीं करेगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ ज़रुर ऐसा करेगा इस पर अपने वायदे की (वफा) लाज़िम व ज़रुरी है मगर बहुतेरे आदमी नहीं जानते हैं
(दोबारा ज़िन्दा करना इसलिए ज़रुरी है) कि जिन बातों पर ये लोग झगड़ा करते हैं उन्हें उनके सामने साफ वाज़ेए कर देगा और ताकि कुफ्फार ये समझ लें कि ये लोग (दुनिया में) झूठे थे
Innamaa qawlunaa lisha y'in izaa aradnaahu an naqoola lahoo kun fa yakoon
हम जब किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करते हैं तो हमारा कहना उसके बारे में इतना ही होता है कि हम कह देते हैं कि 'हो जा' बस फौरन हो जाती है (तो फिर मुर्दों का जिलाना भी कोई बात है)
Wallazeena haajaroo fil laahi mim ba'di maa zulimoo lanubawwi' annahum fiddunyaa hasanatanw wa la ajrul Aakhirati akbar; law kaanoo ya'lamoon
और जिन लोगों ने (कुफ्फ़ार के ज़ुल्म पर ज़ुल्म सहने के बाद ख़ुदा की खुशी के लिए घर बार छोड़ा हिजरत की हम उनको ज़रुर दुनिया में भी अच्छी जगह बिठाएँगें और आख़िरत की जज़ा तो उससे कहीं बढ़ कर है काश ये लोग जिन्होंने ख़ुदा की राह में सख्तियों पर सब्र किया
Wa maaa arsalnaa min qablika illaa rijaalan nooheee ilaihim; fas'alooo ahlaz zikri in kuntum laa ta'lamoon
और (ऐ रसूल) तुम से पहले आदमियों ही को पैग़म्बर बना बनाकर भेजा किए जिन की तरफ हम वहीं भेजते थे तो (तुम अहले मक्का से कहो कि) अगर तुम खुद नहीं जानते हो तो अहले ज़िक्र (आलिमों से) पूछो (और उन पैग़म्बरों को भेजा भी तो) रौशन दलीलों और किताबों के साथ
Afa aminal lazeena makarus saiyi aati ai yakhsifal laahu bihimul arda aw yaaa tiyahumul 'azaabu min haisu laa yash'uroon
तो क्या जो लोग बड़ी बड़ी मक्कारियाँ (शिर्क वग़ैरह) करते थे (उनको इस बात का इत्मिनान हो गया है (और मुत्तलिक़ ख़ौफ नहीं) कि ख़ुदा उन्हें ज़मीन में धसा दे या ऐसी तरफ से उन पर अज़ाब आ पहुँचे कि उसकी उनको ख़बर भी न हो
Awa lam yaraw ilaa maa khalaqal laahu min shai'iny-yatafaiya'u zilaaluhoo 'anil yameeni washshamaaa' ili sujjadal lillaahi wa hum daakhiroon
क्या उन लोगों ने ख़ुदा की मख़लूक़ात में से कोई ऐसी चीज़ नहीं देखी जिसका साया (कभी) दाहिनी तरफ और कभी बायीं तरफ पलटा रहता है कि (गोया) ख़ुदा के सामने सर सजदा है और सब इताअत का इज़हार करते हैं
Wa lillaahi yasjudu maa fis samaawaati wa maa fil ardi min daaabbatinw walma laaa'ikatu wa hum laa yastakbiroon
और जितनी चीज़ें (चादँ सूरज वग़ैरह) आसमानों में हैं और जितने जानवर ज़मीन में हैं सब ख़ुदा ही के आगे सर सजूद हैं और फरिश्ते तो (है ही) और वह हुक्में ख़ुदा से सरकशी नहीं करते (49) (सजदा)
Wa lahoo maa fis samaawaati wal ardi wa lahud deenu waasibaa; afaghairal laahi tattaqoon
और जो कुछ आसमानों में हैं और जो कुछ ज़मीन में हैं (ग़रज़) सब कुछ उसी का है और ख़ालिस फरमाबरदारी हमेशा उसी को लाज़िम (जरूरी) है तो क्या तुम लोग ख़ुदा के सिवा (किसी और से भी) डरते हो
और हमने जो रोज़ी उनको दी है उसमें से ये लोग उन बुतों का हिस्सा भी क़रार देते है जिनकी हक़ीकत नहीं जानते तो ख़ुदा की (अपनी) क़िस्म जो इफ़तेरा परदाज़ियाँ तुम करते थे (क़यामत में) उनकी बाज़पुर्स (पूछ गछ) तुम से ज़रुर की जाएगी
yatawaaraa minal qawmimin sooo'i maa bushshira bih; a-yumsikuhoo 'alaa hoonin am yadussuhoo fit turaab; alaa saaa'a maa yahkumoon
और वह ज़हर का सा घूँट पीकर रह जाता है (बेटी की) जिसकी खुशखबरी दी गई है अपनी क़ौम के लोगों से छिपा फिरता है (और सोचता है) कि क्या इसको ज़िल्लत उठाके ज़िन्दा रहने दे या (ज़िन्दा ही) इसको ज़मीन में गाड़ दे-देखो तुम लोग किस क़दर बुरा एहकाम (हुक्म) लगाते हैं
Lillazeena laa yu'minoona bil Aakhirati masalus saw'i wa lillaahil masalul a'laa; wa Huwal 'Azeezul Hakeem
बुरी (बुरी) बातें तो उन्हीं लोगों के लिए ज्यादा मुनासिब हैं जो आख़िरत का यक़ीन नहीं रखते और ख़ुदा की शान के लायक़ तो आला सिफते (बहुत बड़ी अच्छाइया) हैं और वही तो ग़ालिब है
Wa law yu'aakhizul laahun naasa bizulminhim maa taraka 'alaihaa min daaabbatinw wa laakiny yu'akhkhiruhum ilaaa ajalim musamman fa izaa jaaa'a ajaluhum laa yastaakhiroona saa'atanw wa laa yastaqdimoon
और अगर (कहीं) ख़ुदा अपने बन्दों की नाफरमानियों की गिरफ़त करता तो रुए ज़मीन पर किसी एक जानदार को बाक़ी न छोड़ता मगर वह तो एक मुक़र्रर वक्त तक उन सबको मोहलत देता है फिर जब उनका (वह) वक्त अा पहुँचेगा तो न एक घड़ी पीछे हट सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
Wa yaj'aloona lillaahi maa yakrahoona wa tasifu alsinatuhumul kaziba anna lahumul husnaa laa jarama anna lahumun Naara wa annahum mufratoon
और ये लोग खुद जिन बातों को पसन्द नहीं करते उनको ख़ुदा के वास्ते क़रार देते हैं और अपनी ही ज़बान से ये झूठे दावे भी करते हैं कि (आख़िरत में भी) उन्हीं के लिए भलाई है (भलाई तो नहीं मगर) हाँ उनके लिए जहन्नुम की आग ज़रुरी है और यही लोग सबसे पहले (उसमें) झोंके जाएँगें
Tallaahi laqad arsalnaaa ilaaa umamim min qablika fazayyana lahumush Shaitaanu a'maalahum fahuwa waliyyuhumul yawma wa lahum 'azaabun aleem
(ऐ रसूल) ख़ुदा की (अपनी) कसम तुमसे पहले उम्मतों के पास बहुतेरे पैग़म्बर भेजे तो शैतान ने उनकी कारस्तानियों को उम्दा कर दिखाया तो वही (शैतान) आज भी उन लोगों का सरपरस्त बना हुआ है हालॉकि उनके वास्ते दर्दनाक अज़ाब है
Wa maaa anzalnaa 'alaikal Kitaaba illaa litubaiyina lahumul lazikh talafoo feehi wa hudanw wa rahmatal liqawminy yu'minoon
और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) तो इसी लिए नाज़िल की ताकि जिन बातों में ये लोग बाहम झगड़ा किए हैं उनको तुम साफ साफ बयान करो (और यह किताब) ईमानदारों के लिए तो (अज़सरतापा) हिदायत और रहमत है
Wallaahu anzala minas samaaa'i maaa'an fa ahyaa bihil arda ba'da mawtihaa; inna fee zaalika la aayatal liqaw miny yasma'oon
और ख़ुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया तो उसके ज़रिए ज़मीन को मुर्दा होने के बाद ज़िन्दा (शादाब) (हरी भरी) किया क्या कुछ शक नहीं कि इसमें जो लोग बसते हैं उनके वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
Wa inna lakum fil an'aami la'ibrah; nusqeekum mimmmaa fee butoonihee mim baini farsinw wa damil labanann khaalisan saaa'ighallish shaaribeen
और इसमें शक़ नहीं कि चौपायों में भी तुम्हारे लिए (इबरत की बात) है कि उनके पेट में ख़ाक, बला, गोबर और ख़ून (जो कुछ भरा है) उसमें से हमे तुमको ख़ालिस दूध पिलाते हैं जो पीने वालों के लिए खुशगवार है
Wa min samaraatin nakheeli wal a'nnaabi tattakhizoona minhu sakaranw wa rizqann hasanaa; inna fee zaalika la Aayatal liqawminy ya'qiloon
और इसी तरह खुरमें और अंगूर के फल से (हम तुमको शीरा पिलाते हैं) जिसकी (कभी तो) तुम शराब बना लिया करते हो और कभी अच्छी रोज़ी (सिरका वगैरह) इसमें शक नहीं कि इसमें भी समझदार लोगों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बड़ी निशानी है
उनमें अपने छत्ते बना फिर हर तरह के फलों (के पूर से) (उनका अर्क़) चूस कर फिर अपने परवरदिगार की राहों में ताबेदारी के साथ चली मक्खियों के पेट से पीने की एक चीज़ निकलती है (शहद) जिसके मुख्तलिफ रंग होते हैं इसमें लोगों (के बीमारियों) की शिफ़ा (भी) है इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर व फ़िक्र करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की बहुत बड़ी निशानी है)
और ख़ुदा ही ने तुमको पैदा किया फिर वही तुमको (दुनिया से) उठा लेगा और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो ज़लील ज़िन्दगी (सख्त बुढ़ापे) की तरफ लौटाए जाते हैं (बहुत कुछ) जानने के बाद (ऐसे सड़ीले हो गए कि) कुछ नहीं जान सके बेशक ख़ुदा (सब कुछ) जानता और (हर तरह की) कुदरत रखता है
और ख़ुदा ही ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर रिज़क (दौलत में) तरजीह दी है फिर जिन लोगों को रोज़ी ज्यादा दी गई है वह लोग अपनी रोज़ी में से उन लोगों को जिन पर उनका दस्तरस (इख्तेयार) है (लौन्डी ग़ुलाम वग़ैरह) देने वाला नहीं (हालॉकि इस माल में तो सब के सब मालिक गुलाम वग़ैरह) बराबर हैं तो क्या ये लोग ख़ुदा की नेअमत के मुन्किर हैं
Wallaahu ja'ala lakum min anfusikum azwaajanw wa ja'ala lakum min azwaajikum baneena wa hafadatanw wa razaqakum minat yaiyibaat; afabil baatili yu'minoona wa bini'matil laahi hum yakkfuroon
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे लिए बीबियाँ तुम ही में से बनाई और उसी ने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी बीवियों से बेटे और पोते पैदा किए और तुम्हें पाक व पाकीज़ा रोज़ी खाने को दी तो क्या ये लोग बिल्कुल बातिल (सुल्तान बुत वग़ैरह) पर ईमान रखते हैं और ख़ुदा की नेअमत (वहदानियत वग़ैरह से) इन्कार करते हैं
Darabal laahu masalan 'abdam mammlookal laa yaqdiru 'alaa shai'inw wa marrazaqnaahu mminnaa rizqan hasanan fahuwa yunfiqu minhu sirranw wa jahra; hal yasta-woon; alhamdu lillaah; bal aksaruhum laa ya'lamoon
एक मसल ख़ुदा ने बयान फरमाई कि एक ग़ुलाम है जो दूसरे के कब्जे में है (और) कुछ भी एख्तियार नहीं रखता और एक शख़्श वह है कि हमने उसे अपनी बारगाह से अच्छी (खासी) रोज़ी दे रखी है तो वह उसमें से छिपा के दिखा के (ग़रज़ हर तरह ख़ुदा की राह में) ख़र्च करता है क्या ये दोनो बराबर हो सकते हैं (हरगिज़ नहीं) अल्हमदोलिल्लाह (कि वह भी उसके मुक़र्रर हैं) मगर उनके बहुतेरे (इतना भी) नहीं जानते
Wa darabal laahu masalar rajulaini ahaduhumaaa abkamu laa yaqdiru 'alaa shai'inw wa huwa kallun 'alaa mawlaahu ainamaa yuwajjihhu laa yaati bikhairin hal yastawee huwa wa many-yaamuru bil'adli wa huwa 'alaa Siraatim MMustaqeem
और ख़ुदा एक दूसरी मसल बयान फरमाता है दो आदमी हैं कि एक उनमें से बिल्कुल गूँगा उस पर गुलाम जो कुछ भी (बात वग़ैरह की) कुदरत नहीं रखता और (इस वजह से) वह अपने मालिक को दूभर हो रहा है कि उसको जिधर भेजता है (ख़ैर से) कभी भलाई नहीं लाता क्या ऐसा ग़ुलाम और वह शख़्श जो (लोगों को) अदल व मियाना रवी का हुक्म करता है वह खुद भी ठीक सीधी राह पर क़ायम है (दोनों बराबर हो सकते हैं (हरगिज़ नहीं)
Wa lillaahi ghaibus samaawaati wal ard; wa maaa amrus Saa'ati illaa kalamhil basari aw huwa aqrab; innal laaha 'alaaa kulli shai'in Qadeer
और सारे आसमान व ज़मीन की ग़ैब की बातें ख़ुदा ही के लिए मख़सूस हैं और ख़ुदा क़यामत का वाकेए होना तो ऐसा है जैसे पलक का झपकना बल्कि इससे भी जल्दी बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ुदरत कामेला रखता है
Alam yaraw ilat tairi musakhkharaatin fee jawwis samaaa'i maa yumsikuhunna illal laah; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy yu'minoon
क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया जो आसमान के नीचे हवा में घिरे हुए (उड़ते रहते हैं) उनको तो बस ख़ुदा ही (गिरने से ) रोकता है बेशक इसमें भी (कुदरते ख़ुदा की) ईमानदारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
Wallaahu ja'ala lakum min juloodil an'aami buyootan tastakhif foonahaa yawma za'nikum wa yawma iqaamatikum wa min aswaafihaa wa awbaarihaa wa ash'aarihaaa asaasanw wa mataa'an ilaa been
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार दिया और उसी ने तुम्हारे वास्ते चौपायों की खालों से तुम्हारे लिए (हलके फुलके) डेरे (ख़ेमे) बना जिन्हें तुम हलका पाकर अपने सफर और हजर (ठहरने) में काम लाते हो और इन चारपायों की ऊन और रुई और बालो से एक वक्त ख़ास (क़यामत तक) के लिए तुम्हारे बहुत से असबाब और अबकार आमद (काम की) चीज़े बनाई
Wallaahu ja'ala lakum mimmaa khalaqa zilaalanw wa ja'ala lakum minal jibaali aknaananw wa ja'ala lakum saraabeela taqeekumul harra wa saraabeela taqeekum baasakum; kazaalika yutimmu ni'matahoo alaikum la'allakum tuslimoon
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे आराम के लिए अपनी पैदा की हुईचीज़ों के साए बनाए और उसी ने तुम्हारे (छिपने बैठने) के वास्ते पहाड़ों में घरौन्दे (ग़ार वग़ैरह) बनाए और उसी ने तुम्हारे लिए कपड़े बनाए जो तुम्हें (सर्दी) गर्मी से महफूज़ रखें और (लोहे) के कुर्ते जो तुम्हें हाथियों की ज़द (मार) से बचा लंग़ यूँ ख़ुदा अपनी नेअमत तुम पर पूरी करता है
Wa yawma nab'asu min kulli ummatin shaheedan summa laa yu'zanu lillazeena kafaroo wa laa hum yusta'taboon
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
Wa izaa ra al lazeena ashrakoo shurakaaa'ahum qaaloo Rabbana haaa'ulaaa'i shurakaaa'unal lazeena kunnaa nad'oo min doonika fa alqaw ilaihimul qawla innakum lakaaziboon
और जिन लोगों ने दुनिया में ख़ुदा का शरीक (दूसरे को) ठहराया था जब अपने (उन) शरीकों को (क़यामत में) देखेंगे तो बोल उठेगें कि ऐ हमारे परवरदिगार यही तो हमारे शरीक हैं जिन्हें हम (मुसीबत) के वक्त तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे तो वह शरीक उन्हीं की तरफ बात को फेंक मारेगें कि तुम निरे झूठे हो
Wa yawma nab'asu fee kulli ummmatin shaheedan 'alaihim min anfusihim wa ji'naa bika shaheedan 'alaa haaa'ulaaa'; wa nazzalnaa 'alaikal Kitaaba tibyaanal likulli shai'inw wa hudanw wa rahmatanw wa bushraa lilmuslimeen
और वह दिन याद करो जिस दिन हम हर एक गिरोह में से उन्हीं में का एक गवाह उनके मुक़ाबिल ला खड़ा करेगें और (ऐ रसूल) तुम को उन लोगों पर (उनके) सामने गवाह बनाकर ला खड़ा करेंगें और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) नाज़िल की जिसमें हर चीज़ का (शाफी) बयान है और मुसलमानों के लिए (सरमापा) हिदायत और रहमत और खुशख़बरी है
Innal laaha yaamaru bil 'adli wal ihsaani wa eetaaa'i zil qurbaa wa yanhaa 'anil fahshaaa'i wal munkari walbagh-i' ya'izukum la'allakum tazakkkaroon
इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा इन्साफ और (लोगों के साथ) नेकी करने और क़राबतदारों को (कुछ) देने का हुक्म करता है और बदकारी और नाशाएस्ता हरकतों और सरकशी करने को मना करता है (और) तुम्हें नसीहत करता है ताकि तुम नसीहत हासिल करो
Wa awfoo bi Ahdil laahi izaa 'aahattum wa laa tanqudul aimaana ba'da tawkeedihaa wa qad ja'altumul laaha 'alaikum kafeelaa; innal laaha ya'lamu maa taf'aloon
और जब तुम लोग बाहम क़ौल व क़रार कर लिया करो तो ख़ुदा के एहदो पैमान को पूरा करो और क़समों को उनके पक्का हो जाने के बाद न तोड़ा करो हालॉकि तुम तो ख़ुदा को अपना ज़ामिन बना चुके हो जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे ज़रुर जानता है
Wa laa takoonoo kallatee naqadat ghazlahaa mim ba'di quwwatin ankaasaa; tattakhizoona aimaanakum dakhlalam bainakum an takoona ummatun hiya arbaa min ummah; innnamaa yablookumul laahu bih; wa la yubaiyinanna lakum yawmal Qiyaamati maa kuntum fee takhtalifoon
और तुम लोग (क़समों के तोड़ने में) उस औरत के ऐसे न हो जो अपना सूत मज़बूत कातने के बाद टुकड़े टुकड़े करके तोड़ डाले कि अपने एहदो को आपस में उस बात की मक्कारी का ज़रिया बनाने लगो कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से (ख्वामख़वाह) बढ़ जाए इससे बस ख़ुदा तुमको आज़माता है (कि तुम किसी की पालाइश करते हो) और जिन बातों में तुम दुनिया में झगड़ते थे क़यामत के दिन ख़ुदा खुद तुम से साफ साफ बयान कर देगा
Wa law shaaa'al laahu laja'alakum ummmatanw waahidatanw wa laakiny yudillu many-yashaaa'u wa yahdee many-yashaaa'; wa latus'alunna 'ammaa kuntum ta'maloon
और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको एक ही (किस्म के) गिरोह बना देता मगर वह तो जिसको चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसकी चाहता है हिदायत करता है और जो कुछ तुम लोग दुनिया में किया करते थे उसकी बाज़ पुर्स (पुछ गछ) तुमसे ज़रुर की जाएगी
Wa laa tattakhizooo aimaanakum dakhalam bainakum ftazilla qadamum ba'da subootihaa wa tazooqus sooo'a bimmaa sadattum 'an sabeelil laahi wa lakum 'azaabun 'azeem
और तुम अपनी क़समों को आपस में के फसाद का सबब न बनाओ ताकि (लोगों के) क़दम जमने के बाद (इस्लाम से) उखड़ जाएँ और फिर आख़िरकार क़यामत में तुम्हें लोगों को ख़ुदा की राह से रोकने की पादाश (रोकने के बदले) में अज़ाब का मज़ा चखना पड़े और तुम्हारे वास्ते बड़ा सख्त अज़ाब हो
maa 'indakum yanfadu wa maa 'indal laahi baaq; wa lanajziyannal lazeena sabarooo ajjrahum bi ahsani maa kaanoo ya'maloon
(क्योंकि माल दुनिया से) जो कुछ तुम्हारे पास है एक न एक दिन ख़त्म हो जाएगा और (अज्र) ख़ुदा के पास है वह हमेशा बाक़ी रहेगा और जिन लोगों ने दुनिया में सब्र किया था उनको (क़यामत में) उनके कामों का हम अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता करेंगें
Man 'amila saaliham min zakarin aw unsaa wa huwa mu'minun falanuhyiyannahoo hayaatan taiiyibatanw wa lanajzi yannnahum ajrahum bi ahsani maa kaanoo ya'maloon
मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें
Wa izaa baddalnaaa Aayatam makaana Aayatinw wal laahu a'lamu bimaa yunazzilu qaalooo innamaa anta muftar; bal aksaruhum laa ya'lamoon
और (ऐ रसूल) हम जब एक आयत के बदले दूसरी आयत नाज़िल करते हैं तो हालॉकि ख़ुदा जो चीज़ नाज़िल करता है उस (की मसलहतों) से खूब वाक़िफ है मगर ये लोग (तुम को) कहने लगते हैं कि तुम बस बिल्कुल मुज़तरी (ग़लत बयान करने वाले) हो बल्कि खुद उनमें के बहुतेरे (मसालेह को) नहीं जानते
Qul nazzalahoo Roohul Qudusi mir Rabbika bilhaqqi liyusabbital lazeena aamanoo wa hudanw wa bushraa lilmuslimeen
(ऐ रसूल) तुम (साफ) कह दो कि इस (क़ुरान) को तो रुहलकुदूस (जिबरील) ने तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ नाज़िल किया है ताकि जो लोग ईमान ला चुके हैं उनको साबित क़दम रखे और मुसलमानों के लिए (अज़सरतापा) खुशखबरी है
Wa laqad na'lamu annahum yaqooloona innamaa yu'allimuhoo bashar; lisaanul lazee yulhidoona ilaihi a'ja miyyunw wa haaza lisaanun 'Arabiyyum mubeen
और (ऐ रसूल) हम तहक़ीक़तन जानते हैं कि ये कुफ्फार तुम्हारी निस्बत कहा करते है कि उनको (तुम को) कोई आदमी क़ुरान सिखा दिया करता है हालॉकि बिल्कुल ग़लत है क्योंकि जिस शख्स की तरफ से ये लोग निस्बत देते हैं उसकी ज़बान तो अजमी है और ये तो साफ साफ अरबी ज़बान है
man kafara billaahi mim ba'di eemaanihee illaa man ukriha wa qalbuhoo mutmma'innum bil eemaani wa laakim man sharaha bilkufri sadran fa'alaihim ghadabum minal laahi wa lahum 'azaabun 'azeem
और हक़ीक़त अम्र ये है कि यही लोग झूठे हैं उस शख्स के सिवा जो (कलमाए कुफ्र) पर मजबूर किया जाए और उसका दिल ईमान की तरफ से मुतमइन हो जो शख्स भी ईमान लाने के बाद कुफ्र एख्तियार करे बल्कि खूब सीना कुशादा (जी खोलकर) कुफ्र करे तो उन पर ख़ुदा का ग़ज़ब है और उनके लिए बड़ा (सख्त) अज़ाब है
Summa inna Rabbaka lillazeena haajaroo mim ba'dimaa futinoo summma jaahadoo wa sabaroo inna Rabbaka mim ba'dihaa la Ghafoorur Raheem
फिर इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उन लोगों को जिन्होने मुसीबत में मुब्तिला होने क बाद घर बार छोडे फ़िर (ख़ुदा की राह में) जिहाद किए और तकलीफों पर सब्र किया इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इन सब बातों के बाद अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
Wa darabal laahu masalan qaryatan kaanat aaminatam mutma'innatany yaaateehaa rizquhaa rghadam min kulli makaanin fakafarat bi an'umil laahi fa azaaqahal laahu libaasal joo'i walkhawfi bimaa kaanoo yasna'oon
और हर शख़्श को जो कुछ भी उसने किया था उसका पूरा पूरा बदला मिलेगा और उन पर किसी तरह का जुल्म न किया जाएगा ख़ुदा ने एक गाँव की मसल बयान फरमाई जिसके रहने वाले हर तरह के चैन व इत्मेनान में थे हर तरफ से बाफराग़त (बहुत ज्यादा) उनकी रोज़ी उनके पास आई थी फिर उन लोगों ने ख़ुदा की नूअमतों की नाशुक्री की तो ख़ुदा ने उनकी करतूतों की बदौलत उनको मज़ा चखा दिया
फिर अज़ाब (ख़ुदा) ने उन्हें ले डाला और वह ज़ालिम थे ही तो ख़ुदा ने जो कुछ तुम्हें हलाल तय्यब (ताहिर) रोज़ी दी है उसको (शौक़ से) खाओ और अगर तुम खुदा ही की परसतिश (का दावा करते हो)
Innamaa harrma 'alai kumul maitata waddama wa lahmal khinzeeri wa maaa uhilla lighairil laahi bihee famanid turra ghaira baaghinw wa laa 'aadin fa innal laaha Ghafoorur Raheem
उसकी नेअमत का शुक्र अदा किया करो तुम पर उसने मुरदार और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर (ज़बाह के वक्त) ख़ुदा के सिवा (किसी) और का नाम लिया जाए हराम किया है फिर जो शख़्श (मारे भूक के) मजबूर हो ख़ुदा से सरतापी (नाफरमानी) करने वाला हो और न (हद ज़रुरत से) बढ़ने वाला हो और (हराम खाए) तो बेशक ख़ुदा बख्शने वाला मेहरबान है
और झूट मूट जो कुछ तुम्हारी ज़बान पर आए (बे समझे बूझे) न कह बैठा करों कि ये हलाल है और हराम है ताकि इसकी बदौलत ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाँधने लगो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें
आयत 117
مَتَٰعٌۭ قَلِيلٌۭ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ
Mata'un qaleelunw wa lahum 'azaabun aleem
(दुनिया में) फायदा तो ज़रा सा है और (आख़िरत में) दर्दनाक अज़ाब है
Summma inna Rabbaka lillazeena 'amilus sooo'a bijahaalatin summa taaboo mim ba'di zaaalika wa aslahoo inna Rabbaka mim ba'dihaa la Ghafoorur Raheem
मगर वह लोग खुद अपने ऊपर सितम तोड़ रहे हैं फिर इसमे शक़ नहीं कि जो लोग नादानी से गुनाह कर बैठे उसके बाद सदक़ दिल से तौबा कर ली और अपने को दुरुस्त कर लिया तो (ऐ रसूल) इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इसके बाद बख्शने वाला मेहरबान है
Summma awhainaa ilaika anit tabi' Millata Ibraaheema haneefaa; wa maa kaana minal mushrikeen
और वह आख़िरत में भी यक़ीनन नेको कारों से होगें ऐ रसूल फिर तुम्हारे पास वही भेजी कि इबराहीम के तरीक़े की पैरवी करो जो बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से नहीं थे
Innnamaa ju'ilas Sabtu 'alal lazeenakhtalafoo feeh; wa inna Rabbaka la yahkumu bainahum Yawmal Qiyaamati feemaa kaanoo feehi yakhtalifoon
(ऐ रसूल) हफ्ते (के दिन) की ताज़ीम तो बस उन्हीं लोगों पर लाज़िम की गई थी (यहूद व नसारा इसके बारे में) एख्तिलाफ करते थे और कुछ शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उनके दरमियान जिस अग्र में वह झगड़ा करते थे क़यामत के दिन फैसला कर देगा
Ud'u ilaa sabeeli Rabbika bilhikmati walmaw 'izatil hasanati wa jaadilhum billatee hiya ahsan; inna Rabbaka huwa a'almu biman dalla 'an sabeelihee wa Huwa a'lamu bilmuhtadeen
(ऐ रसूल) तुम (लोगों को) अपने परवरदिगार की राह पर हिकमत और अच्छी अच्छी नसीहत के ज़रिए से बुलाओ और बहस व मुबाशा करो भी तो इस तरीक़े से जो लोगों के नज़दीक सबसे अच्छा हो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग ख़ुदा की राह से भटक गए उनको तुम्हारा परवरदिगार खूब जानता है
Wa in 'aaqabtum fa'aaqiboo bimisli maa 'ooqibtum bihee wa la'in sabartum lahuwa khairul lissaabireen
और हिदायत याफ़ता लोगों से भी खूब वाक़िफ है और अगर (मुख़ालिफीन के साथ) सख्ती करो भी तो वैसी ही सख्ती करो जैसे सख्ती उन लोगों ने तुम पर की थी और अगर तुम सब्र करो तो सब्र करने वालों के वास्ते बेहतर हैं
Wasbir wa maa sabruka illaa billaah; wa laa tahzan 'alaihim wa laa taku fee daiqim mimmaa yamkuroon
और (ऐ रसूल) तुम सब्र ही करो (और ख़ुदा की (मदद) बग़ैर तो तुम सब्र कर भी नहीं सकते और उन मुख़ालिफीन के हाल पर तुम रंज न करो और जो मक्कारीयाँ ये लोग करते हैं उससे तुम तंग दिल न हो