आयत 1
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ
Qul a'uzoo bi rabbil-falaq
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं सुबह के मालिक की
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ
Qul a'uzoo bi rabbil-falaq
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं सुबह के मालिक की
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
Min sharri ma khalaq
हर चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की पनाह माँगता हूँ
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
Wa min sharri ghasiqin iza waqab
और अंधेरीरात की बुराई से जब उसका अंधेरा छा जाए
وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ
Wa min sharrin-naffaa-thaati fil 'uqad
और गन्डों पर फूँकने वालियों की बुराई से
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
Wa min shar ri haasidin iza hasad
(जब फूँके) और हसद करने वाले की बुराई से