Noor
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Noor / क़ुरआन / अल-फ़ज्र
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अल-फ़ज्र — उषा

الفَجۡرِ
मक्की आयत 30
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सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।

आयत 1

وَٱلْفَجْرِ

Wal-Fajr

सुबह की क़सम

आयत 2

وَلَيَالٍ عَشْرٍۢ

Wa layaalin 'ashr

और दस रातों की

आयत 3

وَٱلشَّفْعِ وَٱلْوَتْرِ

Wash shaf'i wal watr

और ज़ुफ्त व ताक़ की

आयत 4

وَٱلَّيْلِ إِذَا يَسْرِ

Wallaili izaa yasr

और रात की जब आने लगे

आयत 5

هَلْ فِى ذَٰلِكَ قَسَمٌۭ لِّذِى حِجْرٍ

Hal fee zaalika qasamul lizee hijr

अक्लमन्द के वास्ते तो ज़रूर बड़ी क़सम है (कि कुफ्फ़ार पर ज़रूर अज़ाब होगा)

आयत 6

أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ

Alam tara kaifa fa'ala rabbuka bi'aad

क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे आद के साथ क्या किया

आयत 7

إِرَمَ ذَاتِ ٱلْعِمَادِ

Iramaa zaatil 'imaad

यानि इरम वाले दराज़ क़द

आयत 8

ٱلَّتِى لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِى ٱلْبِلَٰدِ

Allatee lam yukhlaq misluhaa fil bilaad

जिनका मिसल तमाम (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा ही नहीं किया गया

आयत 9

وَثَمُودَ ٱلَّذِينَ جَابُوا۟ ٱلصَّخْرَ بِٱلْوَادِ

Wa samoodal lazeena jaabus sakhra bil waad

और समूद के साथ (क्या किया) जो वादी (क़रा) में पत्थर तराश कर घर बनाते थे

आयत 10

وَفِرْعَوْنَ ذِى ٱلْأَوْتَادِ

Wa fir'awna zil awtaad

और फिरऔन के साथ (क्या किया) जो (सज़ा के लिए) मेख़े रखता था

आयत 11

ٱلَّذِينَ طَغَوْا۟ فِى ٱلْبِلَٰدِ

Allazeena taghaw fil bilaad

ये लोग मुख़तलिफ़ शहरों में सरकश हो रहे थे

आयत 12

فَأَكْثَرُوا۟ فِيهَا ٱلْفَسَادَ

Fa aksaroo feehal fasaad

और उनमें बहुत से फ़साद फैला रखे थे

आयत 13

فَصَبَّ عَلَيْهِمْ رَبُّكَ سَوْطَ عَذَابٍ

Fasabba 'alaihim Rabbuka sawta 'azaab

तो तुम्हारे परवरदिगार ने उन पर अज़ाब का कोड़ा लगाया

आयत 14

إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلْمِرْصَادِ

Inna Rabbaka labil mirsaad

बेशक तुम्हारा परवरदिगार ताक में है

आयत 15

فَأَمَّا ٱلْإِنسَٰنُ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ رَبُّهُۥ فَأَكْرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَكْرَمَنِ

Fa ammal insaanu izaa mab talaahu Rabbuhoo fa akramahoo wa na' 'amahoo fa yaqoolu Rabbeee akraman

लेकिन इन्सान जब उसको उसका परवरदिगार (इस तरह) आज़माता है कि उसको इज्ज़त व नेअमत देता है, तो कहता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे इज्ज़त दी है

आयत 16

وَأَمَّآ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَهَٰنَنِ

Wa ammaaa izaa mabtalaahu faqadara 'alaihi rizqahoo fa yaqoolu Rabbeee ahaanan

मगर जब उसको (इस तरह) आज़माता है कि उस पर रोज़ी को तंग कर देता है बोल उठता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे ज़लील किया

आयत 17

كَلَّا ۖ بَل لَّا تُكْرِمُونَ ٱلْيَتِيمَ

Kalla bal laa tukrimooo nal yateem

हरगिज़ नहीं बल्कि तुम लोग न यतीम की ख़ातिरदारी करते हो

आयत 18

وَلَا تَحَٰٓضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ

Wa laa tahaaaddoona 'alaata'aamil miskeen

और न मोहताज को खाना खिलाने की तरग़ीब देते हो

आयत 19

وَتَأْكُلُونَ ٱلتُّرَاثَ أَكْلًۭا لَّمًّۭا

Wa taakuloonat turaasa aklal lammaa

और मीरारा के माल (हलाल व हराम) को समेट कर चख जाते हो

आयत 20

وَتُحِبُّونَ ٱلْمَالَ حُبًّۭا جَمًّۭا

Wa tuhibboonal maala hubban jammaa

और माल को बहुत ही अज़ीज़ रखते हो

आयत 21

كَلَّآ إِذَا دُكَّتِ ٱلْأَرْضُ دَكًّۭا دَكًّۭا

Kallaaa izaaa dukkatil ardu dakkan dakka

सुन रखो कि जब ज़मीन कूट कूट कर रेज़ा रेज़ा कर दी जाएगी

आयत 22

وَجَآءَ رَبُّكَ وَٱلْمَلَكُ صَفًّۭا صَفًّۭا

Wa jaaa'a Rabbuka wal malaku saffan saffaa

और तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म और फ़रिश्ते कतार के कतार आ जाएँगे

आयत 23

وَجِا۟ىٓءَ يَوْمَئِذٍۭ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍۢ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَٰنُ وَأَنَّىٰ لَهُ ٱلذِّكْرَىٰ

Wa jeee'a yawma'izim bi jahannnam; Yawma 'iziny yatazakkarul insaanu wa annaa lahuz zikraa

और उस दिन जहन्नुम सामने कर दी जाएगी उस दिन इन्सान चौंकेगा मगर अब चौंकना कहाँ (फ़ायदा देगा)

आयत 24

يَقُولُ يَٰلَيْتَنِى قَدَّمْتُ لِحَيَاتِى

Yaqoolu yaa laitanee qaddamtu lihayaatee

(उस वक्त) क़हेगा कि काश मैने अपनी (इस) ज़िन्दगी के वास्ते कुछ पहले भेजा होता

आयत 25

فَيَوْمَئِذٍۢ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُۥٓ أَحَدٌۭ

Fa Yawma izil laa yu'azzibu 'azaabahooo ahad

तो उस दिन ख़ुदा ऐसा अज़ाब करेगा कि किसी ने वैसा अज़ाब न किया होगा

आयत 26

وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُۥٓ أَحَدٌۭ

Wa laa yoosiqu wasaaqa hooo ahad

और न कोई उसके जकड़ने की तरह जकड़ेगा

आयत 27

يَٰٓأَيَّتُهَا ٱلنَّفْسُ ٱلْمُطْمَئِنَّةُ

Yaaa ayyatuhan nafsul mutma 'innah

(और कुछ लोगों से कहेगा) ऐ इत्मेनान पाने वाली जान

आयत 28

ٱرْجِعِىٓ إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةًۭ مَّرْضِيَّةًۭ

Irji'eee ilaa Rabbiki raadiyatam mardiyyah

अपने परवरदिगार की तरफ़ चल तू उससे ख़ुश वह तुझ से राज़ी

आयत 29

فَٱدْخُلِى فِى عِبَٰدِى

Fadkhulee fee 'ibaadee

तो मेरे (ख़ास) बन्दों में शामिल हो जा

आयत 30

وَٱدْخُلِى جَنَّتِى

Wadkhulee jannatee

और मेरे बेहिश्त में दाख़िल हो जा