1
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ (ثَلاَثَاً) اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلاَمُ, وَمِنْكَ السَّلاَمُ, تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلاَلِ وَالْإِكْرَامِ
मैं अल्लाह से बख़्शिश मांगता हूं। (तीन बार) ऐ अल्लाह! तू ही सलामती वाला है और तुझी से सलामती है। ऐ बुज़ुर्गी और इज़्ज़त वाले! तू बड़ी बरकत वाला है।) (1) ......................... (1) मुस्लिमः1/414,हदीस संख्याः591
स्रोत: Muslim 1/414.
2
لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ, لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ [ثلاثاً], اللَّهُمَّ لاَ مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ, وَلاَ مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ, وَلاَ يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الجَدُّ
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी के लिए बादशाहत है, उसी के लिए सब तारीफ़ है औऱ वह हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ अल्लाह! जो कुछ तू दे, उसे कोई रोकने वाला नहीं औऱ जिसे तू रोक ले, उसे कोई देने वाला नहीं, और किसी दौलतमन्द को उसकी दौलत तेरे यहां कुछ फायदा नहीं दे सकती।) (1) .......................... (1) बुखारीः1/255, हदीस संख्याः844, मुस्लिमः1/414,हदीस संख्याः593, दोनों कोष्ठों के बीच का भाग बुखारी (हदीस संख्याः6473) का है।
स्रोत: Al-Bukhari 1/255, Muslim 1/414.
3
لَا إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ, لَهُ الْمُلْكُ, وَلَهُ الْحَمدُ, وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ. لاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ, لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ, وَلاَ نَعْبُدُ إِلاَّ إِيَّاهُ, لَهُ النِّعْمَةُ وَلَهُ الْفَضْلُ وَلَهُ الثَّنَاءُ الْحَسَنُ, لَا إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الكَافِرُونَ
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है, उसी के लिए सब तारीफ़ है और वह हर चाज़ पर क़ुदरत रखने वाला है। अल्लाह की मदद के बिना न गुनाह से बचने की शक्ति है, न नेकी करने की ताक़त। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं और उसके सिवा हम किसी की इबादत नहीं करते। उसी के लिए नेमत है, उसी के लिए फ़ज़्ल और उसी के लिए अच्छी तारीफ़ है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। हम अपनी इबादत उसी के लिए विशुद्ध करते हैं, चाहे काफिरों को बुरा ही लगे। (1) .......................... (1) मुस्लिमः1/415, हदीस संख्याः594
स्रोत: Muslim 1/415.
4
سُبْحَانَ اللَّهِ, وَالْحَمْدُ لِلَّهِ, وَاللَّهُ أَكْبَرُ (ثلاثاً وثلاثين) لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ, لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
अल्लाह पाक है, हर प्रकार की तारीफ़ अल्लाह के लिए है और अल्लाह सबसे बड़ा है (तेंतीस बार)। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है। उसी के लिए सब तारीफ़ है और वह हर चाज़ पर क़ुदरत रखने वाला है। (1) .......................... (1) मुस्लिमः1/418, हदीस संख्याः597, और उसमें हैः(जो आदमी हर नमाज़ के बाद ये दुआ पढ़े, उसके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं, चाहे वो समुद्र के झाग के बराबर क्यों न हों।)
स्रोत: Muslim 1/418.
5
بسم الله الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ ﴿قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ* اللَّهُ الصَّمَدُ* لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ* وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُواً أَحَدٌ﴾
بسم الله الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ ﴿قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ* مِن شَرِّ مَا خَلَقَ* وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ* وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ* وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ﴾
بسم الله الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ ﴿قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ* مَلِكِ النَّاسِ* إِلَهِ النَّاسِ* مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ* الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ* مِنَ الْجِنَّةِ وَ النَّاسِ﴾
(بَعْدَ كُلِّ صَلاَةٍ)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है ख़ुदा बरहक़ बेनियाज़ है न उसने किसी को जना न उसको किसी ने जना, और उसका कोई हमसर नहीं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं सुबह के मालिक की हर चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की पनाह माँगता हूँ और अंधेरीरात की बुराई से जब उसका अंधेरा छा जाए और गन्डों पर फूँकने वालियों की बुराई से (जब फूँके) और हसद करने वाले की बुराई से (ऐ रसूल) तुम कह दो मैं लोगों के परवरदिगार लोगों के बादशाह लोगों के माबूद की (शैतानी) वसवसे की बुराई से पनाह माँगता हूँ जो (ख़ुदा के नाम से) पीछे हट जाता है जो लोगों के दिलों में वसवसे डाला करता है जिन्नात में से ख्वाह आदमियों में से
स्रोत: Al-Ikhlas:1-4, Al-Falaq:1-5, An-Nas:1-6.
6
اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌ لَّهُ مَا فِي السَّمَوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ وَلاَ يَؤُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ (عَقِبَ كلِّ صَلاَةٍ)
ख़ुदा ही वो ज़ाते पाक है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वह) ज़िन्दा है (और) सारे जहान का संभालने वाला है उसको न ऊँघ आती है न नींद जो कुछ आसमानो में है और जो कुछ ज़मीन में है (गरज़ सब कुछ) उसी का है कौन ऐसा है जो बग़ैर उसकी इजाज़त के उसके पास किसी की सिफ़ारिश करे जो कुछ उनके सामने मौजूद है (वह) और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका) है (खुदा सबको) जानता है और लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ पर भी अहाता नहीं कर सकते मगर वह जिसे जितना चाहे (सिखा दे) उसकी कुर्सी सब आसमानॊं और ज़मीनों को घेरे हुये है और उन दोनों (आसमान व ज़मीन) की निगेहदाश्त उसपर कुछ भी मुश्किल नहीं और वह आलीशान बुजुर्ग़ मरतबा है
स्रोत: An-Nasa'i (Hadith no. 100), Ibn As-Sunni (Hadith no. 121,Sahihul-Jami' As-Saghir 5/339, Silsilatul al-Ahadith as-Sahihah 2/697.
7
لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ, لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और उसी के लिए सब तारीफ़ है। वह मारता और जिलाता है और वह हर चाज़ पर क़ुदरत रखने वाला है।) दस बार मग़्रिब और फ़ज्र की नमाज़ के बाद।(1) .......................... (1)तिर्मिज़ीः5/515, हदीस संख्याः3474, अह़मदः4/227,हदीस संख्याः17990, तख़रीज के लिए देखिएः ज़ादुल-मआदः1/300
स्रोत: At-Tirmizi 5/515, Ahmad 4/227, Zadul-Ma'ad 1/300.
8
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْماً نافِعاً, وَرِزْقاً طَيِّباً, وَعَمَلاً مُتَقَبَّلاً (بعد السلام من صلاة الفجر)
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे लाभ देने वाला इल्म, पाकीज़ा रोज़ी और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूं।) फज्र की नमाज़ से सलाम फेरने के बाद पढ़े। (1) ....................... (1) इब्ने माजाः925, नसाई की अमलुल-यौमे वल-लैला हदीस संख्याः102, देखिएः सह़ीह़ इब्ने माजाः1/152 और मजमउज़-ज़्वाइदः10/111, ये रिवायत आगे दुआ संख्याः95 में आ रही है।
स्रोत: Ibn Majah, Sahih Ibn Majah 1/152, Majma' az-Zawaid 10/111.