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Noor / क़ुरआन / अल-मुरसलात
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अल-मुरसलात — भेजी गई

المُرۡسَلَاتِ
मक्की आयत 50
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सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।

आयत 1

وَٱلْمُرْسَلَٰتِ عُرْفًۭا

Wal mursalaati'urfaa

हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं

आयत 2

فَٱلْعَٰصِفَٰتِ عَصْفًۭا

Fal'aasifaati 'asfaa

फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं

आयत 3

وَٱلنَّٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا

Wannaashiraati nashraa

और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं

आयत 4

فَٱلْفَٰرِقَٰتِ فَرْقًۭا

Falfaariqaati farqaa

फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं

आयत 5

فَٱلْمُلْقِيَٰتِ ذِكْرًا

Falmulqiyaati zikra

फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं

आयत 6

عُذْرًا أَوْ نُذْرًا

'Uzran aw nuzraa

ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए

आयत 7

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ

Innamaa too'adoona lawaaqi'

कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा

आयत 8

فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ

Fa izam nujoomu tumisat

फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी

आयत 9

وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ

Wa izas samaaa'u furijat

और जब आसमान फट जाएगा

आयत 10

وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ

Wa izal jibaalu nusifat

और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे

आयत 11

وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ

Wa izar Rusulu uqqitat

और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे

आयत 12

لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ

Li ayyi yawmin ujjilat

(फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है

आयत 13

لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ

Li yawmil Fasl

फ़ैसले के दिन के लिए

आयत 14

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ

Wa maaa adraaka maa yawmul fasl

और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है

आयत 15

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailuny yawma 'izillilmukazzibeen

उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

आयत 16

أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ

Alam nuhlikil awwaleen

क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया

आयत 17

ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْءَاخِرِينَ

Summa nutbi'uhumul aakhireen

फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे

आयत 18

كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ

Kazzlika naf'alu bilmujrimeen

हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं

आयत 19

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailunw yawma 'izil lil mukazzibeen

उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

आयत 20

أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ

Alam nakhlukkum mimmaaa'im maheen

क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया

आयत 21

فَجَعَلْنَٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ

Faja'alnaahu fee qaraarim makeen

फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक

आयत 22

إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ

Illaa qadrim ma'loom

एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा

आयत 23

فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَٰدِرُونَ

Faqadarnaa fani'mal qaadiroon

फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं

आयत 24

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailuny yawma 'izil lilmukazzibeen

उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

आयत 25

أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا

Alam naj'alil arda kifaataa

क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया

आयत 26

أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا

Ahyaaa'anw wa amwaataa

और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए

आयत 27

وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَٰمِخَٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا

Wa ja'alnaa feehaa rawaasiya shaamikhaatinw wa asqainaakum maaa'an furaataa

और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया

आयत 28

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailuny yawma 'izil lilmukazzibeen

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

आयत 29

ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ

Intaliqooo ilaa maa kuntum bihee tukazziboon

जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो

आयत 30

ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَٰثِ شُعَبٍۢ

Intaliqooo ilaa zillin zee salaasi shu'ab

(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं

आयत 31

لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ

Laa zaleelinw wa laa yughnee minal lahab

जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा

आयत 32

إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ

Innahaa tarmee bishararin kalqasr

उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल

आयत 33

كَأَنَّهُۥ جِمَٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ

Ka annahoo jimaalatun sufr

गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं

आयत 34

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailuny yawma 'izil lilmukazibeen

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

आयत 35

هَٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ

Haazaa yawmu laa uantiqoon

ये वह दिन होगा कि लोग लब तक न हिला सकेंगे

आयत 36

وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ

Wa laa yu'zanu lahum fa ya'taziroon

और उनको इजाज़त दी जाएगी कि कुछ उज्र माअज़ेरत कर सकें

आयत 37

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailunw yawma 'izil lilmukazzibeen

उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है

आयत 38

هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ

Haaza yawmul fasli jama 'naakum wal awwaleen

यही फैसले का दिन है (जिस में) हमने तुमको और अगलों को इकट्ठा किया है

आयत 39

فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ

Fa in kaana lakum kaidun fakeedoon

तो अगर तुम्हें कोई दाँव करना हो तो आओ चल चुको

आयत 40

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailuny yawma'izil lilmukazzibeen

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

आयत 41

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ

Innal muttaqeena fee zilaalinw wa 'uyoon

बेशक परहेज़गार लोग (दरख्तों की) घनी छाँव में होंगे

आयत 42

وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ

Wa fawaakiha mimmaa yastahoon

और चश्मों और आदमियों में जो उन्हें मरग़ूब हो

आयत 43

كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

Kuloo washraboo haneee 'am bimaa kuntum ta'maloon

(दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो

आयत 44

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

Innaa kazaalika najzil muhsineen

मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं

आयत 45

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailuny yawma 'izil lilmuzkazzibeen

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

आयत 46

كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ

Kuloo wa tamatta'oo qaleelan innakum mujrimoon

(झुठलाने वालों) चन्द दिन चैन से खा पी लो तुम बेशक गुनेहगार हो

आयत 47

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailunny yawma 'izil lilmukazzibeen

उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

आयत 48

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ

Wa izaa qeela lahumur ka'oo aa yarka'oon

और जब उनसे कहा जाता है कि रूकूउ करों तो रूकूउ नहीं करते

आयत 49

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

Wailunny yawma 'izil lilmukazzibeen

उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

आयत 50

فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ

Fabi ayyi hadeesim ba'dahoo yu'minoon

अब इसके बाद ये किस बात पर ईमान लाएँगे