إِذَا تَزَوَّجَ أَحَدُكُمُ امْرَأَةً, أَوْ إِذَا اشْتَرَى خَادِماً فَلْيَقُلْ: اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا, وَخَيْرَ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ, وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا, وَشَرِّ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ, وَإِذَا اشْتَرَى بَعِيراً فَلْيَأْخُذْ بِذِرْوَةِ سَنَامِهِ وَلْيَقُلْ مِثْلَ ذَلِكَ
जब तुम में कोई आदमी किसी औरत से शादी करे या लोंडी खरीदे तो यह कहेः 'ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इसकी भलाई का सवाल करता हूं और उस चीज़ की भलाई का सवाल करता हूं जिस पर तूने इसे पैदा किया है और तेरी पनाह मांगता हूं इसके शर से और उस चीज़ के शर से जिस पर तूने इसे पैदा किया है।' और जब कोई ऊंट (या जानवर) खरीदे तो उसकी की चोटी पकड़ कर यही दुआ करे।) (1) ................................ (1) अबू दाऊदः2/248, हदीस संख्याः2160, इब्ने माजाः1/617, हदीस संख्याः1918, देखिएः सह़ीह़ इब्ने माजाः1/324
स्रोत: Abu Dawud 2/248, Ibn Majah 1/617.