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غُفْرَانَكَ
ऐ अल्लाह! मैं तेरी बख़्शिश् मांगता हूं।) (1) .................. (1) नसाई की 'अमलुल-यौमे वल-लैला' हदीस संख्याः79، अबू-दाऊद हदीस संख्याः30, तिर्मिज़ी हदीस संख्याः7, इब्ने माजा، हदीस संख्याः300, और, शौख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ सुनन अबू दाऊदः1/19 में सह़ीह़ कहा है।
स्रोत: Abu Dawud, Ibn Majah, At-Tirmizi, An-Nasa'i, Al-Qayyim's Zadul-Ma'ad, 2/387.