اللَّهُمَّ أَعِذْهُ مِنْ عَذَابِ القَبْرِ, وإن قال: اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ فَرَطاً وَذُخْراً لِوَالِدَيْهِ, وَشَفِيعاً مُجَاباً, اللَّهُمَّ ثَقِّلْ بِهِ مَوَازِينَهُمَا, وَأَعْظِمْ بِهِ أُجورَهُمَا, وَأَلْحِقْهُ بِصَالِحِ الْمُؤْمِنِينَ, وَاجْعَلْهُ فِي كَفَالَةِ إِبْرَاهِيمَ, وَقِهِ بِرَحْمَتِكَ عَذَابَ الْجَحِيمِ, وَأَبْدِلْهُ دَاراً خَيْراً مِنْ دَارِهِ, وَأَهْلاً خَيْراً مِنْ أَهْلِهِ, اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِأَسْلاَفِنَا, وَأَفْرَاطِنَا, وَمَنْ سَبَقَنَا بِالْإِيمَانِ (فَحَسَنٌ)
ऐ अल्लाह! इसे क़ब्र के अज़ाब से बचा। (और यह कहना भी अच्छा है:) ऐ अल्लाह! इसे इसके माता-पिता के लिए अग्रदूत, संचय और ऐसा सिफ़ारिशी बना जिसकी सिफ़ारिश क़बूल हो। ऐ अल्लाह! इसके द्वारा उन दोनों के तराज़ू भारी कर और इसके द्वारा उनके अज्र बढ़ा दे, इसे नेक मोमिनों के साथ मिला दे, इसे इब्राहीम की संरक्षकता में रख, और अपनी रहमत से इसे जहन्नम के अज़ाब से बचा, और इसे इसके घर से बेहतर घर और इसके परिवार से बेहतर परिवार अता कर। ऐ अल्लाह! हमारे पूर्वजों, हमारी मृत संतानों और जो ईमान में हमसे आगे बढ़ गए, उन्हें क्षमा कर।
स्रोत: Ibn Qudamah, Al-Mughni 3/416.