Noor
हिन्दी
Noor / दुआ / अल्लाह की प्रशंसा / नबी पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत

नबी पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत

अल्लाह की प्रशंसा · 5 दुआएँ

नबी पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत 0:00
सुनें
1

قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم: مَنْ صَلَّى عَلَيَّ صَلاَةً صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ بِهَا عَشْراً

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (जो आदमी मुझ पर एक बार दरूद भेजेगा, अल्लाह तआला उस पर दस रह़मतें नाज़िल फ़रमायेगा।) (1) .............................. (1) मुस्लिमः1/288, ह़दीस संख्याः384

स्रोत: Muslim 1/288.

2

وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: لاَ تَجْعَلُوا قَبْرِي عِيداً وَصَلُّوا عَلَيَّ؛ فَإِنَّ صَلاَتَكُم تَبْلُغُنِي حَيْثُ كُنْتُمْ

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (मेरी क़ब्र को मेलागाह न बनाओ और मुझ पर दरूद भेजो। तुम जहां भी हो तुम्हारा दरूद मुझे पहुंच जाता है। (1) ............................... (1) अबू दाऊदः2/218, ह़दीस संख्याः2044, अह़मदः2/367, ह़दीस संख्याः8804, और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ अबू दाऊदः2/383 में सह़ीह़ कहा है।

स्रोत: Abu Dawud 2/218, Ahmad 2/367.

3

وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: الْبَخِيلُ مَنْ ذُكِرْتُ عِنْدَهُ فَلَمْ يُصَلِّ عَلَيَّ

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (बख़ील (कन्जूस) वह है जिसके पास मेरा ज़िक्र हो और वह मुझ पर दरूद न भेजे।) (1) ........................... (1) तिर्मिज़ीः5/551, ह़दीस संख़्याः3546, आदि, सह़ीह़ुल-जामेः3/25 और सह़ीह़ तिर्मिज़ीः3/177

स्रोत: At-Tirmizi 5/551.

4

وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: إِنَّ لِلَّهِ مَلاَئِكَةً سَيَّاحِينَ فِي الْأَرْضِ يُبَلِّغُونِي مِنْ أُمَّتِي السَّلاَمَ

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (अल्लाह तआला के कुछ ऐसे फ़रिश्ते हैं जो ज़मीन में घूमते फिरते हैं, वह मेरी उम्मत के लोगों का सलाम मुझे पहुंचाते हैं।) (1) ......................... (1) नसाईः3/43, ह़दीस संख्याः1282, ह़ाकिमः2/421, और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ नसाईः1/274 में सह़ीह़ कहा है।

स्रोत: An-Nasa'i, Al-Hakim 2/421.

5

(وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: مَا مِنْ أَحَدٍ يُسَلِّمُ عَلَيَّ إِلاَّ رَدَّ اللَّهُ عَلَيَّ رُوحِيَ حَتَّى أَرُدَّ عَلَيْهِ السَّلاَمَ

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (कोई आदमी जब भी मुझ पर सलाम पढ़ता है तो अल्लाह तआला मेरी रूह़ (प्राण) को मेरे बदन में वापस लौटा देता है, ताकि मैं उसे सलाम का जवाब दे सकूं।) (1) ................................ (1) अबू दाऊद ह़दीस संख्याः2041, और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ अबूदाऊदः1/383 में ह़सन कहा है।

स्रोत: Abu Dawud (Hadith no. 2041).