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मजलिस में बैठने के अज़कार

शिष्टाचार और आदाब · 1 दुआ

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عَنِ ابْنِ عُمَرَ رضي الله عنهما قَاَلَ: كَانَ يُعَدُّ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي الْمَجْلِسِ الوَاحِدِ مِائَةُ مَرَّةٍ مِنْ قَبْلِ أَنْ يَقُومَ: (رَبِّ اغْفِرْ لِي, وَتُبْ عَلَيَّ, إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الغَفُورُ

इब्न उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) ने कहा: एक मजलिस में उठने से पहले रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए सौ बार गिना जाता था: "ऐ मेरे रब! मुझे क्षमा कर और मेरी तौबा क़बूल कर; निस्संदेह तू ही बहुत तौबा क़बूल करने वाला, बड़ा क्षमाशील है।"

स्रोत: Sahih Ibn Majah 2/321, Sahih At-Tirmizi 3/153.

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