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सजदे की दुआ

नमाज़ · 7 दुआएँ

सजदे की दुआ 0:00
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1

سُبْحَانَ رَبِّيَ الأَعْلَى (ثلاث مرات)

मेरा महान रब पाक है।) तीन बार पढ़े। (1) ................ (1) अबू दाऊद, हदीस संख्याः870, तिर्मिज़ी ,हदीस संख्याः262, नसाई, हदीस संख्याः1007, इब्ने माजा, हदीस संख्याः897, अह़मद, हदीस संख्याः3514, और देखिएः सह़ीह़ तिर्मिजीः1/83

स्रोत: Abu Dawud, Ibn Majah, An-Nasa'i, At-Tirmizi, Ahmad, Sahih At-Tirmizi (Al-Albani) 1/83.

2

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ رَبَّنَا وَبِحَمْدِكَ, اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي

पाक है तू ऐ अल्लाह! ऐ हमारे रब! और हर प्रकार की तारीफ़ तेरे ही लिए है। ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे।) (1) ................... (1) बुख़ारी हदीस संख्याः794, मुस्लिम हदीस संख्याः484, दुआ संख्याः34 में ये रिवायत गुज़र चुकी है।

स्रोत: Al-Bukhari, Muslim.

3

سُبوحٌ, قُدُّوسٌ, رَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ

अत्यधिक पवित्र एवं पुणीत है फ़रिश्तों तथा रूह़ (जिब्राईल) का रब।) (1) ................. (1) मुस्लिमः1/353, हदीस संख्याः487, अबू दाऊदः1/230, हदीस संख्याः872, दुआ संख्याः35 में ये रिवायत गुज़र चुकी है।

स्रोत: Muslim 1/533.

4

اللَّهُمَّ لَكَ سَجَدْتُ وَبِكَ آمَنْتُ, وَلَكَ أَسْلَمْتُ, سَجَدَ وَجْهِيَ لِلَّذِي خَلَقَهُ, وَصَوَّرَهُ, وَشَقَّ سَمْعَهُ وَبَصَرَهُ, تَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسنُ الْخَالِقينَ

ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए ही सज्दा किया, तुझी पर ईमान लाया और तेरा ही फ़रमांबरदार बना। मेरे चेहरे ने उस ज़ात के लिए सज्दा किया जिसने उसे पैदा किया, उसकी सूरत बनाई, कानों में सूराख़ बनाए और आंखों के शिगाफ़ बनाए। बरकत वाला है अल्लाह, जो तमाम बनाने वालों से अच्छा है।) (1) ................... (1) मुस्लिमः1/534, हदीस संख्याः771, आदि।

स्रोत: Muslim 1/534.

5

سُبْحَانَ ذِي الْجَبَرُوتِ, وَالْمَلَكُوتِ, وَالْكِبْرِيَاءِ, وَالْعَظَمَةِ

पाक है अत्यधिक शक्ति रखने वाला, बड़े मुल्क वाला और बड़ाई तथा अ़ज़्मत वाला (अल्लाह)।) (1) ................... (1) अबू दाऊदः1/230, हदीस संख्याः873, नसाई, हदीस संख्याः1131, अह़मद, हदीस संख्याः23980, अल्बानी ने इसे सह़ीह़ अबू दाऊदः1/166 में सह़ीह़ कहा है। दुआ संख्याः37 में ये रिवायत गुज़र चुकी है।

स्रोत: Abu Dawud 1/230, An-Nasa'i, Ahmad, Sahih Abu Dawud 1/166.

6

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ: دِقَّهُ وَجِلَّهُ, وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ, وَعَلاَنِيَّتَهُ وَسِرَّهُ

ऐ अल्लाह! मेरे छोटे-बड़े, अगले-पिछले तथा ज़ाहिर और पोशीदा तमाम गुनाहों को बख़्श दे।) (1) .................. (1) मुस्लिमः1/230, हदीस संख्याः483

स्रोत: Muslim 1/350.

7

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ, وَبِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقوبَتِكَ, وَأَعُوذُ بِكَ مِنْكَ, لاَ أُحْصِي ثَنَاءً عَلَيْكَ, أَنْتَ كَمَا أَثْنَيْتَ عَلَى نَفْسِكَ

ऐ अल्लाह! मैं तेरी नाराज़गी से भाग कर तेरी रज़ा की पनाह में आता हूं, तेरी सज़ा से तेरी माफ़ी की पनाह में आता हूं और तुझसे तेरी पनाह में आता हूं। तू उसी तरह़ है जिस तरह़ तूने ख़ुद अपनी तारीफ़ की है।) (1) .................................. (1) अबू-दाऊद ,हदीस संख्याः1427, तिर्मिज़ी, हदीस संख्याः3566, नसाई,हदीस संख्याः1746, इब्ने माजा हदीस संख्याः1179, अह़मद, हदीस संख्याः751, देखिएः सह़ीह तिर्मिज़ीः3/180 , सह़ीह इब्ने माजाः1/194 और अल्बानी की इरवाउल-ग़लीलः2/175

स्रोत: Muslim 1/352.