وَٱلضُّحَىٰ
Wad duhaa
(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।
وَٱلضُّحَىٰ
Wad duhaa
(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम
وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ
Wal laili iza sajaa
और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ
Ma wad da'aka rabbuka wa ma qalaa
कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ
وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ
Walal-aakhiratu khairul laka minal-oola
और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है
وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ
Wa la sawfa y'uteeka rabbuka fatarda
और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ
أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ
Alam ya jidka yateeman fa aawaa
क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)
وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ
Wa wa jadaka daal lan fahada
और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया
وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ
Wa wa jadaka 'aa-ilan fa aghnaa
और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया
فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ
Fa am mal yateema fala taqhar
तो तुम भी यतीम पर सितम न करना
وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ
Wa am mas saa-ila fala tanhar
माँगने वाले को झिड़की न देना
وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ
Wa amma bi ni'mati rabbika fahad dith
और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना