يَبْدَأُ بِرِجْلِهِ الْيُسْرَى, وَيَقُولُ: بِسْمِ اللَّهِ وَالصّلَاةُ وَالسَّلَامُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ, اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِك, اللَّهُمَّ اعْصِمْنِي مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
पहले अपना बायां पांव निकाले।) (1), और कहेः (अल्लाह के नाम से, और दरूद व सलाम हो रसूलुल्लाह पर, ऐ अल्लाह! मैं तुझ से तेरे फ़ज़्ल का सवाल करता हूं। ऐ अल्लाह! मुझे बहिष्कृत शैतान से बचा) (2) ........................ (1) ह़ाकिमः1/218, बैहक़ीः2/442, शैख़ अल्बानी ने इसे सिल्सिला सह़ीह़ाः5/624, ह़दीस संख्याः2478, में ह़सन कहा है। इसकी तख़रीज गुज़र चुकी है। (2) मस्जिद में प्रवेश करने से संबंधित पिछली ह़दीस की रिवायतों (संख्याः25) की तख़रीज देखिए।और (ऐ अल्लाह! मुझे बहिष्कृत शैतान से बचा) की वृद्धि इब्ने माजा की है। देखिएः सह़ीह़ इब्ने माजाः1/129
स्रोत: Abu Dawud 1/126, Sahih Al-Jami' 1/528, Muslim 1/494. Sahih Ibn Majah 1/128-129.