तो (ऐ मुशरिकों) बस तुम चार महीने (ज़ीकादा, जिल हिज्जा, मुहर्रम रजब) तो (चैन से बेख़तर) रूए ज़मीन में सैरो सियाहत (घूम फिर) कर लो और ये समझते रहे कि तुम (किसी तरह) ख़ुदा को आजिज़ नहीं कर सकते और ये भी कि ख़ुदा काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहेगा
Wa azaanum minal laahi wa Rasooliheee ilan naasi yawmal Hajjil Akbari annal laaha bareee'um minal mushrikeena wa Rasooluh; fa-in tubtum fahuwa khairullakum wa in tawallaitum fa'lamooo annakum ghairu mu'jizil laah; wa bashiril lazeena kafaroo biazaabin aleem
और ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ से हज अकबर के दिन (तुम) लोगों को मुनादी की जाती है कि ख़ुदा और उसका रसूल मुशरिकों से बेज़ार (और अलग) है तो (मुशरिकों) अगर तुम लोगों ने (अब भी) तौबा की तो तुम्हारे हक़ में यही बेहतर है और अगर तुम लोगों ने (इससे भी) मुंह मोड़ा तो समझ लो कि तुम लोग ख़ुदा को हरगिज़ आजिज़ नहीं कर सकते और जिन लोगों ने कुफ्र इख्तेयार किया उनको दर्दनाक अज़ाब की ख़ुश ख़बरी दे दो
मगर (हाँ) जिन मुशरिकों से तुमने एहदो पैमान किया था फिर उन लोगों ने भी कभी कुछ तुमसे (वफ़ा एहद में) कमी नहीं की और न तुम्हारे मुक़ाबले में किसी की मदद की हो तो उनके एहद व पैमान को जितनी मुद्द्त के वास्ते मुक़र्रर किया है पूरा कर दो ख़ुदा परहेज़गारों को यक़ीनन दोस्त रखता है
Fa izansalakhal Ashhurul Hurumu faqtulul mushrikeena haisu wajattumoohum wa khuzoohum wahsuroohum qaq'udoo lahum kulla marsad; fa-in taaboo wa aqaamus Salaata wa aatawuz Zakaata fakhalloo sabeelahum; innal laaha Ghafoorur Raheem
फिर जब हुरमत के चार महीने गुज़र जाएँ तो मुशरिकों को जहाँ पाओ (बे ताम्मुल) कत्ल करो और उनको गिरफ्तार कर लो और उनको कैद करो और हर घात की जगह में उनकी ताक में बैठो फिर अगर वह लोग (अब भी शिर्क से) बाज़ आऎं और नमाज़ पढ़ने लगें और ज़कात दे तो उनकी राह छोड़ दो (उनसे ताअरूज़ न करो) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
Wa in ahadum minal mushrikeenas tajaaraka fa ajirhu hattaa yasma'a Kalaamal laahi summa ablighhu maa manah; zaalika bi annahum qawmul laa ya'lamoon
और (ऐ रसूल) अगर मुशरिकीन में से कोई तुमसे पनाह मागें तो उसको पनाह दो यहाँ तक कि वह ख़ुदा का कलाम सुन ले फिर उसे उसकी अमन की जगह वापस पहुँचा दो ये इस वजह से कि ये लोग नादान हैं
(जब) मुशरिकीन ने ख़ुद एहद शिकनी (तोड़ा) की तो उन का कोई एहदो पैमान ख़ुदा के नज़दीक और उसके रसूल के नज़दीक क्योंकर (क़ायम) रह सकता है मगर जिन लोगों से तुमने खानाए काबा के पास मुआहेदा किया था तो वह लोग (अपनी एहदो पैमान) तुमसे क़ायम रखना चाहें तो तुम भी उन से (अपना एहद) क़ायम रखो बेशक ख़ुदा (बद एहदी से) परहेज़ करने वालों को दोस्त रखता है
Kaifa wa iny-yazharoo 'alaikum laa yarquboo feekum illanw wa laa zimmah; yurdoo nakum biafwaahihim wa taabaa quloobuhum wa aksaruhum faasiqoon
(उनका एहद) क्योंकर (रह सकता है) जब (उनकी ये हालत है) कि अगर तुम पर ग़लबा पा जाएं तो तुम्हारे में न तो रिश्ते नाते ही का लिहाज़ करेगें और न अपने क़ौल व क़रार का ये लोग तुम्हें अपनी ज़बानी (जमा खर्च में) खुश कर देते हैं हालॉकि उनके दिल नहीं मानते और उनमें के बहुतेरे तो बदचलन हैं
Ishtaraw bi Aayaatil laahi samanan qaleelan fasaddoo 'an sabeelih; innahum saaa'a maa kaanoo ya'maloon
और उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फायदे) हासिल करके (लोगों को) उसकी राह से रोक दिया बेशक ये लोग जो कुछ करते हैं ये बहुत ही बुरा है
Fa in taaboo wa aqaamus Salaata wa aatawuz Zakaata fa ikhwaanukum fid deen; wa nufassilul Aayaati liqawminy ya'lamoon
तो अगर (अभी मुशरिक से) तौबा करें और नमाज़ पढ़ने लगें और ज़कात दें तो तुम्हारे दीनी भाई हैं और हम अपनी आयतों को वाक़िफकार लोगों के वास्ते तफ़सीलन बयान करते हैं
Wa in nakasooo aimaanahum mim ba'di 'ahdihim wa ta'anoo fee deenikum faqaatilooo a'immatal kufri innahum laaa aimaana lahum la'allahum yantahoon
और अगर ये लोग एहद कर चुकने के बाद अपनी क़समें तोड़ डालें और तुम्हारे दीन में तुमको ताना दें तो तुम कुफ्र के सरवर आवारा लोगों से खूब लड़ाई करो उनकी क़समें का हरगिज़ कोई एतबार नहीं ताकि ये लोग (अपनी शरारत से) बाज़ आएँ
Alaa tuqaatiloona qawman nakasooo aimaanahum wa hammoo bi ikhraajir Rasooli wa hum bada'ookum awwala marrah; atakhshawnahum; fallaahu ahaqqu an takhshawhu in kuntum mu'mineen
(मुसलमानों) भला तुम उन लोगों से क्यों नहीं लड़ते जिन्होंने अपनी क़समों को तोड़ डाला और रसूल को निकाल बाहर करना (अपने दिल में) ठान लिया था और तुमसे पहले छेड़ भी उन्होनें ही शुरू की थी क्या तुम उनसे डरते हो तो अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा उनसे कहीं बढ़ कर तुम्हारे डरने के क़ाबिल है
Am hasibtum an turakoo wa lammaa ya'lamil laahul lazeena jaahadoo minkum wa lam yattakhizoo min doonil laahi wa laa Rasoolihee wa lalmu'mineena waleejah; wallaahu khabeerum bimaa ta'maloon
क्या तुमने ये समझ लिया है कि तुम (यूं ही) छोड़ दिए जाओगे और अभी तक तो ख़ुदा ने उन लोगों को मुमताज़ किया ही नहीं जो तुम में के (राहे ख़ुदा में) जिहाद करते हैं और ख़ुदा और उसके रसूल और मोमेनीन के सिवा किसी को अपना राज़दार दोस्त नहीं बनाते और जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
maa kaana lilmushrikeena ai ya'muroo masaajidal laahi shaahideena 'alaaa anfusihim bilkufr; ulaaa'ika habitat a'maaluhum wa fin naari hum khaalidoon
मुशरेकीन का ये काम नहीं कि जब वह अपने कुफ़्र का ख़ुद इक़रार करते है तो ख़ुदा की मस्जिदों को (जाकर) आबाद करे यही वह लोग हैं जिनका किया कराया सब अकारत हुआ और ये लोग हमेशा जहन्नुम में रहेंगे
Innamaa ya'muru masaa jidal laahi man aamana billaahi wal Yawmil Aakhiri wa aqaamas Salaata wa aataz Zakaata wa lam yakkhsa illal laaha fa'asaaa ulaaa'ika ai yakoonoo minal muhtadeen
ख़ुदा की मस्जिदों को बस सिर्फ वहीं शख़्स (जाकर) आबाद कर सकता है जो ख़ुदा और रोजे आख़िरत पर ईमान लाए और नमाज़ पढ़ा करे और ज़कात देता रहे और ख़ुदा के सिवा (और) किसी से न डरो तो अनक़रीब यही लोग हिदायत याफ्ता लोगों मे से हो जाऎंगे
क्या तुम लोगों ने हाजियों की सक़ाई (पानी पिलाने वाले) और मस्जिदुल हराम (ख़ानाए काबा की आबादियों को उस शख़्स के हमसर (बराबर) बना दिया है जो ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत के दिन पर ईमान लाया और ख़ुदा के राह में जेहाद किया ख़ुदा के नज़दीक तो ये लोग बराबर नहीं और खुदा ज़ालिम लोगों की हिदायत नहीं करता है
Allazeena aamanoo wa haajaroo wa jaahadoo fee sabeelil laahi bi amwaalihim wa anufsihim a'zamu darajatan 'indal laah; wa ulaaa'ika humul faaa'izoon
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और (ख़ुदा के लिए) हिजरत एख्तियार की और अपने मालों से और अपनी जानों से ख़ुदा की राह में जिहाद किया वह लोग ख़ुदा के नज़दीक दर्जें में कही बढ़ कर हैं और यही लोग (आला दर्जे पर) फायज़ होने वाले हैं
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa tattakhizooo aabaaa 'akum wa ikhwaanakum awliyaaa'a inis tahabbul kufra 'alal eemaan; wa mai yatawal lahum minkum fa ulaaa'ika humuz zaalimoon
ऐ ईमानदारों अगर तुम्हारे माँ बाप और तुम्हारे (बहन) भाई ईमान के मुक़ाबले कुफ़्र को तरजीह देते हो तो तुम उनको (अपना) ख़ैर ख्वाह (हमदर्द) न समझो और तुममें जो शख़्स उनसे उलफ़त रखेगा तो यही लोग ज़ालिम है
Qul in kaana aabaaa'ukum wa abnaaa'ukum wa ikhwaanukum wa azwaajukum wa 'asheeratukum wa amwaaluniq taraftumoohaa wa tijaaratun takhshawna kasaadahaa wa masaakinu tardawnahaaa ahabba ilaikum minal laahi wa Rasoolihee wa Jihaadin fee Sabeelihee fatarabbasoo hattaa yaatiyallaahu bi amrih; wallaahu laa yahdil qawmal faasiqeen
(ऐ रसूल) तुम कह दो तुम्हारे बाप दादा और तुम्हारे बेटे और तुम्हारे भाई बन्द और तुम्हारी बीबियाँ और तुम्हारे कुनबे वाले और वह माल जो तुमने कमा के रख छोड़ा हैं और वह तिजारत जिसके मन्द पड़ जाने का तुम्हें अन्देशा है और वह मकानात जिन्हें तुम पसन्द करते हो अगर तुम्हें ख़ुदा से और उसके रसूल से और उसकी राह में जिहाद करने से ज्यादा अज़ीज़ है तो तुम ज़रा ठहरो यहाँ तक कि ख़ुदा अपना हुक्म (अज़ाब) मौजूद करे और ख़ुदा नाफरमान लोगों की हिदायत नहीं करता
Laqad nasarakumul laahu fee mawaatina kaseeratinw wa yawma Hunainin iz a'jabatkum kasratukum falam tughni 'ankum shai'anw wa daaqat 'alaikumul ardu bimaa rahubat summa wallaitum mudbireen
(मुसलमानों) ख़ुदा ने तुम्हारी बहुतेरे मक़ामात पर (ग़ैबी) इमदाद की और (ख़ासकर) जंग हुनैन के दिन जब तुम्हें अपनी क़सरत (तादाद) ने मग़रूर कर दिया था फिर वह क़सरत तुम्हें कुछ भी काम न आयी और (तुम ऐसे घबराए कि) ज़मीन बावजूद उस वसअत (फैलाव) के तुम पर तंग हो गई तुम पीठ कर भाग निकले
Summa anzalal laahu sakeenatahoo 'alaa Rasoolihee wa 'alalmu 'mineena wa anzala junoodal lam tarawhaa wa azzabal lazeena kafaroo; wa zaalika jazaaa'ul kaafireen
तब ख़ुदा ने अपने रसूल पर और मोमिनीन पर अपनी (तरफ से) तसकीन नाज़िल फरमाई और (रसूल की ख़ातिर से) फ़रिश्तों के लश्कर भेजे जिन्हें तुम देखते भी नहीं थे और कुफ्फ़ार पर अज़ाब नाज़िल फरमाया और काफिरों की यही सज़ा है
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo innamal mushrikoona najasun falaa yaqrabul Masjidal Haraama ba'da 'aamihim haaza; wa in khiftum 'ailatan fasawfa yughnee kumul laahu min fadliheee in shaaa'; innallaaha 'Aleemun hakeem
ऐ ईमानदारों मुशरेकीन तो निरे नजिस हैं तो अब वह उस साल के बाद मस्जिदुल हराम (ख़ाना ए काबा) के पास फिर न फटकने पाएँ और अगर तुम (उनसे जुदा होने में) फक़रों फाक़ा से डरते हो तो अनकरीब ही ख़ुदा तुमको अगर चाहेगा तो अपने फज़ल (करम) से ग़नीकर देगा बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार हिकमत वाला है
Qaatilul lazeena laa yu'minoona billaahi wa laa bil yawmil Aakhiri wa laa yuharrimoona maa harramal laahu wa Rasooluhoo wa laa yadeenoona deenal haqqi minal lazeena ootul Kitaaba hattaa yu'tul jizyata ai yadinw wa hum saaghiroon
अहले किताब में से जो लोग न तो (दिल से) ख़ुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोज़े आख़िरत पर और न ख़ुदा और उसके रसूल की हराम की हुई चीज़ों को हराम समझते हैं और न सच्चे दीन ही को एख्तियार करते हैं उन लोगों से लड़े जाओ यहाँ तक कि वह लोग ज़लील होकर (अपने) हाथ से जज़िया दे
Q qaalatil yahoodu 'Uzairunib nul laahi wa qaalatin Nasaaral Maseehub nul laahi zaalika qawluhum bi afwaahihim yudaahi'oona qawlal lazeena kafaroo min qabl; qatalahumul laah; annaa yu'fakoon
यहूद तो कहते हैं कि अज़ीज़ ख़ुदा के बेटे हैं और ईसाई कहते हैं कि मसीहा (ईसा) ख़ुदा के बेटे हैं ये तो उनकी बात है और (वह ख़ुद) उन्हीं के मुँह से ये लोग भी उन्हीं काफ़िरों की सी बातें बनाने लगे जो उनसे पहले गुज़र चुके हैं ख़ुदा उनको क़त्ल (तहस नहस) करके (देखो तो) कहाँ से कहाँ भटके जा रहे हैं
ittakhazooo ahbaarahum wa ruhbaanahum arbaabammin doonil laahi wal Maseehab na Maryama wa maaa umirooo illaa liya'budooo Ilaahanw Waa hidan laaa ilaaha illaa Hoo; Subhaanahoo 'ammaa yushrikoon
उन लोगों ने तो अपने ख़ुदा को छोड़कर अपनी आलिमों को और अपने ज़ाहिदों को और मरियम के बेटे मसीह को अपना परवरदिगार बना डाला हालॉकि उन्होनें सिवाए इसके और हुक्म ही नहीं दिया गया कि ख़ुदाए यक़ता (सिर्फ़ ख़ुदा) की इबादत करें उसके सिवा (और कोई क़ाबिले परसतिश नहीं)
Yureedoona ai yutfi'oo nooral laahi bi'afwaahihim wa yaaballaahu illaaa ai yutimma noorahoo wa law karihal kaafiroon
जिस चीज़ को ये लोग उसका शरीक़ बनाते हैं वह उससे पाक व पाक़ीजा है ये लोग चाहते हैं कि अपने मुँह से (फ़ूंक मारकर) ख़ुदा के नूर को बुझा दें और ख़ुदा इसके सिवा कुछ मानता ही नहीं कि अपने नूर को पूरा ही करके रहे
huwal lazeee ar sala Rasoolahoo bilhudaa wa deenil haqqi liyuzhirahoo 'alad deeni kullihee wa law karihal mushrikoon
अगरचे कुफ्फ़ार बुरा माना करें वही तो (वह ख़ुदा) है कि जिसने अपने रसूल (मोहम्मद) को हिदायत और सच्चे दीन के साथ ( मबऊस करके) भेजता कि उसको तमाम दीनो पर ग़ालिब करे अगरचे मुशरेकीन बुरा माना करे
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo inna kaseeramminal ahbaari warruhbaani la yaakuloona amwaalan naasi bil baatili wa yasuddoona 'an sabeelil laah; wallazeena yaknizoonaz zahaba wal fiddata wa laayunfiqoonahaa fee sabeelil laahi fabashshirhum bi'azaabin aleem
ऐ ईमानदारों इसमें उसमें शक़ नहीं कि (यहूद व नसारा के) बहुतेरे आलिम ज़ाहिद लोगों के माल (नाहक़) चख जाते है और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोकते हैं और जो लोग सोना और चाँदी जमा करते जाते हैं और उसको ख़ुदा की राह में खर्च नहीं करते तो (ऐ रसूल) उन को दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशखबरी सुना दो
Yawma yuhmaa 'alaihaa fee naari jahannama fatukwaa bihaa jibaahuhum haazaa maa kanaztum li anfusikum fazooqoo maa kuntum taknizoon
(जिस दिन वह (सोना चाँदी) जहन्नुम की आग में गर्म (और लाल) किया जाएगा फिर उससे उनकी पेशानियाँ और उनके पहलू और उनकी पीठें दाग़ी जाऎंगी (और उनसे कहा जाएगा) ये वह है जिसे तुमने अपने लिए (दुनिया में) जमा करके रखा था तो (अब) अपने जमा किए का मज़ा चखो
इसमें तो शक़ ही नहीं कि ख़ुदा ने जिस दिन आसमान व ज़मीन को पैदा किया (उसी दिन से) ख़ुदा के नज़दीक ख़ुदा की किताब (लौहे महफूज़) में महीनों की गिनती बारह महीने है उनमें से चार महीने (अदब व) हुरमत के हैं यही दीन सीधी राह है तो उन चार महीनों में तुम अपने ऊपर (कुश्त व ख़ून (मार काट) करके) ज़ुल्म न करो और मुशरेकीन जिस तरह तुम से सबके बस मिलकर लड़ते हैं तुम भी उसी तरह सबके सब मिलकर उन से लड़ों और ये जान लो कि ख़ुदा तो यक़ीनन परहेज़गारों के साथ है
महीनों का आगे पीछे कर देना भी कुफ़्र ही की ज्यादती है कि उनकी बदौलत कुफ्फ़ार (और) बहक जाते हैं एक बरस तो उसी एक महीने को हलाल समझ लेते हैं और (दूसरे) साल उसी महीने को हराम कहते हैं ताकि ख़ुदा ने जो (चार महीने) हराम किए हैं उनकी गिनती ही पूरी कर लें और ख़ुदा की हराम की हुई चीज़ को हलाल कर लें उनकी बुरी (बुरी) कारस्तानियॉ उन्हें भली कर दिखाई गई हैं और खुदा काफिर लोगो को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
ऐ ईमानदारों तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि ख़ुदा की राह में (जिहाद के लिए) निकलो तो तुम लदधड़ (ढीले) हो कर ज़मीन की तरफ झुके पड़ते हो क्या तुम आख़िरत के बनिस्बत दुनिया की (चन्द रोज़ा) जिन्दगी को पसन्द करते थे तो (समझ लो कि) दुनिया की ज़िन्दगी का साज़ो सामान (आख़िर के) ऐश व आराम के मुक़ाबले में बहुत ही थोड़ा है
Illaa tanfiroo yu'az zibkum 'azaaban aleemanw wa yastabdil qawman ghairakum wa laa tadurroohu shai'aa; wal laahu 'alaa kulli shai'in Qadeer
अगर (अब भी) तुम न निकलोगे तो ख़ुदा तुम पर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और (ख़ुदा कुछ मजबरू तो है नहीं) तुम्हारे बदले किसी दूसरी क़ौम को ले आएगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
Illaa tansuroohu faqad nasarahul laahu iz akhrajahul lazeena kafaroo saaniyasnaini iz humaa filghaari iz yaqoolu lisaahibihee la tahzan innnal laaha ma'anaa fa anzalallaahu sakeenatahoo 'alaihi wa aiyadahoo bijunoodil lam tarawhaa wa ja'ala kalimatal lazeena kafarus suflaa; wa Kalimatul laahi hiyal 'ulyaa; wallaahu 'Azeezun Hakeem;
अगर तुम उस रसूल की मदद न करोगे तो (कुछ परवाह् नहीं ख़ुदा मददगार है) उसने तो अपने रसूल की उस वक्त मदद की जब उसकी कुफ्फ़ार (मक्का) ने (घर से) निकल बाहर किया उस वक्त सिर्फ (दो आदमी थे) दूसरे रसूल थे जब वह दोनो ग़ार (सौर) में थे जब अपने साथी को (उसकी गिरिया व ज़ारी (रोने) पर) समझा रहे थे कि घबराओ नहीं ख़ुदा यक़ीनन हमारे साथ है तो ख़ुदा ने उन पर अपनी (तरफ से) तसकीन नाज़िल फरमाई और (फ़रिश्तों के) ऐसे लश्कर से उनकी मदद की जिनको तुम लोगों ने देखा तक नहीं और ख़ुदा ने काफिरों की बात नीची कर दिखाई और ख़ुदा ही का बोल बाला है और ख़ुदा तो ग़ालिब हिकमत वाला है
Infiroo khifaafanw wa siqaalanw wa jaahidoo bi amwaalikum wa anfusikum fee sabeelil laah; zaalikum khairul lakum in kuntum ta'lamoon
(मुसलमानों) तुम हलके फुलके (हॅसते) हो या भारी भरकम (मसलह) बहर हाल जब तुमको हुक्म दिया जाए फौरन चल खड़े हो और अपनी जानों से अपने मालों से ख़ुदा की राह में जिहाद करो अगर तुम (कुछ जानते हो तो) समझ लो कि यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
Law kaana 'aradan qareebanw wa safaran qaasidal lattaba'ooka wa laakim ba'udat 'alaihimush shuqqah; wa sayahlifoona billaahi lawis tata'naa lakharajnaa ma'akum; yuhlikoona anfusahum wal laahu ya'lamu innahum lakaa ziboon
(ऐ रसूल) अगर सरे दस्त फ़ायदा और सफर आसान होता तो यक़ीनन ये लोग तुम्हारा साथ देते मगर इन पर मुसाफ़त (सफ़र) की मशक़क़त (सख्ती) तूलानी हो गई और अगर पीछे रह जाने की वज़ह से पूछोगे तो ये लोग फौरन ख़ुदा की क़समें खॉएगें कि अगर हम में सकत होती तो हम भी ज़रूर तुम लोगों के साथ ही चल खड़े होते ये लोग झूठी कसमें खाकर अपनी जान आप हलाक किए डालते हैं और ख़ुदा तो जानता है कि ये लोग बेशक झूठे हैं
'Afal laahu 'anka lima azinta lahum hattaa yatabai yana lakal lazeena sadaqoo wa ta'lamal kaazibeen
(ऐ रसूल) ख़ुदा तुमसे दरगुज़र फरमाए तुमने उन्हें (पीछे रह जाने की) इजाज़त ही क्यों दी ताकि (तुम) अगर ऐसा न करते तो) तुम पर सच बोलने वाले (अलग) ज़ाहिर हो जाते और तुम झूटों को (अलग) मालूम कर लेते
Laa yastaazinukal lazeena yu'minoona billaahi wal Yawmil Aakhiri ai yujaa hidoo bi amwaalihim wa anfusihim; wallaahu 'aleemum bilmut taqeen
(ऐ रसूल) जो लोग (दिल से) ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान रखते हैं वह तो अपने माल से और अपनी जानों से जिहाद (न) करने की इजाज़त मॉगने के नहीं (बल्कि वह ख़ुद जाऎंगे) और ख़ुदा परहेज़गारों से खूब वाक़िफ है
(पीछे रह जाने की) इजाज़त तो बस वही लोग मॉगेंगे जो ख़ुदा और रोजे आख़िरत पर ईमान नहीं रखते और उनके दिल (तरह तरह) के शक़ कर रहे है तो वह अपने शक़ में डावॉडोल हो रहे हैं
Wa law araadul khurooja la-'addoo lahoo 'uddatanw wa laakin karihal laahum bi'aasahum fasabbatahum wa qeelaq 'udoo ma'al qaa'ideen
(कि क्या करें क्या न करें) और अगर ये लोग (घर से) निकलने की ठान लेते तो (कुछ न कुछ सामान तो करते मगर (बात ये है) कि ख़ुदा ने उनके साथ भेजने को नापसन्द किया तो उनको काहिल बना दिया और (गोया) उनसे कह दिया गया कि तुम बैठने वालों के साथ बैठे (मक्खी मारते) रहो
Law kharajoo feekum maa zaadookum ilaa Khabaalanw wa la awda'oo khilaalakum yabghoona kumul fitnata wa feekum sammaa'oona lahum; wallaahu 'aleemum biz zaalimeen
अगर ये लोग तुममें (मिलकर) निकलते भी तो बस तुममे फ़साद ही बरपा कर देते और तुम्हारे हक़ में फ़ितना कराने की ग़रज़ से तुम्हारे दरमियान (इधर उधर) घोड़े दौड़ाते फिरते और तुममें से उनके जासूस भी हैं (जो तुम्हारी उनसे बातें बयान करते हैं) और ख़ुदा शरीरों से ख़ूब वाक़िफ़ है
Laqadib taghawul fitnata min qablu wa qallaboo lakal umoora hattaa jaaa'al haqqu wa zahara amrul laahi wa hum kaarihoon
(ए रसूल) इसमें तो शक़ नहीं कि उन लोगों ने पहले ही फ़साद डालना चाहा था और तुम्हारी बहुत सी बातें उलट पुलट के यहॉ तक कि हक़ आ पहुंचा और ख़ुदा ही का हुक्म ग़ालिब रहा और उनको नागवार ही रहा
Wa minhum mai yaqoolu' zal lee wa laa taftinneee; alaa fil fitnati saqatoo; wa inna Jahannama lamuheetatum bil kaafireen
उन लोगों में से बाज़ ऐसे भी हैं जो साफ कहते हैं कि मुझे तो (पीछे रह जाने की) इजाज़त दीजिए और मुझ बला में न फॅसाइए (ऐ रसूल) आगाह हो कि ये लोग खुद बला में (औंधे मुँह) गिर पड़े और जहन्नुम तो काफिरों का यक़ीनन घेरे हुए ही हैं
in tusibka hasanatun tasu'hum; wa in tusibka museebatuny yaqooloo qad akhaznaaa amranaa min qablu wa yatawallaw wa hum farihoon
तुमको कोई फायदा पहुंचा तो उन को बुरा मालूम होता है और अगर तुम पर कोई मुसीबत आ पड़ती तो ये लोग कहते हैं कि (इस वजह से) हमने अपना काम पहले ही ठीक कर लिया था और (ये कह कर) ख़ुश (तुम्हारे पास से उठकर) वापस लौटतें है
Qul lany-yuseebanaaa illaa maa katabal laahu lanaa Huwa mawlaanaa; wa 'alal laahi falyatawak kalimu 'minoon
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हम पर हरगिज़ कोई मुसीबत पड़ नही सकती मगर जो ख़ुदा ने तुम्हारे लिए (हमारी तक़दीर में) लिख दिया है वही हमारा मालिक है और ईमानदारों को चाहिए भी कि ख़ुदा ही पर भरोसा रखें
Qul hal tarabbasoona binaaa illaaa ihdal husnayayni wa nahnu natrabbasu bikum ai yus eebakumul laahu bi'azaa bim min 'indiheee aw biaidee naa fatarabbasooo innaa ma'akum mutarabbisoon
(ऐ रसूल) तुम मुनाफिकों से कह दो कि तुम तो हमारे वास्ते (फतेह या शहादत) दो भलाइयों में से एक के ख्वाह मख्वाह मुन्तज़िर ही हो और हम तुम्हारे वास्ते उसके मुन्तज़िर हैं कि ख़ुदा तुम पर (ख़ास) अपने ही से कोई अज़ाब नाज़िल करे या हमारे हाथों से फिर (अच्छा) तुम भी इन्तेज़ार करो हम भी तुम्हारे साथ (साथ) इन्तेज़ार करते हैं
Wa maa mana'ahum an tuqbala minhum nafaqaatuhum illaaa annnahum kafaroo billaahi wa bi Rasoolihee wa laa yaatoonas Salaata illaa wa hum kusaalaa wa laa yunfiqoona illaa wa hum kaarihoon
और उनकी ख़ैरात के क़ुबूल किए जाने में और कोई वजह मायने नहीं मगर यही कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की नाफ़रमानी की और नमाज़ को आते भी हैं तो अलकसाए हुए और ख़ुदा की राह में खर्च करते भी हैं तो बे दिली से
Falaa tu'jibka amwaaluhum wa laaa awlaaduhum; innamaa yureedul laahu liyu'az zibahum bihaa fil hayaatid dunyaa wa tazhaqa anfusuhum wa hum kaafiroon
(ऐ रसूल) तुम को न तो उनके माल हैरत में डाले और न उनकी औलाद (क्योंकि) ख़ुदा तो ये चाहता है कि उनको आल व माल की वजह से दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी (ही) में मुबितलाए अज़ाब करे और जब उनकी जानें निकलें तब भी वह काफिर (के काफिर ही) रहें
Wa minhum mai yalmizuka fis sadaqaati fa-in u'too minhaa radoo wa illam yu'taw minhaaa izaa hum yaskhatoon
(ऐ रसूल) उनमें से कुछ तो ऐसे भी हैं जो तुम्हें ख़ैरात (की तक़सीम) में (ख्वाह मा ख्वाह) इल्ज़ाम देते हैं फिर अगर उनमे से कुछ (माक़ूल मिक़दार(हिस्सा)) दे दिया गया तो खुश हो गए और अगर उनकी मर्ज़ी के मुवाफिक़ उसमें से उन्हें कुछ नहीं दिया गया तो बस फौरन ही बिगड़ बैठे
Wa law annahum radoo maaa aataahumul laahu wa Rasooluhoo wa qaaloo hasbunal laahu wayu'teenallaahu min fadlihee wa Rasooluhooo innaaa ilallaahi raaghiboon
और जो कुछ ख़ुदा ने और उसके रसूल ने उनको अता फरमाया था अगर ये लोग उस पर राज़ी रहते और कहते कि ख़ुदा हमारे वास्ते काफी है (उस वक्त नहीं तो) अनक़रीब ही खुदा हमें अपने फज़ल व करम से उसका रसूल दे ही देगा हम तो यक़ीनन अल्लाह ही की तरफ लौ लगाए बैठे हैं
Innamas sadaqaatu lilfuqaraaa'i walmasaakeeni wal 'aamileena 'alaihaa wal mu'al lafati quloobuhum wa fir riqaabi walghaarimeena wa fee sabeelil laahi wabnis sabeeli fareedatam minal laah; wal laahu 'Aleemun Hakeem
(तो उनका क्या कहना था) ख़ैरात तो बस ख़ास फकीरों का हक़ है और मोहताजों का और उस (ज़कात वग़ैरह) के कारिन्दों का और जिनकी तालीफ़ क़लब की गई है (उनका) और (जिन की) गर्दनों में (गुलामी का फन्दा पड़ा है उनका) और ग़द्दारों का (जो ख़ुदा से अदा नहीं कर सकते) और खुदा की राह (जिहाद) में और परदेसियों की किफ़ालत में ख़र्च करना चाहिए ये हुकूक़ ख़ुदा की तरफ से मुक़र्रर किए हुए हैं और ख़ुदा बड़ा वाक़िफ कार हिकमत वाला है
Wa minhumul lazeena yu'zoonan nabiyya wa yaqooloona huwa uzun; qul uzunu khairil lakum yu'minu billaahi wa yu'minu lilmu mi neena wa rahmatul lillazeena aamanoo minkum; wallazeena yu'zoona Rasoolal laahi lahum 'azaabun aleem
और उसमें से बाज़ ऐसे भी हैं जो (हमारे) रसूल को सताते हैं और कहते हैं कि बस ये कान ही (कान) हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (कान तो हैं मगर) तुम्हारी भलाई सुन्ने के कान हैं कि ख़ुदा पर ईमान रखते हैं और मोमिनीन की (बातों) का यक़ीन रखते हैं और तुममें से जो लोग ईमान ला चुके हैं उनके लिए रहमत और जो लोग रसूले ख़ुदा को सताते हैं उनके लिए दर्दनाक अज़ाब हैं
Alam ya'lamooo annahoo mai yuhaadidillaaha wa Rasoolahoo faanna lahoo Naara jahannama khaalidan feehaa; zaalikal khizyul 'Azeem
तो ख़ुदा और उसका रसूल कहीं ज्यादा हक़दार है कि उसको राज़ी रखें क्या ये लोग ये भी नहीं जानते कि जिस शख़्स ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त की तो इसमें शक़ ही नहीं कि उसके लिए जहन्नुम की आग (तैयार रखी) है
Yahzarul munaafiqoona an tunaz zala 'alaihim Sooratun tunabbi 'uhum bimaa feequloobihim; qulistahzi'oo innal laaha mukhrijum maa tahzaroon
जिसमें वह हमेशा (जलता भुनता) रहेगा यही तो बड़ी रूसवाई है मुनाफेक़ीन इस बात से डरतें हैं कि (कहीं ऐसा न हो) इन मुलसमानों पर (रसूल की माअरफ़त) कोई सूरा नाज़िल हो जाए जो उनको जो कुछ उन मुनाफिक़ीन के दिल में है बता दे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अच्छा) तुम मसख़रापन किए जाओ
Wala'in sa altahum layaqoolunna innamaa kunnaa nakhoodu wa nal'ab; qul abillaahi wa 'Aayaatihee wa Rasoolihee kuntum tastahzi'oon
जिससे तुम डरते हो ख़ुदा उसे ज़रूर ज़ाहिर कर देगा और अगर तुम उनसे पूछो (कि ये हरकत थी) तो ज़रूर यूं ही कहेगें कि हम तो यूं ही बातचीत (दिल्लगी) बाज़ी ही कर रहे थे तुम कहो कि हाए क्या तुम ख़ुदा से और उसकी आयतों से और उसके रसूल से हॅसी कर रहे थे
Laa ta'taziroo qad kafartum ba'da eemaanikum; in na'fu 'an taaa'ifatim minkum nu'az zib taaa'ifatam bi annahum kaanoo mujrimeen
अब बातें न बनाओं हक़ तो ये हैं कि तुम ईमान लाने के बाद काफ़िर हो बैठे अगर हम तुममें से कुछ लोगों से दरगुज़र भी करें तो हम कुछ लोगों को सज़ा ज़रूर देगें इस वजह से कि ये लोग कुसूरवार ज़रूर हैं
मुनाफिक़ मर्द और मुनाफिक़ औरतें एक दूसरे के बाहम जिन्स हैं कि (लोगों को) बुरे काम का तो हुक्म करते हैं और नेक कामों से रोकते हैं और अपने हाथ (राहे ख़ुदा में ख़र्च करने से) बन्द रखते हैं (सच तो यह है कि) ये लोग ख़ुदा को भूल बैठे तो ख़ुदा ने भी (गोया) उन्हें भुला दिया बेशक मुनाफ़िक़ बदचलन है
Wa'adal laahul munafiqeena wal munaafiqaati wal kuffaara naara jahannnamma khaalideena feehaa; hiya hasbuhum; wa la'annahumul laahu wa lahum 'azaabum muqeem
मुनाफिक़ मर्द और मुनाफिक़ औरतें और काफिरों से ख़ुदा ने जहन्नुम की आग का वायदा तो कर लिया है कि ये लोग हमेशा उसी में रहेगें और यही उन के लिए काफ़ी है और ख़ुदा ने उन पर लानत की है और उन्हीं के लिए दाइमी (हमेशा रहने वाला) अज़ाब है
Kallazeena min qablikum kaanoo ashadda minkum quwwatanw wa aksara amwaalanw wa awlaadan fastamta'oo bikhalaaqihim fastamta'tum bikhalaaqikum kamas tamta'al lazeena min qablikum bikhalaa qihim wa khudtum kallazee khaadooo; ulaaa'ika habitat a'maaluhum fid dunyaa wal Aakhirati wa ulaaa'ika humul khaasiroon
(मुनाफिक़ो तुम्हारी तो) उनकी मसल है जो तुमसे पहले थे वह लोग तुमसे कूवत में (भी) ज्यादा थे और औलाद में (भी) कही बढ़ कर तो वह अपने हिस्से से भी फ़ायदा उठा हो चुके तो जिस तरह तुम से पहले लोग अपने हिस्से से फायदा उठा चुके हैं इसी तरह तुम ने अपने हिस्से से फायदा उठा लिया और जिस तरह वह बातिल में घुसे रहे उसी तरह तुम भी घुसे रहे ये वह लोग हैं जिन का सब किया धरा दुनिया और आख़िरत (दोनों) में अकारत हुआ और यही लोग घाटे में हैं
Alam yaatihim naba ul lazeena min qablihim qawmi Noohinw wa 'Aadinw wa Samooda wa qawmi Ibraaheema wa ashaabi adyana walmu'tafikaat; atathum Rusuluhum bilbaiyinaati famaa kaanal laahu liyazlimahum wa laakin kaanooo anfusahum yazlimoon
क्या इन मुनाफिक़ों को उन लोगों की ख़बर नहीं पहुँची है जो उनसे पहले हो गुज़रे हैं नूह की क़ौम और आद और समूद और इबराहीम की क़ौम और मदियन वाले और उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले कि उनके पास उनके रसूल वाजेए (और रौशन) मौजिज़े लेकर आए तो (वह मुब्तिलाए अज़ाब हुए) और ख़ुदा ने उन पर जुल्म नहीं किया मगर ये लोग ख़ुद अपने ऊपर जुल्म करते थे
Walmu'minoona wal mu'minaatu ba'duhum awliyaaa'u ba;d; yaamuroona bilma'roofi wa yanhawna 'anil munkari wa yuqeemoonas Salaata wa yu'toonaz Zakaata wa yutee'oonal laaha wa Rasoolah; ulaaa'ika sayarhamuhumul laah; innallaaha 'Azeezun Hakeem
और ईमानदार मर्द और ईमानदार औरते उनमें से बाज़ के बाज़ रफीक़ है और नामज़ पाबन्दी से पढ़ते हैं और ज़कात देते हैं और ख़ुदा और उसके रसूल की फरमाबरदारी करते हैं यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा अनक़रीब रहम करेगा बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
Wa'adal laahulmu' mineena walmu'minaati Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa wa masaakina taiyibatan fee Jannnaati 'adn; wa ridwaanum minal laahi akbar; zaalika hual fawzul 'azeem
ख़ुदा ने ईमानदार मर्दों और ईमानदारा औरतों से (बेहश्त के) उन बाग़ों का वायदा कर लिया है जिनके नीचे नहरें जारी हैं और वह उनमें हमेशा रहेगें (बेहश्त) अदन के बाग़ो में उम्दा उम्दा मकानात का (भी वायदा फरमाया) और ख़ुदा की ख़ुशनूदी उन सबसे बालातर है- यही तो बड़ी (आला दर्जे की) कामयाबी है
Yahlifoona billaahi wa qaaloo wa laqad qaaloo kalimatal kufri wa kafaroo ba'da Islaamihim wa hammoo bimaa lam yanaaloo; wa maa naqamooo illaaa an aghnaa humullaahu wa Rasooluhoo min fadlih; fainy yatooboo yaku khairal lahum wa iny yatawal law yu'az zibhumullaahu 'azaaban aleeman fiddunyaa wal Aakhirah; wamaa lahum fil ardi minw waliyyinw wa laa naseer
ये मुनाफेक़ीन ख़ुदा की क़समें खाते है कि (कोई बुरी बात) नहीं कही हालॉकि उन लोगों ने कुफ़्र का कलमा ज़रूर कहा और अपने इस्लाम के बाद काफिर हो गए और जिस बात पर क़ाबू न पा सके उसे ठान बैठे और उन लोगें ने (मुसलमानों से) सिर्फ इस वजह से अदावत की कि अपने फज़ल व करम से ख़ुदा और उसके रसूल ने दौलत मन्द बना दिया है तो उनके लिए उसमें ख़ैर है कि ये लोग अब भी तौबा कर लें और अगर ये न मानेगें तो ख़ुदा उन पर दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और तमाम दुनिया में उन का न कोई हामी होगा और न मददगार
Wa minhum man 'aaha dal laaha la'in aataanaa min fadlihee lanas saddaqanna wa lanakoonanna minassaaliheen
और इन (मुनाफेक़ीन) में से बाज़ ऐसे भी हैं जो ख़ुदा से क़ौल क़रार कर चुके थे कि अगर हमें अपने फज़ल (व करम) से (कुछ माल) देगा तो हम ज़रूर ख़ैरात किया करेगें और नेकोकार बन्दे हो जाऎंगे
Fa a'qabahum nifaaqan fee quloobihim ilaa Yawmi yalqaw nahoo bimaaa akhlaful laaha maa wa'adoohu wa bimaa kaanoo yakhziboon
फिर उनसे उनके ख़ामयाजे (बदले) में अपनी मुलाक़ात के दिन (क़यामत) तक उनके दिल में (गोया खुद) निफाक डाल दिया इस वजह से उन लोगों ने जो ख़ुदा से वायदा किया था उसके ख़िलाफ किया और इस वजह से कि झूठ बोला करते थे
जो लोग दिल खोलकर ख़ैरात करने वाले मोमिनीन पर (रियाकारी का) और उन मोमिनीन पर जो सिर्फ अपनी शफ़क़क़्त (मेहनत) की मज़दूरी पाते (शेख़ी का) इल्ज़ाम लगाते हैं फिर उनसे मसख़रापन करते तो ख़ुदा भी उन से मसख़रापन करेगा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
istaghfir lahum aw laa tastaghfir lahum in tastaghfir lahum sab'eena marratan falany yaghfiral laahu lahum; zaalika bi annahum kafaroo billaahi wa Rasoolih; wallaahu laa yahdil qawmal faasiqeen
(ऐ रसूल) ख्वाह तुम उन (मुनाफिक़ों) के लिए मग़फिरत की दुआ मॉगों या उनके लिए मग़फिरत की दुआ न मॉगों (उनके लिए बराबर है) तुम उनके लिए सत्तर बार भी बख्शिस की दुआ मांगोगे तो भी ख़ुदा उनको हरगिज़ न बख्शेगा ये (सज़ा) इस सबब से है कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल के साथ कुफ्र किया और ख़ुदा बदकार लोगों को मंज़िलें मकसूद तक नहीं पहुँचाया करता
Farihal mukhallafoona bimaq'adihim khilaafa Rasoolil laahi wa karihooo ai yujaahidoo bi amwaalihim wa anfusihim fee sabeelil laahi wa qaaloo la tanfiroo fil harr; qul Naaru jahannama ashaddu harraa; law kaanoo yafqahoon
(जंगे तबूक़ में) रसूले ख़ुदा के पीछे रह जाने वाले अपनी जगह बैठ रहने (और जिहाद में न जाने) से ख़ुश हुए और अपने माल और आपनी जानों से ख़ुदा की राह में जिहाद करना उनको मकरू मालूम हुआ और कहने लगे (इस) गर्मी में (घर से) न निकलो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि जहन्नुम की आग (जिसमें तुम चलोगे उससे कहीं ज्यादा गर्म है
Fa ir raja'akal laahu ilaa taaa'ifatim minhum fastaaa zanooka lilkhurooji faqul lan takhrujoo ma'iya abadanw a lan tuqaatiloo ma'iya 'aduwwan innakum radeetum bilqu'oodi awwala marratin faq'udoo ma'al khaalifeen
तो (ऐ रसूल) अगर ख़ुदा तुम इन मुनाफेक़ीन के किसी गिरोह की तरफ (जिहाद से सहीसालिम) वापस लाए फिर तुमसे (जिहाद के वास्ते) निकलने की इजाज़त माँगें तो तुम साफ़ कह दो कि तुम मेरे साथ (जिहाद के वास्ते) हरगिज़ न निकलने पाओगे और न हरगिज़ दुश्मन से मेरे साथ लड़ने पाओगे जब तुमने पहली मरतबा (घर में) बैठे रहना पसन्द किया तो (अब भी) पीछे रह जाने वालों के साथ (घर में) बैठे रहो
Wa laa tusalli 'alaaa ahadim minhum maata abadanw wa laa taqum 'alaa qabriheee innahum kafaroo billaahi wa Rasoolihee wa maatoo wa hum faasiqoon
और (ऐ रसूल) उन मुनाफिक़ीन में से जो मर जाए तो कभी ना किसी पर नमाजे ज़नाज़ा पढ़ना और न उसकी क़ब्र पर (जाकर) खडे होना इन लोगों ने यक़ीनन ख़ुदा और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया और बदकारी की हालत में मर (भी) गए
Wa laa tu'jibka amwaa luhum wa awlaaduhum; innamaa yureedul laahu ai yu'az zibahum bihaa fid dunyaa wa tazhaqa anfusuhum wa hum kaafiroon
और उनके माल और उनकी औलाद (की कसरत) तुम्हें ताज्जुब (हैरत) में न डाले (क्योकि) ख़ुदा तो बस ये चाहता है कि दुनिया में भी उनके माल और औलाद की बदौलत उनको अज़ाब में मुब्तिला करे और उनकी जान निकालने लगे तो उस वक्त भी ये काफ़िर (के काफ़िर ही) रहें
Wa izaaa unzilat Sooratun an aaminoo billaahi wa jaahidoo ma'a Rasoolihis taazanaka uluttawli minhum wa qaaloo zarnaa nakum ma'alqaa 'ideen
और जब कोई सूरा इस बारे में नाज़िल हुआ कि ख़ुदा को मानों और उसके रसूल के साथ जिहाद करो तो जो उनमें से दौलत वाले हैं वह तुमसे इजाज़त मांगते हैं और कहते हैं कि हमें (यहीं छोड़ दीजिए) कि हम भी (घर बैठने वालो के साथ (बैठे) रहें
Laakinir Rasoolu wal lazeena aamanoo ma'ahoo jaahadoo bi amwaalihim wa anfusihim; wa ulaaa'ika lahumul khairaatu wa ulaaa'ika humul muflihoon
मगर रसूल और जो लोग उनके साथ ईमान लाए हैं उन लोगों ने अपने अपने माल और अपनी अपनी जानों से जिहाद किया- यही वह लोग हैं जिनके लिए (हर तरह की) भलाइयाँ हैं और यही लोग कामयाब होने वाले हैं
ख़ुदा ने उनके वास्ते (बेहश्त) के वह (हरे भरे) बाग़ तैयार कर रखे हैं जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरे जारी हैं (और ये) इसमें हमेशा रहेंगें यही तो बड़ी कामयाबी हैं
Wa jaaa'al mu'az ziroona minal A'raabi liyu'zana lahum wa qa'adal lazeena kazabul laaha wa Rasoolah; sayuseebul lazeena kafaroo minhum 'azaabun aleem
और (तुम्हारे पास) कुछ हीला करने वाले गवार देहाती (भी) आ मौजदू हुए ताकि उनको भी (पीछे रह जाने की) इजाज़त दी जाए और जिन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल से झूठ कहा था वह (घर में) बैठ रहे (आए तक नहीं) उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र एख्तेयार किया अनक़रीब ही उन पर दर्दनाक अज़ाब आ पहुँचेगा
Laisa 'alad du'aaaa'i wa laa 'alal mardaa wa laa 'alal lazeena laa yajidoona maa yunfiqoona harajun izaa nasahoo lillaahi wa Rasoolih; maa 'alal muhsineena min sabeel; wallaahu Ghafoorur Raheem
(ऐ रसूल जिहाद में न जाने का) न तो कमज़ोरों पर कुछ गुनाह है न बीमारों पर और न उन लोगों पर जो कुछ नहीं पाते कि ख़र्च करें बशर्ते कि ये लोग ख़ुदा और उसके रसूल की ख़ैर ख्वाही करें नेकी करने वालों पर (इल्ज़ाम की) कोई सबील नहीं और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
Wa laa 'alal lazeena izaa maaa atawka litahmilahum qulta laaa ajidu maaa ahmilukum 'alaihi tawallaw wa a'yunuhum tafeedu minaddam'i hazanan allaa yajidoo maa yunfiqoon
और न उन्हीं लोगों पर कोई इल्ज़ाम है जो तुम्हारे पास आए कि तुम उनके लिए सवारी बाहम पहुँचा दो और तुमने कहा कि मेरे पास (तो कोई सवारी) मौजूद नहीं कि तुमको उस पर सवार करूँ तो वह लोग (मजबूरन) फिर गए और हसरत (व अफसोस) उसे उस ग़म में कि उन को ख़र्च मयस्सर न आया
Innamas sabeelu 'alal lazeena yastaazinoonaka wa hum aghniyaaa'; radoo biany-yakoonoo ma'al khawaalifi wa taba'al laahu 'alaa quloobihim fahum laa ya'lamoon
उनकी ऑंखों से ऑंसू जारी थे (इल्ज़ाम की) सबील तो सिर्फ उन्हीं लोगों पर है जिन्होंने बावजूद मालदार होने के तुमसे (जिहाद में) न जाने की इजाज़त चाही और उनके पीछे रह जाने वाले (औरतों, बच्चों) के साथ रहना पसन्द आया और ख़ुदा ने उनके दिलों पर (गोया) मोहर कर दी है तो ये लोग कुछ नहीं जानते
ya'taziroona ilaikum izaa raja'tum ilaihim; qul laa ta'taziroo lan nu'mina lakum qad nabba annal laahu min akhbaarikum; wa sa yaral laahu 'amalakum wa Rasooluhoo suma turaddoona ilaa 'Aalimil Ghaibi washshahaadati fa yunabbi'ukum bimaa kuntum ta'maloon
जब तुम उनके पास (जिहाद से लौट कर) वापस आओगे तो ये (मुनाफिक़ीन) तुमसे (तरह तरह) की माअज़रत करेंगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बातें न बनाओ हम हरग़िज़ तुम्हारी बात न मानेंगे (क्योंकि) हमे तो ख़ुदा ने तुम्हारे हालात से आगाह कर दिया है अनक़ीरब ख़ुदा और उसका रसूल तुम्हारी कारस्तानी को मुलाहज़ा फरमाएगें फिर तुम ज़ाहिर व बातिन के जानने वालों (ख़ुदा) की हुज़ूरी में लौटा दिए जाओगे तो जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे (ज़र्रा ज़र्रा) बता देगा
Sa yahlifoona billaahi lakum izanqalabtum ilaihim litu'ridoo 'anhum fa a'ridoo 'anhum innahum rijsunw wa maawaahum jahannamu jazaaa 'ambimaa kaanoo yaksiboon
जब तुम उनके पास (जिहाद से) वापस आओगे तो तुम्हारे सामने ख़ुदा की क़समें खाएगें ताकि तुम उनसे दरगुज़र करो तो तुम उनकी तरफ से मुँह फेर लो बेशक ये लोग नापाक हैं और उनका ठिकाना जहन्नुम है (ये) सज़ा है उसकी जो ये (दुनिया में) किया करते थे
Al A'raabu ashaddu kufranw wa nifaaqanw wa ajdaru allaa ya'lamoo hudooda maaa anzalal laahu 'alaa Rasoolih; wallaahu 'Aleemun Hakeem
(ये) अरब के गॅवार देहाती कुफ्र व निफाक़ में बड़े सख्त हैं और इसी क़ाबिल हैं कि जो किताब ख़ुदा ने अपने रसूल पर नाज़िल फरमाई है उसके एहक़ाम न जानें और ख़ुदा तो बड़ा दाना हकीम है
Wa minal A'raabi mai yattakhizu maa yunfiqu maghramanw wa yatarabbasu bikumud dawaaa'ir; alaihim daaa'iratus saw'; wallaahu Samee'un 'Aleem
और कुछ गॅवार देहाती (ऐसे भी हैं कि जो कुछ ख़ुदा की) राह में खर्च करते हैं उसे तावान (जुर्माना) समझते हैं और तुम्हारे हक़ में (ज़माने की) गर्दिशों के मुन्तज़िर (इन्तेज़ार में) हैं उन्हीं पर (ज़माने की) बुरी गर्दिश पड़े और ख़ुदा तो सब कुछ सुनता जानता है
Wa minal A'raabi mai yu'minu billaahi wal yawmil AAkhiri wa yattakhizu maa yunfiqu qurubaatin 'indal laahi wa salawaatir Rasool; alaaa innahaa qurbatul lahum; sayudkhiluhumul laahu fee rahmatih; innal laaha Ghafoorur Raheem
और कुछ देहाती तो ऐसे भी हैं जो ख़ुदा और आख़िरत पर ईमान रखते हैं और जो कुछ खर्च करते है उसे ख़ुदा की (बारगाह में) नज़दीकी और रसूल की दुआओं का ज़रिया समझते हैं आगाह रहो वाक़ई ये (ख़ैरात) ज़रूर उनके तक़र्रुब (क़रीब होने का) का बाइस है ख़ुदा उन्हें बहुत जल्द अपनी रहमत में दाख़िल करेगा बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
Was saabiqoonal awwa loona minal Muhaajireena wal Ansaari wallazeenat taba'oo hum bi ihsaanir radiyal laahu 'anhum wa radoo 'anhu wa a'adda lahum jannnaatin tajree tahtahal anhaaru khaalideena feehaaa abadaa; zaalikal fawzul 'azeem
और मुहाजिरीन व अन्सार में से (ईमान की तरफ) सबक़त (पहल) करने वाले और वह लोग जिन्होंने नेक नीयती से (कुबूले ईमान में उनका साथ दिया ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से ख़ुश और उनके वास्ते ख़ुदा ने (वह हरे भरे) बाग़ जिन के नीचे नहरें जारी हैं तैयार कर रखे हैं वह हमेशा अब्दआलाबाद (हमेशा) तक उनमें रहेगें यही तो बड़ी कामयाबी हैं
Wa mimmann hawlakum minal A'raabi munaafiqoona wa min ahlil Madeenati maradoo 'alan nifaaq, laa ta'lamuhum nahnu na'lamuhum; sanu'azzibuhum marrataini summa yuraddoona ilaa 'azaabin 'azeem
और (मुसलमानों) तुम्हारे एतराफ़ (आस पास) के गॅवार देहातियों में से बाज़ मुनाफिक़ (भी) हैं और ख़ुद मदीने के रहने वालों मे से भी (बाज़ मुनाफिक़ हैं) जो निफ़ाक पर अड़ गए हैं (ऐ रसूल) तुम उन को नहीं जानते (मगर) हम उनको (ख़ूब) जानते हैं अनक़रीब हम (दुनिया में) उनकी दोहरी सज़ा करेगें फिर ये लोग (क़यामत में) एक बड़े अज़ाब की तरफ लौटाए जाऎंगे
Wa aakharoona' tarafoo bizunoobihim khalatoo 'amalan saalihanw wa aakhara saiyi'an 'asal laahu ai yatooba 'alaihim; innal laaha Ghafoorur Raheem
और कुछ लोग हैं जिन्होंने अपने गुनाहों का (तो) एकरार किया (मगर) उन लोगों ने भले काम को और कुछ बुरे काम को मिला जुला (कर गोलमाल) कर दिया क़रीब है कि ख़ुदा उनकी तौबा कुबूल करे (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनी बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान हैं
Khuz min amwaalihim sadaqtan tutahhiruhum wa tuzakkeehim bihaa wa salli 'alaihim inna salaataka sakanul lahum; wallaahu Samee'un 'Aleem
(ऐ रसूल) तुम उनके माल की ज़कात लो (और) इसकी बदौलत उनको (गुनाहो से) पाक साफ करों और उनके वास्ते दुआएं ख़ैर करो क्योंकि तुम्हारी दुआ इन लोगों के हक़ में इत्मेनान (का बाइस है) और ख़ुदा तो (सब कुछ) सुनता (और) जानता है
Alam ya'lamooo annnal laaha huwa yaqbalut tawbata 'an ibaadihee wa yaakhuzus sadaqaati wa annal laaha Huwat awwaabur Raheem
क्या इन लोगों ने इतने भी नहीं जाना यक़ीनन ख़ुदा बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और वही ख़ैरातें (भी) लेता है और इसमें शक़ नहीं कि वही तौबा का बड़ा कुबूल करने वाला मेहरबान है
Wa quli'maloo fasayaral laahu 'amalakum wa Rasooluhoo walmu'minoona wa saturaddoona ilaa 'Aalimil Ghaibi washshahaadati fa yunabbi'ukum bimaa kuntum ta'maloon
और (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम लोग अपने अपने काम किए जाओ अभी तो ख़ुदा और उसका रसूल और मोमिनीन तुम्हारे कामों को देखेगें और बहुत जल्द (क़यामत में) ज़ाहिर व बातिन के जानने वाले (ख़ुदा) की तरफ लौटाए जाऎंगे तब वह जो कुछ भी तुम करते थे तुम्हें बता देगा
Wa aakharoona murjawna li amril laahi imaa yu'az zibuhum wa immaa yatoobu 'alaihim; wallaahu 'Aleemun Hakeem
और कुछ लोग हैं जो हुक्मे ख़ुदा के उम्मीदवार किए गए हैं (उसको अख्तेयार है) ख्वाह उन पर अज़ाब करे या उन पर मेहरबानी करे और ख़ुदा (तो) बड़ा वाकिफकार हिकमत वाला है
Wallazeenat takhazoo masjidan diraaranw wa kufranw wa tafreeqam bainal mu'mineena wa irsaadal liman haarabal laaha wa Rasoolahoo min qabl; wa la yahlifunna in aradnaaa illal husnaa wallaahu yash hadu innahum lakaaziboon
और (वह लोग भी मुनाफिक़ हैं) जिन्होने (मुसलमानों के) नुकसान पहुंचाने और कुफ़्र करने वाले और मोमिनीन के दरमियान तफरक़ा (फूट) डालते और उस शख़्स की घात में बैठने के वास्ते मस्जिद बनाकर खड़ी की है जो ख़ुदा और उसके रसूल से पहले लड़ चुका है (और लुत्फ़ तो ये है कि) ज़रूर क़समें खाएगें कि हमने भलाई के सिवा कुछ और इरादा ही नहीं किया और ख़ुदा ख़ुद गवाही देता है
Laa taqum feehi abadaa; lamasjidun ussisa 'alat taqwaa min awwali yawmin ahaqqu an taqooma feeh; feehi rijaaluny yuhibbona ai yatatahharoo, wallaahu yuhibbul mmuttah hireen
ये लोग यक़ीनन झूठे है (ऐ रसूल) तुम इस (मस्जिद) में कभी खड़े भी न होना वह मस्जिद जिसकी बुनियाद अव्वल रोज़ से परहेज़गारी पर रखी गई है वह ज़रूर उसकी ज्यादा हक़दार है कि तुम उसमें खडे होकर (नमाज़ पढ़ो क्योंकि) उसमें वह लोग हैं जो पाक व पाकीज़ा रहने को पसन्द करते हैं और ख़ुदा भी पाक व पाकीज़ा रहने वालों को दोस्त रखता है
Afaman assasa bunyaa nahoo 'alaa taqwaa minal laahi wa ridwaanin khairun am man assasa bunyaanahoo 'alaa shafaa jurufin haarin fanhaara bihee fee Naari Jahannnam; wallaahu laa yahdil qawmaz zaalimeen
क्या जिस शख़्स ने ख़ुदा के ख़ौफ और ख़ुशनूदी पर अपनी इमारत की बुनियाद डाली हो वह ज्यादा अच्छा है या वह शख़्स जिसने अपनी इमारत की बुनियाद इस बोदे किनारे के लब पर रखी हो जिसमें दरार पड़ चुकी हो और अगर वह चाहता हो फिर उसे ले दे के जहन्नुम की आग में फट पडे और ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मंज़िलें मक़सूद तक नहीं पहुंचाया करता
(ये इमारत की) बुनियाद जो उन लोगों ने क़ायम की उसके सबब से उनके दिलो में हमेशा धरपकड़ रहेगी यहाँ तक कि उनके दिलों के परख़चे उड़ जाएँ और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम हैं
Innal laahash taraa minal mu'mineena anfusahum wa amwaalahum bi anna lahumul jannah; yuqaatiloona fee sabeelil laahi fa yaqtuloona wa yuqtaloona wa'dan 'alaihi haqqan fit Tawraati wal Injeeli wal Qur-aan; wa man awfaa be'ahdihee minal laah; fastabshiroo bibai'ikumul lazee baaya'tum bih; wa zaalika huwal fawzul 'azeem
इसमें तो शक़ ही नहीं कि ख़ुदा ने मोमिनीन से उनकी जानें और उनके माल इस बात पर ख़रीद लिए हैं कि (उनकी क़ीमत) उनके लिए बेहश्त है (इसी वजह से) ये लोग ख़ुदा की राह में लड़ते हैं तो (कुफ्फ़ार को) मारते हैं और ख़ुद (भी) मारे जाते हैं (ये) पक्का वायदा है (जिसका पूरा करना) ख़ुदा पर लाज़िम है और ऐसा पक्का है कि तौरैत और इन्जील और क़ुरान (सब) में (लिखा हुआ है) और अपने एहद का पूरा करने वाला ख़ुदा से बढ़कर कौन है तुम तो अपनी ख़रीद फरोख्त से जो तुमने ख़ुदा से की है खुशियाँ मनाओ यही तो बड़ी कामयाबी है
At taaa'iboonal 'aabidoonal haamidoonas saaa'ihoonar raaki'oonas saajidoonal aamiroona bilma'roofi wannaahoona 'anil munkari walhaafizoona lihudoodil laah; wa bashshiril mu'mineen
(ये लोग) तौबा करने वाले इबादत गुज़ार (ख़ुदा की) हम्दो सना (तारीफ़) करने वाले (उस की राह में) सफर करने वाले रूकूउ करने वाले सजदा करने वाले नेक काम का हुक्म करने वाले और बुरे काम से रोकने वाले और ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदो को निगाह रखने वाले हैं और (ऐ रसूल) उन मोमिनीन को (बेहिश्त की) ख़ुशख़बरी दे दो
Maa kaana lin nabiyyi wallazeena aamanooo ai yastaghfiroo lilmushrikeena wa law kaanoo ulee qurbaa mim ba'di maa tabiyana lahum annahum Ashaabul jaheem
नबी और मोमिनीन पर जब ज़ाहिर हो चुका कि मुशरेकीन जहन्नुमी है तो उसके बाद मुनासिब नहीं कि उनके लिए मग़फिरत की दुआएं माँगें अगरचे वह मुशरेकीन उनके क़राबतदार हो (क्यों न) हो
Wa maa kaanas tighfaaru ibraaheema li abeehi illaa 'ammaw 'idatinw wa 'adahaaa iyyaahu falammaa tabaiyana lahooo annahoo 'aduwwul lillaahi tabarra a minh; inna Ibraaheema la awwaahum haleem
और इबराहीम का अपने बाप के लिए मग़फिरत की दुआ माँगना सिर्फ इस वायदे की वजह से था जो उन्होंने अपने बाप से कर लिया था फिर जब उनको मालूम हो गया कि वह यक़ीनी ख़ुदा का दुश्मन है तो उससे बेज़ार हो गए, बेशक इबराहीम यक़ीनन बड़े दर्दमन्द बुर्दबार (सहन करने वाले) थे
Wa maa kaanal laahu liyudilla qawmam ba'da iz hadaahum hatta yubaiyina lahum maa yattaqoon; innal laaha bikulli shai'in 'Aleem
ख़ुदा की ये शान नहीं कि किसी क़ौम को जब उनकी हिदायत कर चुका हो उसके बाद बेशक ख़ुदा उन्हें गुमराह कर दे हत्ता (यहां तक) कि वह उन्हीं चीज़ों को बता दे जिससे वह परहेज़ करें बेशक ख़ुदा हर चीज़ से (वाक़िफ है)
Innal laaha lahoo mulkus samaawaati wal ardi yuhyee wa yumeet; wa maa lakum min doonil laahi minw waliyyinw wa laa naseer
इसमें तो शक़ ही नहीं कि सारे आसमान व ज़मीन की हुकूमत ख़ुदा ही के लिए ख़ास है वही (जिसे चाहे) जिलाता है और (जिसे चाहे) मारता है और तुम लोगों का ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त है न मददगार
अलबत्ता ख़ुदा ने नबी और उन मुहाजिरीन अन्सार पर बड़ा फज़ल किया जिन्होंने तंगदस्ती के वक्त रसूल का साथ दिया और वह भी उसके बाद कि क़रीब था कि उनमे ंसे कुछ लोगों के दिल जगमगा जाएँ फिर ख़ुदा ने उन पर (भी) फज़ल किया इसमें शक़ नहीं कि वह उन लोगों पर पड़ा तरस खाने वाला मेहरबान है
Wa 'alas salaasatil lazeena khullifoo hattaaa izaa daaqat 'alaihimul ardu bimaa rahubat wa daaqat 'alaihim anfusuhum wa zannnooo al laa malja-a minal laahi illaaa ilaihi summa taaba 'alaihim liyatooboo; innal laaha Huwat Tawwaabur Raheem
और उन यमीमों पर (भी फज़ल किया) जो (जिहाद से पीछे रह गए थे और उन पर सख्ती की गई) यहाँ तक कि ज़मीन बावजूद उस वसअत (फैलाव) के उन पर तंग हो गई और उनकी जानें (तक) उन पर तंग हो गई और उन लोगों ने समझ लिया कि ख़ुदा के सिवा और कहीं पनाह की जगह नहीं फिर ख़ुदा ने उनको तौबा की तौफीक दी ताकि वह (ख़ुदा की तरफ) रूजू करें बेशक ख़ुदा ही बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान है
Maa kaana li ahlil Madeenati wa man hawlahum minal A'raabi ai yatakhallafoo 'ar-Rasoolil laahi wa laa yarghaboo bi anfusihim 'an nafsih; zaalika bi annahum laa yuseebuhum zama unw wa laa nasabunw wa laa makhmasatun fee sabeelil laahi wa laa yata'oona mawti'ai yagheezul kuffaara wa laa yanaaloona min 'aduwwin nailan illaa kutiba lahum bihee 'amalun saalih; innal laaha laa yudee'u ajral muhsineen
मदीने के रहने वालों और उनके गिर्दोनवॉ (आस पास) देहातियों को ये जायज़ न था कि रसूल ख़ुदा का साथ छोड़ दें और न ये (जायज़ था) कि रसूल की जान से बेपरवा होकर अपनी जानों के बचाने की फ्रिक करें ये हुक्म उसी सबब से था कि उन (जिहाद करने वालों) को ख़ुदा की रूह में जो तकलीफ़ प्यास की या मेहनत या भूख की शिद्दत की पहुँचती है या ऐसी राह चलते हैं जो कुफ्फ़ार के ग़ैज़ (ग़ज़ब का बाइस हो या किसी दुश्मन से कुछ ये लोग हासिल करते हैं तो बस उसके ऐवज़ में (उनके नामए अमल में) एक नेक काम लिख दिया जाएगा बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों का अज्र (व सवाब) बरबाद नहीं करता है
Wa laa yunfiqoona nafa qatan sagheeratanw wa laa kabeeratanw wa laa yaqta'oona waadiyan illaa kutiba lahum liyajziyahumul laahu ahsana maa kaanoo ya'maloon
और ये लोग (ख़ुदा की राह में) थोड़ा या बहुत माल नहीं खर्च करते और किसी मैदान को नहीं क़तआ करते मगर फौरन (उनके नामाए अमल में) उनके नाम लिख दिया जाता है ताकि ख़ुदा उनकी कारगुज़ारियों का उन्हें अच्छे से अच्छा बदला अता फरमाए
Wa maa kaanal mu'minoona liyanfiroo kaaaffah; falaw laa nafara min kulli firqatim minhum taaa'ifatul liyatafaqqahoo fiddeeni wa liyunziroo qawmahum izaa raja'ooo ilaihim la'allahum yahzaroon
और ये भी मुनासिब नहीं कि मोमिननि कुल के कुल (अपने घरों में) निकल खड़े हों उनमें से हर गिरोह की एक जमाअत (अपने घरों से) क्यों नहीं निकलती ताकि इल्मे दीन हासिल करे और जब अपनी क़ौम की तरफ पलट के आवे तो उनको (अज्र व आख़िरत से) डराए ताकि ये लोग डरें
ऐ ईमानदारों कुफ्फार में से जो लोग तुम्हारे आस पास के है उन से लड़ों और (इस तरह लड़ना) चाहिए कि वह लोग तुम में करारापन महसूस करें और जान रखो कि बेशुबहा ख़ुदा परहेज़गारों के साथ है
Wa izaa maaa unzilat Sooratun faminhum mai yaqoolu aiyukum zaadat hu haazihee eemaanaa; fa ammal lazeena aamanoo fazaadat hum eemaananw wa hum yastabshiroon
और जब कोई सूरा नाज़िल किया गया तो उन मुनाफिक़ीन में से (एक दूसरे से) पूछता है कि भला इस सूरे ने तुममें से किसी का ईमान बढ़ा दिया तो जो लोग ईमान ला चुके हैं उनका तो इस सूरे ने ईमान बढ़ा दिया और वह वहां उसकी ख़ुशियाँ मनाते है
Awalaa yarawna annahum yuftanoona fee kulli 'aamim marratan aw marrataini summa laa yatooboona wa laa hum yazzakkkaroon
क्या वह लोग (इतना भी) नहीं देखते कि हर साल एक मरतबा या दो मरतबा बला में मुबितला किए जाते हैं फिर भी न तो ये लोग तौबा ही करते हैं और न नसीहत ही मानते हैं
Wa izaa maaa unzilat Sooratun nazara ba'duhum ilaa ba'din hal yaraakum min ahadin summman sarafoo; sarafal laahu quloobahum bi annahum qawmul laa yafqahoon
और जब कोई सूरा नाज़िल किया गया तो उसमें से एक की तरफ एक देखने लगा (और ये कहकर कि) तुम को कोई मुसलमान देखता तो नहीं है फिर (अपने घर) पलट जाते हैं (ये लोग क्या पलटेगें गोया) ख़ुदा ने उनके दिलों को पलट दिया है इस सबब से कि ये बिल्कुल नासमझ लोग हैं
Laqad jaaa'akum Rasoolum min anfusikum 'azeezun 'alaihi maa 'anittum hareesun 'alaikum bilmu'mineena ra'oofur raheem
लोगों तुम ही में से (हमारा) एक रसूल तुम्हारे पास आ चुका (जिसकी शफ़क्क़त (मेहरबानी) की ये हालत है कि) उस पर शाक़ (दुख) है कि तुम तकलीफ उठाओ और उसे तुम्हारी बेहूदी का हौका है ईमानदारो पर हद दर्जे रफ़ीक़ मेहरबान हैं
Fa in tawallaw faqul lhasbiyal laahu laaa ilaaha illaa Huwa 'alaihi tawakkkaltu wa Huwa Rabbul 'Arshil 'Azeem
ऐ रसूल अगर इस पर भी ये लोग (तुम्हारे हुक्म से) मुँह फेरें तो तुम कह दो कि मेरे लिए ख़ुदा काफी है उसके सिवा कोई माबूद नहीं मैने उस पर भरोसा रखा है वही अर्श (ऐसे) बुर्जूग (मख़लूका का) मालिक है