1
اللَّهُمَّ اسْقِنَا غَيْثاً مُغِيثاً مَرِيئاً مَرِيعاً, نَافِعاً غَيْرَ ضَارٍّ, عَاجِلاً غَيْرَ آجِلٍ
ऐ अल्लाह! हमें ऐसी बारिश अता कर जो मददगार, ख़ुशगवार, हरियाली लाने वाली और फ़ायदा पहुंचाने वाली हो, नुक़सान देने वाली न हो, जल्दी आने वाली हो न कि देर से आने वाली।) (1) ................................. (1) अबू दाऊदः1/303, हदीस संख्याः1171, और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ कहा है, सह़ीह़ अबू दाऊदः1/216
स्रोत: Abu Dawud 1/303.
2
اللَّهُمَّ أَغِثْنَا, اللَّهُمَّ أَغِثْنَا, اللَّهُمَّ أَغِثْنَا
ऐ अल्लाह! हमें बारिश दे। ऐ अल्लाह! हमें बारिश दे। ऐ अल्लाह! हमें बारिश दे।) (1) ............................. (1) बुखारीः1/224, ह़दीस संख्याः1014, मुस्लिमः2/613, ह़दीस संख्याः897
स्रोत: Al-Bukhari 1/224, Muslim 2/613.
3
اللَّهُمَّ اسْقِ عِبَادَكَ, وَبَهَائِمَكَ, وَانْشُرْ رَحْمَتَكَ, وَأَحْيِي بَلَدَكَ الْمَيِّتَ
ऐ अल्लाह! अपने बन्दों और अपने चोपायों को पानी पिला، अपनी रह़मत को फैला दे और अपने मुर्दा शहर को ज़िन्दा कर दे।) (1) ................................. (1) अबू दाऊदः1/305, हदीस संख्याः1178, और शैख़ अल्बानी ने इसे ह़सन कहा है, सह़ीह़ अबू दाऊदः1/218
स्रोत: Abu Dawud 1/305.