Yas'aloonaka 'anil anfaali qulil anfaalu lillaahi war Rasooli fattaqul laaha wa ahlihoo zaata bainikum wa atee'ul laaha wa Rasoolahooo in kuntum mu'mineen
(ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे में पूछा करते हैं तुम कह दो कि अनफाल मख़सूस ख़ुदा और रसूल के वास्ते है तो ख़ुदा से डरो (और) अपने बाहमी (आपसी) मामलात की इसलाह करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो
Innamal mu'minoonal lazeena izaa zukiral laahu wajilat quloobuhum wa izaa tuliyat 'alaihim Aayaatuhoo zaadat hum eemaananw wa 'alaa Rabbihim yatawakkaloon
सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके सामने) ख़ुदा का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल हिल जाते हैं और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनके ईमान को और भी ज्यादा कर देती हैं और वह लोग बस अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं
Ulaaa'ika humul mu'minoona haqqaa; lahum darajaatun 'inda Rabbihim wa magh firatunw wa rizqun kareem
यही तो सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के लिए उनके परवरदिगार के हॉ (बड़े बड़े) दरजे हैं और बख्शिश और इज्ज़त और आबरू के साथ रोज़ी है (ये माले ग़नीमत का झगड़ा वैसा ही है)
Yujaadiloonaka fil haqqi ba'da maa tabaiyana kaannamaa yasaaqoona ilal mawti wa hum uanzuroon
कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी तुमसे (ख्वाह माख्वाह) सच्ची बात में झगड़तें थें और इस तरह (करने लगे) गोया (ज़बरदस्ती) मौत के मुँह में ढकेले जा रहे हैं
Wa iz ya'idukumul laahu ihdat taaa'ifataini annahaa lakum wa tawaddoona anna ghaira zaatish shawkati takoonu lakum wa yureedul laahu ai yuhiqqal haqqa bikalimaatihee wa taqta'a daabiral kaafireen
और उसे (अपनी ऑंखों से) देख रहे हैं और (ये वक्त था) जब ख़ुदा तुमसे वायदा कर रहा था कि (कुफ्फार मक्का) दो जमाअतों में से एक तुम्हारे लिए ज़रूरी हैं और तुम ये चाहते थे कि कमज़ोर जमाअत तुम्हारे हाथ लगे (ताकि बग़ैर लड़े भिड़े माले ग़नीमत हाथ आ जाए) और ख़ुदा ये चाहता था कि अपनी बातों से हक़ को साबित (क़दम) करें और काफिरों की जड़ काट डाले
Wa maa ja'alahul laahu illaa bushraa wa litatma'inna bihee quloobukum; wa man nasru illaa min 'indil laah; innal laaha Azeezun Hakeem
और (ये इमदाद ग़ैबी) ख़ुदा ने सिर्फ तुम्हारी ख़ातिर (खुशी) के लिए की थी और तुम्हारे दिल मुतमइन हो जाएं और (याद रखो) मदद ख़ुदा के सिवा और कहीं से (कभी) नहीं होती बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
Iz yughashsheekumun nu'assa amanatam minhu wa yunazzilu 'alaikum minas samaaa'i maaa'al liyutah hirakum bihee wa yuzhiba 'ankum rijzash Shaitaani wa liyarbita 'ala quloobikum wa yusabbita bihil aqdaam
ये वह वक्त था जब अपनी तरफ से इत्मिनान देने के लिए तुम पर नींद को ग़ालिब कर रहा था और तुम पर आसमान से पानी बरस रहा था ताकि उससे तुम्हें पाक (पाकीज़ा कर दे और तुम से शैतान की गन्दगी दूर कर दे और तुम्हारे दिल मज़बूत कर दे और पानी से (बालू जम जाए) और तुम्हारे क़दम ब क़दम (अच्छी तरह) जमाए रहे
(ऐ रसूल ये वह वक्त था) जब तुम्हारा परवरदिगार फ़रिश्तों से फरमा रहा था कि मै यकीनन तुम्हारे साथ हूँ तुम ईमानदारों को साबित क़दम रखो मै बहुत जल्द काफिरों के दिलों में (तुम्हारा रौब) डाल दूँगा (पस फिर क्या है अब) तो उन कुफ्फार की गर्दनों पर मारो और उनकी पोर पोर को चटिया कर दो
Zaalika bi annahum shaaaqqul laaha wa Rasoolah; wa mai yushaqiqil laaha wa Rasoolahoo fa innal laaha shadeedul 'iqaab
ये (सज़ा) इसलिए है कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालिफ की और जो शख़्स (भी) ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालफ़त करेगा तो (याद रहें कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
Wa mai yuwallihim yawma'izin duburahooo illaa mutaharrifal liqitaalin aw mutahaiyizan ilaa fi'atin faqad baaa'a bighadabim minal laahi wa maawaahu Jahannamu wa bi'sal maseer
(याद रहे कि) उस शख़्स के सिवा जो लड़ाई वास्ते कतराए या किसी जमाअत के पास (जाकर) मौके पाए (और) जो शख़्स भी उस दिन उन कुफ्फ़ार की तरफ पीठ फेरेगा वह यक़ीनी (हिर फिर के) ख़ुदा के ग़जब में आ गया और उसका ठिकाना जहन्नुम ही हैं और वह क्या बुरा ठिकाना है
Falam taqtuloohum wa laakinnal laaha qatalahum; wa maa ramaita iz ramaita wa laakinnal laaha ramaa; wa liyubliyal mu'mineena minhu balaaa'an hasanaa; innal laaha Samee'un Aleem
और (मुसलमानों) उन कुफ्फ़ार को कुछ तुमने तो क़त्ल किया नही बल्कि उनको तो ख़ुदा ने क़त्ल किया और (ऐ रसूल) जब तुमने तीर मारा तो कुछ तुमने नही मारा बल्कि ख़ुदा ख़ुदा ने तीर मारा और ताकि अपनी तरफ से मोमिनीन पर खूब एहसान करे बेशक ख़ुदा (सबकी) सुनता और (सब कुछ) जानता है
In tastaftihoo faqad jaaa'akumul fathu wa in tantahoo fahuwa khairul lakum wa in ta'oodoo na'ud wa lan tughniya 'ankum fi'atukum shai'anw wa law kasurat wa annal laaha ma'al mu'mineen
(काफ़िर) अगर तुम ये चाहते हो (कि जो हक़ पर हो उसकी) फ़तेह हो (मुसलमानों की) फ़तेह भी तुम्हारे सामने आ मौजूद हुई अब क्या गुरूर बाक़ी है और अगर तुम (अब भी मुख़तलिफ़ इस्लाम) से बाज़ रहो तो तुम्हारे वास्ते बेहतर है और अगर कहीं तुम पलट पड़े तो (याद रहे) हम भी पलट पड़ेगें (और तुम्हें तबाह कर छोड़ देगें) और तुम्हारी जमाअत अगरचे बहुत ज्यादा भी हो हरगिज़ कुछ काम न आएगी और ख़ुदा तो यक़ीनी मामिनीन के साथ है
Wa law 'alimal laahu feehim khairal la asma'ahum; wa law asma'ahum latawallaw wa hum mu'ridoon
और अगर ख़ुदा उनमें नेकी (की बू भी) देखता तो ज़रूर उनमें सुनने की क़ाबलियत अता करता मगर ये ऐसे हैं कि अगर उनमें सुनने की क़ाबिलयत भी देता तो मुँह फेर कर भागते।
Yaaa aiyuhal lazeena aamanus tajeeboo lillaahi wa lir Rasooli izaa da'aakum limaa yuhyeekum wa'lamooo annal laaha yahoolu bainal mar'i wa qalbihee wa anahooo ilaihi tuhsharoon
ऐ ईमानदार जब तुम को हमारा रसूल (मोहम्मद) ऐसे काम के लिए बुलाए जो तुम्हारी रूहानी ज़िन्दगी का बाइस हो तो तुम ख़ुदा और रसूल के हुक्म दिल से कुबूल कर लो और जान लो कि ख़ुदा वह क़ादिर मुतलिक़ है कि आदमी और उसके दिल (इरादे) के दरमियान इस तरह आ जाता है और ये भी समझ लो कि तुम सबके सब उसके सामने हाज़िर किये जाओगे
और उस फितने से डरते रहो जो ख़ास उन्हीं लोगों पर नही पड़ेगा जिन्होने तुम में से ज़ुल्म किया (बल्कि तुम सबके सब उसमें पड़ जाओगे) और यक़ीन मानों कि ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
Wazkurooo iz antum qaleelum mustad 'afoona filardi takhaafoona ai yatakhat tafakumun naasu fa aawaakum wa aiyadakum binasrihee wa razaqakum minat taiyibaati la'allakum tashkuroon
(मुसलमानों वह वक्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के) में बहुत कम और बिल्कुल बेबस थे उससे सहमे जाते थे कि कहीं लोग तुमको उचक न ले जाए तो ख़ुदा ने तुमको (मदीने में) पनाह दी और ख़ास अपनी मदद से तुम्हारी ताईद की और तुम्हे पाक व पाकीज़ा चीज़े खाने को दी ताकि तुम शुक्र गुज़ारी करो
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo in tattaqul laaha yaj'al lakum furqaananw wa yukaffir 'ankum saiyi aatikum wa yaghfir lakum; wallaahu zul fadlil 'azeem
और यक़ीनन ख़ुदा के हॉ बड़ी मज़दूरी है ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़ुदा से डरते रहोगे तो वह तुम्हारे वास्ते इम्तियाज़ पैदा करे देगा और तुम्हारी तरफ से तुम्हारे गुनाह का कफ्फ़ारा क़रार देगा और तुम्हें बख्श देगा और ख़ुदा बड़ा साहब फज़ल (व करम) है
Wa iz yamkuru bikal lazeena kafaroo liyusbitooka aw yaqtulooka aw yukhrijook; wa yamkuroona wa yamkurul laahu wallaahu khairul maakireen
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब कुफ्फ़ार तुम से फरेब कर रहे थे ताकि तुमको क़ैद कर लें या तुमको मार डाले तुम्हें (घर से) निकाल बाहर करे वह तो ये तदबीर (चालाकी) कर रहे थे और ख़ुदा भी (उनके ख़िलाफ) तदबीरकर रहा था
Wa izaa tutlaa 'alaihim Aayaatunaa qaaloo qad sami'naa law nashaaa'u laqulnaa misla haazaaa in haazaaa illaaa asaateerul awwaleen
और ख़ुदा तो सब तदबीरकरने वालों से बेहतर है और जब उनके सामने हमारी आयते पढ़ी जाती हैं तो बोल उठते हैं कि हमने सुना तो लेकिन अगर हम चाहें तो यक़ीनन ऐसा ही (क़रार) हम भी कह सकते हैं-तो बस अगलों के क़िस्से है
Wa iz qaalul laahumma in kaana haazaa huwal haqqa min 'indika fa amtir 'alainaa hijaaratam minas samaaa'i awi'tinaa bi 'azaabin alaeem
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब उन काफिरों ने दुआएँ माँगीं थी कि ख़ुदा (वन्द) अगर ये (दीन इस्लाम) हक़ है और तेरे पास से (आया है) तो हम पर आसमान से पत्थर बरसा या हम पर कोई और दर्दनाक अज़ाब ही नाज़िल फरमा
Wa maa kanal laahu liyu'az zibahum wa anta feehim; wa maa kaanal laahu mu'az zibahum wa hum yastaghfiroon
हालॉकि जब तक तुम उनके दरमियान मौजूद हो ख़ुदा उन पर अज़ाब नहीं करेगा और अल्लाह ऐसा भी नही कि लोग तो उससे अपने गुनाहो की माफी माँग रहे हैं और ख़ुदा उन पर नाज़िल फरमाए
Wa maa lahum allaa yu'az zibahumul laahu wa hum yasuddoona 'anil Masjidil-Haraami wa maa kaanooo awliyaaa'ah; in awliyaaa' uhooo illal muttaqoona wa laakinna aksarahum laa ya'lamoon
और जब ये लोग लोगों को मस्जिदुल हराम (ख़ान ए काबा की इबादत) से रोकते है तो फिर उनके लिए कौन सी बात बाक़ी है कि उन पर अज़ाब न नाज़िल करे और ये लोग तो ख़ानाए काबा के मुतवल्ली भी नहीं (फिर क्यों रोकते है) इसके मुतवल्ली तो सिर्फ परहेज़गार लोग हैं मगर इन काफ़िरों में से बहुतेरे नहीं जानते
इसमें शक़ नहीं कि ये कुफ्फार अपने माल महज़ इस वास्ते खर्च करेगें फिर उसके बाद उनकी हसरत का बाइस होगा फिर आख़िर ये लोग हार जाएँगें और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया (क़यामत में) सब के सब जहन्नुम की तरफ हाके जाएँगें
Qul lillazeena kafarooo iny yantahoo yughfar lahum maa qad salafa wa iny ya'oodoo faqad madat sunnatul awwaleen
(ऐ रसूल) तुम काफिरों से कह दो कि अगर वह लोग (अब भी अपनी शरारत से) बाज़ रहें तो उनके पिछले कुसूर माफ कर दिए जाएं और अगर फिर कहीं पलटें तो यक़ीनन अगलों के तरीक़े गुज़र चुके जो, उनकी सज़ा हुई वही इनकी भी होगी
Wa qaatiloohum hattaa laa takoona fitnatunw wa yakoonaddeenu kulluhoo lillaah; fainin tahaw fa innallaaha bimaa ya'maloona Baseer
मुसलमानों काफ़िरों से लड़े जाओ यहाँ तक कि कोई फसाद (बाक़ी) न रहे और (बिल्कुल सारी ख़ुदाई में) ख़ुदा की दीन ही दीन हो जाए फिर अगर ये लोग (फ़साद से) न बाज़ आएं तो ख़ुदा उनकी कारवाइयों को ख़ूब देखता है
Wa'lamooo annamaa ghanimtum min sha'in fa anna lillaahi khumusahoo wa lir Rasooli wa lizil qurba walyataamaa walmasaakeeni wabnis sabeeli in kuntum aamantum billaahi wa maaa anzalnaa 'ala 'abdinaa yawmal Furqaani yawmaltaqal jam'aan; wal laahu 'alaa kulli shai'in Qadeer
और जान लो कि जो कुछ तुम (माल लड़कर) लूटो तो उनमें का पॉचवॉ हिस्सा मख़सूस ख़ुदा और रसूल और (रसूल के) क़राबतदारों और यतीमों और मिस्कीनों और परदेसियों का है अगर तुम ख़ुदा पर और उस (ग़ैबी इमदाद) पर ईमान ला चुके हो जो हमने ख़ास बन्दे (मोहम्मद) पर फ़ैसले के दिन (जंग बदर में) नाज़िल की थी जिस दिन (मुसलमानों और काफिरों की) दो जमाअतें बाहम गुथ गयी थी और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
Iz antum bil'udwatid dunyaa wa hum bil'udwatil quswaa warrakbu asfala minkum; wa law tawaa'attum lakhtalaftum fil mee'aadi wa laakil liyaqdiyal laahu amran kaana maf'oolal liyahlika man halaka 'am baiyinatinw wa yahyaa man haiya 'am baiyinah; wa innal laaha la Samee'un 'Aleem
(ये वह वक्त था) जब तुम (मैदाने जंग में मदीने के) क़रीब नाके पर थे और वह कुफ्फ़ार बईद (दूर के) के नाके पर और (काफ़िले के) सवार तुम से नशेब में थे और अगर तुम एक दूसरे से (वक्त क़ी तक़रीर का) वायदा कर लेते हो तो और वक्त पर गड़बड़ कर देते मगर (ख़ुदा ने अचानक तुम लोगों को इकट्ठा कर दिया ताकि जो बात यदनी (होनी) थी वह पूरी कर दिखाए ताकि जो शख़्स हलाक (गुमराह) हो वह (हक़ की) हुज्जत तमाम होने के बाद हलाक हो और जो ज़िन्दा रहे वह हिदायत की हुज्जत तमाम होने के बाद ज़िन्दा रहे और ख़ुदा यक़ीनी सुनने वाला ख़बरदार है
Iz yureekahumul laahu fee manaamika qaleela; wa law araakahum kaseeral lafashiltum wa latanaaza'tum fil amri wa laakinnal laaha sallam; innahoo 'aleemum bizaatis sudoor
(ये वह वक्त था) जब ख़ुदा ने तुम्हें ख्वाब में कुफ्फ़ार को कम करके दिखलाया था और अगर उनको तुम्हें ज्यादा करते दिखलाता तुम यक़ीनन हिम्मत हार देते और लड़ाई के बारे में झगड़ने लगते मगर ख़ुदा ने इसे (बदनामी) से बचाया इसमें तो शक़ ही नहीं कि वह दिली ख्यालात से वाक़िफ़ है
Wa iz yureekumoohum izil taqaitum feee a'yunikum qaleelanw wa yuqallilukum feee a'yunihim liyaqdiyal laahu amran kaana maf'oolaa; wa ilal laahi turja'ul umoor
(ये वह वक्त था) जब तुम लोगों ने मुठभेड़ की तो ख़ुदा ने तुम्हारी ऑखों में कुफ्फ़ार को बहुत कम करके दिखलाया और उनकी ऑखों में तुमको थोड़ा कर दिया ताकि ख़ुदा को जो कुछ करना मंज़ूर था वह पूरा हो जाए और कुल बातों का दारोमदार तो ख़ुदा ही पर है
Wa atee'ul laaha wa Rasoolahoo wa laa tanaaza'oo fatafshaloo wa tazhaba reehukum wasbiroo; innal laaha ma'as saabireen
और ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो और आपस में झगड़ा न करो वरना तुम हिम्मत हारोगे और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी और (जंग की तकलीफ़ को) झेल जाओ (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनन सब्र करने वालों का साथी है
Wa laa takoonoo kallazeena kharajoo min diyaarihim bataranw wa ri'aaa'an naasi wa yasuddoona 'an sabeelil laah; wallaahu bimaa ya'maloona muheet
और उन लोगों के ऐसे न हो जाओ जो इतराते हुए और लोगों के दिखलाने के वास्ते अपने घरों से निकल खड़े हुए और लोगों को ख़ुदा की राह से रोकते हैं और जो कुछ भी वह लोग करते हैं ख़ुदा उस पर (हर तरह से) अहाता किए हुए है
Wa iz zaiyana lahumush shaitaanu a'ma alahum wa qaala laa ghaaliba lakumul yawma minan naasi wa innee jaarul lakum falammaa taraaa'atil fi'ataani nakasa 'alaa aqibaihi wa qaala innee bareee'um minkum innee araa maa laa tarawna inneee akhaaful laah; wallaahu shadeedul 'iqaab
और जब शैतान ने उनकी कारस्तानियों को उम्दा कर दिखाया और उनके कान में फूंक दिया कि लोगों में आज कोई ऐसा नहीं जो तुम पर ग़ालिब आ सके और मै तुम्हारा मददगार हूं फिर जब दोनों लश्कर मुकाबिल हुए तो अपने उलटे पॉव भाग निकला और कहने लगा कि मै तो तुम से अलग हूं मै वह चीजें देख रहा हूं जो तुम्हें नहीं सूझती मैं तो ख़ुदा से डरता हूं और ख़ुदा बहुत सख्त अज़ाब वाला है
Iz yaqoolul munaafiqoona wallazeena fee quloobihim maradun gharra haaa'ulaaa'i deenuhum; wa mai yatawakkal 'alal laahi fa innal laaha 'azee zun Hakeem
(ये वक्त था) जब मुनाफिक़ीन और जिन लोगों के दिल में (कुफ्र का) मर्ज़ है कह रहे थे कि उन मुसलमानों को उनके दीन ने धोके में डाल रखा है (कि इतराते फिरते हैं हालॉकि जो शख़्स ख़ुदा पर भरोसा करता है (वह ग़ालिब रहता है क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनन ग़ालिब और हिकमत वाला है
Kadaabi Aali Fir'awna wal lazeena min qablihim; kafaroo bi Aayaatil laahi fa akhazahu mul laahu bizunoobihim; innal laaha qawiyyun shadeedul 'iqaab
(उन लोगों की हालत) क़ौमे फिरऔन और उनके लोगों की सी है जो उन से पहले थे और ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे तो ख़ुदा ने भी उनके गुनाहों की वजह से उन्हें ले डाला बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त और बहुत सख्त अज़ाब देने वाला है
Zaalika bi annal laaha lam yaku mughaiyiran ni matan an'amahaa 'alaa qawmin hattaa yughaiyiroo maa bianfusihim wa annallaaha samee un 'Aleem
ये सज़ा इस वजह से (दी गई) कि जब कोई नेअमत ख़ुदा किसी क़ौम को देता है तो जब तक कि वह लोग ख़ुद अपनी कलबी हालत (न) बदलें ख़ुदा भी उसे नहीं बदलेगा और ख़ुदा तो यक़ीनी (सब की सुनता) और सब कुछ जानता है
Kadaabi Aali Fir'awna wallazeena min qablihim; kazzaboo bi Aayaati Rabbihim faahlaknaahum bizunoobihim wa aghraqnaa Aala Fir'awn; wa kullun kaanoo zaalimeen
(उन लोगों की हालत) क़ौम फिरऔन और उन लोगों की सी है जो उनसे पहले थे और अपने परवरदिगार की आयतों को झुठलाते थे तो हमने भी उनके गुनाहों की वजह से उनको हलाक़ कर डाला और फिरऔन की क़ौम को डुबा मारा और (ये) सब के सब ज़ालिम थे
Fa immaa tasqafannahum fil harbi fasharrid bihim man khalfahum la'allahum yazzakkaroon
तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हाथे चढ़ जाएँ तो (ऐसी सख्त गोश्माली दो कि) उनके साथ साथ उन लोगों का तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हत्थे चढ़ जाएं तो (ऐसी सजा दो की) उनके साथ उन लोगों को भी तितिर बितिर कर दो जो उन के पुश्त पर हो ताकि ये इबरत हासिल करें
Wa immaa takhaafana min qawmin khiyaanatan fambiz ilaihim 'alaa sawaaa'; innal laaha laayuhibbul khaaa'ineen
और अगर तुम्हें किसी क़ौम की ख्यानत (एहद शिकनी(वादा ख़िलाफी)) का ख़ौफ हो तो तुम भी बराबर उनका एहद उन्हीं की तरफ से फेंक मारो (एहदो शिकन के साथ एहद शिकनी करो ख़ुदा हरगिज़ दग़ाबाजों को दोस्त नहीं रखता
Wa a'iddoo lahum mastata'tum min quwwatinw wa mirribaatil khaili turhiboona bihee 'aduwwal laahi wa 'aduwwakum wa aakhareena min doonihim laa ta'lamoo nahum Allaahu ya'lamuhum; wa maa tunfiqoo min shai'in fee sabeelil laahi yuwaf failaikum wa antum laa tuzlamoon
और (मुसलमानों तुम कुफ्फार के मुकाबले के) वास्ते जहाँ तक तुमसे हो सके (अपने बाज़ू के) ज़ोर से और बॅधे हुए घोड़े से लड़ाई का सामान मुहय्या करो इससे ख़ुदा के दुश्मन और अपने दुश्मन और उसके सिवा दूसरे लोगों पर भी अपनी धाक बढ़ा लेगें जिन्हें तुम नहीं जानते हो मगर ख़ुदा तो उनको जानता है और ख़ुदा की राह में तुम जो कुछ भी ख़र्च करोगें वह तुम पूरा पूरा भर पाओगें और तुम पर किसी तरह ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
Wa iny yureedooo any-yakhda'ooka fainna hasbakal laah; Huwal lazeee aiyadaka binasrihee wa bilmu'mineen
और अगर वह लोग तुम्हें फरेब देना चाहे तो (कुछ परवा नहीं) ख़ुदा तुम्हारे वास्ते यक़ीनी काफी है-(ऐ रसूल) वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने अपनी ख़ास मदद और मोमिनीन से तुम्हारी ताईद की
Wa allafa baina quloobihim; law anfaqta maa fil ardi jamee'am maaa allafta baina quloobihim wa laakinnallaaha allafa bainahum; innaahoo 'Azeezun Hakeem
और उसी ने उन मुसलमानों के दिलों में बाहम ऐसी उलफ़त पैदा कर दी कि अगर तुम जो कुछ ज़मीन में है सब का सब खर्च कर डालते तो भी उनके दिलो में ऐसी उलफ़त पैदा न कर सकते मगर ख़ुदा ही था जिसने बाहम उलफत पैदा की बेशक वह ज़बरदस्त हिक़मत वाला है
ऐ रसूल तुम मोमिनीन को जिहाद के वास्ते आमादा करो (वह घबराए नहीं ख़ुदा उनसे वायदा करता है कि) अगर तुम लोगों में के साबित क़दम रहने वाले बीस भी होगें तो वह दो सौ (काफिरों) पर ग़ालिब आ जायेगे और अगर तुम लोगों में से साबित कदम रहने वालों सौ होगें तो हज़ार (काफिरों) पर ग़ालिब आ जाएँगें इस सबब से कि ये लोग ना समझ हैं
Al'aana khaffafal laahu 'ankum wa 'alima anna feekum da'faa; fa-iny yakum minkum mi'atun saabiratuny yaghliboo mi'atayn; wa iny-yakum minkum alfuny yaghlibooo alfaini bi iznil laah; wallaahu ma'as saabireen
अब ख़ुदा ने तुम से (अपने हुक्म की सख्ती में) तख्फ़ीफ (कमी) कर दी और देख लिया कि तुम में यक़ीनन कमज़ोरी है तो अगर तुम लोगों में से साबित क़दम रहने वाले सौ होगें तो दो सौ (काफ़िरों) पर ग़ालिब रहेंगें और अगर तुम लोगों में से (ऐसे) एक हज़ार होगें तो ख़ुदा के हुक्म से दो हज़ार (काफ़िरों) पर ग़ालिब रहेंगे और (जंग की तकलीफों को) झेल जाने वालों का ख़ुदा साथी है
Maa kaana li Nabiyyin ai yakoona lahooo asraa hatta yuskhina fil ard; tureedoona aradad dunyaa wallaahu yureedul Aakhirah; wallaahu 'Azeezun Hakeem
कोई नबी जब कि रूए ज़मीन पर (काफिरों का) खून न बहाए उसके यहाँ कैदियों का रहना मुनासिब नहीं तुम लोग तो दुनिया के साज़ो सामान के ख्वाहॉ (चाहने वाले) हो औॅर ख़ुदा (तुम्हारे लिए) आख़िरत की (भलाई) का ख्वाहॉ है और ख़ुदा ज़बरदस्त हिकमत वाला है
उसकी सज़ा में तुम पर बड़ा अज़ाब नाज़िल होकर रहता तो (ख़ैर जो हुआ सो हुआ) अब तुमने जो माल ग़नीमत हासिल किया है उसे खाओ (और तुम्हारे लिए) हलाल तय्यब है और ख़ुदा से डरते रहो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
ऐ रसूल जो कैदी तुम्हारे कब्जे में है उनसे कह दो कि अगर तुम्हारे दिलों में नेकी देखेगा तो जो (माल) तुम से छीन लिया गया है उससे कहीं बेहतर तुम्हें अता फरमाएगा और तुम्हें बख्श भी देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
Wa iny-yureedoo khiyaa nataka faqad khaanullaaha min qablu fa amkana minhum; wallaahu 'aleemum Hakeem
और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हिकमत वाला है
Innal lazeena aamanoo wa haajaroo wa jaahadoo bi amwaalihim wa anfusihim fee sabeelil laahi wallazeena aawaw wa nasarooo ulaaa'ika ba'duhum awliyaaa'u ba'd; wallazeena aamanoo wa lam yuhaajiroo maa lakum minw walaayatihim min shai'in hatta yuhaajiroo; wa inistan sarookum fid deeni fa'alaiku munnasru illaa 'alaa qawmim bainakum wa bainahum meesaaq; wallaahu bimaa ta'maloona Baseer
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और अपने अपने जान माल से ख़ुदा की राह में जिहाद किया और जिन लोगों ने (हिजरत करने वालों को जगह दी और हर (तरह) उनकी ख़बर गीरी (मदद) की यही लोग एक दूसरे के (बाहम) सरपरस्त दोस्त हैं और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत नहीं की तो तुम लोगों को उनकी सरपरस्ती से कुछ सरोकार नहीं-यहाँ तक कि वह हिजरत एख्तियार करें और (हॉ) मगर दीनी अम्र में तुम से मदद के ख्वाहॉ हो तो तुम पर (उनकी मदद करना लाज़िम व वाजिब है मगर उन लोगों के मुक़ाबले में (नहीं) जिनमें और तुममें बाहम (सुलह का) एहदो पैमान है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा (सबको) देख रहा है
Wallazeena aamanoo wa haajaroo wa jaahadoo fee sabeelil laahi wallazeena aawaw wa nasarooo ulaaa'ika humul mu'minoona haqqaa; lahum maghfiratunw wa rizqun kareem
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और ख़ुदा की राह में लड़े भिड़े और जिन लोगों ने (ऐसे नाज़ुक वक्त में मुहाजिरीन को जगह ही और उनकी हर तरह ख़बरगीरी (मदद) की यही लोग सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के वास्ते मग़फिरत और इज्ज़त व आबरु वाली रोज़ी है
Wallazeena aamanoo mim ba'du wa haajaroo wa jaahadoo ma;akum faulaaa'ika minkum; wa ulul arhaami baduhum awlaa biba'din fee Kitaabil laah; innal laaha bikulli shai'in 'Aleem
और जिन लोगों ने (सुलह हुदैबिया के) बाद ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और तुम्हारे साथ मिलकर जिहाद किया वह लोग भी तुम्हीं में से हैं और साहबाने क़राबत ख़ुदा की किताब में बाहम एक दूसरे के (बनिस्बत औरों के) ज्यादा हक़दार हैं बेशक ख़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ हैं