Alhamdu lillaahil lazee lahoo maa fis samaawaati wa maa fil ardi wa lahul hamdu fil aakhirah; wa Huwal Hakeemul Khabeer
हर क़िस्म की तारीफ उसी खुदा के लिए (दुनिया में भी) सज़ावार है कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और आख़ेरत में (भी हर तरफ) उसी की तारीफ है और वही वाक़िफकार हकीम है
Ya'lamu maa yaliju fil ardi wa maa yakhruju minhaa wa maa yanzilu minas samaaa'i wa maa ya'ruju feehaa; wa Huwar Raheemul Ghafoor
(जो) चीज़ें (बीज वग़ैरह) ज़मीन में दाख़िल हुई है और जो चीज़ (दरख्त वग़ैरह) इसमें से निकलती है और जो चीज़ (पानी वग़ैरह) आसामन से नाज़िल होती है और जो चीज़ (नज़ारात फरिश्ते वग़ैरह) उस पर चढ़ती है (सब) को जानता है और वही बड़ा बख्शने वाला है
Wa qaalal lazeena kafaroo laa taateenas Saa'ah; qul balaa wa Rabbee lataatiyannakum 'Aalimul Ghaib; laa ya'zubu 'anhu misqaalu zarratin fis samaawaati wa laa fil ardi wa laaa asgharu min zaalika wa laaa akbaru illaa fee kitaabim mubeen
और कुफ्फार कहने लगे कि हम पर तो क़यामत आएगी ही नहीं (ऐ रसूल) तुम कह दो हॉ (हॉ) मुझ को अपने उस आलेमुल ग़ैब परवरदिगार की क़सम है जिससे ज़र्रा बराबर (कोई चीज़) न आसमान में छिपी हुई है और न ज़मीन में कि क़यामत ज़रूर आएगी और ज़र्रे से छोटी चीज़ और ज़र्रे से बडी (ग़रज़ जितनी चीज़े हैं सब) वाजेए व रौशन किताब लौहे महफूज़ में महफूज़ हैं
Wa yaral lazeena utul 'Ilmal lazeee unzila ilaika mir Rabbika huwal haqqa wa yahdeee ilaaa siraatil 'Azeezil Hameed
और (ऐ रसूल) जिन लोगों को (हमारी बारगाह से) इल्म अता किया गया है वह जानते हैं कि जो (क़ुरान) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है बिल्कुल ठीक है और सज़ावार हम्द (व सना) ग़ालिब (खुदा) की राह दिखाता है
Wa qaalal lazeena kafaroo hal nadullukum 'alaa rajuliny yanabbi 'ukum izaa muzziqtum kulla mumazzaqin innakum lafee khalqin jadeed
और कुफ्फ़ार (मसख़रेपन से बाहम) कहते हैं कि कहो तो हम तुम्हें ऐसा आदमी (मोहम्मद) बता दें जो तुम से बयान करेगा कि जब तुम (मर कर सड़ ग़ल जाओगे और) बिल्कुल रेज़ा रेज़ा हो जाओगे तो तुम यक़ीनन एक नए जिस्म में आओगे
Aftaraa 'alal laahi kaziban am bihee jinnah; balil lazeena laa yu'minoona bil Aakhirati fil'azaabi waddad laalil ba'eed
क्या उस शख्स (मोहम्मद) ने खुदा पर झूठ तूफान बाँधा है या उसे जुनून (हो गया) है (न मोहम्मद झूठा है न उसे जुनून है) बल्कि खुद वह लोग जो आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते अज़ाब और पहले दरजे की गुमराही में पड़े हुए हैं
Afalam yaraw ilaa maa baina aydeehim wa maa khalfahum minas samaaa'i wal ard; in nashad nakhsif bihimul arda aw nusqit 'alaihim kisafam minas samaaa'; inna fee zaalika la Aayatal likulli 'abdim muneeb
तो क्या उन लोगों ने आसमान और ज़मीन की तरफ भी जो उनके आगे और उनके पीछे (सब तरफ से घेरे) हैं ग़ौर नहीं किया कि अगर हम चाहे तो उन लोगों को ज़मीन में धँसा दें या उन पर आसमान का कोई टुकड़ा ही गिरा दें इसमें शक नहीं कि इसमें हर रूजू करने वाले बन्दे के लिए यक़ीनी बड़ी इबरत है
Wa laqad aatainaa Daawooda minnaa fadlany yaa jibaalu awwibee ma'ahoo wattaira wa alannaa lahul hadeed
और हमने यक़ीनन दाऊद को अपनी बारगाह से बुर्जुग़ी इनायत की थी (और पहाड़ों को हुक्म दिया) कि ऐ पहाड़ों तसबीह करने में उनका साथ दो और परिन्द को (ताबेए कर दिया) और उनके वास्ते लोहे को (मोम की तरह) नरम कर दिया था
कि फँराख़ व कुशादा जिरह बनाओ और (कड़ियों के) जोड़ने में अन्दाज़े का ख्याल रखो और तुम सब के सब अच्छे (अच्छे) काम करो वो कुछ तुम लोग करते हो मैं यक़ीनन देख रहा हूँ
Wa li-Sulaimaanar reeha ghuduwwuhaa shahrunw wa ra-waahuhaa shahrunw wa asalnaa lahoo 'ainal qitr; wa minal jinni mai ya'malu baina yadaihi bi izni Rabbih; wa mai yazigh minhum 'an amrinaa nuziqhu min 'azaabis sa'eer
और हवा को सुलेमान का (ताबेइदार बना दिया था) कि उसकी सुबह की रफ्तार एक महीने (मुसाफ़त) की थी और इसी तरह उसकी शाम की रफ्तार एक महीने (के मुसाफत) की थी और हमने उनके लिए तांबे (को पिघलाकर) उसका चश्मा जारी कर दिया था और जिन्नात (को उनका ताबेदार कर दिया था कि उन) में कुछ लोग उनके परवरदिगार के हुक्म से उनके सामने काम काज करते थे और उनमें से जिसने हमारे हुक्म से इनहराफ़ किया है उसे हम (क़यामत में) जहन्नुम के अज़ाब का मज़ा चख़ाँएगे
Ya'maloona lahoo ma yashaaa'u mim mahaareeba wa tamaaseela wa jifaanin kaljawaabi wa qudoorir raasiyaat; i'maloo aala Daawooda shukraa; wa qaleelum min 'ibaadiyash shakoor
ग़रज़ सुलेमान को जो बनवाना मंज़ूर होता ये जिन्नात उनके लिए बनाते थे (जैसे) मस्जिदें, महल, क़िले और (फरिश्ते अम्बिया की) तस्वीरें और हौज़ों के बराबर प्याले और (एक जगह) गड़ी हुई (बड़ी बड़ी) देग़ें (कि एक हज़ार आदमी का खाना पक सके) ऐ दाऊद की औलाद शुक्र करते रहो और मेरे बन्दों में से शुक्र करने वाले (बन्दे) थोड़े से हैं
Falammaa qadainaa 'alaihil mawta ma dallahum 'alaa mawtiheee illaa daaabbatul ardi taakulu minsa atahoo falammaa kharra tabaiyanatil jinnu al law kaanoo ya'lamoonal ghaiba maa labisoo fil 'azaabil muheen
फिर जब हमने सुलेमान पर मौत का हुक्म जारी किया तो (मर गए) मगर लकड़ी के सहारे खड़े थे और जिन्नात को किसी ने उनके मरने का पता न बताया मगर ज़मीन की दीमक ने कि वह सुलेमान के असा को खा रही थी फिर (जब खोखला होकर टूट गया और) सुलेमान (की लाश) गिरी तो जिन्नात ने जाना कि अगर वह लोग ग़ैब वॉ (ग़ैब के जानने वाले) होते तो (इस) ज़लील करने वाली (काम करने की) मुसीबत में न मुब्तिला रहते
Laqad kaana li Saba-in fee maskanihim Aayatun jannataani 'ai yameeninw wa shimaalin kuloo mir rizq Rabbikum washkuroolah; baldatun taiyibatunw wa Rabbun Ghafoor
और (क़ौम) सबा के लिए तो यक़ीनन ख़ुद उन्हीं के घरों में (कुदरते खुदा की) एक बड़ी निशानी थी कि उनके शहर के दोनों तरफ दाहिने बाएं (हरे-भरे) बाग़ात थे (और उनको हुक्म था) कि अपने परवरदिगार की दी हुई रोज़ी Âाओ (पियो) और उसका शुक्र अदा करो (दुनिया में) ऐसा पाकीज़ा शहर और (आख़ेरत में) परवरदिगार सा बख्शने वाला
Fa-a''radoo fa-arsalnaa 'alaihim Sailal 'Arimi wa baddalnaahum bijannataihim jannataini azwaatai ukulin khamtinw wa aslinw wa shai'im min sidrin qaleel
इस पर भी उन लोगों ने मुँह फेर लिया (और पैग़म्बरों का कहा न माना) तो हमने (एक ही बन्द तोड़कर) उन पर बड़े ज़ोरों का सैलाब भेज दिया और (उनको तबाह करके) उनके दोनों बाग़ों के बदले ऐसे दो बाग़ दिए जिनके फल बदमज़ा थे और उनमें झाऊ था और कुछ थोड़ी सी बेरियाँ थी
Wa ja'alnaa bainahum wa bainal qural latee baaraknaa feehaa quran zaahiratanw wa qaddamaa feehas sayr; seeroo feehaa la yaalirya wa aiyaaman aamineen
और हम अहले सबा और (शाम) की उन बस्तियों के दरमियान जिनमें हमने बरकत अता की थी और चन्द बस्तियाँ (सरे राह) आबाद की थी जो बाहम नुमाया थीं और हमने उनमें आमद व रफ्त की राह मुक़र्रर की थी कि उनमें रातों को दिनों को (जब जी चाहे) बेखटके चलो फिरो
Faqaaloo Rabbanaa baa'id baina asfaarinaa wa zalamooo anfusahum faja'alnaahum ahaadeesa wa mazzaq naahum kulla mumazzaq; inna fee zaalika la Aayaatil likulli sabbaarin shakoor
तो वह लोग ख़ुद कहने लगे परवरदिगार (क़रीब के सफर में लुत्फ नहीं) तो हमारे सफ़रों में दूरी पैदा कर दे और उन लोगों ने खुद अपने ऊपर ज़ुल्म किया तो हमने भी उनको (तबाह करके उनके) अफसाने बना दिए - और उनकी धज्जियाँ उड़ा के उनको तितिर बितिर कर दिया बेशक उनमें हर सब्र व शुक्र करने वालोंके वास्ते बड़ी इबरते हैं
Wa maa kaana lahoo 'alaihim min sultaanin illaa lina'lama mai yu minu bil Aakhirati mimman huwa minhaa fee shakk; wa Rabbuka 'alaa kulli shai'in Hafeez
और शैतान का उन लोगों पर कुछ क़ाबू तो था नहीं मगर ये (मतलब था) कि हम उन लोगों को जो आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं उन लोगों से अलग देख लें जो उसके बारे में शक में (पड़े) हैं और तुम्हारा परवरदिगार तो हर चीज़ का निगरॉ है
Qulid 'ul lazeena za'amtum min doonil laahi laa yamlikoona misqaala zarratin fissamaawaati wa laa fil ardi wa maa lahum feehimaa min shirkinw wa maa lahoo minhum min zaheer
(ऐ रसूल इनसे) कह दो कि जिन लोगों को तुम खुद ख़ुदा के सिवा (माबूद) समझते हो पुकारो (तो मालूम हो जाएगा कि) वह लोग ज़र्रा बराबर न आसमानों में कुछ इख़तेयार रखते हैं और न ज़मीन में और न उनकी उन दोनों में शिरकत है और न उनमें से कोई खुदा का (किसी चीज़ में) मद्दगार है
Wa laa tanfa'ush shafaa'atu 'indahooo illaa liman azina lah; hattaaa izaa fuzzi'a 'an quloobihim qaaloo maazaa qaala Rabbukum; qaalul haqq, wa Huwal 'Aliyul Kabeer
जिसके लिए वह खुद इजाज़त अता फ़रमाए उसके सिवा कोई सिफारिश उसकी बारगाह में काम न आएगी (उसके दरबार की हैबत) यहाँ तक (है) कि जब (शिफ़ाअत का) हुक्म होता है तो शिफ़ाअत करने वाले बेहोश हो जाते हैं फिर तब उनके दिलों की घबराहट दूर कर दी जाती है तो पूछते हैं कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या हुक्म दिया
Qul mai yarzuqukum minas samaawaati wal ardi qulil laahu wa innaaa aw iyyaakum la'alaa hudan aw fee dalaalim mubeen
तो मुक़र्रिब फरिश्ते कहते हैं कि जो वाजिबी था (ऐ रसूल) तुम (इनसे) पूछो तो कि भला तुमको सारे आसमान और ज़मीन से कौन रोज़ी देता है (वह क्या कहेंगे) तुम खुद कह दो कि खुदा और मैं या तुम (दोनों में से एक तो) ज़रूर राहे रास्त पर है (और दूसरा गुमराह) या वह सरीही गुमराही में पड़ा है (और दूसरा राहे रास्त पर)
Qul yajma'u bainanaa Rabbunaa summa yaftahu bainanaa bilhaqq; wa Huwal Fattaahul 'Aleem
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि हमारा परवरदिगार (क़यामत में) हम सबको इकट्ठा करेगा फिर हमारे दरमियान (ठीक) फैसला कर देगा और वह तो ठीक-ठीक फैसला करने वाला वाक़िफकार है
(ऐ रसूल तुम कह दो कि जिनको तुम ने खुदा का शरीक बनाकर) खुदा के साथ मिलाया है ज़रा उन्हें मुझे भी तो दिखा दो हरगिज़ (कोई शरीक नहीं) बल्कि खुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
Wa maaa arsalnaaka illaa kaaffatal linnaasi basheeranw wa nazeeranw wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon
(ऐ रसूल) हमने तुमको तमाम (दुनिया के) लोगों के लिए (नेकों को बेहश्त की) खुशखबरी देने वाला और (बन्दों को अज़ाब से) डराने वाला (पैग़म्बर) बनाकर भेजा मगर बहुतेरे लोग (इतना भी) नहीं जानते
Wa qaalal lazeena kafaroo lan nu'mina bihaazal Quraani wa laa billazee baina yadayh; wa law taraaa iziz zaalimoona mawqoofoona 'inda Rabbihim yarji'u ba'duhum ilaa ba'dinil qawla yaqoolul lazeenas tud'ifoo lillazeenas takbaroo law laaa antum lakunnaa mu'mineen
और जो लोग काफिर हों बैठे कहते हैं कि हम तो न इस क़ुरान पर हरगिज़ ईमान लाएँगे और न उस (किताब) पर जो इससे पहले नाज़िल हो चुकी और (ऐ रसूल तुमको बहुत ताज्जुब हो) अगर तुम देखो कि जब ये ज़ालिम क़यामत के दिन अपने परवरदिगार के सामने खड़े किए जायेंगे (और) उनमें का एक दूसरे की तरफ (अपनी) बात को फेरता होगा कि कमज़ोर अदना (दरजे के) लोग बड़े (सरकश) लोगों से कहते होगें कि अगर तुम (हमें) न (बहकाए) होते तो हम ज़रूर ईमानवाले होते (इस मुसीबत में न पड़ते)
Qaalal lazeenas takbaroo lillazeenas tud'ifooo anahnu sadadnaakum 'anil hudaa ba'da iz jaaa'akum bal kuntum mujrimeen
तो सरकश लोग कमज़ोरों से (मुख़ातिब होकर) कहेंगे कि जब तुम्हारे पास (खुदा की तरफ़ से) हिदायत आयी तो थी तो क्या उसके आने के बाद हमने तुमको (ज़बरदस्ती अम्ल करने से) रोका था (हरगिज़ नहीं) बल्कि तुम तो खुद मुजरिम थे
Wa qaalal lazeenastud'ifoo lillazeenas takbaroo bal makrul laili wannahaari iz taamuroonanaaa an nakfura billaahi wa naj'ala lahooo andaadaa; wa asarrun nadaamata lammaa ra awul 'azaab; wa ja'alnal aghlaala feee a'naaqil lazeena kafaroo; hal yujzawna illaa maa kanoo ya'maloon
और कमज़ोर लोग बड़े लोगों से कहेंगे (कि ज़बरदस्ती तो नहीं की मगर हम खुद भी गुमराह नहीं हुए) बल्कि (तुम्हारी) रात-दिन की फरेबदेही ने (गुमराह किया कि) तुम लोग हमको खुदा न मानने और उसका शरीक ठहराने का बराबर हुक्म देते रहे (तो हम क्या करते) और जब ये लोग अज़ाब को (अपनी ऑंखों से) देख लेंगे तो दिल ही दिल में पछताएँगे और जो लोग काफिर हो बैठे हम उनकी गर्दनों में तौक़ डाल देंगे जो कारस्तानियां ये लोग (दुनिया में) करते थे उसी के मुवाफिक़ तो सज़ा दी जाएगी
Wa maaa amwaalukum wa laaa awlaadukum billatee tuqarribukum 'indanaa zulfaaa illaa man aamana wa 'amila saalihan fa ulaaa'ika lahum jazaaa'ud di'fi bimaa 'amiloo wa hum fil ghurufaati aaminoon
और (याद रखो) तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद की ये हस्ती नहीं कि तुम को हमारी बारगाह में मुक़र्रिब बना दें मगर (हाँ) जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए उन लोगों के लिए तो उनकी कारगुज़ारियों की दोहरी जज़ा है और वह लोग (बेहश्त के) झरोखों में इत्मेनान से रहेंगे
Qul inna Rabbee yabsutur rizqa limai yashaaa'u min 'ibaadihee wa yaqdiru lah; wa maaa anfaqtum min shai'in fahuwa yukhlifuhoo wa Huwa khairur raaziqeen
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है और जो कुछ भी तुम लोग (उसकी राह में) ख़र्च करते हो वह उसका ऐवज देगा और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देनेवाला है
Wa yawma yahshuruhum jamee'an summa yaqoolu lilmalaaa'ikati a-haaa'ulaaa'i iyyaakum kaanoo ya'budoon
और (वह दिन याद करो) जिस दिन सब लोगों को इकट्ठा करेगा फिर फरिश्तों से पूछेगा कि क्या ये लोग तुम्हारी परसतिश करते थे फरिश्ते अर्ज़ करेंगे (बारे इलाहा) तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है
तब (खुदा फरमाएगा) आज तो तुममें से कोई न दूसरे के फायदे ही पहुँचाने का इख्तेयार रखता है और न ज़रर का और हम सरकशों से कहेंगे कि (आज) उस अज़ाब के मज़े चखो जिसे तुम (दुनिया में) झुठलाया करते थे
Wa izaa tutlaa 'alaihim Aayaatunaa baiyinaatin qaaloo maa haazaa illaa rajuluny yureedu ai-yasuddakum 'ammaa kaana ya'budu aabaaa'ukum wa qaaloo maa haazaaa illaaa ifkum muftaraa; wa qaalal lazeena kafaroo lilhaqqi lammaa jaaa'ahum in haazaaa illaa sihrum mubeen
और जब उनके सामने हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें पढ़ी जाती थीं तो बाहम कहते थे कि ये (रसूल) भी तो बस (हमारा ही जैसा) आदमी है ये चाहता है कि जिन चीज़ों को तुम्हारे बाप-दादा पूजते थे (उनकी परसतिश) से तुम को रोक दें और कहने लगे कि ये (क़ुरान) तो बस निरा झूठ है और अपने जी का गढ़ा हुआ है और जो लोग काफ़िर हो बैठो जब उनके पास हक़ बात आयी तो उसके बारे में कहने लगे कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
Wa maaa aatainaahum min Kutubiny yadrusoonahaa wa maaa arsalnaaa ilaihim qablaka min nazeer
और (ऐ रसूल) हमने तो उन लोगों को न (आसमानी) किताबें अता की तुम्हें जिन्हें ये लोग पढ़ते और न तुमसे पहले इन लोगों के पास कोई डरानेवाला (पैग़म्बर) भेजा (उस पर भी उन्होंने क़द्र न की)
Wa kazzabal lazeena min qablihim wa maa balaghoo mi'shaara maaa aatainaahum fakazzaboo Rusulee; fakaifa kaana nakeer
और जो लोग उनसे पहले गुज़र गए उन्होंने भी (पैग़म्बरों को) झुठलाया था हालॉकि हमने जितना उन लोगों को दिया था ये लोग (अभी) उसके दसवें हिस्सा को (भी) नहीं पहुँचे उस पर उन लोगों न मेरे (पैग़म्बरों को) झुठलाया था तो तुमने देखा कि मेरा (अज़ाब उन पर) कैसा सख्त हुआ
Qul innamaaa a'izukum biwaahidatin an taqoomoo lillaahi masnaa wa furaadaa summa tatafakkaroo; maa bisaahibikum min jinnah; in huwa illaa nazeerul lakum baina yadai 'azaabin shadeed
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुमसे नसीहत की बस एक बात कहता हूँ (वह) ये (है) कि तुम लोग बाज़ खुदा के वास्ते एक-एक और दो-दो उठ खड़े हो और अच्छी तरह ग़ौर करो तो (देख लोगे कि) तुम्हारे रफीक़ (मोहम्मद स0) को किसी तरह का जुनून नहीं वह तो बस तुम्हें एक सख्त अज़ाब (क़यामत) के सामने (आने) से डराने वाला है
Qul maa sa-altukum min ajrin fahuwa lakum in ajriya illaa 'alal laahi wa Huwa 'alaa kullin shai-in Shaheed
(ऐ रसूल) तुम (ये भी) कह दो कि (तबलीख़े रिसालत की) मैंने तुमसे कुछ उजरत माँगी हो तो वह तुम्हीं को (मुबारक) हो मेरी उजरत तो बस खुदा पर है और वही (तुम्हारे आमाल अफआल) हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
Qul in dalaltu fainnamaaa adillu 'alaa nafsee wa inih-tadaitu fabimaa yoohee ilaiya Rabbee; innahoo Samee'un Qareeb
(ऐ रसूल) तुम ये भी कह दो कि अगर मैं गुमराह हो गया हूँ तो अपनी ही जान पर मेरी गुमराही (का वबाल) है और अगर मैं राहे रास्त पर हूँ तो इस ''वही'' के तुफ़ैल से जो मेरा परवरदिगार मेरी तरफ़ भेजता है बेशक वह सुनने वाला (और बहुत) क़रीब है
Wa qaloo aamannaa bihee wa annaa lahumut tanaawushu mim makaanim ba'eed
और आस ही पास से (बाआसानी) गिरफ्तार कर लिए जाएँगे और (उस वक्त बेबसी में) कहेंगे कि अब हम रसूलों पर ईमान लाए और इतनी दूर दराज़ जगह से (ईमान पर) उनका दसतरस (पहुँचना) कहाँ मुमकिन है
Wa heela bainahum wa baina maa yashtahoona kamaa fu'ila bi-ashyaa'ihim min qabl; innahum kaanoo fee shakkim mureeb
और अब तो उनके और उनकी तमन्नाओं के दरमियान (उसी तरह) पर्दा डाल दिया गया है जिस तरह उनसे पहले उनके हमरंग लोगों के साथ (यही बरताव) किया जा चुका इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए थे