Noor
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Noor / क़ुरआन / अस-साफ़्फ़ात
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अस-साफ़्फ़ात — पंक्तिबद्ध

الصَّافَّاتِ
मक्की आयत 182
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सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।

आयत 1

وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفًّۭا

Wassaaaffaati saffaa

(इबादत या जिहाद में) पर बाँधने वालों की (क़सम)

आयत 2

فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجْرًۭا

Fazzaajiraati zajraa

फिर (बदों को बुराई से) झिड़क कर डाँटने वाले की (क़सम)

आयत 3

فَٱلتَّٰلِيَٰتِ ذِكْرًا

Fattaaliyaati Zikra

फिर कुरान पढ़ने वालों की क़सम है

आयत 4

إِنَّ إِلَٰهَكُمْ لَوَٰحِدٌۭ

Inna Illaahakum la Waahid

तुम्हारा माबूद (यक़ीनी) एक ही है

आयत 5

رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ ٱلْمَشَٰرِقِ

Rabbus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa wa Rabbul mashaariq

जो सारे आसमान ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है (सबका) परवरदिगार है

आयत 6

إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِزِينَةٍ ٱلْكَوَاكِبِ

Innaa zaiyannas samaaa 'ad dunyaa bizeenatinil kawaakib

और (चाँद सूरज तारे के) तुलूउ व (गुरूब) के मक़ामात का भी मालिक है हम ही ने नीचे वाले आसमान को तारों की आरइश (जगमगाहट) से आरास्ता किया

आयत 7

وَحِفْظًۭا مِّن كُلِّ شَيْطَٰنٍۢ مَّارِدٍۢ

Wa hifzam min kulli Shaitaanim maarid

और (तारों को) हर सरकश शैतान से हिफ़ाज़त के वास्ते (भी पैदा किया)

आयत 8

لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلْمَلَإِ ٱلْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍۢ

Laa yassamma 'oona ilal mala il a'alaa wa yuqzafoona min kulli jaanib

कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं लगा सकते और (जहाँ सुन गुन लेना चाहा तो) हर तरफ़ से खदेड़ने के लिए शहाब फेके जाते हैं

आयत 9

دُحُورًۭا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌۭ وَاصِبٌ

Duhooranw wa lahum 'azaabunw waasib

और उनके लिए पाएदार अज़ाब है

आयत 10

إِلَّا مَنْ خَطِفَ ٱلْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌۭ ثَاقِبٌۭ

Illaa man khatifal khatfata fa atba'ahoo shihaabun saaqib

मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है

आयत 11

فَٱسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَآ ۚ إِنَّا خَلَقْنَٰهُم مِّن طِينٍۢ لَّازِبٍۭ

Fastaftihim ahum ashaddu khalqan am man khalaqnaa; innaa khalaqnaahum min teenil laazib

तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया

आयत 12

بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ

Bal'ajibta wa yaskharoon

बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं

आयत 13

وَإِذَا ذُكِّرُوا۟ لَا يَذْكُرُونَ

Wa izaa zukkiroo laa yazkuroon

और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं

आयत 14

وَإِذَا رَأَوْا۟ ءَايَةًۭ يَسْتَسْخِرُونَ

Wa izaa ra aw Aayatinw yastaskhiroon

और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं

आयत 15

وَقَالُوٓا۟ إِنْ هَٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ مُّبِينٌ

Wa qaalooo in haazaa illaa sihrum mubeen

और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है

आयत 16

أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ

'A-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa 'izaaman 'ainnaa lamab'oosoon

भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे

आयत 17

أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ

Awa aabaa'unal awwaloon

तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे

आयत 18

قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَٰخِرُونَ

Qul na'am wa antum daakhiroon

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)

आयत 19

فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ

Fa innamaa hiya zajra tunw waahidatun fa izaa hum yanzuroon

और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे

आयत 20

وَقَالُوا۟ يَٰوَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ ٱلدِّينِ

Qa qaaloo yaa wailanaa haazaa Yawmud-Deen

और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है

आयत 21

هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ

Haazaa Yawmul Faslil lazee kuntum bihee tukaziboon

(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे

आयत 22

۞ ٱحْشُرُوا۟ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ وَأَزْوَٰجَهُمْ وَمَا كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ

Uhshurul lazeena zalamoo wa azwaajahum wa maa kaanoo ya'budoon

(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं

आयत 23

مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْجَحِيمِ

Min doonil laahi fahdoohum ilaa siraatil Jaheem

उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ

आयत 24

وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْـُٔولُونَ

Wa qifoohum innahum mas'ooloon

और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है

आयत 25

مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ

Maa lakum laa tanaasaroon

(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते

आयत 26

بَلْ هُمُ ٱلْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ

Bal humul Yawma mustaslimoon

(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं

आयत 27

وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ

Wa aqbala ba'duhum 'alaa ba'diny yatasaaa'aloon

और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे

आयत 28

قَالُوٓا۟ إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ ٱلْيَمِينِ

Qaalooo innakum kuntum taatoonanaa 'anil yameen

(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे

आयत 29

قَالُوا۟ بَل لَّمْ تَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ

Qaaloo bal lam takoonoo mu'mineen

वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे

आयत 30

وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَٰنٍۭ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًۭا طَٰغِينَ

Wa maa kaana lanaa 'alaikum min sultaanim bal kuntum qawman taagheen

और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे

आयत 31

فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ ۖ إِنَّا لَذَآئِقُونَ

Fahaqqa 'alainaa qawlu Rabbinaaa innaa lazaaa'iqoon

फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे

आयत 32

فَأَغْوَيْنَٰكُمْ إِنَّا كُنَّا غَٰوِينَ

Fa aghwainaakum innaa kunnaa ghaaween

हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया

आयत 33

فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍۢ فِى ٱلْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ

Fa innahum Yawma'izin fil'azaabi mushtarikoon

ग़रज़ ये लोग सब के सब उस दिन अज़ाब में शरीक होगें

आयत 34

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ

Innaa kazaalika naf'alu bil mujrimeen

और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे

आयत 35

إِنَّهُمْ كَانُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ

Innahum kaanooo izaa qeela lahum laaa ilaaha illal laahu yastakbiroon

कि जब उनसे कहा जाता था कि खुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो अकड़ा करते थे

आयत 36

وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓا۟ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٍۢ مَّجْنُونٍۭ

Wa yaqooloona a'innaa lataarikooo aalihatinaa lishaa'irim majnoon

और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)

आयत 37

بَلْ جَآءَ بِٱلْحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلْمُرْسَلِينَ

bal jaaa'a bilhaqqi wa saddaqal mursaleen

बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है

आयत 38

إِنَّكُمْ لَذَآئِقُوا۟ ٱلْعَذَابِ ٱلْأَلِيمِ

Innakum lazaaa'iqul 'azaabil aleem

तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे

आयत 39

وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

Wa maa tujzawna illaa maa kuntum ta'maloon

और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे

आयत 40

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen

मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे

आयत 41

أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ رِزْقٌۭ مَّعْلُومٌۭ

Ulaaa'ika lahum rizqum ma'loom

उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी

आयत 42

فَوَٰكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ

Fa waakihu wa hum mukramoon

(और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर क़िस्म के मेवे

आयत 43

فِى جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ

Fee jannaatin Na'eem

और वह लोग बड़ी इज्ज़त से नेअमत के (लदे हुए)

आयत 44

عَلَىٰ سُرُرٍۢ مُّتَقَٰبِلِينَ

'Alaa sururim mutaqaa bileen

बाग़ों में तख्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे

आयत 45

يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۭ

Yutaafu 'alaihim bikaasim mim ma'een

उनमें साफ सफेद बुर्राक़ शराब के जाम का दौर चल रहा होगा

आयत 46

بَيْضَآءَ لَذَّةٍۢ لِّلشَّٰرِبِينَ

Baidaaa'a laz zatil lish shaaribeen

जो पीने वालों को बड़ा मज़ा देगी

आयत 47

لَا فِيهَا غَوْلٌۭ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ

Laa feehaa ghawlunw wa laa hum 'anhaa yunzafoon

(और फिर) न उस शराब में ख़ुमार की वजह से) दर्द सर होगा और न वह उस (के पीने) से मतवाले होंगे

आयत 48

وَعِندَهُمْ قَٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ عِينٌۭ

Wa 'indahum qaasiraatut tarfi 'een

और उनके पहलू में (शर्म से) नीची निगाहें करने वाली बड़ी बड़ी ऑंखों वाली परियाँ होगी

आयत 49

كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌۭ مَّكْنُونٌۭ

Ka annahunna baidum maknoon

(उनकी) गोरी-गोरी रंगतों में हल्की सी सुर्ख़ी ऐसी झलकती होगी

आयत 50

فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ

Fa aqbala ba'duhum 'alaa badiny yatasaaa 'aloon

गोया वह अन्डे हैं जो छिपाए हुए रखे हो

आयत 51

قَالَ قَآئِلٌۭ مِّنْهُمْ إِنِّى كَانَ لِى قَرِينٌۭ

Qaala qaaa'ilum minhum innee kaana lee qareen

फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते करते उनमें से एक कहने वाला बोल उठेगा कि (दुनिया में) मेरा एक दोस्त था

आयत 52

يَقُولُ أَءِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُصَدِّقِينَ

Yaqoolu a'innnaka laminal musaddiqeen

और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत की तसदीक़ करने वालों में हो

आयत 53

أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ

'A-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa 'izaaman 'ainnaa lamadeenoon

(भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा

आयत 54

قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ

Qaala hal antum muttali'oon

(फिर अपने बेहश्त के साथियों से कहेगा)

आयत 55

فَٱطَّلَعَ فَرَءَاهُ فِى سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ

Fattala'a fara aahu fee sawaaa'il Jaheem

तो क्या तुम लोग भी (मेरे साथ उसे झांक कर देखोगे) ग़रज़ झाँका तो उसे बीच जहन्नुम में (पड़ा हुआ) देखा

आयत 56

قَالَ تَٱللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ

Qaala tallaahi in kitta laturdeen

(ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे

आयत 57

وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ

Wa law laa ni'matu Rabbee lakuntu minal muhdareen

और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं भी (इस वक्त) तेरी तरह जहन्नुम में गिरफ्तार किया गया होता

आयत 58

أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ

Afamaa nahnu bimaiyiteen

(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है

आयत 59

إِلَّا مَوْتَتَنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ

Illa mawtatanal oola wa maa nahnu bimu'azzabeen

और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा

आयत 60

إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ

Inna haazaa falya'ma lil'aamiloon

(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है

आयत 61

لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ ٱلْعَٰمِلُونَ

Limisli haaza falya'ma lil 'aamiloon

ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए

आयत 62

أَذَٰلِكَ خَيْرٌۭ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ

Azaalika khairun nuzulan am shajaratuz Zaqqom

भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)

आयत 63

إِنَّا جَعَلْنَٰهَا فِتْنَةًۭ لِّلظَّٰلِمِينَ

Innaa ja'alnaahaa fitnatal lizzaalimeen

जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है

आयत 64

إِنَّهَا شَجَرَةٌۭ تَخْرُجُ فِىٓ أَصْلِ ٱلْجَحِيمِ

Innahaa shajaratun takhruju feee aslil Jaheem

ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है

आयत 65

طَلْعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَٰطِينِ

Tal'uhaa ka annahoo ru'oosush Shayaateen

उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे

आयत 66

فَإِنَّهُمْ لَءَاكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ

Fa innahum la aakiloona minhaa famaali'oona minhal butoon

फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे

आयत 67

ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًۭا مِّنْ حَمِيمٍۢ

Summa inna lahum 'alaihaa lashawbam min hameem

फिर उसके ऊपर से उन को खूब खौलता हुआ पानी (पीप वग़ैरह में) मिला मिलाकर पीने को दिया जाएगा

आयत 68

ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى ٱلْجَحِيمِ

Summa inna marji'ahum la ilal Jaheem

फिर (खा पीकर) उनको जहन्नुम की तरफ यक़ीनन लौट जाना होगा

आयत 69

إِنَّهُمْ أَلْفَوْا۟ ءَابَآءَهُمْ ضَآلِّينَ

Innahum alfaw aabaaa'ahum daaalleen

उन लोगों ने अपन बाप दादा को गुमराह पाया था

आयत 70

فَهُمْ عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِمْ يُهْرَعُونَ

Fahum 'alaa aasaarihim yuhra'oon

ये लोग भी उनके पीछे दौड़े चले जा रहे हैं

आयत 71

وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ ٱلْأَوَّلِينَ

Wa laqad dalla qablahum aksarul awwaleen

और उनके क़ब्ल अगलों में से बहुतेरे गुमराह हो चुके

आयत 72

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ

Wa laqad arsalnaa feehim munzireen

उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था

आयत 73

فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلْمُنذَرِينَ

Fanzur kaifa kaana 'aaqibatul munzareen

ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ

आयत 74

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen

मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)

आयत 75

وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌۭ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ

Wa laqad naadaanaa Noohun falani'mal mujeeboon

और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे

आयत 76

وَنَجَّيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ

Wa jajainaahu wa ahlahoo minal karbil 'azeem

और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

आयत 77

وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلْبَاقِينَ

Wa ja'alnaa zurriyyatahoo hummul baaqeen

और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा

आयत 78

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

Wa taraknaa 'alaihi fil aakhireen

और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा

आयत 79

سَلَٰمٌ عَلَىٰ نُوحٍۢ فِى ٱلْعَٰلَمِينَ

Salaamun 'alaa Noohin fil 'aalameen

कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है

आयत 80

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

Innaa kazaalika najzil muhsineen

हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

आयत 81

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

Innahoo min 'ibaadinal mu'mineen

इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे

आयत 82

ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْءَاخَرِينَ

Summa aghraqnal aakhareen

फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया

आयत 83

۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبْرَٰهِيمَ

Wa ina min shee'atihee la Ibraaheem

और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे

आयत 84

إِذْ جَآءَ رَبَّهُۥ بِقَلْبٍۢ سَلِيمٍ

Iz jaaa'a Rabbahoo bi qalbin saleem

जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था

आयत 85

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَاذَا تَعْبُدُونَ

Iz qaala li abeehi wa qawmihee maazaa ta'budoon

जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग किस चीज़ की परसतिश करते हो

आयत 86

أَئِفْكًا ءَالِهَةًۭ دُونَ ٱللَّهِ تُرِيدُونَ

A'ifkan aalihatan doonal laahi tureedoon

क्या खुदा को छोड़कर दिल से गढ़े हुए माबूदों की तमन्ना रखते हो

आयत 87

فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ

Famaa zannukum bi Rabbil'aalameen

फिर सारी खुदाई के पालने वाले के साथ तुम्हारा क्या ख्याल है

आयत 88

فَنَظَرَ نَظْرَةًۭ فِى ٱلنُّجُومِ

Fanazara nazratan finnujoom

फिर (एक ईद में उन लोगों ने चलने को कहा) तो इबराहीम ने सितारों की तरफ़ एक नज़र देखा

आयत 89

فَقَالَ إِنِّى سَقِيمٌۭ

Faqaala inee saqeem

और कहा कि मैं (अनक़रीब) बीमार पड़ने वाला हूँ

आयत 90

فَتَوَلَّوْا۟ عَنْهُ مُدْبِرِينَ

Fatawallaw 'anhu mudbireen

तो वह लोग इबराहीम के पास से पीठ फेर फेर कर हट गए

आयत 91

فَرَاغَ إِلَىٰٓ ءَالِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ

Faraagha ilaaa aalihatihim faqaala alaa taakuloon

(बस) फिर तो इबराहीम चुपके से उनके बुतों की तरफ मुतावज्जे हुए और (तान से) कहा तुम्हारे सामने इतने चढ़ाव रखते हैं

आयत 92

مَا لَكُمْ لَا تَنطِقُونَ

Maa lakum laa tantiqoon

आख़िर तुम खाते क्यों नहीं (अरे तुम्हें क्या हो गया है)

आयत 93

فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًۢا بِٱلْيَمِينِ

Faraagha 'alaihim darbam bilyameen

कि तुम बोलते तक नहीं

आयत 94

فَأَقْبَلُوٓا۟ إِلَيْهِ يَزِفُّونَ

Fa aqbalooo ilaihi yaziffoon

फिर तो इबराहीम दाहिने हाथ से मारते हुए उन पर पिल पड़े (और तोड़-फोड़ कर एक बड़े बुत के गले में कुल्हाड़ी डाल दी)

आयत 95

قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ

Qaala ata'budoona maa tanhitoon

जब उन लोगों को ख़बर हुई तो इबराहीम के पास दौड़ते हुए पहुँचे

आयत 96

وَٱللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ

Wallaahu khalaqakum wa maa ta'maloon

इबराहीम ने कहा (अफ़सोस) तुम लोग उसकी परसतिश करते हो जिसे तुम लोग खुद तराश कर बनाते हो

आयत 97

قَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ لَهُۥ بُنْيَٰنًۭا فَأَلْقُوهُ فِى ٱلْجَحِيمِ

Qaalub noo lahoo bun yaanan fa alqoohu fil jaheem

हालाँकि तुमको और जिसको तुम लोग बनाते हो (सबको) खुदा ही ने पैदा किया है (ये सुनकर) वह लोग (आपस में कहने लगे) इसके लिए (भट्टी की सी) एक इमारत बनाओ

आयत 98

فَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًۭا فَجَعَلْنَٰهُمُ ٱلْأَسْفَلِينَ

Fa araadoo bihee kaidan faja 'alnaahumul asfaleen

और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही

आयत 99

وَقَالَ إِنِّى ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّى سَيَهْدِينِ

Wa qaala innee zaahibun ilaa Rabbee sa yahdeen

तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ

आयत 100

رَبِّ هَبْ لِى مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

Rabbi hab lee minas saaliheen

वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा

आयत 101

فَبَشَّرْنَٰهُ بِغُلَٰمٍ حَلِيمٍۢ

Fabashsharnaahu bighulaamin haleem

तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी

आयत 102

فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّٰبِرِينَ

Falamma balagha ma'a hus sa'ya qaala yaa buniya inneee araa fil manaami anneee azbahuka fanzur maazaa taraa; qaala yaaa abatif 'al maa tu'maru satajidunee in shaaa'allaahu minas saabireen

फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे

आयत 103

فَلَمَّآ أَسْلَمَا وَتَلَّهُۥ لِلْجَبِينِ

Falammaaa aslamaa wa tallahoo liljabeen

फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया

आयत 104

وَنَٰدَيْنَٰهُ أَن يَٰٓإِبْرَٰهِيمُ

Wa naadainaahu ai yaaaa Ibraheem

और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम

आयत 105

قَدْ صَدَّقْتَ ٱلرُّءْيَآ ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

Qad saddaqtar ru'yaa; innaa kazaalika najzil muhsineen

तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया अब तुम दोनों को बड़े मरतबे मिलेगें हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर देते हैं

आयत 106

إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْبَلَٰٓؤُا۟ ٱلْمُبِينُ

Inna haazaa lahuwal balaaa'ul mubeen

इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था

आयत 107

وَفَدَيْنَٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍۢ

Wa fadainaahu bizibhin 'azeem

और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया

आयत 108

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

Wa taraknaa 'alaihi fil aakhireen

और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है

आयत 109

سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ

Salaamun 'alaaa Ibraaheem

कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं

आयत 110

كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

Kazaalika najzil muhsineen

हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं

आयत 111

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

Innahoo min 'ibaadinal mu'mineen

बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे

आयत 112

وَبَشَّرْنَٰهُ بِإِسْحَٰقَ نَبِيًّۭا مِّنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

Wa bashsharnaahu bi Ishaaqa Nabiyayam minas saaliheen

और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी

आयत 113

وَبَٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰٓ إِسْحَٰقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌۭ وَظَالِمٌۭ لِّنَفْسِهِۦ مُبِينٌۭ

Wa baaraknaa 'alaihi wa 'alaaa Ishaaq; wa min zurriyya tihimaa muhsinunw wa zaalimul linafshihee mubeen

जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला

आयत 114

وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

Wa laqad mananna alaa Moosaa wa Haaroon

और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं

आयत 115

وَنَجَّيْنَٰهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ

Wa najjainaahumaa wa qawmahumaa minal karbil 'azeem

और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

आयत 116

وَنَصَرْنَٰهُمْ فَكَانُوا۟ هُمُ ٱلْغَٰلِبِينَ

Wa nasarnaahum fakaanoo humul ghaalibeen

और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आख़िर) यही लोग ग़ालिब रहे

आयत 117

وَءَاتَيْنَٰهُمَا ٱلْكِتَٰبَ ٱلْمُسْتَبِينَ

Wa aatainaahumal Kitaabal mustabeen

और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की

आयत 118

وَهَدَيْنَٰهُمَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ

Wa hadainaahumus Siraatal Mustaqeem

और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई

आयत 119

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِى ٱلْءَاخِرِينَ

Wa taraknaa 'alaihimaa fil aakhireen

और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा

आयत 120

سَلَٰمٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

Salaamun 'alaa Moosaa wa Haaroon

कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है

आयत 121

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

Innaa kazaalika najzil muhsineen

हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

आयत 122

إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

Innahumaa min 'ibaadinal mu'mineen

बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे)

आयत 123

وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

Wa inna Ilyaasa laminal mursaleen

और इसमें शक नहीं कि इलियास यक़ीनन पैग़म्बरों में से थे

आयत 124

إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَلَا تَتَّقُونَ

Iz qaala liqawmiheee alaa tattaqoon

जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते

आयत 125

أَتَدْعُونَ بَعْلًۭا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ ٱلْخَٰلِقِينَ

Atad'oona Ba'lanw wa tazaroona ahsanal khaaliqeen

क्या तुम लोग बाल (बुत) की परसतिश करते हो और खुदा को छोड़े बैठे हो जो सबसे बेहतर पैदा करने वाला है

आयत 126

ٱللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ

Allaaha Rabbakum wa Rabba aabaaa'ikumul awwaleen

और (जो) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे अगले बाप दादाओं का (भी) परवरदिगार है

आयत 127

فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ

Fakazzaboohu fa inna hum lamuhdaroon

तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे

आयत 128

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen

मगर खुदा के निरे खरे बन्दे महफूज़ रहेंगे

आयत 129

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

Wa taraknaa 'alaihi fil aakhireen

और हमने उनका ज़िक्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा

आयत 130

سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِلْ يَاسِينَ

Salaamun 'alaaa Ilyaaseen

कि (हर तरफ से) आले यासीन पर सलाम (ही सलाम) है

आयत 131

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

Innaa kazaalika najzil muhsineen

हम यक़ीनन नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं

आयत 132

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

Innahoo min 'ibaadinal mu'mineen

बेशक वह हमारे (ख़ालिस) ईमानदार बन्दों में थे

आयत 133

وَإِنَّ لُوطًۭا لَّمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

Wa inna Lootal laminal mursaleen

और इसमें भी शक नहीं कि लूत यक़ीनी पैग़म्बरों में से थे

आयत 134

إِذْ نَجَّيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ

Iz najjainaahu wa ahlahooo ajma'een

जब हमने उनको और उनके लड़के वालों सब को नजात दी

आयत 135

إِلَّا عَجُوزًۭا فِى ٱلْغَٰبِرِينَ

Illaa 'ajoozan fil ghaabireen

मगर एक (उनकी) बूढ़ी बीबी जो पीछे रह जाने वालों ही में थीं

आयत 136

ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْءَاخَرِينَ

Summa dammarnal aakhareen

फिर हमने बाक़ी लोगों को तबाह व बर्बाद कर दिया

आयत 137

وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ

Wa innakum latamurroona 'alaihim musbiheen

और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से (कभी) सुबह को और (कभी) शाम को (आते जाते गुज़रते हो)

आयत 138

وَبِٱلَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ

Wa billail; afalaa ta'qiloon

तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते

आयत 139

وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

Wa inna Yoonusa laminal mursaleen

और इसमें शक नहीं कि यूनुस (भी) पैग़म्बरों में से थे

आयत 140

إِذْ أَبَقَ إِلَى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ

Iz abaqa ilal fulkil mash hoon

(वह वक्त याद करो) जब यूनुस भाग कर एक भरी हुई कश्ती के पास पहुँचे

आयत 141

فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُدْحَضِينَ

Fasaahama fakaana minal mudhadeen

तो (अहले कश्ती ने) कुरआ डाला तो (उनका ही नाम निकला) यूनुस ने ज़क उठायी (और दरिया में गिर पड़े)

आयत 142

فَٱلْتَقَمَهُ ٱلْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌۭ

Faltaqamahul hootu wa huwa muleem

तो उनको एक मछली निगल गयी और यूनुस खुद (अपनी) मलामत कर रहे थे

आयत 143

فَلَوْلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلْمُسَبِّحِينَ

Falaw laaa annahoo kaana minal musabbiheen

फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते

आयत 144

لَلَبِثَ فِى بَطْنِهِۦٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ

Lalabisa fee batniheee ilaa Yawmi yub'asoon

तो रोज़े क़यामत तक मछली के पेट में रहते

आयत 145

۞ فَنَبَذْنَٰهُ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ سَقِيمٌۭ

Fanabaznaahu bil'araaa'i wa huwa saqeem

फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया

आयत 146

وَأَنۢبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةًۭ مِّن يَقْطِينٍۢ

Wa ambatnaa 'alaihi shajaratam mai yaqteen

और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे और हमने उन पर साये के लिए एक कद्दू का दरख्त उगा दिया

आयत 147

وَأَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ مِا۟ئَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ

Wa arsalnaahu ilaa mi'ati alfin aw yazeedoon

और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा)

आयत 148

فَـَٔامَنُوا۟ فَمَتَّعْنَٰهُمْ إِلَىٰ حِينٍۢ

Fa aamanoo famatta' naahum ilaa heen

तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा

आयत 149

فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ

Fastaftihim ali Rabbikal banaatu wa lahumul banoon

तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे

आयत 150

أَمْ خَلَقْنَا ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ إِنَٰثًۭا وَهُمْ شَٰهِدُونَ

Am khalaqnal malaaa'i kata inaasanw wa hm shaahidoon

(क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे

आयत 151

أَلَآ إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ

Alaaa innahum min ifkihim la yaqooloon

ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है

आयत 152

وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَٰذِبُونَ

Waladal laahu wa innhum lakaaziboon

और ये लोग यक़ीनी झूठे हैं

आयत 153

أَصْطَفَى ٱلْبَنَاتِ عَلَى ٱلْبَنِينَ

Astafal banaati 'alal baneen

क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है

आयत 154

مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ

Maa lakum kaifa tahkumoon

(अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो

आयत 155

أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

Afalaa tazakkaroon

तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते

आयत 156

أَمْ لَكُمْ سُلْطَٰنٌۭ مُّبِينٌۭ

Am lakum sultaanum mubeen

या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है

आयत 157

فَأْتُوا۟ بِكِتَٰبِكُمْ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ

Faatoo bi Kitaabikum in kuntum saadiqeen

तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो

आयत 158

وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًۭا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ

Wa ja'aloo bainahoo wa bainal jinnati nasabaa; wa laqad 'alimatil jinnatu innahum lamuhdaroon

और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे

आयत 159

سُبْحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ

Subhaanal laahi 'ammaa yasifoon

ये लोग जो बातें बनाया करते हैं इनसे खुदा पाक साफ़ है

आयत 160

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen

मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)

आयत 161

فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ

Fa innakum wa maa ta'ubdoon

ग़रज़ तुम लोग खुद और तुम्हारे माबूद

आयत 162

مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَٰتِنِينَ

Maaa antum 'alaihi befaaatineen

उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते

आयत 163

إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ ٱلْجَحِيمِ

Illaa man huwa saalil jaheem

मगर उसको जो जहन्नुम में झोंका जाने वाला है

आयत 164

وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌۭ مَّعْلُومٌۭ

Wa maa minnasa illaa lahoo maqaamum ma'loom

और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है

आयत 165

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلصَّآفُّونَ

Wa innaa llanah nus saaffoon

और हम तो यक़ीनन (उसकी इबादत के लिए) सफ बाँधे खड़े रहते हैं

आयत 166

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلْمُسَبِّحُونَ

Wa innaa lanah nul musabbihoon

और हम तो यक़ीनी (उसकी) तस्बीह पढ़ा करते हैं

आयत 167

وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ

Wa in kaanoo la yaqooloon

अगरचे ये कुफ्फार (इस्लाम के क़ब्ल) कहा करते थे

आयत 168

لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًۭا مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ

Law anna 'indana zikram minal awwaleen

कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता

आयत 169

لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

Lakunna 'ibaadal laahil mukhlaseen

तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते

आयत 170

فَكَفَرُوا۟ بِهِۦ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ

Fakafaroo bihee fasawfa ya'lamoon

(मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब (उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा

आयत 171

وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلْمُرْسَلِينَ

Wa laqad sabaqat Kalimatunaa li'ibaadinal mursa leen

और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है

आयत 172

إِنَّهُمْ لَهُمُ ٱلْمَنصُورُونَ

Innaa hum lahumul mansooroon

कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी

आयत 173

وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلْغَٰلِبُونَ

Wa inna jundana lahumul ghaaliboon

और हमारा लश्कर तो यक़ीनन ग़ालिब रहेगा

आयत 174

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ

Fatawalla 'anhum hatta heen

तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

आयत 175

وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ

Wa absirhum fasawfa yubsiroon

और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे

आयत 176

أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ

Afabi'azaabinaa yasta'jiloon

तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं

आयत 177

فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلْمُنذَرِينَ

Fa izaa nazala bisaahatihim fasaaa'a sabaahul munzareen

फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी

आयत 178

وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ

Wa tawalla 'anhum hattaa heen

और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

आयत 179

وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ

Wa absir fasawfa yubsiroon

और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें

आयत 180

سُبْحَٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ

Subhaana Rabbika Rabbil 'izzati 'amma yasifoon

ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है

आयत 181

وَسَلَٰمٌ عَلَى ٱلْمُرْسَلِينَ

Wa salaamun 'alalmursaleen

और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो

आयत 182

وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ

Walhamdu lillaahi Rabbil 'aalameen

और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है