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مَا مِنْ عَبْدٍ يُذنِبُ ذَنْباً فَيُحْسِنُ الطُّهُورَ, ثُمَّ يَقُومُ فَيُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ, ثُمَّ يَسْتَغْفِرُ اللَّهَ إِلاَّ غَفَرَ اللَّهُ لَهُ
जब किसी बन्दे से गुनाह हो जाए तो वह अच्छी तरह़ वुज़ू करे, फ़िर खड़ा होकर दो रकअत (नफ़्ल) नमाज़ पढ़े, फिर अल्लाह की बख़्शिश की दुआ मांगे तो अल्लाह तआला ऐसे बन्दे को बख़्श देता है।) (1) ................................ (1) अबू दीऊदः2/86, ह़दीस संख्याः1521, तिर्मिज़ीः2/257, ह़दीस संख़्याः406, और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ अबूदाऊदः1/383 में सह़ीह़ कहा है।
स्रोत: Abu Dawud 2/86, At-Tirmizi 2/257.