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اللَّهُمَّ لاَ تُؤَاخِذْنِي بِمَا يَقُولُونَ, وَاغْفِرْ لِي مَا لاَ يَعْلَمُونَ, [وَاجْعَلْنِي خَيْراً مِمَّا يَظُّنُّونَ]
ऐ अल्लाह! जो ये लोग मेरे बारे में कह रहे हैं, उस पर मेरी पकड़ मत करना और जो कुछ ये नहीं जानते वह मुझे माफ़ कर दे। [और मुझे उससे बेहतर बना दे जो ये मेरे बारे में गुमान करते हैं]) (1) ................................ (1) बुखारी की अल-अदबुल-मुफ़रद ह़दीस संख्याः761, और शैख़ अल्बानी ने इसकी सनद को सह़ीह़ अदबुल-मुफ़रद ह़दीस संख्याः585 में सह़ीह़ कहा है। और दो कोष्ठों के बीच का भाग बैह़की ने शुअ़बुल-ईमानः4/228 में एक दूसरी सनद से ज़्यादा किया है।
स्रोत: Al-Bukhari, Al-Bayhaqi.