اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ, وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ, كَمَا صَلَّيتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ, وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ, إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ, اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ, كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ, إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
ऐ अल्लाह! रह़मत नाज़िल कर मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर और मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की आल पर, जिस तरह़ तूने रह़मत नाज़िल की इब्राहीम औऱ इब्राहीम अलैहिस्-सलाम की औलाद पर। बेशक तू तारीफ़ वाला एवं बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह! बरकत नाज़िल कर मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर और मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की आल पर, जिस तरह़ तूने बरकत नाज़िल की इब्राहीम अलैहिस्-सलाम और इब्राहीम अलैहिस्-सलाम की औलाद पर। बेशक तू तारीफ़ वाला एवं बुज़ुर्गी वाला है।) (1) .................... (1) बुखारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथः6/408, हदीस संख्याः3370, मुस्लिमःहदीस संख्याः406
स्रोत: Al-Bukhari, Fathul Bari 6/408.