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اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ كَسَوْتَنِيهِ, أَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِهِ وَخَيْرِ مَا صُنِعَ لَهُ, وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهِ وَشَرِّ مَا صُنِعَ لَهُ
ऐ अल्लाह! तेरे ही लिए तारीफ़ है। तूने मुझे यह पहनाया, मैं तुझसे इसकी भलाई और जिस चीज़ के लिए इसे बनाया गया है, उसकी भलाई चाहता हूं। तथा इसकी बुराई और जिस चीज़ के लिए इसे बनाया गया है, उसकी बुराई से तेरी पनाह चाहता हूं।) (1) .................... (1) अबू दाऊद, हदीस संख्याः4020, तिर्मिज़ी, हदीस संख्याः1767, बग़वीः12/40, देखिएः शौख़ अल्बानी की मुख़्तसर श्माइले-तिर्मिज़ी पृष्ठः47
स्रोत: Abu Dawud, At-Tirmizi. Al-Albani, Mukhtasar Shamd'il At-Tirmizi, p. 47.