Noor
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Noor / क़ुरआन / अद-दुहा
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अद-दुहा — चाश्त का समय

الضُّحَىٰ
मक्की आयत 11
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सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।

आयत 1

وَٱلضُّحَىٰ

Wad duhaa

(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम

आयत 2

وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ

Wal laili iza sajaa

और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले

आयत 3

مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ

Ma wad da'aka rabbuka wa ma qalaa

कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ

आयत 4

وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ

Walal-aakhiratu khairul laka minal-oola

और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है

आयत 5

وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ

Wa la sawfa y'uteeka rabbuka fatarda

और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ

आयत 6

أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ

Alam ya jidka yateeman fa aawaa

क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)

आयत 7

وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ

Wa wa jadaka daal lan fahada

और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया

आयत 8

وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ

Wa wa jadaka 'aa-ilan fa aghnaa

और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया

आयत 9

فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ

Fa am mal yateema fala taqhar

तो तुम भी यतीम पर सितम न करना

आयत 10

وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ

Wa am mas saa-ila fala tanhar

माँगने वाले को झिड़की न देना

आयत 11

وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ

Wa amma bi ni'mati rabbika fahad dith

और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना