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क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ

बीमारी और मृत्यु · 1 दुआ

क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ 0:00
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السَّلاَمُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الدِّيَارِ, مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ, وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ بِكُمْ لاَحِقُونَ, [وَيَرْحَمُ اللَّهُ الْمُسْتَقدِمِينَ مِنَّا وَالْمُسْتأْخِرِينَ] أَسْاَلُ اللَّهَ لَنَا وَلَكُمُ الْعَافِيَةَ

ऐ इस घर वाले (क़ब्र तथा बर्ज़ख़ी घर वाले) मोमिनो और मुसलमानो! तुम पर सलाम हो और हम भी अगर अल्लाह ने चाहा तो तुमसे मिलने वाले हैं। [हम में से पहले जाने वालों पर और बाद में जाने वालों पर अल्लाह रह़म फ़रमाए।] मैं अपने लिए और तुम्हारे लिए अल्लाह से आफ़ियत का सवाल करता हूं।) (1) ................................... (1) मुस्लिमः2/671, हदीस संख्याः975, इब्ने माजाः1/494, हदीस संख्याः1547, शब्द उन्हीं के हैं और बुरैदा रज़ियल्लाहु अन्हु रावी हैं। दोनों कोष्ठों के बीच के शब्द सह़ीह़ मुस्लिम में आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा की ह़दीस से हैं। 2/671, हदीस संख्याः975

स्रोत: Muslim 2/671, Ibn Majah 1/494, Muslim 2/671.