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Noor / क़ुरआन / अत-तकवीर
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अत-तकवीर — लपेटा जाना

التَّكۡوِيرِ
मक्की आयत 29
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सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।

आयत 1

إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْ

Izash shamsu kuwwirat

जिस वक्त आफ़ताब की चादर को लपेट लिया जाएगा

आयत 2

وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْ

Wa izan nujoomun kadarat

और जिस वक्त तारे गिर पडेग़ें

आयत 3

وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْ

Wa izal jibaalu suyyirat

और जब पहाड़ चलाए जाएंगें

आयत 4

وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْ

Wa izal 'ishaaru 'uttilat

और जब अनक़रीब जनने वाली ऊंटनियों बेकार कर दी जाएंगी

आयत 5

وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْ

Wa izal wuhooshu hushirat

और जिस वक्त वहशी जानवर इकट्ठा किये जायेंगे

आयत 6

وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْ

Wa izal bihaaru sujjirat

और जिस वक्त दरिया आग हो जायेंगे

आयत 7

وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْ

Wa izan nufoosu zuwwijat

और जिस वक्त रुहें हवियों से मिला दी जाएंगी

आयत 8

وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْ

Wa izal maw'oodatu su'ilat

और जिस वक्त ज़िन्दा दर गोर लड़की से पूछा जाएगा

आयत 9

بِأَىِّ ذَنۢبٍۢ قُتِلَتْ

Bi ayyi zambin qutilat

कि वह किस गुनाह के बदले मारी गयी

आयत 10

وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْ

Wa izas suhufu nushirat

और जिस वक्त (आमाल के) दफ्तर खोले जाएं

आयत 11

وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْ

Wa izas samaaa'u kushitat

और जिस वक्त आसमान का छिलका उतारा जाएगा

आयत 12

وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْ

Wa izal jaheemu su'-'irat

और जब दोज़ख़ (की आग) भड़कायी जाएगी

आयत 13

وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْ

Wa izal jannatu uzlifat

और जब बेहिश्त क़रीब कर दी जाएगी

आयत 14

عَلِمَتْ نَفْسٌۭ مَّآ أَحْضَرَتْ

'Alimat nafsum maaa ahdarat

तब हर शख़्श मालूम करेगा कि वह क्या (आमाल) लेकर आया

आयत 15

فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِ

Falaaa uqsimu bil khunnas

तो मुझे उन सितारों की क़सम जो चलते चलते पीछे हट जाते

आयत 16

ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِ

Al jawaaril kunnas

और ग़ायब होते हैं

आयत 17

وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ

Wallaili izaa 'as'as

और रात की क़सम जब ख़त्म होने को आए

आयत 18

وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ

Wassubhi izaa tanaffas

और सुबह की क़सम जब रौशन हो जाए

आयत 19

إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍۢ كَرِيمٍۢ

Innahoo laqawlu rasoolin kareem

कि बेशक यें (क़ुरान) एक मुअज़िज़ फरिश्ता (जिबरील की ज़बान का पैग़ाम है

आयत 20

ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍۢ

Zee quwwatin 'inda zil 'arshi makeen

जो बड़े क़वी अर्श के मालिक की बारगाह में बुलन्द रुतबा है

आयत 21

مُّطَاعٍۢ ثَمَّ أَمِينٍۢ

Mutaa'in samma ameen

वहाँ (सब फरिश्तों का) सरदार अमानतदार है

आयत 22

وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍۢ

Wa maa saahibukum bimajnoon

और (मक्के वालों) तुम्हारे साथी मोहम्मद दीवाने नहीं हैं

आयत 23

وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِ

Wa laqad ra aahu bilufuqil mubeen

और बेशक उन्होनें जिबरील को (आसमान के) खुले (शरक़ी) किनारे पर देखा है

आयत 24

وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍۢ

Wa maa huwa 'alal ghaibi bidaneen

और वह ग़ैब की बातों के ज़ाहिर करने में बख़ील नहीं

आयत 25

وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَٰنٍۢ رَّجِيمٍۢ

Wa maa huwa biqawli shaitaanir rajeem

और न यह मरदूद शैतान का क़ौल है

आयत 26

فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ

Fa ayna tazhaboon

फिर तुम कहाँ जाते हो

आयत 27

إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌۭ لِّلْعَٰلَمِينَ

In huwa illaa zikrul lil'aalameen

ये सारे जहॉन के लोगों के लिए बस नसीहत है

आयत 28

لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ

Liman shaaa'a minkum ai yastaqeem

(मगर) उसी के लिए जो तुममें सीधी राह चले

आयत 29

وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَ

Wa maa tashaaa'oona illaaa ai yashaaa 'al laahu Rabbul 'Aalameen

और तुम तो सारे जहॉन के पालने वाले ख़ुदा के चाहे बग़ैर कुछ भी चाह नहीं सकते