Yaaa aiyuhan naasut taqoo Rabbakumul lazee khalaqakum min nafsinw waahidatinw wa khalaqa minhaa zawjahaa wa bas sa minhumaa rijaalan kaseeranw wa nisaaa'aa; wattaqul laahallazee tasaaa 'aloona bihee wal arhaam; innal laaha kaana 'alaikum Raqeeba
ऐ लोगों अपने पालने वाले से डरो जिसने तुम सबको (सिर्फ) एक शख्स से पैदा किया और (वह इस तरह कि पहले) उनकी बाकी मिट्टी से उनकी बीवी (हव्वा) को पैदा किया और (सिर्फ़) उन्हीं दो (मियॉ बीवी) से बहुत से मर्द और औरतें दुनिया में फैला दिये और उस ख़ुदा से डरो जिसके वसीले से आपस में एक दूसरे से सवाल करते हो और क़तए रहम से भी डरो बेशक ख़ुदा तुम्हारी देखभाल करने वाला है
Wa aatul yataamaaa amwaalahum wa laa tatabad dalul khabeesa bittaiyibi wa laa taakulooo amwaalahum ilaaa amwaalikum; innahoo kaana hooban kabeeraa
और यतीमों को उनके माल दे दो और बुरी चीज़ (माले हराम) को भली चीज़ (माले हलाल) के बदले में न लो और उनके माल अपने मालों में मिलाकर न चख जाओ क्योंकि ये बहुत बड़ा गुनाह है
Wa in khiftum allaa tuqsitoo fil yataamaa fankihoo maa taaba lakum minan nisaaa'i masnaa wa sulaasa wa rubaa'a fa'in khiftum allaa ta'diloo fawaahidatan aw maa malakat aimaanukum; zaalika adnaaa allaa ta'ooloo
और अगर तुमको अन्देशा हो कि (निकाह करके) तुम यतीम लड़कियों (की रखरखाव) में इन्साफ न कर सकोगे तो और औरतों में अपनी मर्ज़ी के मवाफ़िक दो दो और तीन तीन और चार चार निकाह करो (फिर अगर तुम्हें इसका) अन्देशा हो कि (मुततइद) बीवियों में (भी) इन्साफ न कर सकोगे तो एक ही पर इक्तेफ़ा करो या जो (लोंडी) तुम्हारी ज़र ख़रीद हो (उसी पर क़नाअत करो) ये तदबीर बेइन्साफ़ी न करने की बहुत क़रीने क़यास है
Wa laa tu'tus sufahaaa'a amwaalakumul latee ja'alal laahu lakum qiyaamanw-warzuqoohum feehaa waksoohum wa qooloo lahum qawlam ma'roofaa
और अपने वह माल जिनपर ख़ुदा ने तुम्हारी गुज़र न क़रार दी है बेवकूफ़ों (ना समझ यतीम) को न दे बैठो हॉ उसमें से उन्हें खिलाओ और उनको पहनाओ (तो मज़ाएक़ा नहीं) और उनसे (शौक़ से) अच्छी तरह बात करो
Wabtalul yataamaa hattaaa izaa balaghun nikaaha fa in aanastum minhum rushdan fad fa'ooo ilaihim amwaalahum wa laa taa kuloohaaa israafanw wa bidaaran ai yakbaroo; wa mai kaana ghaniyyan falyasta' fif wa mai kaana faqeeran falyaakul bilma'roof; fa izaa dafa'tum ilaihim amwaalahum fa'ashhidoo 'alaihim; wa kafaa billaahi Haseeba
और यतीमों को कारोबार में लगाए रहो यहॉ तक के ब्याहने के क़ाबिल हों फिर उस वक्त तुम उन्हे (एक महीने का ख़र्च) उनके हाथ से कराके अगर होशियार पाओ तो उनका माल उनके हवाले कर दो और (ख़बरदार) ऐसा न करना कि इस ख़ौफ़ से कि कहीं ये बड़े हो जाएंगे फ़ुज़ूल ख़र्ची करके झटपट उनका माल चट कर जाओ और जो (जो वली या सरपरस्त) दौलतमन्द हो तो वह (माले यतीम अपने ख़र्च में लाने से) बचता रहे और (हॉ) जो मोहताज हो वह अलबत्ता (वाजिबी) दस्तूर के मुताबिक़ खा सकता है पस जब उनके माल उनके हवाले करने लगो तो लोगों को उनका गवाह बना लो और (यूं तो) हिसाब लेने को ख़ुदा काफ़ी ही है
Lirrijaali naseebum mimmaa tarakal waalidaani wal aqraboona wa lin nisaaa'i naseebum mimmaa tarakal waalidaani wal aqraboona mimmaa qalla minhu aw kasur; naseebam mafroodaa
मॉ बाप और क़राबतदारों के तर्के में कुछ हिस्सा ख़ास मर्दों का है और उसी तरह माँ बाब और क़राबतदारो के तरके में कुछ हिस्सा ख़ास औरतों का भी है ख्वाह तर्क कम हो या ज्यादा (हर शख्स का) हिस्सा (हमारी तरफ़ से) मुक़र्रर किया हुआ है
Wa izaa hadaral qismata ulul qurbaa walyataamaa walmasaakeenu farzuqoohum minhu wa qooloo lahum qawlam ma'roofaa
और जब (तर्क की) तक़सीम के वक्त (वह) क़राबतदार (जिनका कोई हिस्सा नहीं) और यतीम बच्चे और मोहताज लोग आ जाएं तो उन्हे भी कुछ उसमें से दे दो और उसे अच्छी तरह (उनवाने शाइस्ता से) बात करो
Walyakhshal lazeena law tarakoo min khalfihim zurriyyatan di'aafan khaafoo 'alaihim falyattaqul laaha walyaqooloo qawlan sadeedaa
और उन लोगों को डरना (और ख्याल करना चाहिये) कि अगर वह लोग ख़ुद अपने बाद (नन्हे नन्हे) नातवॉ बच्चे छोड़ जाते तो उन पर (किस क़दर) तरस आता पस उनको (ग़रीब बच्चों पर सख्ती करने में) ख़ुदा से डरना चाहिये और उनसे सीधी तरह बात करना चाहिए
Yooseekumul laahu feee awlaadikum liz zakari mislu hazzil unsayayn; fa in kunna nisaaa'an fawqas nataini falahunna suhusaa maa taraka wa in kaanat waahidatan falahan nisf; wa li abawaihi likulli waahidim minhumas sudusu mimmma taraka in kaana lahoo walad; fa il lam yakul lahowaladunw wa warisahooo abawaahu fali ummihis sulus; fa in kaana lahoo ikhwatun fali ummihis sudus; mim ba'di wasiyyatiny yoosee bihaaa aw dayn; aabaaa'ukum wa abnaaa'ukum laa tadroona aiyuhum aqrabu lakum naf'aa; fareedatam minallaah; innal laaha kaana 'Aleeman Hakeemaa
(मुसलमानों) ख़ुदा तुम्हारी औलाद के हक़ में तुमसे वसीयत करता है कि लड़के का हिस्सा दो लड़कियों के बराबर है और अगर (मय्यत की) औलाद में सिर्फ लड़कियॉ ही हों (दो) या (दो) से ज्यादा तो उनका (मक़र्रर हिस्सा) कुल तर्के का दो तिहाई है और अगर एक लड़की हो तो उसका आधा है और मय्यत के बाप मॉ हर एक का अगर मय्यत की कोई औलाद मौजूद न हो तो माल मुस्तरद का में से मुअय्यन (ख़ास चीज़ों में) छटा हिस्सा है और अगर मय्यत के कोई औलाद न हो और उसके सिर्फ मॉ बाप ही वारिस हों तो मॉ का मुअय्यन (ख़ास चीज़ों में) एक तिहाई हिस्सा तय है और बाक़ी बाप का लेकिन अगर मय्यत के (हक़ीक़ी और सौतेले) भाई भी मौजूद हों तो (अगरचे उन्हें कुछ न मिले) उस वक्त मॉ का हिस्सा छठा ही होगा (और वह भी) मय्यत नें जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तालीम और (अदाए) क़र्ज़ के बाद तुम्हारे बाप हों या बेटे तुम तो यह नहीं जानते हों कि उसमें कौन तुम्हारी नाफ़रमानी में ज्यादा क़रीब है (फिर तुम क्या दख़ल दे सकते हो) हिस्सा तो सिर्फ ख़ुदा की तरफ़ से मुअय्यन होता है क्योंकि ख़ुदा तो ज़रूर हर चीज़ को जानता और तदबीर वाला है
Wa lakum nisfu maa taraka azwaajukum il lam yakul lahunna walad; fa in kaana lahunna waladun falakumur rub'u mimmaa tarakna mim ba'di wasiyyatiny yooseena bihaaa aw dayn; wa lahunnar rubu'u mimmaa tarakum il lam yakul lakum walad; fa in kaana lakum waladun falahunnas sumunu mimmaa taraktum; mim ba'di wasiyyatin toosoona bihaaa aw dayn; wa in kaana rajuluny yoorasu kalaalatan awim ra atunw wa lahooo akhun aw ukhtun falikulli waahidim minhumas sudus; fa in kaanooo aksara min zaalika fahum shurakaaa'u fissulusi mim ba'di wasiyyatiny yoosaa bihaaa aw dainin ghaira mudaaarr; wasiyyatam minal laah; wallaahu 'Aleemun Haleem
और जो कुछ तुम्हारी बीवियां छोड़ कर (मर) जाए पस अगर उनके कोई औलाद न हो तो तुम्हारा आधा है और अगर उनके कोई औलाद हो तो जो कुछ वह तरका छोड़े उसमें से बाज़ चीज़ों में चौथाई तुम्हारा है (और वह भी) औरत ने जिसकी वसीयत की हो और (अदाए) क़र्ज़ के बाद अगर तुम्हारे कोई औलाद न हो तो तुम्हारे तरके में से तुम्हारी बीवियों का बाज़ चीज़ों में चौथाई है और अगर तुम्हारी कोई औलाद हो तो तुम्हारे तर्के में से उनका ख़ास चीज़ों में आठवॉ हिस्सा है (और वह भी) तुमने जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तामील और (अदाए) क़र्ज़ के बाद और अगर कोई मर्द या औरत अपनी मादरजिलों (ख्याली) भाई या बहन को वारिस छोड़े तो उनमें से हर एक का ख़ास चीजों में छठा हिस्सा है और अगर उससे ज्यादा हो तो सबके सब एक ख़ास तिहाई में शरीक़ रहेंगे और (ये सब) मय्यत ने जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तामील और (अदाए) क़र्ज क़े बाद मगर हॉ वह वसीयत (वारिसों को ख्वाह मख्वाह) नुक्सान पहुंचाने वाली न हो (तब) ये वसीयत ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा तो हर चीज़ का जानने वाला और बुर्दबार है
Tilka hudoodul laah; wa mai yuti'il laaha wa Rasoolahoo yudkhilhu Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa; wa zaalikal fawzul 'azeem
यह ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदें हैं और ख़ुदा और रसूल की इताअत करे उसको ख़ुदा आख़ेरत में ऐसे (हर भरे) बाग़ों में पहुंचा देगा जिसके नीचे नहरें जारी होंगी और वह उनमें हमेशा (चैन से) रहेंगे और यही तो बड़ी कामयाबी है
Wallaatee yaateenal faahishata min nisaaa'ikum fastashhidoo 'alaihinna arba'atam minkum fa in shahidoo fa amsikoohunna fil buyooti hatta yatawaffaa hunnal mawtu aw yaj'alal laahu lahunna sabeelaa
और वह उसमें हमेशा अपना किया भुगतता रहेगा और उसके लिए बड़ी रूसवाई का अज़ाब है और तुम्हारी औरतों में से जो औरतें बदकारी करें तो उनकी बदकारी पर अपने लोगों में से चार गवाही लो और फिर अगर चारों गवाह उसकी तसदीक़ करें तो (उसकी सज़ा ये है कि) उनको घरों में बन्द रखो यहॉ तक कि मौत आ जाए या ख़ुदा उनकी कोई (दूसरी) राह निकाले
Wallazaani yaatiyaanihaa minkum fa aazoohumaa fa in taabaa wa aslahaa fa a'ridoo 'anhumaaa; innal laaha kaana Tawwaabar Raheema
और तुम लोगों में से जिनसे बदकारी सरज़द हुई हो उनको मारो पीटो फिर अगर वह दोनों (अपनी हरकत से) तौबा करें और इस्लाह कर लें तो उनको छोड़ दो बेशक ख़ुदा बड़ा तौबा कुबूल करने वाला मेहरबान है
Innamat tawbatu 'alallaahi lillazeena ya'maloonas sooo'a bijahaalatin summa yatooboona min qareebin faulaaika yatoobul laahu 'alaihim; wa kaanal laahu 'Aleeman Hakeemaa
मगर ख़ुदा की बारगाह में तौबा तो सिर्फ उन्हीं लोगों की (ठीक) है जो नादानिस्ता बुरी हरकत कर बैठे (और) फिर जल्दी से तौबा कर ले तो ख़ुदा भी ऐसे लोगों की तौबा क़ुबूल कर लेता है और ख़ुदा तो बड़ा जानने वाला हकीम है
Wa laisatit tawbatu lillazeena ya'maloonas saiyiaati hattaaa izaa hadara ahadahumul mawtu qaala innee tubtul 'aana wa lallazeena yamootoona wa hum kuffaar; ulaaa'ika a'tadnaa lahum 'azaaban aleemaa
और तौबा उन लोगों के लिये (मुफ़ीद) नहीं है जो (उम्र भर) तो बुरे काम करते रहे यहॉ तक कि जब उनमें से किसी के सर पर मौत आ खड़ी हुई तो कहने लगे अब मैंने तौबा की और (इसी तरह) उन लोगों के लिए (भी तौबा) मुफ़ीद नहीं है जो कुफ़्र ही की हालत में मर गये ऐसे ही लोगों के वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa yahillu lakum an tarisun nisaaa'a karhan wa laa ta'duloohunna litazhaboo biba'di maaa aataitumoohunna illaaa ai yaateena bifaahishatim bubaiyinah; wa 'aashiroo hunna bilma'roof; fa in karihtumoohunna fa'asaaa an takrahoo shai'anw wa yaj'alal laahu feehi khairan kaseeraa
ऐ ईमानदारों तुमको ये जायज़ नहीं कि (अपने मुरिस की) औरतों से (निकाह कर) के (ख्वाह मा ख्वाह) ज़बरदस्ती वारिस बन जाओ और जो कुछ तुमने उन्हें (शौहर के तर्के से) दिया है उसमें से कुछ (आपस से कुछ वापस लेने की नीयत से) उन्हें दूसरे के साथ (निकाह करने से) न रोको हॉ जब वह खुल्लम खुल्ला कोई बदकारी करें तो अलबत्ता रोकने में (मज़ाएक़ा (हर्ज)नहीं) और बीवियों के साथ अच्छा सुलूक करते रहो और अगर तुम किसी वजह से उन्हें नापसन्द करो (तो भी सब्र करो क्योंकि) अजब नहीं कि किसी चीज़ को तुम नापसन्द करते हो और ख़ुदा तुम्हारे लिए उसमें बहुत बेहतरी कर दे
Wa in arattumustib daala zawjim makaana zawjin wa aataitum ihdaahunna qintaaran falaa taakhuzoo minhu shai'aa; ataakhuzoonahoo buhtaannanw wa ismam mubeenaa
और अगर तुम एक बीवी (को तलाक़ देकर उस) की जगह दूसरी बीवी (निकाह करके) तबदील करना चाहो तो अगरचे तुम उनमें से एक को (जिसे तलाक़ देना चाहते हो) बहुत सा माल दे चुके हो तो तुम उनमें से कुछ (वापस न लो) क्या तुम्हारी यही गैरत है कि (ख्वाह मा ख्वाह) बोहतान बॉधकर या सरीही जुर्म लगाकर वापस ले लो
Wa laa tankihoo maa nakaha aabaaa'ukum minan nisaaa'i illaa maa qad salaf; inahoo kaana faahishatanw wa maqtanw wa saaa'a sabeelaa
और जिन औरतों से तुम्हारे बाप दादाओं से (निकाह) जमाअ (अगरचे ज़िना) किया हो तुम उनसे निकाह न करो मगर जो हो चुका (वह तो हो चुका) वह बदकारी और ख़ुदा की नाख़ुशी की बात ज़रूर थी और बहुत बुरा तरीक़ा था
Hurrimat 'alaikum umma haatukum wa bannaatukum wa akhawaatukum wa 'ammaatukum wa khaalaatukum wa banaatul akhi wa banaatul ukhti wa ummahaatu kumul laateee arda' nakum wa akhawaatukum minarradaa'ati wa ummahaatu nisaaa'ikum wa rabaaa'i bukumul laatee fee hujoorikum min nisaaa'ikumul laatee dakhaltum bihinna Fa il lam takoonoo dakhaltum bihina falaa junaaha 'alaikum wa halaaa'ilu abnaaa'ikumul lazeena min aslaabikum wa an tajma'oo bainal ukhtaini illaa maa qad salaf; innallaaha kaana Ghafoorar Raheema
(मुसलमानों हसबे जेल) औरतें तुम पर हराम की गयी हैं तुम्हारी माएं (दादी नानी वगैरह सब) और तुम्हारी बेटियॉ (पोतियॉ) नवासियॉ (वगैरह) और तुम्हारी बहनें और तुम्हारी फुफियॉ और तुम्हारी ख़ालाएं और भतीजियॉ और भंजियॉ और तुम्हारी वह माएं जिन्होंने तुमको दूध पिलाया है और तुम्हारी रज़ाई (दूध शरीक) बहनें और तुम्हारी बीवीयों की माँए और वह (मादर ज़िलो) लड़कियां जो तुम्हारी गोद में परवरिश पा चुकी हो और उन औरतों (के पेट) से (पैदा हुई) हैं जिनसे तुम हमबिस्तरी कर चुके हो हाँ अगर तुमने उन बीवियों से (सिर्फ निकाह किया हो) हमबिस्तरी न की तो अलबत्ता उन मादरज़िलों (लड़कियों से) निकाह (करने में) तुम पर कुछ गुनाह नहीं है और तुम्हारे सुलबी लड़को (पोतों नवासों वगैरह) की बीवियॉ (बहुएं) और दो बहनों से एक साथ निकाह करना मगर जो हो चुका (वह माफ़ है) बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
Walmuhsanaatu minan nisaaa'i illaa maa malakat aimaanukum kitaabal laahi 'alaikum; wa uhilla lakum maa waraaa'a zaalikum an tabtaghoo bi amwaali kum muhsineena ghaira musaa fiheen; famastamta'tum bihee minhunna fa aatoohunna ujoorahunna fareedah; wa laa junaaha 'alaikum feemaa taraadaitum bihee mim ba'dil fareedah; innal laaha kaana 'Aleeman Hakeemaa
और शौहरदार औरतें मगर वह औरतें जो (जिहाद में कुफ्फ़ार से) तुम्हारे कब्ज़े में आ जाएं हराम नहीं (ये) ख़ुदा का तहरीरी हुक्म (है जो) तुमपर (फ़र्ज़ किया गया) है और उन औरतों के सिवा (और औरतें) तुम्हारे लिए जायज़ हैं बशर्ते कि बदकारी व ज़िना नहीं बल्कि तुम इफ्फ़त या पाकदामिनी की ग़रज़ से अपने माल (व मेहर) के बदले (निकाह करना) चाहो हॉ जिन औरतों से तुमने मुताअ किया हो तो उन्हें जो मेहर मुअय्यन किया है दे दो और मेहर के मुक़र्रर होने के बाद अगर आपस में (कम व बेश पर) राज़ी हो जाओ तो उसमें तुमपर कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा (हर चीज़ से) वाक़िफ़ और मसलेहतों का पहचानने वाला है
Wa mal lam yastati' minkum tawlan ai yankihal muhsanaatil mu'minaati famimmaa malakat aimaanukum min fatayaatikumul mu'minaat; wallaahu a'lamu bi eemaanikum; ba'dukum mim ba'd; fankihoohunna bi izni ahlihinna wa aatoohunna ujoorahunna bilma'roofi muhsanaatin ghaira musaa fihaatinw wa laa muttakhizaati akhdaan; fa izaaa uhsinna fa in ataina bifaahi shatin fa'alaihinnna nisfu maa 'alal muhsanaati minal 'azaab; zaalika liman khashiyal 'anata minkum; wa an tasbiroo khairul lakum; wallaahu Ghafoorur Raheem
और तुममें से जो शख्स आज़ाद इफ्फ़तदार औरतों से निकाह करने की माली हैसियत से क़ुदरत न रखता हो तो वह तुम्हारी उन मोमिना लौन्डियों से जो तुम्हारे कब्ज़े में हैं निकाह कर सकता है और ख़ुदा तुम्हारे ईमान से ख़ूब वाक़िफ़ है (ईमान की हैसियत से तो) तुममें एक दूसरे का हमजिन्स है पस (बे ताम्मुल) उनके मालिकों की इजाज़त से लौन्डियों से निकाह करो और उनका मेहर हुस्ने सुलूक से दे दो मगर उन्हीं (लौन्डियो) से निकाह करो जो इफ्फ़त के साथ तुम्हारी पाबन्द रहें न तो खुले आम ज़िना करना चाहें और न चोरी छिपे से आशनाई फिर जब तुम्हारी पाबन्द हो चुकी उसके बाद कोई बदकारी करे तो जो सज़ा आज़ाद बीवियों को दी जाती है उसकी आधी (सज़ा) लौन्डियों को दी जाएगी (और लौन्डियों) से निकाह कर भी सकता है तो वह शख्स जिसको ज़िना में मुब्तिला हो जाने का ख़ौफ़ हो और सब्र करे तो तुम्हारे हक़ में ज्यादा बेहतर है और ख़ुदा बख्शने वाला मेहरबान है
Yureedul laahu liyubai yina lakum wa yahdiyakum sunanal lazeena min qablikum wa yatooba 'alaikum; wallaahu 'Aleemun Hakeem
ख़ुदा तो ये चाहता है कि (अपने) एहकाम तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान कर दे और जो (अच्छे) लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनके तरीक़े पर चला दे और तुम्हारी तौबा कुबूल करे और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाक़िफ़ और हिकमत वाला है
Yureedul laahu ai yukhaffifa 'ankum; wa khuliqal insaanu da'eefaa
करे और जो लोग नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पडे हैं वह ये चाहते हैं कि तुम लोग (राहे हक़ से) बहुत दूर हट जाओ और ख़ुदा चाहता है कि तुमसे बार में तख़फ़ीफ़ कर दें क्योंकि आदमी तो बहुत कमज़ोर पैदा किया गया है
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हॉ) तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूंट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है
In tajtaniboo kabaaa'ira maa tunhawna 'anhu nukaffir 'ankum saiyiaatikum wa nudkhilkum mudkhalan kareemaa
जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेंगे और तुमको बहुत अच्छी इज्ज़त की जगह पहुंचा देंगे
Wa laa tatamannaw maa faddalal laahu bihee ba'dakum 'alaa ba'd; lirrijaali naseebum mimak tasaboo wa linnisaaa'i naseebum mimmak tasabna; was'alullaaha min fadlih; innal laaha kaana bikulli shai'in 'Aleemaa
और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह दी है उसकी हवस न करो (क्योंकि फ़ज़ीलत तो आमाल से है) मर्दो को अपने किए का हिस्सा है और औरतों को अपने किए का हिस्सा और ये और बात है कि तुम ख़ुदा से उसके फज़ल व करम की ख्वाहिश करो ख़ुदा तो हर चीज़े से वाक़िफ़ है
Wa likullin ja'alnaa ma waaliya mimmaa tarakal waalidaani wal aqraboon; wallazeena 'aqadat aimaanukum fa aatoohum naseebahum; innal laaha kaana 'alaa kulli shai'in Shaheedaa
और मां बाप (या) और क़राबतदार (ग़रज़) तो शख्स जो तरका छोड़ जाए हमने हर एक का (वाली) वारिस मुक़र्रर कर दिया है और जिन लोगों से तुमने मुस्तहकम (पक्का) एहद किया है उनका मुक़र्रर हिस्सा भी तुम दे दो बेशक ख़ुदा तो हर चीज़ पर गवाह है
Arrijaalu qawwaamoona 'alan nisaaa'i bimaa fad dalallaahu ba'dahum 'alaa ba'dinw wa bimaaa anfoqoo min amwaalihim; fassaalihaatu qaanitaatun haafizaatul lil ghaibi bimaa hafizal laah; wallaatee takhaafoona nushoo zahunna fa 'izoohunna wahjuroohunna fil madaaji'i wadriboohunna fa in ata'nakum falaa tabghoo 'alaihinna sabeelaa; innallaaha kaana 'Aliyyan Kabeeraa
मर्दो का औरतों पर क़ाबू है क्योंकि (एक तो) ख़ुदा ने बाज़ आदमियों (मर्द) को बाज़ अदमियों (औरत) पर फ़ज़ीलत दी है और (इसके अलावा) चूंकि मर्दो ने औरतों पर अपना माल ख़र्च किया है पस नेक बख्त बीवियॉ तो शौहरों की ताबेदारी करती हैं (और) उनके पीठ पीछे जिस तरह ख़ुदा ने हिफ़ाज़त की वह भी (हर चीज़ की) हिफ़ाज़त करती है और वह औरतें जिनके नाफरमान सरकश होने का तुम्हें अन्देशा हो तो पहले उन्हें समझाओ और (उसपर न माने तो) तुम उनके साथ सोना छोड़ दो और (इससे भी न माने तो) मारो मगर इतना कि खून न निकले और कोई अज़ो न (टूटे) पस अगर वह तुम्हारी मुतीइ हो जाएं तो तुम भी उनके नुक़सान की राह न ढूंढो ख़ुदा तो ज़रूर सबसे बरतर बुजुर्ग़ है
Wa in khiftum shiqaaqa baini himaa fab'asoo haka mam min ahlihee wa hakamam min ahlihaa; iny-yureedaaa islaah ai-yuwaffiqil laahu bainahumaa; innal laaha kaana 'Aleeman Khabeeraa
और ऐ हुक्काम (वक्त) अगर तुम्हें मियॉ बीवी की पूरी नाइत्तेफ़ाक़ी का तरफैन से अन्देशा हो तो एक सालिस (पन्च) मर्द के कुनबे में से एक और सालिस औरत के कुनबे में मुक़र्रर करो अगर ये दोनों सालिस दोनों में मेल करा देना चाहें तो ख़ुदा उन दोनों के दरमियान उसका अच्छा बन्दोबस्त कर देगा ख़ुदा तो बेशक वाक़िफ व ख़बरदार है
Wa'budul laaha wa laa tushrikoo bihee shai'anw wa bilwaalidaini ihsaananw wa bizil qurbaa walyataamaa walmasaakeeni waljaari zilqurbaa waljaaril junubi wassaahibi biljambi wabnis sabeeli wa maa malakat aimaanukum; innal laaha laa yuhibbu man kaana mukhtaalan fakhooraa
और ख़ुदा ही की इबादत करो और किसी को उसका शरीक न बनाओ और मॉ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों और रिश्तेदार पड़ोसियों और अजनबी पड़ोसियों और पहलू में बैठने वाले मुसाहिबों और पड़ोसियों और ज़र ख़रीद लौन्डी और गुलाम के साथ एहसान करो बेशक ख़ुदा अकड़ के चलने वालों और शेख़ीबाज़ों को दोस्त नहीं रखता
Allazeena yabkhaloona wa yaamuroonan naasa bilbukhli wa yaktumoona maaa aataahu mullaahu min fadlih; wa a'tadnaa lilkaafireena 'azaabam muheenaa
ये वह लोग हैं जो ख़ुद तो बुख्ल करते ही हैं और लोगों को भी बुख्ल का हुक्म देते हैं और जो माल ख़ुदा ने अपने फ़ज़ल व (करम) से उन्हें दिया है उसे छिपाते हैं और हमने तो कुफ़राने नेअमत करने वालों के वास्ते सख्त ज़िल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है
Wallazeena yunfiqoona amwaalahum ri'aaa'an naasi wa laa yu'minoona billaahi wa laa bil Yawmil Aakhir; wa mai yakunish shaitaanu lahoo qareenan fasaaa'a qareenaa
और जो लोग महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते अपने माल ख़र्च करते हैं और न खुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोजे आख़ेरत पर ख़ुदा भी उनके साथ नहीं क्योंकि उनका साथी तो शैतान है और जिसका साथी शैतान हो तो क्या ही बुरा साथी है
Wa maazaa 'alaihim law aamanoo billaahi wal Yawmil Aakhiri wa anfaqoo mimmaa razaqahumul laah; wa kaanallaahu bihim Aaleemaa
अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाक़िफ़ है
Yawma'iziny yawad dullazeena kafaroo wa'asawur Rasoola law tusawwaa bihimul ardu wa laa yaktumoonal laaha hadeesaa
उस दिन जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और रसूल की नाफ़रमानी की ये आरज़ू करेंगे कि काश (वह पेवन्दे ख़ाक हो जाते) और उनके ऊपर से ज़मीन बराबर कर दी जाती और अफ़सोस ये लोग ख़ुदा से कोई बात उस दिन छुपा भी न सकेंगे
yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa taqrabus Salaata wa antum sukaaraa hatta ta'lamoo ma taqooloona wa la junuban illaa 'aabiree sabeelin hatta taghtasiloo; wa in kuntum mardaaa aw 'alaa safarin aw jaaa'a ahadum minkum minal ghaaa'iti aw laamastumun nisaaa'a falam tajidoo maaa'an fatayam mamoo sa'eedan taiyiban famsahoo biwujoohikum wa aideekum; innal laaha kaana 'Afuwwan Ghafooraa
ऐ ईमानदारों तुम नशे की हालत में नमाज़ के क़रीब न जाओ ताकि तुम जो कुछ मुंह से कहो समझो भी तो और न जिनाबत की हालत में यहॉ तक कि ग़ुस्ल कर लो मगर राह गुज़र में हो (और गुस्ल मुमकिन नहीं है तो अलबत्ता ज़रूरत नहीं) बल्कि अगर तुम मरीज़ हो और पानी नुक़सान करे या सफ़र में हो तुममें से किसी का पैख़ाना निकल आए या औरतों से सोहबत की हो और तुमको पानी न मयस्सर हो (कि तहारत करो) तो पाक मिट्टी पर तैमूम कर लो और (उस का तरीक़ा ये है कि) अपने मुंह और हाथों पर मिट्टी भरा हाथ फेरो तो बेशक ख़ुदा माफ़ करने वाला है (और) बख्श ने वाला है
Alam tara ilal lazeena ootoo naseebam minal Kitaabi yashtaroonad dalaalata wa yureedoona an tadillus sabeel
(ऐ रसूल) क्या तूमने उन लोगों के हाल पर नज़र नहीं की जिन्हें किताबे ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था (मगर) वह लोग (हिदायत के बदले) गुमराही ख़रीदने लगे उनकी ऐन मुराद यह है कि तुम भी राहे रास्त से बहक जाओ
Minal lazeena haadoo yuharrifoonal Kalima 'am mawaadi'ihee wa yaqooloona sami'naa wa 'asainaa wasma' ghaira musma'inw wa raa'inaa laiyam bi alsinatihim wa ta'nan fiddeen; wa law annahum qaaloo sami'naa wa ata'naa wasma' wanzurnaa lakaana khairal lahum wa aqwama wa laakil la ''anahumul laahu bikufrihim falaa yu'minoona illaa qaleela
(ऐ रसूल) यहूद से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बातों में उनके महल व मौक़े से हेर फेर डाल देते हैं और अपनी ज़बानों को मरोड़कर और दीन पर तानाज़नी की राह से तुमसे समेअना व असैना (हमने सुना और नाफ़रमानी की) और वसमअ गैरा मुसमइन (तुम मेरी सुनो ख़ुदा तुमको न सुनवाए) राअना मेरा ख्याल करो मेरे चरवाहे कहा करते हैं और अगर वह इसके बदले समेअना व अताअना (हमने सुना और माना) और इसमाआ (मेरी सुनो) और (राअना) के एवज़ उनजुरना (हमपर निगाह रख) कहते तो उनके हक़ में कहीं बेहतर होता और बिल्कुल सीधी बात थी मगर उनपर तो उनके कुफ़्र की वजह से ख़ुदा की फ़िटकार है
yaaa aiyuha lazeena ootu Kitaaba aaminoo bimaa nazzalnaa musadiqallimaa ma'akum min qabli an natmisa wujoohan fanaruddahaa 'alaaa adbaarihaaa aw nal'anahum kamaa la'annaaa Ashaabas Sabt; wa kaana amrul laahi maf'oolaa
पस उनमें से चन्द लोगों के सिवा और लोग ईमान ही न लाएंगे ऐ अहले किताब जो (किताब) हमने नाज़िल की है और उस (किताब) की भी तस्दीक़ करती है जो तुम्हारे पास है उस पर ईमान लाओ मगर क़ब्ल इसके कि हम कुछ लोगों के चेहरे बिगाड़कर उनके पुश्त की तरफ़ फेर दें या जिस तरह हमने असहाबे सबत (हफ्ते वालों) पर फिटकार बरसायी वैसी ही फिटकार उनपर भी करें
Innal laaha laa yaghfiru ai yushraka bihee wa yaghfiru maa doona zaalika limai yashaaa'; wa mai yushrik billaahi faqadif taraaa isman 'azeemaa
और ख़ुदा का हुक्म किया कराया हुआ काम समझो ख़ुदा उस जुर्म को तो अलबत्ता नहीं माफ़ करता कि उसके साथ शिर्क किया जाए हॉ उसके सिवा जो गुनाह हो जिसको चाहे माफ़ कर दे और जिसने (किसी को) ख़ुदा का शरीक बनाया तो उसने बड़े गुनाह का तूफान बॉधा
Alam tara ilal lazeena yuzakkoona anfusahum; balil laahu yuzakkee mai yashaaa'u wa laa yuzlamoona fateelaa
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के हाल पर नज़र नहीं की जो आप बड़े मुक़द्दस बनते हैं (मगर उससे क्या होता है) बल्कि ख़ुदा जिसे चाहता है मुक़द्दस बनाता है और ज़ुल्म तो किसी पर धागे के बराबर हो ही गा नहीं
Alam tara ilal lazeena 'ootoo naseebam minal kitaabi yu'minoona bil Jibti wat Taaghooti wa yaqooloona lillazeena kafaroo haaa ulaaa'i ahdaa minal lazeena aamanoo sabeelaa
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के (हाल पर) नज़र नहीं की जिन्हें किताबे ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था और (फिर) शैतान और बुतों का कलमा पढ़ने लगे और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया है उनकी निस्बत कहने लगे कि ये तो ईमान लाने वालों से ज्यादा राहे रास्त पर हैं
Am yahsudoonan naasa 'alaa maaa aataahumul laahu min fadlihee faqad aatainaaa Aala Ibraaheemal Kitaaba wal Hikmata wa aatainaahum mulkan 'azeemaa
या ख़ुदा ने जो अपने फ़ज़ल से (तुम) लोगों को (कुरान) अता फ़रमाया है इसके रश्क पर चले जाते हैं (तो उसका क्या इलाज है) हमने तो इबराहीम की औलाद को किताब और अक्ल की बातें अता फ़रमायी हैं और उनको बहुत बड़ी सल्तनत भी दी
Innal lazeena kafaroo bi Aayaatinaa sawfa nusleehim Naaran kullamaa nadijat julooduhum baddalnaahum juloodan ghairahaa liyazooqul 'azaab; innallaaha kaana 'Azeezan Hakeemaa
(याद रहे) कि जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया उन्हें ज़रूर अनक़रीब जहन्नुम की आग में झोंक देंगे (और जब उनकी खालें जल कर) जल जाएंगी तो हम उनके लिए दूसरी खालें बदल कर पैदा करे देंगे ताकि वह अच्छी तरह अज़ाब का मज़ा चखें बेशक ख़ुदा हरचीज़ पर ग़ालिब और हिकमत वाला है
Wallazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati sanud khiluum jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaaa abadaa, lahum feehaaa azwaajum mutahharatun wa nudkhiluhum zillan zaleelaa
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए हम उनको अनक़रीब ही (बेहिश्त के) ऐसे ऐसे (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुंचाएंगे जिन के नीचे नहरें जारी होंगी और उनमें हमेशा रहेंगे वहां उनकी साफ़ सुथरी बीवियॉ होंगी और उन्हे घनी छॉव में ले जाकर रखेंगे
Innal laaha yaamurukum an tu'addul amaanaati ilaaa ahlihaa wa izaa hakamtum bainan naasi an tahkumoo bil 'adl; innal laaha yaamurukum an tu'addul amaanaati ilaaa ahlihaa wa izaa hakamtum bainan naasi an tahkumoo bil 'adl; innal laaha ni'immaa ya'izukum bih; innal laaha kaana Samee'am Baseera
ऐ ईमानदारों ख़ुदा तुम्हें हुक्म देता है कि लोगों की अमानतें अमानत रखने वालों के हवाले कर दो और जब लोगों के बाहमी झगड़ों का फैसला करने लगो तो इन्साफ़ से फैसला करो (ख़ुदा तुमको) इसकी क्या ही अच्छी नसीहत करता है इसमें तो शक नहीं कि ख़ुदा सबकी सुनता है (और सब कुछ) देखता है
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo atee'ul laaha wa atee'ur Rasoola wa ulil amri minkum fa in tanaaza'tum fee shai'in faruddoohu ilal laahi war Rasooli in kuntum tu'minoona billaahi wal yawmil Aakhir; zaalika khairunw wa ahsanu taaweelaa
ऐ ईमानदारों ख़ुदा की इताअत करो और रसूल की और जो तुममें से साहेबाने हुकूमत हों उनकी इताअत करो और अगर तुम किसी बात में झगड़ा करो पस अगर तुम ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान रखते हो तो इस अम्र में ख़ुदा और रसूल की तरफ़ रूजू करो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अन्जाम की राह से बहुत अच्छा है
Alam tara ilal lazeena yaz'umoona annahum aarmanoo bimaa unzilaa ilaika wa maaa unzila min qablika yureedoona ai yatahaakamooo ilat Taaghooti wa qad umirooo ai yakfuroo bih, wa yureedush Shaitaanu ai yudillahum dalaalam ba'eedaa
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों की (हालत) पर नज़र नहीं की जो ये ख्याली पुलाओ पकाते हैं कि जो किताब तुझ पर नाज़िल की गयी और जो किताबें तुम से पहले नाज़िल की गयी (सब पर ईमान है) लाए और दिली तमन्ना ये है कि सरकशों को अपना हाकिम बनाएं हालॉकि उनको हुक्म दिया गया कि उसकी बात न मानें और शैतान तो यह चाहता है कि उन्हें बहका के बहुत दूर ले जाए
Wa izaa qeela lahum ta'aalaw ilaa maaa anzalallaahu wa ilar Rasooli ra aital munaafiqeena yasuddoona 'anka sudoodaa
और जब उनसे कहा जाता है कि ख़ुदा ने जो किताब नाज़िल की है उसकी तरफ़ और रसूल की तरफ़ रूजू करो तो तुम मुनाफ़िक़ीन को देखते हो कि तुमसे किस तरह मुंह फेर लेते हैं
Fakaifa izaaa asaabathum museebatum summa jaaa'ooka yahlifoona billaahi in aradnaaa illaaa ihsaananw wa tawfeeqaa
कि जब उनपर उनके करतूत की वजह से कोई मुसीबत पड़ती है तो क्योंकर तुम्हारे पास ख़ुदा की क़समें खाते हैं कि हमारा मतलब नेकी और मेल मिलाप के सिवा कुछ न था ये वह लोग हैं कि कुछ ख़ुदा ही उनके दिल की हालत ख़ूब जानता है
Ulaaa'ikal lazeena ya'la mullaahu maa fee quloobihim fa a'rid 'anhum wa 'izhum wa qul lahum feee anfusihim qawlam baleeghaa
पस तुम उनसे दरगुज़र करो और उनको नसीहत करो और उनसे उनके दिल में असर करने वाली बात कहो और हमने कोई रसूल नहीं भेजा मगर इस वास्ते कि ख़ुदा के हुक्म से लोग उसकी इताअत करें
Wa maa arsalnaa mir Rasoolin illaa liyutaa'a bi iznil laah; wa law annahum 'iz zalamooo anfusahum jaaa'ooka fastaghfarul laaha wastaghfara lahumur Rasoolu la wajadul laaha Tawwaabar Raheemaa
और (रसूल) जब उन लोगों ने (नाफ़रमानी करके) अपनी जानों पर जुल्म किया था अगर तुम्हारे पास चले आते और ख़ुदा से माफ़ी मॉगते और रसूल (तुम) भी उनकी मग़फ़िरत चाहते तो बेशक वह लोग ख़ुदा को बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान पाते
Falaa wa Rabbika laa yu'minoona hattaa yuhakkimooka fe emaa shajara bainahum summa laa yajidoo fee anfusihim harajam mimmaa qadaita wa yusal limoo tasleemaa
पस (ऐ रसूल) तुम्हारे परवरदिगार की क़सम ये लोग सच्चे मोमिन न होंगे तावक्ते क़ि अपने बाहमी झगड़ों में तुमको अपना हाकिम (न) बनाएं फिर (यही नहीं बल्कि) जो कुछ तुम फैसला करो उससे किसी तरह दिलतंग भी न हों बल्कि ख़ुशी ख़ुशी उसको मान लें
Wa law annaa katabnaa 'alaihim aniq tulooo anfusakum awikh rujoo min diyaarikum maa fa'aloohu illaa qaleelum minhum wa law annahum fa'aloo maa yoo'azoona bihee lakaana khairal lahum wa ashadda tasbeetaa
(इस्लामी शरीयत में तो उनका ये हाल है) और अगर हम बनी इसराइल की तरह उनपर ये हुक्म जारी कर देते कि तुम अपने आपको क़त्ल कर डालो या शहर बदर हो जाओ तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा ये लोग तो उसको न करते और अगर ये लोग इस बात पर अमल करते जिसकी उन्हें नसीहत की जाती है तो उनके हक़ में बहुत बेहतर होता
Wa many-yuti'il laaha war Rasoola fa ulaaa'ika ma'al lazeena an'amal laahu 'alaihim minan nabiyyeena wassiddeeqeena washshuhadaaa'i wassaaliheen; wa hasuna ulaaa'ika rafeeqaa
और जिस शख्स ने ख़ुदा और रसूल की इताअत की तो ऐसे लोग उन (मक़बूल) बन्दों के साथ होंगे जिन्हें ख़ुदा ने अपनी नेअमतें दी हैं यानि अम्बिया और सिद्दीक़ीन और शोहदा और सालेहीन और ये लोग क्या ही अच्छे रफ़ीक़ हैं
ऐ ईमानवालों (जिहाद के वक्त) अपनी हिफ़ाज़त के (ज़राए) अच्छी तरह देखभाल लो फिर तुम्हें इख्तेयार है ख्वाह दस्ता दस्ता निकलो या सबके सब इकट्ठे होकर निकल खड़े हो
Wa inna minkum lamal la yubatti'anna fa in asaabatkum museebatun qaala qad an'amal laahu 'alaiya iz lam akum ma'ahum shaheeda
और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो (जेहाद से) ज़रूर पीछे रहेंगे फिर अगर इत्तेफ़ाक़न तुमपर कोई मुसीबत आ पड़ी तो कहने लगे ख़ुदा ने हमपर बड़ा फ़ज़ल किया कि उनमें (मुसलमानों) के साथ मौजूद न हुआ
Wa la'in asaabakum fadlum minal laahi la yaqoolanna ka al lam takum bainakum wa bainahoo mawaddatuny yaa laitanee kuntu ma'ahum fa afooza fawzan 'azeemaa
और अगर तुमपर ख़ुदा ने फ़ज़ल किया (और दुश्मन पर ग़ालिब आए) तो इस तरह अजनबी बनके कि गोया तुममें उसमें कभी मोहब्बत ही न थी यूं कहने लगा कि ऐ काश उनके साथ होता तो मैं भी बड़ी कामयाबी हासिल करता
Falyuqaatil fee sabeelil laahil lazeena yashroonal hayaatad dunyaa bil Aakhirah; wa many-uqaatil fee sabeelil laahi fa yuqtal aw yaghlib fasawfa nu'teehi ajran 'azeemaa
पस जो लोग दुनिया की ज़िन्दगी (जान तक) आख़ेरत के वास्ते दे डालने को मौजूद हैं उनको ख़ुदा की राह में जेहाद करना चाहिए और जिसने ख़ुदा की राह में जेहाद किया फिर शहीद हुआ तो गोया ग़ालिब आया तो (बहरहाल) हम तो अनक़रीब ही उसको बड़ा अज्र अता फ़रमायेंगे
Wa maa lakum laa tuqaatiloona fee sabeelil laahi walmustad'afeena minar rijaali wannisaaa'i walwildaanil lazeena yaqooloona Rabbanaaa akhrijnaa min haazihil qaryatiz zaalimi ahluhaa waj'al lanaa mil ladunka waliyanw waj'al lanaa mil ladunka naseeraa
(और मुसलमानों) तुमको क्या हो गया है कि ख़ुदा की राह में उन कमज़ोर और बेबस मर्दो और औरतों और बच्चों (को कुफ्फ़ार के पंजे से छुड़ाने) के वास्ते जेहाद नहीं करते जो (हालते मजबूरी में) ख़ुदा से दुआएं मॉग रहे हैं कि ऐ हमारे पालने वाले किसी तरह इस बस्ती (मक्का) से जिसके बाशिन्दे बड़े ज़ालिम हैं हमें निकाल और अपनी तरफ़ से किसी को हमारा सरपरस्त बना और तू ख़ुद ही किसी को अपनी तरफ़ से हमारा मददगार बना
(पस देखो) ईमानवाले तो ख़ुदा की राह में लड़ते हैं और कुफ्फ़ार शैतान की राह में लड़ते मरते हैं पस (मुसलमानों) तुम शैतान के हवा ख़ाहों से लड़ो और (कुछ परवाह न करो) क्योंकि शैतान का दाओ तो बहुत ही बोदा है
Alam tara ilal lazeena qeela lahum kuffooo aidiyakum wa aqeemus Salaata w aaatuz Zakaata falammaa kutiba 'alaihimul qitaalu izaa fareequm minhum yakhshawnnan naasa kakhashyatil laahi aw ashadda khashyah; wa qaaloo Rabbanaa lima katabta 'alainal qitaala law laaa akhkhartanaa ilaaa ajalin qareeb; qul mataa'ud dunyaa qaleelunw wal Aakhiratu khairul limanit taqaa wa laa tuzlamoona fateelaa
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों (के हाल) पर नज़र नहीं की जिनको (जेहाद की आरज़ू थी) और उनको हुक्म दिया गया था कि (अभी) अपने हाथ रोके रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और ज़कात दिए जाओ मगर जब जिहाद (उनपर वाजिब किया गया तो) उनमें से कुछ लोग (बोदेपन में) लोगों से इस तरह डरने लगे जैसे कोई ख़ुदा से डरे बल्कि उससे कहीं ज्यादा और (घबराकर) कहने लगे ख़ुदाया तूने हमपर जेहाद क्यों वाजिब कर दिया हमको कुछ दिनों की और मोहलत क्यों न दी (ऐ रसूल) उनसे कह दो कि दुनिया की आसाइश बहुत थोड़ा सा है और जो (ख़ुदा से) डरता है उसकी आख़ेरत उससे कहीं बेहतर है
Ainamaa takoonoo yudrikkumul mawtu wa law kuntum fee buroojim mushai yadah; wa in tusibhum hasanatuny yaqooloo haazihee min indil laahi wa in tusibhum saiyi'atuny yaqooloo haazihee min 'indik; qul kullum min 'indillaahi famaa lihaaa 'ulaaa'il qawmi laa yakkaadoona yafqahoona hadeesaa
और वहां रेशा (बाल) बराबर भी तुम लोगों पर जुल्म नहीं किया जाएगा तुम चाहे जहॉ हो मौत तो तुमको ले डालेगी अगरचे तुम कैसे ही मज़बूत पक्के गुम्बदों में जा छुपो और उनको अगर कोई भलाई पहुंचती है तो कहने लगते हैं कि ये ख़ुदा की तरफ़ से है और अगर उनको कोई तकलीफ़ पहुंचती है तो (शरारत से) कहने लगते हैं कि (ऐ रसूल) ये तुम्हारी बदौलत है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि सब ख़ुदा की तरफ़ से है पस उन लोगों को क्या हो गया है कि र्कोई बात ही नहीं समझते
Maaa asaabaka min hasanatin faminal laahi wa maaa asaaabaka min saiyi'atin famin nafsik; wa arsalnaaka linnaasi Rasoolaa; wa kafaa billaahi Shaheedaa
हालॉकि (सच तो यूं है कि) जब तुमको कोई फ़ायदा पहुंचे तो (समझो कि) ख़ुदा की तरफ़ से है और जब तुमको कोई फ़ायदा पहुंचे तो (समझो कि) ख़ुद तुम्हारी बदौलत है और (ऐ रसूल) हमने तुमको लोगों के पास पैग़म्बर बनाकर भेजा है और (इसके लिए) ख़ुदा की गवाही काफ़ी है
Man yuti'ir Rasoola faqad ataa'al laaha wa man tawallaa famaaa arsalnaaka 'alaihim hafeezaa
जिसने रसूल की इताअत की तो उसने ख़ुदा की इताअत की और जिसने रूगरदानी की तो तुम कुछ ख्याल न करो (क्योंकि) हमने तुम को पासबान (मुक़र्रर) करके तो भेजा नहीं है
Wa yaqooloona taa'antun fa izaa barazoo min 'indika baiyata taaa'ifatum minhum ghairal lazee taqoolu wallaahu yaktubu maa yubaiyitoona faa'rid 'anhum wa tawakkal 'alal laah; wa kafaa billaahi Wakeelaa
(ये लोग तुम्हारे सामने) तो कह देते हैं कि हम (आपके) फ़रमाबरदार हैं लेकिन जब तुम्हारे पास से बाहर निकले तो उनमें से कुछ लोग जो कुछ तुमसे कह चुके थे उसके ख़िलाफ़ रातों को मशवरा करते हैं हालॉकि (ये नहीं समझते) ये लोग रातों को जो कुछ भी मशवरा करते हैं उसे ख़ुदा लिखता जाता है पास तुम उन लोगों की कुछ परवाह न करो और ख़ुदा पर भरोसा रखो और ख़ुदा कारसाज़ी के लिए काफ़ी है
Wa izaa jaaa'ahum amrum minal amni awil kkhawfi azaa'oo bihee wa law raddoohu ilar Rasooli wa ilaaa ulil amri minhum la'alimahul lazeena yastambitoonahoo minhum; wa law laa fadlul laahi 'alaikum wa rahmatuhoo lattaba'tumush Shaitaana illaa qaleelaa
और जब उनके (मुसलमानों के) पास अमन या ख़ौफ़ की ख़बर आयी तो उसे फ़ौरन मशहूर कर देते हैं हालॉकि अगर वह उसकी ख़बर को रसूल (या) और ईमानदारो में से जो साहबाने हुकूमत तक पहुंचाते तो बेशक जो लोग उनमें से उसकी तहक़ीक़ करने वाले हैं (पैग़म्बर या वली) उसको समझ लेते कि (मशहूर करने की ज़रूरत है या नहीं) और (मुसलमानों) अगर तुमपर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो चन्द आदमियों के सिवा तुम सबके सब शैतान की पैरवी करने लगते
Faqaatil fee sabeelil laahi laa tukallafu illa nafsaka wa harridil mu'mineena 'asallaahu ai yakuffa baasallazeena kafaroo; wallaahu ashaddu baasanw wa ashaaddu tanakeelaa
पस (ऐ रसूल) तुम ख़ुदा की राह में जिहाद करो और तुम अपनी ज़ात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो और ईमानदारों को (जेहाद की) तरग़ीब दो और अनक़रीब ख़ुदा काफ़िरों की हैबत रोक देगा और ख़ुदा की हैबत सबसे ज्यादा है और उसकी सज़ा बहुत सख्त है
Mai yashfa' shafaa'atan hasanatay yakul lahoo naseebum minhaa wa mai yashfa' shafaa'tan saiyi'atanny-yakul lahoo kiflum minhaa; wa kaanal laahu 'alaa kulli shai'im Muqeetaa
जो शख्स अच्छे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उस काम के सवाब से कुछ हिस्सा मिलेगा और जो बुरे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उसी काम की सज़ा का कुछ हिस्सा मिलेगा और ख़ुदा तो हर चीज़ पर निगेहबान है
Allaahu laaa ilaaha illaa huwa la yajma'annakum ilaa Yawmil Qiyaamati laa raiba feeh; wa man asdaqu mminallaahi hadeesaa
अल्लाह तो वही परवरदिगार है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं वह तुमको क़यामत के दिन जिसमें ज़रा भी शक नहीं ज़रूर इकट्ठा करेगा और ख़ुदा से बढ़कर बात में सच्चा कौन होगा
Famaa lakum filmuna afiqeena fi'ataini wallaahu arkasahum bimaa kasaboo; atureedoona an tahdoo man adallal laahu wa mmai yudlilil laahu falan tajida lahoo sabeelaa
(मुसलमानों) फिर तुमको क्या हो गया है कि तुम मुनाफ़िक़ों के बारे में दो फ़रीक़ हो गए हो (एक मुवाफ़िक़ एक मुख़ालिफ़) हालॉकि ख़ुद ख़ुदा ने उनके करतूतों की बदौलत उनकी अक्लों को उलट पुलट दिया है क्या तुम ये चाहते हो कि जिसको ख़ुदा ने गुमराही में छोड़ दिया है तुम उसे राहे रास्त पर ले आओ हालॉकि ख़ुदा ने जिसको गुमराही में छोड़ दिया है उसके लिए तुममें से कोई शख्स रास्ता निकाल ही नहीं सकता
Wadoo law takfuroona kamaa kafaroo fatakoonoona sawaaa'an falaa tattakhizoo minhum awliyaaa'a hattaa yuhaajiroo fee sabeelil laah; fa in tawallaw fa khuzoohum waqtuloohum haisu wajat tumoohum wa laa tattakhizoo minhum waliyyanw wa laa naseeraa
उन लोगों की ख्वाहिश तो ये है कि जिस तरह वह काफ़िर हो गए तुम भी काफ़िर हो जाओ ताकि तुम उनके बराबर हो जाओ पस जब तक वह ख़ुदा की राह में हिजरत न करें तो उनमें से किसी को दोस्त न बनाओ फिर अगर वह उससे भी मुंह मोड़ें तो उन्हें गिरफ्तार करो और जहॉ पाओ उनको क़त्ल करो और उनमें से किसी को न अपना दोस्त बनाओ न मददगार
Illal lazeena yasiloona ilaa qawmim binakum wa bainahum meesaaqun aw jaaa'ookum hasirat sudooruhum ai yuqaatilookum aw yuqaatiloo qawmahum, wa law shaaa'al laahu lasallatahum 'alaikum falaqaatalookum; fa ini' tazalookum falam yuqaatilookum wa alqaw ilaikumus salama famaa ja'alal laahu lakum 'alaihim sabeelaa
मगर जो लोग किसी ऐसी क़ौम से जा मिलें कि तुममें और उनमें (सुलह का) एहद व पैमान हो चुका है या तुमसे जंग करने या अपनी क़ौम के साथ लड़ने से दिलतंग होकर तुम्हारे पास आए हों (तो उन्हें आज़ार न पहुंचाओ) और अगर ख़ुदा चाहता तो उनको तुमपर ग़लबा देता तो वह तुमसे ज़रूर लड़ पड़ते पस अगर वह तुमसे किनारा कशी करे और तुमसे न लड़े और तुम्हारे पास सुलाह का पैग़ाम दे तो तुम्हारे लिए उन लोगों पर आज़ार पहुंचाने की ख़ुदा ने कोई सबील नहीं निकाली
Satajidoona aakhareena yureedoona ai yaamanookum wa yaamanoo qawmahum kullamaa ruddooo ilal itnati urkisoo feehaa; fa il lam ya'tazilookum wa yulqooo ilai kumus salama wa yakuffooo aidiyahum fakhuzoohum waqtuloohum haisu saqif tumoohum; wa ulaaa'ikum ja'alnaa lakum 'alaihim sultaanam mubeenaa
अनक़रीब तुम कुछ ऐसे और लोगों को भी पाओगे जो चाहते हैं कि तुमसे भी अमन में रहें और अपनी क़ौम से भी अमन में रहें (मगर) जब कभी झगड़े की तरफ़ बुलाए गए तो उसमें औंधे मुंह के बल गिर पड़े पस अगर वह तुमसे न किनारा कशी करें और न तुम्हें सुलह का पैग़ाम दें और न लड़ाई से अपने हाथ रोकें पस उनको पकड़ों और जहॉ पाओ उनको क़त्ल करो और यही वह लोग हैं जिनपर हमने तुम्हें सरीही ग़लबा अता फ़रमाया
Wa maa kaana limu'minin ai yaqtula mu'minan illaa khata'aa; waman qatala mu'minan khata'an fatabreeru raqabatim mu'minatinw wa diyatum mmusallamatun ilaaa ahliheee illaaa ai yassaddaqoo; fa in kaana min qawmin 'aduwwil lakum wa huwa mu'minun fatabreeru raqabatim mu'minah; wa in kaana min qawmim bainakum wa bainahum meesaaqun fadiyatum mmusallamatun ilaaa ahlihee wa tahreeru raqabatim mu'minatin famal lam yajid fa Siyaamu shahraini mutataabi'aini tawhatam minal laah; wa kaanal laahu 'Aleeman hakeemaa
और किसी ईमानदार को ये जायज़ नहीं कि किसी मोमिन को जान से मार डाले मगर धोखे से (क़त्ल किया हो तो दूसरी बात है) और जो शख्स किसी मोमिन को धोखे से (भी) मार डाले तो (उसपर) एक ईमानदार गुलाम का आज़ाद करना और मक़तूल के क़राबतदारों को खूंन बहा देना (लाज़िम) है मगर जब वह लोग माफ़ करें फिर अगर मक़तूल उन लोगों में से हो वह जो तुम्हारे दुशमन (काफ़िर हरबी) हैं और ख़ुद क़ातिल मोमिन है तो (सिर्फ) एक मुसलमान ग़ुलाम का आज़ाद करना और अगर मक़तूल उन (काफ़िर) लोगों में का हो जिनसे तुम से एहद व पैमान हो चुका है तो (क़ातिल पर) वारिसे मक़तूल को ख़ून बहा देना और एक बन्दए मोमिन का आज़ाद करना (वाजिब) है फ़िर जो शख्स (ग़ुलाम आज़ाद करने को) न पाये तो उसका कुफ्फ़ारा ख़ुदा की तरफ़ से लगातार दो महीने के रोज़े हैं और ख़ुदा ख़ूब वाकिफ़कार (और) हिकमत वाला है
Wa mai yaqtul mu'minammuta 'ammidan fajazaaa'uhoo Jahannamu khaalidan feehaa wa ghadibal laahu' alaihi wa la'anahoo wa a'adda lahoo 'azaaban 'azeemaa
और जो शख्स किसी मोमिन को जानबूझ के मार डाले (ग़ुलाम की आज़ादी वगैरह उसका कुफ्फ़ारा नहीं बल्कि) उसकी सज़ा दोज़क है और वह उसमें हमेशा रहेगा उसपर ख़ुदा ने (अपना) ग़ज़ब ढाया है और उसपर लानत की है और उसके लिए बड़ा सख्त अज़ाब तैयार कर रखा है
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo izaa darabtum fee sabeelil laahi fatabaiyanoo wa laa taqooloo liman alqaaa ilaikumus salaama lasta mu'minan tabtaghoona 'aradal hayaatid dunyaa fa'indal laahi maghaanimu kaseerah; kazaalika kuntum min qablu famannnal laahu 'alaikum fatabaiyanoo; innallaaha kaana bimaa ta'maloona Khabeeraa
ऐ ईमानदारों जब तुम ख़ुदा की राह में (जेहाद करने को) सफ़र करो तो (किसी के क़त्ल करने में जल्दी न करो बल्कि) अच्छी तरह जॉच कर लिया करो और जो शख्स (इज़हारे इस्लाम की ग़रज़ से) तुम्हे सलाम करे तो तुम बे सोचे समझे न कह दिया करो कि तू ईमानदार नहीं है (इससे ज़ाहिर होता है) कि तुम (फ़क्त) दुनियावी आसाइश की तमन्ना रखते हो मगर इसी बहाने क़त्ल करके लूट लो और ये नहीं समझते कि (अगर यही है) तो ख़ुदा के यहॉ बहुत से ग़नीमतें हैं (मुसलमानों) पहले तुम ख़ुद भी तो ऐसे ही थे फिर ख़ुदा ने तुमपर एहसान किया (कि बेखटके मुसलमान हो गए) ग़रज़ ख़ूब छानबीन कर लिया करो बेशक ख़ुदा तुम्हारे हर काम से ख़बरदार है
Laa yastawil qaa'idoona Minal mu'mineena ghairu ulid darari walmujaahidoona fee sabeelil laahi bi amwaalihim wa anfusihim; faddalal laahul mujaahideena bi amwaalihim wa anfusihim; faddalal laahul mujaahideena bi am waalihim wa anfusihim 'alalqaa'ideena darajab; wa kullanw wa'adal laahul husnaa; wa faddalal laahul mujaahideena 'alal qaa'ideena ajran 'azeemaa
माज़ूर लोगों के सिवा जेहाद से मुंह छिपा के घर में बैठने वाले और ख़ुदा की राह में अपने जान व माल से जिहाद करने वाले हरगिज़ बराबर नहीं हो सकते (बल्कि) अपने जान व माल से जिहाद करने वालों को घर बैठे रहने वालें पर ख़ुदा ने दरजे के एतबार से बड़ी फ़ज़ीलत दी है (अगरचे) ख़ुदा ने सब ईमानदारों से (ख्वाह जिहाद करें या न करें) भलाई का वायदा कर लिया है मगर ग़ाज़ियों को खाना नशीनों पर अज़ीम सवाब के एतबार से ख़ुदा ने बड़ी फ़ज़ीलत दी है
Innal lazeena tawaffaa humul malaaa'ikatu zaalimeee anfusihim qaaloo feema kuntum qaaloo kunnaa mustad'afeena fil-ard; qaalooo alam takun ardul laahi waasi'atan fatuhaajiroo feehaa; fa ulaaa'ika maawaahum Jahannamu wa saaa'at maseeraa
बेशक जिन लोगों की क़ब्जे रूह फ़रिश्ते ने उस वक़त की है कि (दारूल हरब में पड़े) अपनी जानों पर ज़ुल्म कर रहे थे और फ़रिश्ते कब्जे रूह के बाद हैरत से कहते हैं तुम किस (हालत) ग़फ़लत में थे तो वह (माज़ेरत के लहजे में) कहते है कि हम तो रूए ज़मीन में बेकस थे तो फ़रिश्ते कहते हैं कि ख़ुदा की (ऐसी लम्बी चौड़ी) ज़मीन में इतनी सी गुन्जाइश न थी कि तुम (कहीं) हिजरत करके चले जाते पस ऐसे लोगों का ठिकाना जहन्नुम है और वह बुरा ठिकाना है
Wa mai yuhaajir fee sabeelil laahi yajid fil ardi mmuraaghaman kaseeranw wa sa'ah; wa mai yakhruj mim baitihee muhaajiran ilal laahi wa Rasoolihee summa yudrikhul mawtu faqad waqa'a ajruhoo 'alal laah; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheemaa
और जो शख्स ख़ुदा की राह में हिजरत करेगा तो वह रूए ज़मीन में बा फ़राग़त (चैन से रहने सहने के) बहुत से कुशादा मक़ाम पाएगा और जो शख्स अपने घर से जिलावतन होके ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ़ निकल ख़ड़ा हुआ फिर उसे (मंज़िले मक़सूद) तक पहुंचने से पहले मौत आ जाए तो ख़ुदा पर उसका सवाब लाज़िम हो गया और ख़ुदा तो बड़ा बख्श ने वाला मेहरबान है ही
Wa izaa darabtum fil ardi falaisa 'alaikum junaahun an taqsuroo minas Salaati in khiftum ai yaftinakumul lazeena kafarooo; innal kaafireena kaanoo lakum aduwwam mubeenaa
(मुसलमानों जब तुम रूए ज़मीन पर सफ़र करो) और तुमको इस अम्र का ख़ौफ़ हो कि कुफ्फ़ार (असनाए नमाज़ में) तुमसे फ़साद करेंगे तो उसमें तुम्हारे वास्ते कुछ मुज़ाएक़ा नहीं कि नमाज़ में कुछ कम कर दिया करो बेशक कुफ्फ़ार तो तुम्हारे ख़ुल्लम ख़ुल्ला दुश्मन हैं
Wa izaa kunta feehim fa aqamta lahumus Salaata faltaqum taaa'ifatum minhum ma'aka walyaakhuzooo aslihatahum fa izaa sajadoo fal yakoonoo minw waraaa'ikum waltaati taaa'ifatun ukhraa lam yusalloo falyusallo ma'aka walyaakhuzoo hizrahum wa aslihatahum; waddal lazeena kafaroo law taghfuloona 'anaslihatikum wa amti'atikum fa yameeloona 'alaikum mailatanw waahidah; wa laa junaaha 'alaikum in kaana bikum azam mimmatarin aw kuntum mmardaaa an tada'ooo aslihatakum wa khuzoo hizrakum; innal laaha a'adda lilkaafireena 'azaabam muheenaa
और (ऐ रसूल) तुम मुसलमानों में मौजूद हो और (लड़ाई हो रही हो) कि तुम उनको नमाज़ पढ़ाने लगो तो (दो गिरोह करके) एक को लड़ाई के वास्ते छोड़ दो (और) उनमें से एक जमाअत तुम्हारे साथ नमाज़ पढ़े और अपने हरबे तैयार अपने साथ लिए रहे फिर जब (पहली रकअत के) सजदे कर (दूसरी रकअत फुरादा पढ़) ले तो तुम्हारे पीछे पुश्त पनाह बनें और दूसरी जमाअत जो (लड़ रही थी और) जब तक नमाज़ नहीं पढ़ने पायी है और (तुम्हारी दूसरी रकअत में) तुम्हारे साथ नमाज़ पढ़े और अपनी हिफ़ाज़त की चीजे अौर अपने हथियार (नमाज़ में साथ) लिए रहे कुफ्फ़ार तो ये चाहते ही हैं कि काश अपने हथियारों और अपने साज़ व सामान से ज़रा भी ग़फ़लत करो तो एक बारगी सबके सब तुम पर टूट पड़ें हॉ अलबत्ता उसमें कुछ मुज़ाएक़ा नहीं कि (इत्तेफ़ाक़न) तुमको बारिश के सबब से कुछ तकलीफ़ पहुंचे या तुम बीमार हो तो अपने हथियार (नमाज़ में) उतार के रख दो और अपनी हिफ़ाज़त करते रहो और ख़ुदा ने तो काफ़िरों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है
Fa izaa qadaitumus Salaata fazkurul laaha qiyaamanw wa qu'oodanw wa 'alaa junoobikum; fa izat maanantum fa aqeemus Salaah; innas Salaata kaanat 'alal mu'mineena kitaabam mawqootaa
फिर जब तुम नमाज़ अदा कर चुको तो उठते बैठते लेटते (ग़रज़ हर हाल में) ख़ुदा को याद करो फिर जब तुम (दुश्मनों से) मुतमईन हो जाओ तो (अपने मअमूल) के मुताबिक़ नमाज़ पढ़ा करो क्योंकि नमाज़ तो ईमानदारों पर वक्त मुतय्यन करके फ़र्ज़ की गयी है
Wa laa tahinoo fibtighaaa'il qawmi in takoonoo taalamoona fa innahum yaalamoona kamaa taalamoona wa tarjoona minal laahi maa laa yarjoon; wa kaanal laahu 'Aleeman Hakeemaa
और (मुसलमानों) दुशमनों के पीछा करने में सुस्ती न करो अगर लड़ाई में तुमको तकलीफ़ पहुंचती है तो जैसी तुमको तकलीफ़ पहुंचती है उनको भी वैसी ही अज़ीयत होती है और (तुमको) ये भी (उम्मीद है कि) तुम ख़ुदा से वह वह उम्मीदें रखते हो जो (उनको) नसीब नहीं और ख़ुदा तो सबसे वाक़िफ़ (और) हिकमत वाला है
(ऐ रसूल) हमने तुमपर बरहक़ किताब इसलिए नाज़िल की है कि ख़ुदा ने तुम्हारी हिदायत की है उसी तरह लोगों के दरमियान फ़ैसला करो और ख्यानत करने वालों के तरफ़दार न बनो
और (ऐ रसूल) तुम (उन बदमाशों) की तरफ़ होकर (लोगों से) न लड़ो जो अपने ही (लोगों) से दग़ाबाज़ी करते हैं बेशक ख़ुदा ऐसे शख्स को दोस्त नहीं रखता जो दग़ाबाज़ गुनाहगार हो
Yastakhfoona minannaasi wa laa yastakh foona minal laahi wa huwa ma'ahum iz yubaiyitoona maa laa yardaa minal qawl; wa kaanal laahu bimaa ya'maloona muheetaa
लोगों से तो अपनी शरारत छुपाते हैं और (ख़ुदा से नहीं छुपा सकते) हालॉकि वह तो उस वक्त भी उनके साथ साथ है जब वह लोग रातों को (बैठकर) उन बातों के मशवरे करते हैं जिनसे ख़ुदा राज़ी नहीं और ख़ुदा तो उनकी सब करतूतों को (इल्म के अहाते में) घेरे हुए है
haaa antum haaa'ulaaa'i jaadaltum 'anhum fil hayaatid dunyaa famai yujaadilul laaha 'anhum Yawmal Qiyaamati am mai yakoonu 'alaihim wakeelaa
(मुसलमानों) ख़बरदार हो जाओ भला दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में तो तुम उनकी तरफ़ होकर लड़ने खडे हो गए (मगर ये तो बताओ) फिर क़यामत के दिन उनका तरफ़दार बनकर ख़ुदा से कौन लड़ेगा या कौन उनका वकील होगा
Wa law laa fadlul laahi 'alaika wa rahmatuhoo lahammat taaa'ifatum minhum ai yudillooka wa maa yudilloona illaaa anfusahum wa maa yadurroonaka min shai'; wa anzalal laahu 'alaikal Kitaaba wal Hikmata wa 'allamaka maa lam takun ta'lam; wa kaana fadlul laahi 'alaika 'azeemaa
और (ऐ रसूल) अगर तुमपर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो उन (बदमाशों) में से एक गिरोह तुमको गुमराह करने का ज़रूर क़सद करता हालॉकि वह लोग बस अपने आप को गुमराह कर रहे हैं और यह लोग तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुंचा सकते और ख़ुदा ही ने तो (मेहरबानी की कि) तुमपर अपनी किताब और हिकमत नाज़िल की और जो बातें तुम नहीं जानते थे तुम्हें सिखा दी और तुम पर तो ख़ुदा का बड़ा फ़ज़ल है
laa khaira fee kaseerim min najwaahum illaa man amara bisadaqatin aw ma'roofin aw islaahim bainan naas; wa mai yaf'al zaalikab tighaaa'a mardaatil laahi fa sawfa nu'teehi ajran 'azeemaa
(ऐ रसूल) उनके राज़ की बातों में अक्सर में भलाई (का तो नाम तक) नहीं मगर (हॉ) जो शख्स किसी को सदक़ा देने या अच्छे काम करे या लोगों के दरमियान मेल मिलाप कराने का हुक्म दे (तो अलबत्ता एक बात है) और जो शख्स (महज़) ख़ुदा की ख़ुशनूदी की ख्वाहिश में ऐसे काम करेगा तो हम अनक़रीब ही उसे बड़ा अच्छा बदला अता फरमाएंगे
Wa mai yushaaqiqir Rasoola mim ba'di maa tabaiyana lahul hudaa wa tattabi' ghaira sabeelil mu'mineena nuwallihee ma tawallaa wa nuslihee Jahannama wa saaa'at maseeraa
और जो शख्स राहे रास्त के ज़ाहिर होने के बाद रसूल से सरकशी करे और मोमिनीन के तरीक़े के सिवा किसी और राह पर चले तो जिधर वह फिर गया है हम भी उधर ही फेर देंगे और (आख़िर) उसे जहन्नुम में झोंक देंगे और वह तो बहुत ही बुरा ठिकाना
Innal laaha laa yaghfiru ai yushraka bihee wayaghfiru maa doona zaalika limai yashaaa'; wa mai yushrik billaahi faqad dalla dalaalam ba'eedaa
ख़ुदा बेशक उसको तो नहीं बख्शता कि उसका कोई और शरीक बनाया जाए हॉ उसके सिवा जो गुनाह हो जिसको चाहे बख्श दे और (माज़ अल्लाह) जिसने किसी को ख़ुदा का शरीक बनाया तो वह बस भटक के बहुत दूर जा पड़ा
Wa la udillannahum wa la umanni yannnahum wa la aamurannahum fala yubat tikunna aazaanal lan'aami wa la aamurannahum fala yughai yirunna khalqal laah; wa mai yattakhizish Shaitaana waliyyam mmin doonil laahi faqad khasira khusraanam mubeena
और फिर उन्हें ज़रूर गुमराह करूंगा और उन्हें बड़ी बड़ी उम्मीदें भी ज़रूर दिलाऊंगा और यक़ीनन उन्हें सिखा दूंगा फिर वो (बुतों के वास्ते) जानवरों के काम ज़रूर चीर फाड़ करेंगे और अलबत्ता उनसे कह दूंगा बस फिर वो (मेरी तालीम के मुवाफ़िक़) ख़ुदा की बनाई हुई सूरत को ज़रूर बदल डालेंगे और (ये याद रहे कि) जिसने ख़ुदा को छोड़कर शैतान को अपना सरपरस्त बनाया तो उसने खुल्लम खुल्ला सख्त घाटा उठाया
Wallazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati sanud khiluhum Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaaa abadaa; wa'dal laahi haqqaa; wa man asdaqu minal laahi qeelaa
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें हम अनक़रीब ही (बेहिश्त के) उन (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुंचाएगें जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग उसमें हमेशा आबादुल आबाद तक रहेंगे (ये उनसे) ख़ुदा का पक्का वायदा है और ख़ुदा से ज्यादा (अपनी) बात में सच्चा कौन होगा
Laisa bi amaaniyyikum wa laaa amaaniyyi Ahlil Kitaab; mai ya'mal sooo'ai yujza bihee wa laa yajid lahoo min doonil laahi waliyanw wa laa naseeraa
न तुम लोगों की आरज़ू से (कुछ काम चल सकता है) न अहले किताब की तमन्ना से कुछ हासिल हो सकता है बल्कि (जैसा काम वैसा दाम) जो बुरा काम करेगा उसे उसका बदला दिया जाएगा और फिर ख़ुदा के सिवा किसी को न तो अपना सरपरस्त पाएगा और न मददगार
Wa mai ya'mal minas saalihaati min zakarin aw unsaa wa huwa mu'minun fa ulaaa'ika yadkhuloonal Jannata wa laa yuzlamoona naqeeraa
और जो शख्स अच्छे अच्छे काम करेगा (ख्वाह) मर्द हो या औरत और ईमानदार (भी) हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में (बेखटके) जा पहुंचेंगे और उनपर तिल भी ज़ुल्म न किया जाएगा
Wa man ahsanu deenam mimmman aslama wajhahoo lillaahi wa huwa muhsinunw wattaba'a Millata Ibraaheema haneefaa; wattakhazal laahu Ibraaheema khaleelaa
और उस शख्स से दीन में बेहतर कौन होगा जिसने ख़ुदा के सामने अपना सरे तसलीम झुका दिया और नेको कार भी है और इबराहीम के तरीके पर चलता है जो बातिल से कतरा कर चलते थे और ख़ुदा ने इब्राहिम को तो अपना ख़लिस दोस्त बना लिया
Wa yastaftoonaka finnisaaa'i qulil laahu yufteekum feehinna wa maa yutlaa 'alaikum fil Kitaabi fee yataaman nisaaa'il laatee laa tu'toonahunna mmaa kutiba lahunnna wa targhaboona an tankihoohunna wal mustad'a feena minal wildaani wa an taqoomoo lilyataamaa bilqist; wa maa taf'aloo min khairin fa innal laaha kaana bihee 'Aleemaa
(ऐ रसूल) ये लोग तुमसे (यतीम लड़कियों) से निकाह के बारे में फ़तवा तलब करते हैं तुम उनसे कह दो कि ख़ुदा तुम्हें उनसे (निकाह करने) की इजाज़त देता है और जो हुक्म मनाही का कुरान में तुम्हें (पहले) सुनाया जा चुका है वह हक़ीक़तन उन यतीम लड़कियों के वास्ते था जिन्हें तुम उनका मुअय्यन किया हुआ हक़ नहीं देते और चाहते हो (कि यूं ही) उनसे निकाह कर लो और उन कमज़ोर नातवॉ (कमजोर) बच्चों के बारे में हुक्म फ़रमाता है और (वो) ये है कि तुम यतीमों के हुक़ूक़ के बारे में इन्साफ पर क़ायम रहो और (यक़ीन रखो कि) जो कुछ तुम नेकी करोगे तो ख़ुदा ज़रूर वाक़िफ़कार है
Wa inimra atun khaafat mim ba'lihaa nushoozan aw i'raadan falaa junaaha 'alaihi maaa ai yuslihaa bainahumaa sulhaa; wassulhu khair; wa uhdiratil anfusush shuhh; wa in tuhsinoo wa tattaqoo fa innal laaha kaana bimaa ta'maloona Khabeeraa
और अगर कोई औरत अपने शौहर की ज्यादती व बेतवज्जोही से (तलाक़ का) ख़ौफ़ रखती हो तो मियॉ बीवी के बाहम किसी तरह मिलाप कर लेने में दोनों (में से किसी पर) कुछ गुनाह नहीं है और सुलह तो (बहरहाल) बेहतर है और बुख्ल से तो क़रीब क़रीब हर तबियत के हम पहलू है और अगर तुम नेकी करो और परहेजदारी करो तो ख़ुदा तुम्हारे हर काम से ख़बरदार है (वही तुमको अज्र देगा)
Wa lan tastatee'ooo an ta'diloo bainan nisaaa'i wa law harastum falaa tameeloo kullal maili fatazaroohaa kalmu'al laqah; wa in tuslihoo wa tattaqoo fa innal laaha kaana Ghafoorar Raheema
और अगरचे तुम बहुतेरा चाहो (लेकिन) तुममें इतनी सकत तो हरगिज़ नहीं है कि अपनी कई बीवियों में (पूरा पूरा) इन्साफ़ कर सको (मगर) ऐसा भी तो न करो कि (एक ही की तरफ़) हमातन माएल हो जाओ कि (दूसरी को अधड़ में) लटकी हुई छोड़ दो और अगर बाहम मेल कर लो और (ज्यादती से) बचे रहो तो ख़ुदा यक़ीनन बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
Wa iny-yatafarraqaa yughnil laahu kullam min sa'atih; wa kaanal laahu Waasi'an Hakeemaa
और अगर दोनों मियॉ बीवी एक दूसरे से बाज़रिए तलाक़ जुदा हो जाएं तो ख़ुदा अपने वसी ख़ज़ाने से (फ़रागुल बाली अता फ़रमाकर) दोनों को (एक दूसरे से) बेनियाज़ कर देगा और ख़ुदा तो बड़ी गुन्जाइश और तदबीर वाला है और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ुदा ही का है
Wa lillaahi maafis samaawaati wa maa fil ard; wa laqad wassainal lazeena ootul Kitaaba min qablikum wa iyyaakum anit taqul laah; wa intakfuroo fa inna lillaahi maa fis samaawaati wa maa fil ard; wa kaanal laahu Ghaniyyan hameedaa
और जिन लोगों को तुमसे पहले किताबे ख़ुदा अता की गयी है उनको और तुमको भी उसकी हमने वसीयत की थी कि (ख़ुदा) (की नाफ़रमानी) से डरते रहो और अगर (कहीं) तुमने कुफ़्र इख्तेयार किया तो (याद रहे कि) जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ुदा ही का है (जो चाहे कर सकता है) और ख़ुदा तो सबसे बेपरवा और (हमा सिफ़त) मौसूफ़ हर हम्द वाला है
man kaana yureedu sawaabad dunyaa fa'indallaahi sawaabud dunyaa wal Aakhirah; wa kaanal laahu Samee'am Baseeraa
और जो शख्स (अपने आमाल का) बदला दुनिया ही में चाहता है तो ख़ुदा के पास दुनिया व आख़िरत दोनों का अज्र मौजूद है और ख़ुदा तो हर शख्स की सुनता और सबको देखता है
Yaa aiyuhal lazeena aamanoo koonoo qawwa ameena bilqisti shuhadaaa'a lillaahi wa law 'alaa anfusikum awil waalidaini wal aqrabeen iny yakun ghaniyyan aw faqeeran fallaahu awlaa bihimaa falaaa tattabi'ul hawaaa an ta'diloo; wa in talwooo aw tu'ridoo fa innal laaha kaana bimaa ta'maloona Khabeera
ऐ ईमानवालों मज़बूती के साथ इन्साफ़ पर क़ायम रहो और ख़ुदा के लये गवाही दो अगरचे (ये गवाही) ख़ुद तुम्हारे या तुम्हारे मॉ बाप या क़राबतदारों के लिए खिलाफ़ (ही क्यो) न हो ख्वाह मालदार हो या मोहताज (क्योंकि) ख़ुदा तो (तुम्हारी बनिस्बत) उनपर ज्यादा मेहरबान है तो तुम (हक़ से) कतराने में ख्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी न करो और अगर घुमा फिरा के गवाही दोगे या बिल्कुल इन्कार करोगे तो (याद रहे जैसी करनी वैसी भरनी क्योंकि) जो कुछ तुम करते हो ख़ुद उससे ख़ूब वाक़िफ़ है
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo aaminoo billaahi wa Rasoolihee wal Kitaabil lazee nazzala 'alaa Rasoolihee wal Kitaabil lazeee anzala min qabl; wa mai yakfur billaahi wa Malaaa'ikatihee wa Kutubihee wa Rusulihee wal Yawmil Aakhiri faqad dalla dalaalam ba'eedaa
ऐ ईमानवालों ख़ुदा और उसके रसूल (मोहम्मद) पर और उसकी किताब पर जो उसने अपने रसूल (मोहम्मद) पर नाज़िल की है और उस किताब पर जो उसने पहले नाज़िल की ईमान लाओ और (ये भी याद रहे कि) जो शख्स ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों और रोज़े आख़िरत का मुन्किर हुआ तो वह राहे रास्त से भटक के जूर जा पड़ा
Innal lazeena aamanoo summa kafaroo summa aamanoo summa kafaroo summaz daado kufral lam yakunil laahu liyaghfira lahum wa laa liyahdiyahum sabeelaa
बेशक जो लोग ईमान लाए उसके बाद फ़िर काफ़िर हो गए फिर ईमान लाए और फिर उसके बाद काफ़िर हो गये और कुफ़्र में बढ़ते चले गए तो ख़ुदा उनकी मग़फ़िरत करेगा और न उन्हें राहे रास्त की हिदायत ही करेगा
Wa qad nazzala 'alaikum fil Kitaabi an izaa sami'tum Aayaatil laahi yukfaru bihaa wa yustahza u bihaa falaa taq'udoo ma'ahum hattaa yakhoodoo fee hadeesin ghairih; innakum izam misluhum; innal laaha jaami'ul munaafiqeena wal kaafireena fee jahannama jamee'aa
(मुसलमानों) हालॉकि ख़ुदा तुम पर अपनी किताब कुरान में ये हुक्म नाज़िल कर चुका है कि जब तुम सुन लो कि ख़ुदा की आयतों से ईन्कार किया जाता है और उससे मसख़रापन किया जाता है तो तुम उन (कुफ्फ़ार) के साथ मत बैठो यहॉ तक कि वह किसी दूसरी बात में ग़ौर करने लगें वरना तुम भी उस वक्त उनके बराबर हो जाओगे उसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा तमाम मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों को (एक न एक दिन) जहन्नुम में जमा ही करेगा
Allazeena yatarab basoona bikum fa in kaana lakum fathum minal laahi qaalooo alam nakum ma'akum wa in kaana lilkaafireena naseebun qaalooo alam nastah wiz 'alaikum wa nammna'kum minal mu'mineen; fallaahu yahkumu bainakum Yawmal Qiyaamah; wa lai yaj'alal laahu lilkaafireena 'alal mu'mineena sabeelaa
(वो मुनाफ़ेकीन) जो तुम्हारे मुन्तज़िर है (कि देखिए फ़तेह होती है या शिकस्त) तो अगर ख़ुदा की तरफ़ से तुम्हें फ़तेह हुई तो कहने लगे कि क्या हम तुम्हारे साथ न थे और अगर (फ़तेह का) हिस्सा काफ़िरों को मिला तो (काफ़िरों के तरफ़दार बनकर) कहते हैं क्या हम तुमपर ग़ालिब न आ गए थे (मगर क़सदन तुमको छोड़ दिया) और तुमको मोमिनीन (के हाथों) से हमने बचाया नहीं था (मुनाफ़िक़ों) क़यामत के दिन तो ख़ुदा तुम्हारे दरमियान फैसला करेगा और ख़ुदा ने काफ़िरों को मोमिनीन पर वर (ऊँचा) रहने की हरगिज़ कोई राह नहीं क़रार दी है
Innal munaafiqeena yukhaadi'oonal laaha wa huwa khaadi'uhum wa izaa qaamooo ilas Salaati qaamoo kusaalaa yuraaa'oonan naasa wa laa yazkuroonal laaha illaa qaleelaa
बेशक मुनाफ़िक़ीन (अपने ख्याल में) ख़ुदा को फरेब देते हैं हालॉकि ख़ुदा ख़ुद उन्हें धोखा देता है और ये लोग जब नमाज़ पढ़ने खड़े होते हैं तो (बे दिल से) अलकसाए हुए खड़े होते हैं और सिर्फ लोगों को दिखाते हैं और दिल से तो ख़ुदा को कुछ यूं ही सा याद करते हैं
Muzabzabeena baina zaalika laaa ilaa haaa' ulaaa'i wa laaa ilaa haaa'ulaaa'; wa mai yudlilil laahu falan tajida lahoo sabeela
इस कुफ़्र व ईमान के बीच अधड़ में पड़े झूल रहे हैं न उन (मुसलमानों) की तरफ़ न उन काफ़िरों की तरफ़ और (ऐ रसूल) जिसे ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे उसकी (हिदायत की) तुम हरगिज़ सबील नहीं कर सकते
Illal lazeena taaboo wa aslahoo wa'tasamoo billaahi wa akhlasoo deenahum lillaahi faulaaa'ika ma'al mu'mineena wa sawfa yu'til laahul mu'mineena ajran 'azeemaa
मगर (हॉ) जिन लोगों ने (निफ़ाक़ से) तौबा कर ली और अपनी हालत दुरूस्त कर ली और ख़ुदा से लगे लिपटे रहे और अपने दीन को महज़ ख़ुदा के वास्ते निरा खरा कर लिया तो ये लोग मोमिनीन के साथ (बेहिश्त में) होंगे और मोमिनीन को ख़ुदा अनक़रीब ही बड़ा (अच्छा) बदला अता फ़रमाएगा
Innal lazeena yakkfuroona billaahi wa Rusulihee wa yureedoona ai yufarriqoo bainal laahi wa Rusulihee wa yaqooloona nu'minu biba'dinw wa nakfuru biba' dinw wa yureedoona ai yattakhizoo baina zaalika sabeelaa
बेशक जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों से इन्कार करते हैं और ख़ुदा और उसके रसूलों में तफ़रक़ा डालना चाहते हैं और कहते हैं कि हम बाज़ (पैग़म्बरों) पर ईमान लाए हैं और बाज़ का इन्कार करते हैं और चाहते हैं कि इस (कुफ़्र व ईमान) के दरमियान एक दूसरी राह निकलें
Wallazeena aamanoo billaahi wa Rusulihee wa lam yufarriqoo baina ahadim minhum ulaaa'ika sawfa yu'teehim ujoorahum; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheema
और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए और उनमें से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते तो ऐसे ही लोगों को ख़ुदा बहुत जल्द उनका अज्र अता फ़रमाएगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
yas'aluka Ahlul Kitaabi an tunazzila 'alaihim Kitaabam minas samaaa'i faqad sa aloo Moosaa akbara min zaalika faqaaloo arinal laaha jahratan fa akhazat humus saa'iqatu bizulmihim; summat takhazul 'ijla mim ba'di maa jaa'at humul baiyinaatu fa'afawnaa 'ann zaalik; wa aatainaa Moosaa sultaanam mubeenaa
(ऐ रसूल) अहले किताब (यहूदी) जो तुमसे (ये) दरख्वास्त करते हैं कि तुम उनपर एक किताब आसमान से उतरवा दो (तुम उसका ख्याल न करो क्योंकि) ये लोग मूसा से तो इससे कहीं बढ़ (बढ़) के दरख्वास्त कर चुके हैं चुनान्चे कहने लगे कि हमें ख़ुदा को खुल्लम खुल्ला दिखा दो तब उनकी शरारत की वजह से बिजली ने ले डाला फिर (बावजूद के) उन लोगों के पास तौहीद की वाजैए और रौशन (दलीलें) आ चुकी थी उसके बाद भी उन लोगों ने बछड़े को (ख़ुदा) बना लिया फिर हमने उससे भी दरगुज़र किया और मूसा को हमने सरीही ग़लबा अता किया
Wa rafa'naa fawqahumut Toora bimeesaaqihim wa qulnaa lahumud khulul baaba sujjadanw wa qulnaa lahum laa ta'doo fis Sabti wa akhaznaa minhum meesaaqan ghaleezaa
और हमने उनके एहद व पैमान की वजह से उनके (सर) पर (कोहे) तूर को लटका दिया और हमने उनसे कहा कि (शहर के) दरवाज़े में सजदा करते हुए दाख़िल हो और हमने (ये भी) कहा कि तुम हफ्ते के दिन (हमारे हुक्म से) तजावुज़ न करना और हमने उनसे बहुत मज़बूत एहदो पैमान ले लिया
Fabimaa naqdihim meesaaqahum wa kufrihim bi Aayaatil laahi wa qatlihimul Ambiyaaa'a bighairi haqqinw wa qawlihim quloobunna ghulf; bal taba'al laahu 'alaihaa bikufrihim falaa yu'minoona illaa qaleelaa
फिर उनके अपने एहद तोड़ डालने और एहकामे ख़ुदा से इन्कार करने और नाहक़ अम्बिया को क़त्ल करने और इतरा कर ये कहने की वजह से कि हमारे दिलों पर ग़िलाफ़ चढे हुए हैं (ये तो नहीं) बल्कि ख़ुदा ने उनके कुफ़्र की वजह से उनके दिलों पर मोहर कर दी है तो चन्द आदमियों के सिवा ये लोग ईमान नहीं लाते
Wa qawlihim innaa qatal nal maseeha 'Eesab-na-Maryama Rasoolal laahi wa maa qataloohu wa maa salaboohu wa laakin shubbiha lahum; wa innal lazeenakh talafoo fee lafee shakkim minh; maa lahum bihee min 'ilmin illat tibaa'az zann; wa maa qataloohu yaqeenaa
और उनके यह कहने की वजह से कि हमने मरियम के बेटे ईसा (स.) ख़ुदा के रसूल को क़त्ल कर डाला हालॉकि न तो उन लोगों ने उसे क़त्ल ही किया न सूली ही दी उनके लिए (एक दूसरा शख्स ईसा) से मुशाबेह कर दिया गया और जो लोग इस बारे में इख्तेलाफ़ करते हैं यक़ीनन वह लोग (उसके हालत) की तरफ़ से धोखे में (आ पड़े) हैं उनको उस (वाक़िये) की ख़बर ही नहीं मगर फ़क्त अटकल के पीछे (पड़े) हैं और ईसा को उन लोगों ने यक़ीनन क़त्ल नहीं किया
Wa im min Ahlil Kitaabi illaa layu'minanna bihee qabla mawtihee wa Yawmal Qiyaamati yakoonu 'alaihim shaheedaa
और (जब ईसा मेहदी मौऊद के ज़हूर के वक्त आसमान से उतरेंगे तो) अहले किताब में से कोई शख्स ऐसा न होगा जो उनपर उनके मरने के क़ब्ल ईमान न लाए और ख़ुद ईसा क़यामत के दिन उनके ख़िलाफ़ गवाही देंगे
ग़रज़ यहूदियों की (उन सब) शरारतों और गुनाह की वजह से हमने उनपर वह साफ़ सुथरी चीजें ज़ो उनके लिए हलाल की गयी थीं हराम कर दी और उनके ख़ुदा की राह से बहुत से लोगों को रोकने कि वजह से भी
Wa akhzihimur ribaa wa qad nuhoo 'anhu wa aklihim amwaalan naasi bilbaatil; wa a'tadnaa lilkaafireena minhum 'azaaban aleema
और बावजूद मुमानिअत सूद खा लेने और नाहक़ ज़बरदस्ती लोगों के माल खाने की वजह से उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनके वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
लेकिन (ऐ रसूल) उनमें से जो लोग इल्म (दीन) में बड़े मज़बूत पाए पर फ़ायज़ हैं वह और ईमान वाले तो जो (किताब) तुमपर नाज़िल हुई है (सब पर ईमान रखते हैं) और से नमाज़ पढ़ते हैं और ज़कात अदा करते हैं और ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं ऐसे ही लोगों को हम अनक़रीब बहुत बड़ा अज्र अता फ़रमाएंगे
innaaa awhainaaa ilaika kamaaa awhainaaa ilaa Noohinw wan nabiyyeena mim ba'dih; wa awhainaaa ilaaa ibraaheema wa Ismaaa'eela wa Ishaaqa wa Ya'qooba wal Asbaati wa 'Eesaa wa Ayyooba wa Yoonusa wa haaroona wa Sulaimaan; wa aatainaa Daawooda Zabooraa
(ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (भी) तो इसी तरह 'वही' भेजी जिस तरह नूह और उसके बाद वाले पैग़म्बरों पर भेजी थी और जिस तरह इबराहीम और इस्माइल और इसहाक़ और याक़ूब और औलादे याक़ूब व ईसा व अय्यूब व युनुस व हारून व सुलेमान के पास 'वही' भेजी थी और हमने दाऊद को ज़ुबूर अता की
Rusulam mubashshireena wa munzireena li'allaa yakoona linnaasi 'alal laahi hujjatum ba'dar Rusul; wa kaanallaahu 'Azeezan Hakeema
और हमने नेक लोगों को बेहिश्त की ख़ुशख़बरी देने वाले और बुरे लोगों को अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बर (भेजे) ताकि पैग़म्बरों के आने के बाद लोगों की ख़ुदा पर कोई हुज्जत बाक़ी न रह जाए और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त हकीम है (ये कुफ्फ़ार नहीं मानते न मानें)
मगर ख़ुदा तो इस पर गवाही देता है जो कुछ तुम पर नाज़िल किया है ख़ूब समझ बूझ कर नाज़िल किया है (बल्कि) उसकी गवाही तो फ़रिश्ते तक देते हैं हालॉकि ख़ुदा गवाही के लिए काफ़ी है
Yaaa aiyuhan naasu qad jaaa'akumur Rasoolu bilhaqqi mir Rabbikum fa ammminoo khairal lakum; wa in takfuroo fainnna lillaahi maa fis samaawaati wal ard; wa kaanal laahu 'Aleemann hakeemaa
ऐ लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से रसूल (मोहम्मद) दीने हक़ के साथ आ चुके हैं ईमान लाओ (यही) तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अगर इन्कार करोगे तो (समझ रखो कि) जो कुछ ज़मीन और आसमानों में है सब ख़ुदा ही का है और ख़ुदा बड़ा वाक़िफ़कार हकीम है
Yaaa Ahlal Kitaabi laa taghloo fee deenikum wa laa taqooloo 'alal laahi illalhaqq; innamal Maseehu 'Eesab-nu-Maryamma Rasoolul laahi wa Kalimatuhooo alqaahaaa ilaa Maryamma wa roohum minhum fa aaminoo billaahi wa Rusulihee wa laa taqooloo salaasah; intahoo khairallakum; innamal laahu Ilaahunw Waahid, Subhaanahooo ani yakoona lahoo walad; lahoo maa fissamaawaati wa maa fil ard; wa kafaa billaahi Wakeelaa
ऐ अहले किताब अपने दीन में हद (एतदाल) से तजावुज़ न करो और ख़ुदा की शान में सच के सिवा (कोई दूसरी बात) न कहो मरियम के बेटे ईसा मसीह (न ख़ुदा थे न ख़ुदा के बेटे) पस ख़ुदा के एक रसूल और उसके कलमे (हुक्म) थे जिसे ख़ुदा ने मरियम के पास भेज दिया था (कि हामला हो जा) और ख़ुदा की तरफ़ से एक जान थे पस ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और तीन (ख़ुदा) के क़ायल न बनो (तसलीस से) बाज़ रहो (और) अपनी भलाई (तौहीद) का क़सद करो अल्लाह तो बस यकता माबूद है वह उस (नुक्स) से पाक व पाकीज़ा है उसका कोई लड़का हो (उसे लड़के की हाजत ही क्या है) जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब तो उसी का है और ख़ुदा तो कारसाज़ी में काफ़ी है
Lanny yastankifal Maseehu ai yakoona 'abdal lillaahi wa lal malaaa'ikatul muqarraboon; wa mai yastankif 'an ibaadatihee wa yastakbir fasa yahshuruhum ilaihi jamee'aa
न तो मसीह ही ख़ुदा का बन्दा होने से हरगिज़ इन्कार कर सकते हैं और न (ख़ुदा के) मुक़र्रर फ़रिश्ते और (याद रहे) जो शख्स उसके बन्दा होने से इन्कार करेगा और शेख़ी करेगा तो अनक़रीब ही ख़ुदा उन सबको अपनी तरफ़ उठा लेगा (और हर एक को उसके काम की सज़ा देगा)
Fa ammal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati fa yuwaffeehim ujoorahum wa yazeeduhum min fadlihee wa ammal lazeenas tankafoo wastakbaroo fa yu'azzibuhum 'azaaban aleemanw wa laa yajidoona lahum min doonil laahi waliyyanw wa laa naseeraa
पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया है और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उनका उन्हें सवाब पूरा पूरा भर देगा बल्कि अपने फ़ज़ल (व करम) से कुछ और ज्यादा ही देगा और लोग उसका बन्दा होने से इन्कार करते थे और शेख़ी करते थे उन्हें तो दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला करेगा और लुत्फ़ ये है कि वह लोग ख़ुदा के सिवा न अपना सरपरस्त ही पाएंगे और न मददगार
Fa ammal lazeena aamanoo billaahi wa'tasamoo bihee fasa yudkhiluhum fee rah matim minhu wa fadlinw wa yahdeehim ilaihi Siraatam Mustaqeema
पस जो लोग ख़ुदा पर ईमान लाए और उसी से लगे लिपटे रहे तो ख़ुदा भी उन्हें अनक़रीब ही अपनी रहमत व फ़ज़ल के सादाब बाग़ो में पहुंचा देगा और उन्हे अपने हुज़ूरी का सीधा रास्ता दिखा देगा 175
Yastaftoonaka qulillaahu yafteekum fil kalaalah; inimru'un halaka laisa lahoo waladunw wa lahoo ukhtun falahaa nisfu maa tarak; wa huwa yarisuhaaa il lam yakkul lahaa walad; fa in kaanatas nataini falahumas sulusaani mimmmaa tarak; wa in kaanooo ikhwatar rijaalanw wa nisaaa'an faliz zakari mislu hazzil unsayayn; yubaiyinullaahu lakum an tadilloo; wallaahu bikulli shai'in Aleem
(ऐ रसूल) तुमसे लोग फ़तवा तलब करते हैं तुम कह दो कि कलाला (भाई बहन) के बारे में ख़ुदा तो ख़ुद तुम्हे फ़तवा देता है कि अगर कोई ऐसा शख्स मर जाए कि उसके न कोई लड़का बाला हो (न मॉ बाप) और उसके (सिर्फ) एक बहन हो तो उसका तर्के से आधा होगा (और अगर ये बहन मर जाए) और उसके कोई औलाद न हो (न मॉ बाप) तो उसका वारिस बस यही भाई होगा और अगर दो बहनें (ज्यादा) हों तो उनको (भाई के) तर्के से दो तिहाई मिलेगा और अगर किसी के वारिस भाई बहन दोनों (मिले जुले) हों तो मर्द को औरत के हिस्से का दुगना मिलेगा तुम लोगों के भटकने के ख्याल से ख़ुदा अपने एहकाम वाजेए करके बयान फ़रमाता है और ख़ुदा तो हर चीज़ से वाक़िफ़ है