Noor
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Noor / क़ुरआन / अन-नस्र
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अन-नस्र — सहायता

النَّصۡرِ
मदनी आयत 3
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सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।

आयत 1

إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ

Iza jaa-a nas rullahi walfath

ऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी

आयत 2

وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًۭا

Wa ra-aitan naasa yadkhuloona fee deenil laahi afwajah

और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं

आयत 3

فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا

Fa sab bih bihamdi rabbika was taghfir, innahu kaana tawwaaba

तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है