Maa ja'alal laahu lirajulim min qalbaini fee jawfih; wa maa ja'ala azwaajakumul laaa'ee tuzaahiroona minhunna ummahaatikum; wa maa ja'ala ad'iyaaa'akum abnaaa'akum; zaalikum qawlukum bi afwaa hikum wallaahu yaqoolul haqqa wa Huwa yahdis sabeel
ख़ुदा ने किसी आदमी के सीने में दो दिल नहीं पैदा किये कि (एक ही वक्त दो इरादे कर सके) और न उसने तुम्हारी बीवियों को जिन से तुम जेहार करते हो तुम्हारी माएँ बना दी और न उसने तुम्हारे लिये पालकों को तुम्हारे बेटे बना दिये। ये तो फ़क़त तुम्हारी मुँह बोली बात (और ज़ुबानी जमा खर्च) है और (चाहे किसी को बुरी लगे या अच्छी) खुदा तो सच्ची कहता है और सीधी राह दिखाता है।
Ud'oohum li aabaaa'ihim huwa aqsatu 'indal laah; fa illam ta'lamooo aabaaa'ahum fa ikhwaanukum fid deeni wa mawaaleekum; wa laisa 'alaikum junaahun feemaaa akhtaatum bihee wa laakim maa ta'ammadat quloobukum; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheemaa
लिये पालकों का उनके (असली) बापों के नाम से पुकारा करो यही खुदा के नज़दीक बहुत ठीक है हाँ अगर तुम लोग उनके असली बापों को न जानते हो तो तुम्हारे दीनी भाई और दोस्त हैं (उन्हें भाई या दोस्त कहकर पुकारा करो) और हाँ इसमें भूल चूक जाओ तो अलबत्ता उसका तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं है मगर जब तुम दिल से जानबूझ कर करो (तो ज़रूर गुनाह है) और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है।
An-Nabiyyu awlaa bil mu'mineena min anfusihim wa azwaajuhoo ummahatuhum wa ulul arbaami ba'duhum awlaa biba'din fee Kitaabil laahi minal mu'meneena wal Muhaajireena illaaa an taf'alooo ilaaa awliyaaa'ikum ma'roofaa; kaana zaalika fil kitaabi mastooraa
नबी तो मोमिनीन से खुद उनकी जानों से भी बढ़कर हक़ रखते हैं (क्योंकि वह गोया उम्मत के मेहरबान बाप हैं) और उनकी बीवियाँ (गोया) उनकी माएँ हैं और मोमिनीन व मुहाजिरीन में से (जो लोग बाहम) क़राबतदार हैं। किताबें खुदा की रूह से (ग़ैरों की निस्बत) एक दूसरे के (तर्के के) ज्यादा हक़दार हैं मगर (जब) तुम अपने दोस्तों के साथ सुलूक करना चाहो (तो दूसरी बात है) ये तो किताबे (खुदा) में लिखा हुआ (मौजूद) है
Wa iz akhaznaa minan Nabiyyeena meesaaqahum wa minka wa min Noohinw wa Ibraaheema wa Moosaa wa Eesab-ni-Maryama wa akhaznaa minhum meesaaqan ghaleezaa
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने और पैग़म्बरों से और ख़ास तुमसे और नूह और इबराहीम और मूसा और मरियम के बेटे ईसा से एहदो पैमाने लिया और उन लोगों से हमने सख्त एहद लिया था
Yaaa aiyuhal lazeena aamanuz kuroo ni'matal laahi 'alaikum iz jaaa'atkm junoodun fa arsalnaa 'alaihim reehanw wa junoodal lam tarawhaa; wa kaanal laahu bimaa ta'maloona Baseera
(ऐ ईमानदारों खुदा की) उन नेअमतों को याद करो जो उसने तुम पर नाज़िल की हैं (जंगे खन्दक में) जब तुम पर (काफिरों का) लशकर (उमड़ के) आ पड़ा तो (हमने तुम्हारी मदद की) उन पर ऑंधी भेजी और (इसके अलावा फरिश्तों का ऐसा लश्कर भेजा) जिसको तुमने देखा तक नहीं और तुम जो कुछ कर रहे थे खुदा उसे खूब देख रहा था
Iz jaaa'ookum min fawqikum wa min asfala minkum wa iz zaaghatil absaaru wa balaghatil quloobul hanaajira wa tazunnoona billaahiz zunoonaa
जिस वक्त वह लोग तुम पर तुम्हारे ऊपर से आ पड़े और तुम्हारे नीचे की तरफ से भी पिल गए और जिस वक्त (उनकी कसरत से) तुम्हारी ऑंखें ख़ैरा हो गयीं थी और (ख़ौफ से) कलेजे मुँह को आ गए थे और ख़ुदा पर तरह-तरह के (बुरे) ख्याल करने लगे थे।
Wa iz yaqoolul munaafiqoona wallazeena fee quloobihim maradum maa wa'adanal laahu wa Rasooluhooo illaa ghurooraa
और जिस वक्त मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ्र का) मरज़ था कहने लगे थे कि खुदा ने और उसके रसूल ने जो हमसे वायदे किए थे वह बस बिल्कुल धोखे की टट्टी था।
Wa iz qaalat taaa'ifatum minhum yaaa ahla Yasriba laa muqaamaa lakum farji'oo; wa yastaazina fareequm minhumun Nabiyya yaqooloona inna buyootanaa 'awrah; wa maa hiya bi'awratin iny yureedoona illaa firaaraa
और अब उनमें का एक गिरोह कहने लगा था कि ऐ मदीने वालों अब (दुश्मन के मुक़ाबलें में ) तुम्हारे कहीं ठिकाना नहीं तो (बेहतर है कि अब भी) पलट चलो और उनमें से कुछ लोग रसूल से (घर लौट जाने की) इजाज़त माँगने लगे थे कि हमारे घर (मर्दों से) बिल्कुल ख़ाली (गैर महफूज़) पड़े हुए हैं - हालाँकि वह ख़ाली (ग़ैर महफूज़) न थे (बल्कि) वह लोग तो (इसी बहाने से) बस भागना चाहते हैं
Wa laqad kaanoo 'aahadul laaha min qablu laa yuwal loonal adbaar; wa kaana 'ahdul laahi mas'oolaa
और (उस वक्त) अपने घरों में भी बहुत कम तवक्क़ुफ़ करेंगे (मगर ये तो जिहाद है) हालाँकि उन लोगों ने पहले ही खुदा से एहद किया था कि हम दुश्मन के मुक़ाबले में (अपनी) पीठ न फेरेंगे और खुदा के एहद की पूछगछ तो (एक न एक दिन) होकर रहेगी
Qul lany y anfa'akumul firaaru in farartum minal mawti awil qatli wa izal laa tumatta'oona illaa qaleelaa
(ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अगर तुम मौत का क़त्ल (के ख़ौफ) से भागे भी तो (यह) भागना तुम्हें हरगिज़ कुछ भी मुफ़ीद न होगा और अगर तुम भागकर बच भी गए तो बस यही न की दुनिया में चन्द रोज़ा और चैनकर लो
Qul m an zal lazee ya'simukum minal laahi in araada bikum sooo'an aw araada bikum rahmah; wa laa yajidoona lahum min doonil laahi waliyyanw wa laa naseeraa
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि अगर खुदा तुम्हारे साथ बुराई का इरादा कर बैठे तो तुम्हें उसके (अज़ाब) से कौन ऐसा है जो बचाए या भलाई ही करना चाहे (तो कौन रोक सकता है) और ये लोग खुदा के सिवा न तो किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे और न मद्दगार
Qad ya'lamul laahul mu'awwiqeena minkum walqaaa'ileena li ikhwaanihim hahumma ilainaa, wa laa yaatoonal baasa illaa qaleelaa
तुममें से जो लोग (दूसरों को जिहाद से) रोकते हैं खुदा उनको खूब जानता है और (उनको भी खूब जानता है) जो अपने भाई बन्दों से कहते हैं कि हमारे पास चले भी आओ और खुद भी (फक़त पीछा छुड़ाने को लड़ाई के खेत) में बस एक ज़रा सा आकर तुमसे अपनी जान चुराई
Ashihhatan 'alaikum faizaa jaaa'al khawfu ra aytahum yanzuroona ilaika tadooru a'yunuhum kallazee yughshaa 'alaihi minal mawti fa izaa zahabal khawfu salqookum bi alsinatin hidaadin ashibbatan 'alal khayr; ulaaa'ika lam yu'minoo fa ahbatal laahu a'maalahum; wa kaana zaalika 'alal laahi yaseeraa
और चल दिए और जब (उन पर) कोई ख़ौफ (का मौक़ा) आ पड़ा तो देखते हो कि (आस से) तुम्हारी तरफ देखते हैं (और) उनकी ऑंखें इस तरह घूमती हैं जैसे किसी शख्स पर मौत की बेहोशी छा जाए फिर वह ख़ौफ (का मौक़ा) जाता रहा और ईमानदारों की फतेह हुई तो माले (ग़नीमत) पर गिरते पड़ते फौरन तुम पर अपनी तेज़ ज़बानों से ताना कसने लगे ये लोग (शुरू) से ईमान ही नहीं लाए (फक़त ज़बानी जमा ख़र्च थी) तो खुदा ने भी इनका किया कराया सब अकारत कर दिया और ये तो खुदा के वास्ते एक (निहायत) आसान बात थी
Yahsaboonal Ahzaaba lam yazhaboo wa iny yaatil Ahzaabu yawaddoo law annahum baadoona fil A'raabi yasaloona 'an ambaaa'ikum wa law kaanoo feekum maa qaatalooo illaa qaleela
(मदीने का मुहासेरा करने वाले चल भी दिए मगर) ये लोग अभी यही समझ रहे हैं कि (काफ़िरों के) लश्कर अभी नहीं गए और अगर कहीं (कुफ्फार का) लश्कर फिर आ पहुँचे तो ये लोग चाहेंगे कि काश वह जंगलों में गँवारों में जा बसते और (वहीं से बैठे बैठे) तुम्हारे हालात दरयाफ्त करते रहते और अगर उनको तुम लोगों में रहना पड़ता तो फ़क़त (पीछा छुड़ाने को) ज़रा ज़हूर (कहीं) लड़ते
Laqad kaana lakum fee Rasoolil laahi uswatun hasanatul liman kaana yarjul laaha wal yawmal Aakhira wa azkaral laaha kaseeraa
(मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते तो खुद रसूल अल्लाह का (ख़न्दक़ में बैठना) एक अच्छा नमूना था (मगर हाँ यह) उस शख्स के वास्ते है जो खुदा और रोजे आखेरत की उम्मीद रखता हो और खुदा की याद बाकसरत करता हो
Wa lammaa ra al mu'minoonal Ahzaaba qaaloo haaza maa wa'adanal laahu wa Rasooluh; wa maa zaadahum illaaa eemaananw wa tasleemaa
और जब सच्चे ईमानदारों ने (कुफ्फार के) जमघटों को देखा तो (बेतकल्लुफ़) कहने लगे कि ये वही चीज़ तो है जिसका हम से खुदा ने और उसके रसूल ने वायदा किया था (इसकी परवाह क्या है) और खुदा ने और उसके रसूल ने बिल्कुल ठीक कहा था और (इसके देखने से) उनका ईमानदार और उनकी इताअत और भी ज़िन्दा हो गयी
Minal mu'mineena rijaalun sadaqoo maa 'aahadul laaha 'alaihi faminhum man qadaa nahbahoo wa minhum mai yantaziru wa maa baddaloo tabdeelaa
ईमानदारों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं कि खुदा से उन्होंने (जॉनिसारी का) जो एहद किया था उसे पूरा कर दिखाया ग़रज़ उनमें से बाज़ वह हैं जो (मर कर) अपना वक्त पूरा कर गए और उनमें से बाज़ (हुक्मे खुदा के) मुन्तज़िर बैठे हैं और उन लोगों ने (अपनी बात) ज़रा भी नहीं बदली
Li yajziyal aahus saadiqeena bisidqihim wa yu'azzibal munaafiqeena in shaaa'a aw yatooba 'alaihim; innal laaha kaana Ghafoorar Raheemaa
ये इम्तेहान इसलिए था ताकि खुद सच्चे (ईमानदारों) को उनकी सच्चाई की जज़ाए ख़ैर दे और अगर चाहे तो मुनाफेक़ीन की सज़ा करे या (अगर वह लागे तौबा करें तो) खुदा उनकी तौबा कुबूल फरमाए इसमें शक नहीं कि खुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
Wa raddal laahul lazeena kafaroo bighaizihim lam yanaaloo khairaa; wa kafal laahul mu'mineenal qitaal; wa kaanal laahu Qawiyyan 'Azeezaa
और खुदा ने (अपनी कुदरत से) क़ाफिरों को मदीने से फेर दिया (और वह लोग) अपनी झुंझलाहट में (फिर गए) और इन्हें कुछ फायदे भी न हुआ और खुदा ने (अपनी मेहरबानी से) मोमिनीन को लड़ने की नौबत न आने दी और खुदा तो (बड़ा) ज़बरदस्त (और) ग़ालिब हैं
Wa anzalal lazeena zaaha roohum min Ahlil Kitaabi min sa yaaseehim wa qazafa fee quloobihimm mur ru'ba freeqan taqtuloona wa taasiroona fareeqaaa
और अहले किताब में से जिन लोगों (बनी कुरैज़ा) ने उन (कुफ्फार) की मदद की थी खुदा उनको उनके क़िलों से (बेदख़ल करके) नीचे उतार लाया और उनके दिलों में (तुम्हारा) ऐसा रोब बैठा दिया कि तुम उनके कुछ लोगों को क़त्ल करने लगे
Wa awrasakum ardahum wa diyaarahum wa amwaalahum wa ardal lam tata'oohaa; wa kaanal laahu 'alaa kulli shai'in Qadeeraa
और कुछ को क़ैदी (और गुलाम) बनाने और तुम ही लोगों को उनकी ज़मीन और उनके घर और उनके माल और उस ज़मीन (खैबर) का खुदा ने मालिक बना दिया जिसमें तुमने क़दम तक नहीं रखा था और खुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर वतवाना है
Yaaa aiyuhan Nabiyyu qul li azwaajika i kuntunna turidnal hayaatad dunyaa wa zeenatahaa fata'aalaina umatti'kunna wa usarrihkunna saraahan jameela
ऐ रसूल अपनी बीवियों से कह दो कि अगर तुम (फक़त) दुनियावी ज़िन्दगी और उसकी आराइश व ज़ीनत की ख्वाहॉ हो तो उधर आओ मैं तुम लोगों को कुछ साज़ो सामान दे दूँ और उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दूँ
Wa in kuntunna turidnal laaha wa Rasoolahoo wad Daaral Aakhirata fa innal laaha a'adda lil muhsinaati min kunna ajjran 'azeemaa
और अगर तुम लोग खुदा और उसके रसूल और आखेरत के घर की ख्वाहॉ हो तो (अच्छी तरह ख्याल रखो कि) तुम लोगों में से नेकोकार औरतों के लिए खुदा ने यक़ीनन् बड़ा (बड़ा) अज्र व (सवाब) मुहय्या कर रखा है
Yaa nisaaa'an Nabiyyi mai yaati minkunna bifaa hishatim mubaiyinatiny yudaa'af lahal 'azaabu di'fain wa kaana zaalika 'alal laahi yaseera
ऐ पैग़म्बर की बीबियों तुममें से जो कोई किसी सरीही ना शाइस्ता हरकत की का मुरतिब हुई तो (याद रहे कि) उसका अज़ाब भी दुगना बढ़ा दिया जाएगा और खुदा के वास्ते (निहायत) आसान है
Wa mai yaqnut minkunna lillaahi wa Rasoolihee wa ta'mal saalihan nu'tihaaa ajrahaa marratayni wa a'tadnaa lahaa rizqan kareema
और तुममें से जो (बीवी) खुदा और उसके रसूल की ताबेदारी अच्छे (अच्छे) काम करेगी उसको हम उसका सवाब भी दोहरा अता करेगें और हमने उसके लिए (जन्नत में) इज्ज़त की रोज़ी तैयार कर रखी है
Yaa nisaaa'an Nabiyyi lastunna ka ahadim minan nisaaa'i init taqaitunna falaa takhda'na bilqawli fa yatma'al lazee fee qalbihee maradunw wa qulna qawlam ma'roofaa
ऐ नबी की बीवियों तुम और मामूली औरतों की सी तो हो वही (बस) अगर तुम को परहेज़गारी मंजूर रहे तो (अजनबी आदमी से) बात करने में नरम नरम (लगी लिपटी) बात न करो ताकि जिसके दिल में (शहवते ज़िना का) मर्ज़ है वह (कुछ और) इरादा (न) करे
Wa qarna fee bu yoo tikunna wa laa tabarrajna tabarrujal Jaahiliyyatil oolaa wa aqimnas Salaata w aaateenaz Zakaata wa ati'nal laaha wa Rasoolah; innamaa yureedul laahu liyuzhiba 'ankumur rijsa Ahlal Bayti wa yutahhirakum tatheeraa
और (साफ-साफ) उनवाने शाइस्ता से बात किया करो और अपने घरों में निचली बैठी रहो और अगले ज़माने जाहिलियत की तरह अपना बनाव सिंगार न दिखाती फिरो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ा करो और (बराबर) ज़कात दिया करो और खुदा और उसके रसूल की इताअत करो ऐ (पैग़म्बर के) अहले बैत खुदा तो बस ये चाहता है कि तुमको (हर तरह की) बुराई से दूर रखे और जो पाक व पाकीज़ा दिखने का हक़ है वैसा पाक व पाकीज़ा रखे
(दिल लगा के सुनो) मुसलमान मर्द और मुसलमान औरतें और ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतें और फरमाबरदार मर्द और फरमाबरदार औरतें और रास्तबाज़ मर्द और रास्तबाज़ औरतें और सब्र करने वाले मर्द और सब्र करने वाली औरतें और फिरौतनी करने वाले मर्द और फिरौतनी करने वाली औरतें और Âैरात करने वाले मर्द और Âैरात करने वाली औरतें और रोज़ादार मर्द और रोज़ादार औरतें और अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करने वाले मर्द और हिफाज़त करने वाली औरतें और खुदा की बकसरत याद करने वाले मर्द और याद करने वाली औरतें बेशक इन सब लोगों के वास्ते खुदा ने मग़फिरत और (बड़ा) सवाब मुहैय्या कर रखा है
Wa maa kaana limu'mininw wa laa mu'minatin izaa qadal laahu wa Rasooluhooo amran ai yakoona lahumul khiyaratu min amrihim; wa mai ya'sil laaha wa Rasoolahoo faqad dalla dalaalam mubeenaa
और न किसी ईमानदार मर्द को ये मुनासिब है और न किसी ईमानदार औरत को जब खुदा और उसके रसूल किसी काम का हुक्म दें तो उनको अपने उस काम (के करने न करने) अख़तेयार हो और (याद रहे कि) जिस शख्स ने खुदा और उसके रसूल की नाफरमानी की वह यक़ीनन खुल्लम खुल्ला गुमराही में मुब्तिला हो चुका
Wa iz taqoolu lillazeee an'amal laahu 'alaihi wa an'amta 'alaihi amsik 'alaika zawjaka wattaqil laaha wa tukhfee fee nafsika mal laahu mubdeehi wa takhshan naasa wallaahu ahaqqu an takhshaah; falammaa qadaa Zaidum minhaa wataran zawwajnaa kahaa likay laa yakoona 'alal mu'mineena harajun feee azwaaji ad'iyaaa'ihim izaa qadaw minhunna wataraa; wa kaana amrul laahi af'oolaa
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम उस शख्स (ज़ैद) से कह रहे थे जिस पर खुदा ने एहसान (अलग) किया था और तुमने उस पर (अलग) एहसान किया था कि अपनी बीबी (ज़ैनब) को अपनी ज़ौज़ियत में रहने दे और खुदा से डेर खुद तुम इस बात को अपने दिल में छिपाते थे जिसको (आख़िरकार) खुदा ज़ाहिर करने वाला था और तुम लोगों से डरते थे हालॉकि खुदा इसका ज्यादा हक़दार है कि तुम उस से डरो ग़रज़ जब ज़ैद अपनी हाजत पूरी कर चुका (तलाक़ दे दी) तो हमने (हुक्म देकर) उस औरत (ज़ैनब) का निकाह तुमसे कर दिया ताकि आम मोमिनीन को अपने ले पालक लड़कों की बीवियों (से निकाह करने) में जब वह अपना मतलब उन औरतों से पूरा कर चुकें (तलाक़ दे दें) किसी तरह की तंगी न रहे और खुदा का हुक्म तो किया कराया हुआ (क़तई) होता है
Maa kaana 'alan nabiyyyi min harajin feemaa faradal laahu lahoo sunnatal laahi fil lazeena khalaw min qabl; wa kaana amrul laahi qadaram maqdooraa
जो हुक्म खुदा ने पैग़म्बर पर फर्ज क़र दिया (उसके करने) में उस पर कोई मुज़ाएका नहीं जो लोग (उनसे) पहले गुज़र चुके हैं उनके बारे में भी खुदा का (यही) दस्तूर (जारी) रहा है (कि निकाह में तंगी न की) और खुदा का हुक्म तो (ठीक अन्दाज़े से) मुक़र्रर हुआ होता है
Allazeena yuballighoona Risaalaatil laahi wa yakhshaw nahoo wa laa yakkhshawna ahadan illal laah; wa kafaa billaahi Haseebaa
वह लोग जो खुदा के पैग़ामों को (लोगों तक जूँ का तूँ) पहुँचाते थे और उससे डरते थे और खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते थे (फिर तुम क्यों डरते हो) और हिसाब लेने के वास्ते तो खुद काफ़ी है
Maa kaana Muhammmadun abaaa ahadim mir rijaalikum wa laakir Rasoolal laahi wa Khaataman Nabiyyeen; wa kaanal laahu bikulli shai'in 'Aleema
(लोगों) मोहम्मद तुम्हारे मर्दों में से (हक़ीक़तन) किसी के बाप नहीं हैं (फिर जैद की बीवी क्यों हराम होने लगी) बल्कि अल्लाह के रसूल और नबियों की मोहर (यानी ख़त्म करने वाले) हैं और खुदा तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
Huwal lazee yusallee 'alaikum wa malaaa'ikatuhoo liyukhrijakum minazzulumaati ilan-noor wa kaana bilmu'mineena Raheemaa
वह वही तो है जो खुद तुमपर दूरूद (दर्दों रहमत) भेजता है और उसके फ़रिश्ते ताकि तुमको (कुफ़्र की) तारीक़ियों से निकालकर (ईमान की) रौशनी में ले जाए और खुदा ईमानवालों पर बड़ा मेहरबान है
Tahiyyatuhum Yawma yalqawnahoo salaamunw wa a'adda lahum ajran kareemaa
जिस दिन उसकी बारगाह में हाज़िर होंगे (उस दिन) उनकी मुरादात (उसकी तरफ से हर क़िस्म की) सलामती होगी और खुदा ने तो उनके वास्ते बहुत अच्छा बदला (बेहश्त) तैयार रखा है
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo izaa nakahtumul mu'minaati summa tallaqtu moohunna min qabli an tamas soohunna famaa lakum 'alaihinna min 'iddatin ta'taddoonahaa famatti'oohunna wa sarri hoohunna saraahan jameelaa
ऐ ईमानवालों जब तुम मोमिना औरतों से (बग़ैर मेहर मुक़र्रर किये) निकाह करो उसके बाद उन्हें अपने हाथ लगाने से पहले ही तलाक़ दे दो तो फिर तुमको उनपर कोई हक़ नहीं कि (उनसे) इद्दा पूरा कराओ उनको तो कुछ (कपड़े रूपये वग़ैरह) देकर उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दो
Yaaa aiyuhan Nabiyyu innaaa ahlalnaa laka azwaa jakal laatee aayaita ujoora hunna wa maa malakat yameenuka mimmaaa afaaa'al laahu 'alaika wa banaati 'ammika wa banaati 'ammaatika wa banaati khaalika wa banaati khaalaa tikal laatee haajarna ma'aka wamra atam mu'minatan inw wahabat nafsahaa lin Nabiyyi in araadan Nabiyyu ai yastan kihahaa khaalisatal laka min doonil mu'mineen; qad 'alim naa maa faradnaa 'alaihim feee azwaajihim wa maa malakat aimaanuhum likailaa yakoona 'alaika haraj; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheema
ऐ नबी हमने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी उन बीवियों को हलाल कर दिया है जिनको तुम मेहर दे चुके हो और तुम्हारी उन लौंडियों को (भी) जो खुदा ने तुमको (बग़ैर लड़े-भिड़े) माले ग़नीमत में अता की है और तुम्हारे चचा की बेटियाँ और तुम्हारी फूफियों की बेटियाँ और तुम्हारे मामू की बेटियाँ और तुम्हारी ख़ालाओं की बेटियाँ जो तुम्हारे साथ हिजरत करके आयी हैं (हलाल कर दी और हर ईमानवाली औरत (भी हलाल कर दी) अगर वह अपने को (बग़ैर मेहर) नबी को दे दें और नबी भी उससे निकाह करना चाहते हों मगर (ऐ रसूल) ये हुक्म सिर्फ तुम्हारे वास्ते ख़ास है और मोमिनीन के लिए नहीं और हमने जो कुछ (मेहर या क़ीमत) आम मोमिनीन पर उनकी बीवियों और उनकी लौंडियों के बारे में मुक़र्रर कर दिया है हम खूब जानते हैं और (तुम्हारी रिआयत इसलिए है) ताकि तुमको (बीवियों की तरफ से) कोई दिक्क़त न हो और खुदा तो बड़ा बख़शने वाला मेहरबान है
Turjee man tashaaa'u minhunna wa tu'weee ilaika man tashaaa'u wa manibta ghaita mimman 'azalta falaa junaaha 'alaik; zaalika adnaaa an taqarra a'yunuhunna wa laa yahzanna wa yardaina bimaa aataitahunna kulluhunn; wal laahu ya'lamu maa fee quloo bikum; wa kaanal laahu 'Aleeman haleemaa
इनमें से जिसको (जब) चाहो अलग कर दो और जिसको (जब तक) चाहो अपने पास रखो और जिन औरतों को तुमने अलग कर दिया था अगर फिर तुम उनके ख्वाहॉ हो तो भी तुम पर कोई मज़ाएक़ा नहीं है ये (अख़तेयार जो तुमको दिया गया है) ज़रूर इस क़ाबिल है कि तुम्हारी बीवियों की ऑंखें ठन्डी रहे और आर्जूदा ख़ातिर न हो और वो कुछ तुम उन्हें दे दो सबकी सब उस पर राज़ी रहें और जो कुछ तुम्हारे दिलों में है खुदा उसको ख़ुब जानता है और खुदा तो बड़ा वाक़िफकार बुर्दबार है
Laa yahillu lakan nisaaa'u mim ba'du wa laaa an tabaddala bihinna min azwaajinw wa law ajabaka husnuhunna illaa maa malakat yameenukk; wa kaanal laahu 'alaa kulli shai'ir Raqeeba
(ऐ रसूल) अब उन (नौ) के बाद (और) औरतें तुम्हारे वास्ते हलाल नहीं और न ये जायज़ है कि उनके बदले उनमें से किसी को छोड़कर और बीबियाँ कर लो अगर चे तुमको उनका हुस्न कैसा ही भला (क्यों न) मालूम हो मगर तुम्हारी लौंडियाँ (इस के बाद भी जायज़ हैं) और खुदा तो हर चीज़ का निगरॉ है
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa tadkhuloo bu yootan Nabiyyi ilaaa ai yu'zana lakum ilaa ta'aamin ghaira naazireena inaahu wa laakin izaa du'eetum fadkhuloo fa izaa ta'imtum fantashiroo wa laa mustaaniseena lihadees; inna zaalikum kaana yu'zin Nabiyya fa yastahyee minkum wallaahu laa yastahyee minal haqq; wa izaa sa altumoohunna mataa'an fas'aloohunna minw waraaa'i hijaab; zaalikum atharu liquloobikum wa quloobihinn; wa maa kaana lakum an tu'zoo Rasoolal laahi wa laaa an tankihooo azwaajahoo mim ba'diheee abadaa; inna zaalikum kaana 'indal laahi 'azeema
ऐ ईमानदारों तुम लोग पैग़म्बर के घरों में न जाया करो मगर जब तुमको खाने के वास्ते (अन्दर आने की) इजाज़त दी जाए (लेकिन) उसके पकने का इन्तेज़ार (नबी के घर बैठकर) न करो मगर जब तुमको बुलाया जाए तो (ठीक वक्त पर) जाओ और फिर जब खा चुको तो (फौरन अपनी अपनी जगह) चले जाया करो और बातों में न लग जाया करो क्योंकि इससे पैग़म्बर को अज़ीयत होती है तो वह तुम्हारा लैहाज़ करते हैं और खुदा तो ठीक (ठीक कहने) से झेंपता नहीं और जब पैग़म्बर की बीवियों से कुछ माँगना हो तो पर्दे के बाहर से माँगा करो यही तुम्हारे दिलों और उनके दिलों के वास्ते बहुत सफाई की बात है और तुम्हारे वास्ते ये जायज़ नहीं कि रसूले खुदा को (किसी तरह) अज़ीयत दो और न ये जायज़ है कि तुम उसके बाद कभी उनकी बीवियों से निकाह करो बेशक ये ख़ुदा के नज़दीक बड़ा (गुनाह) है
Laa junaaha 'alaihinna feee aabaaa'ihinna wa laaa abnaaa'ihinna wa laaa ikhwaanihinnna wa laaa abnaaa'i ikhwaanihinna wa laaa abnaaa'i akhawaatihinna wa laa nisaaa'i hinna wa laa Maa malakat aimaanuhunn; wattaqeenal laah; innal laaha kaana 'alaa kulli shai'in Shaheedaa
औरतों पर न अपने बाप दादाओं (के सामने होने) में कुछ गुनाह है और न अपने बेटों के और न अपने भाईयों के और न अपने भतीजों के और अपने भांजों के और न अपनी (क़िस्म कि) औरतों के और न अपनी लौंडियों के सामने होने में कुछ गुनाह है (ऐ पैग़म्बर की बीबियों) तुम लोग खुदा से डरती रहो इसमें कोई शक ही नहीं की खुदा (तुम्हारे आमाल में) हर चीज़ से वाक़िफ़ है
और जो लोग ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतों को बगैर कुछ किए द्दरे (तोहमत देकर) अज़ीयत देते हैं तो वह एक बोहतान और सरीह गुनाह का बोझ (अपनी गर्दन पर) उठाते हैं
Yaaa aiyuhan Nabiyyu qul li azwaajika wa banaatika wa nisaaa'il mu'mineena yudneena 'alaihinna min jalaabee bihinn; zaalika adnaaa ai yu'rafna falaa yu'zain; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheemaa
ऐ नबी अपनी बीवियों और अपनी लड़कियों और मोमिनीन की औरतों से कह दो कि (बाहर निकलते वक्त) अपने (चेहरों और गर्दनों) पर अपनी चादरों का घूंघट लटका लिया करें ये उनकी (शराफ़त की) पहचान के वास्ते बहुत मुनासिब है तो उन्हें कोई छेड़ेगा नहीं और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
ऐ रसूल मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ़्र का) मर्ज़ है और जो लोग मदीने में बुरी ख़बरें उड़ाया करते हैं- अगर ये लोग (अपनी शरारतों से) बाज़ न आएंगें तो हम तुम ही को (एक न एक दिन) उन पर मुसल्लत कर देगें फिर वह तुम्हारे पड़ोस में चन्द रोज़ों के सिवा ठहरने (ही) न पाएँगे
yaa aiyuhal lazeena aamanoo las takoonoo kalla zeena aazaw Moosaa fa barra ahul laahu mimmmaa qaaloo; wa kaana 'indal laahi wajeehaa
ऐ ईमानवालों (ख़बरदार कहीं) तुम लोग भी उनके से न हो जाना जिन्होंने मूसा को तकलीफ दी तो खुदा ने उनकी तोहमतों से मूसा को बरी कर दिया और मूसा खुदा के नज़दीक एक रवादार (इज्ज़त करने वाले) (पैग़म्बर) थे
Yuslih lakum a'maalakum wa yaghfir lakum zunoobakum; wa mai yuti'il laaha wa Rasoolahoo faqad faaza fawzan 'azeemaa
तो खुदा तुम्हारी कारगुज़ारियों को दुरूस्त कर देगा और तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और जिस शख्स ने खुदा और उसके रसूल की इताअत की वह तो अपनी मुराद को खूब अच्छी तरह पहुँच गया
Innaa 'aradnal amaanata 'alas samaawaati walardi wal jibaali fa abaina ai yahmil nahaa wa ashfaqna minhaa wa hamalahal insaanu innahoo kaana zalooman jahoolaa
बेशक हमने (रोज़े अज़ल) अपनी अमानत (इताअत इबादत) को सारे आसमान और ज़मीन पहाड़ों के सामने पेश किया तो उन्होंने उसके (बार) उठाने से इन्कार किया और उससे डर गए और आदमी ने उसे (बे ताम्मुल) उठा लिया बेशक इन्सान (अपने हक़ में) बड़ा ज़ालिम (और) नादान है
Liyu 'azzibal laahul munaafiqeena wal munaafiqaati walmushrikeena wal mushrikaati wa yatoobal laahu 'alal mu'mineena walmu'minaat; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheema
इसका नतीजा यह हुआ कि खुदा मुनाफिक़ मर्दों और मुनाफिक़ औरतों और मुशरिक मर्दों और मुशरिक औरतों को (उनके किए की) सज़ा देगा और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों की (तक़सीर अमानत की) तौबा क़ुबूल फरमाएगा और खुदा तो बड़ा बख़शने वाला मेहरबान है