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वुज़ू पूरा करने के बाद का ज़िक्र

नमाज़ · 3 दुआएँ

वुज़ू पूरा करने के बाद का ज़िक्र 0:00
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1

أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّداً عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ

मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं और मैं गवाही देता हूं कि मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उसके बंदे और रसूल हैं...।) (1) .................. (1) मुस्लिमः1/209,हदीस संख्याः234

स्रोत: Muslim 1/209.

2

اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنَ الْمُتَطَهِّرِينَ

ऐ अल्लाह! मुझे बहुत अधिक तौबा करने वालों में से बना दे और मुझे पाक-साफ़ रहने वालों में से बना दे।) (1) .................. (1) तिर्मिजीः1/78, हदीस संख्याः55, देखिएः सह़ीह़ तिर्मिजीः1/18

स्रोत: At-Tirmizi 1/78, Al-Albani, Sahih At-Tirmizi 1/18

3

سُبْحانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ, أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ, أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتوبُ إِلَيْكَ

ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरे लिए हर प्रकार की तारीफ़ है। मैं गवाही देता हूं कि तेेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। मैं तुझसे माफ़ी चाहता हूं और तुझसे तौबा करता हूं।) (1) ........................ (1) अबू दाऊद, हदीस संख्याः4858, तिर्मिज़ी ,हदीस संख्याः3433, नसाइः हदीस संख्याः1344, देखिए सह़ीह़ तिर्मिज़ीः3/153, आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैंः( रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम किसी मज्लिस में बैठते, कुरआन पढ़ते या नमाज़ पढ़ते तो उसका समापन इस दुआ पर करते थे।) नसाइ की अ़मलुल्-यौमे वल-लैलाःहदीस संख्याः308, अह़मदः6/77, हदीस संख्याः24486, डा. फ़ारूक़ ह़मादा ने इसे नसाइ की अ़मलुल्-यौमे वल-लैला की तह़क़ीक़ पृष्ठः273 में सह़ीह़ कहा है।

स्रोत: An-Nasa'i, 'Amalul-Yawm wal-Laylah, p. 173, Al-Albani, 'Irwa'ul-Ghalil 1/135, 2/94.