1
اللَّهُمَّ بَاعِدْ بَيْنِي وَبَيْنَ خَطَايَايَ كَمَا بَاعَدْتَ بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ, اللَّهُمَّ نَقِّنِي مِنْ خَطَايَايَ كَمَا يُنَقَّى الثَّوْبُ الْأَبْيَضُ مِنَ الدَّنَسِ, اللَّهُمَّ اغْسِلْني مِنْ خَطَايَايَ, بِالثَّلْجِ وَالْماءِ وَالْبَرَدِ
ऐ अल्लाह! मेरे और मेरे गुनाहों के बीच मश्रिक़ और मग़्रिब जितनी दूरी कर दे। ऐ अल्लाह! मुझे मेरे गुनाहों से इस तरह़ पाक-साफ़ कर दे, जिस तरह़ सफ़ेद कपड़ा मैल-कुचैल से साफ़ किया जाता है। ऐ अल्लाह! मुझे मेरे गुनाहों से बर्फ़, पानी और ओलों के साथ धो दे।) (1) ..................... (1) बुखारीः1/181, हदीस संख्याः744, मुस्लिमः1/419, हदीस संख्याः598
स्रोत: Al-Bukhari 1/181, Muslim 1/419.
2
سُبْحانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ, وَتَبارَكَ اسْمُكَ, وَتَعَالَى جَدُّكَ, وَلاَ إِلَهَ غَيْرُكَ
ऐ अल्लाह! तू पाक है और हर क़िस्म की तारीफ़ केवल तेरे ही लिए है। बाबरकत है तेरा नाम, बुलंद है तेरी शान और तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं।) (1) ...................... (1) मुस्लिम, हदीस संख्याः399, अबू-दाऊद हदीस संख्याः775, तिर्मिज़ी हदीस संख्याः243, इब्ने माजा हदीस संख्याः806, नसाई, हदीस संख्याः899, देखिएः सह़ीह़ तिर्मिज़ीः1/77, सह़ीह इब्ने माजाः1/135
स्रोत: Abu Dawud, Ibn Majah, An-Nasa'i, At-Tirmizi, Al-Albani, Sahih At-Tirmizi 1/77, Sahih Ibn Majah 1/135.
3
وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ حَنِيفَاً وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ, إِنَّ صَلاَتِي, وَنُسُكِي, وَمَحْيَايَ, وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ, لاَ شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا مِنَ الْمُسْلِمِينَ. اللَّهُمَّ أَنْتَ المَلِكُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ, أَنْتَ رَبِّي وَأَنَا عَبْدُكَ, ظَلَمْتُ نَفْسِي وَاعْتَرَفْتُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي ذُنُوبي جَمِيعَاً إِنَّهُ لاَ يَغْفِرُ الذُّنوبَ إِلاَّ أَنْتَ. وَاهْدِنِي لِأَحْسَنِ الأَخْلاقِ لاَ يَهْدِي لِأَحْسَنِها إِلاَّ أَنْتَ, وَاصْرِفْ عَنِّي سَيِّئَهَا, لاَ يَصْرِفُ عَنِّي سَيِّئَهَا إِلاَّ أَنْتَ, لَبَّيْكَ وَسَعْدَيْكَ, وَالخَيْرُ كُلُّهُ بِيَدَيْكَ, وَالشَّرُّ لَيْسَ إِلَيْكَ, أَنَا بِكَ وَإِلَيْكَ, تَبارَكْتَ وَتَعَالَيْتَ, أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتوبُ إِلَيْكَ
मैंने अपना चेहरा उस ज़ात की तरफ़ फेर लिया, जिसने यकसू (एकाग्रचित) होकर आस्मानों और ज़मीन को बनाया और मैं मुश्रिकों में से नहीं हूं। मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी, मेरी ज़िन्दगी और मेरी, मौत सारे जहान वालों के रब अल्लाह के लिए है। उसका कोई शरीक नहीं। मुझे इसी अक़ीदे पर ईमान रखने का ह़ुक्म दिया गया है औऱ मैं मुसलमानों में से हूं। ऐ अल्लाह! तू ही बादशाह है, तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, तू ही मेरा रब है और मैं तैरा बंदा हूं। मैंने अपने आप पर ज़ुल्म किया है। अपने गुनाहों का इक़्रार करता हूं। अतः मेरे सारे गुनाहों को बख़्श दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई और गुनाहों को बख़्श नहीं सकता। और मुझे सबसे अच्छे अख़्लाक़ (स्वभाव) की ओर हिदायत दे। सबसे अच्छे अख़्लाक़ (स्वभाव) की ओर हिदायत तेरे सिवा कोई नहीं दे सकता। ऐ अल्लाह! मैं इबादत के लिए हीज़िर हूं, तेरी तारीफ़ के लिए हीज़िर हूं। हर प्रकार की भलाई तेरे हाथों में है और बुराई की निस्बत तेरी तरफ नहीं की जा सकती। मैं तेरी तौफ़ीक़ से हूं और तेरी ओर मुतवज्जेह हूं। तू बरकत वाला और बुलंद है। मैं तुझसे माफी मांगता हूं और तौबा करता हूं।) (1) .................... (1) मुस्लिमः1/534, हदीस संख्याः771
स्रोत: Muslim 1/534
4
اللَّهُمَّ رَبَّ جِبْرَائِيلَ, وَمِيْكَائِيلَ, وَإِسْرَافِيلَ, فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ, عَالِمَ الغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَنْتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ. اهْدِنِي لِمَا اخْتُلِفَ فِيهِ مِنَ الْحَقِّ بِإِذْنِكَ إِنَّكَ تَهْدِي مَنْ تَشَاءُ إِلَى صِرَاطٍ مُسْتَقيمٍ
ऐ अल्लाह! ऐ जिब्राईल, मीकाईल और इस्राफ़ील के रब! आस्मानों और ज़मीन के पैदा करने वाले! ग़ायब और ह़ाज़िर को जानने वाले! अपने बंदों के बीच तू ही उस चीज़ के बारे में फ़ैस्ला करेगा, जिसमें वे इख़्तिलाफ़ करते थे। ह़क़ की जिन बातों में इख़्तिलाफ़ हो गया है, तू अपनी इजाज़त से मुझे उनके सम्बंध में च्चाई की ओर हिदायत दे दे। बेशक तू जिसे चाहता है, सीधी राह की तरफ हिदायत देता है।) (1) ................... (1) मुस्लिमः1/534, हदीस संख्याः770
स्रोत: Muslim 1/534
5
اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرَاً, اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيراً, اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيراً, وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثيراً, وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثيراً, وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثيراً, وَسُبْحَانَ اللَّهِ بُكْرَةً وَأَصِيلاً
(ثَلاثاً) أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ: مِنْ نَفْخِهِ, وَنَفْثِهِ, وَهَمْزِهِ
अल्लाह सबसे बड़ा है, बहुत बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है, बहुत बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है, बहुत बड़ा है। हर प्रकार की अत्यधिक प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है। हर प्रकार की अत्यधिक प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है। हर प्रकार की अत्यधिक प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है। मैं सुबह़-शाम अल्लाह की पाकी बयान करता हूं।) तीन बार (मैं अल्लाह की पनाह पकड़ता हूं शैतान से, उसकी फूंक से, उसके थुकथुकाने से औऱ उसके चोके से।) (1) ....................... (1) अबू-दाऊदः1/203, हदीस संख्याः764, इब्ने माजाः1/265, हदीस संख्याः807, अह़मदः4/85, हदीस संख्याः16739, शैख़ शोऐब अरनाऊत अपनी मुस्नद की तह़क़ीक़ में कहते हैंः((ये ह़दीस ह़सन लेग़ैरेही है।)) और इब्ने तैमिया की किताब अल-कलिमुत्-तैयिब की तख़रीज, हदीस संख्याः62, में शैख़ अब्दुल क़ादिर अरनाऊत कहते हैंः((ये ह़दीस श्वाहिद के आधार पर सह़ीह़ है।)) इसे मुस्लिम ने इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से इससे मिलते-जुलते शब्दों में रिवायत किया है। इसमें एक क़िस्सा भी है। 1/420, हदीस संख्याः601
स्रोत: Abu Dawud 1/203, Ibn Majah 1/265, Ahmad 4/85. Muslim 1/420.
6 AI
اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ, أَنْتَ نُورُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ, وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ قَيِّمُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ, [وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ رَبُّ السَّمَواتِ وَالأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ] [وَلَكَ الْحَمْدُ لَكَ مُلْكُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ] [وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ مَلِكُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ] [وَلَكَ الْحَمْدُ] [أَنْتَ الْحَقُّ, وَوَعْدُكَ الْحَقُّ, وَقَوْلُكَ الْحَقُّ, وَلِقاؤُكَ الْحَقُّ, وَالْجَنَّةُ حَقٌّ, وَالنَّارُ حَقٌّ, وَالنَّبِيُّونَ حَقٌّ, وَمحَمَّدٌ صلى الله عليه وسلم حَقٌّ, وَالسّاعَةُ حَقٌّ] [اللَّهُمَّ لَكَ أَسْلَمتُ, وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ, وَبِكَ آمَنْتُ, وَإِلَيْكَ أَنَبْتُ, وَبِكَ خاصَمْتُ, وَإِلَيْكَ حاكَمْتُ. فَاغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ, وَمَا أَخَّرْتُ, وَمَا أَسْرَرْتُ, وَمَا أَعْلَنْتُ] [أَنْتَ المُقَدِّمُ, وَأَنْتَ المُؤَخِّرُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ] [أَنْتَ إِلَهِي لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ]
ऐ अल्लाह! सब प्रशंसा तेरे लिए है; तू आसमानों, ज़मीन और उनमें जो हैं उनका नूर है। सब प्रशंसा तेरे लिए है; तू आसमानों, ज़मीन और उनमें जो हैं उनको क़ायम रखने वाला है। [सब प्रशंसा तेरे लिए है; तू आसमानों, ज़मीन और उनमें जो हैं उनका रब है।] [सब प्रशंसा तेरे लिए है; आसमानों, ज़मीन और उनमें जो हैं उनकी बादशाही तेरी ही है।] [सब प्रशंसा तेरे लिए है; तू आसमानों और ज़मीन का बादशाह है।] [सब प्रशंसा तेरे लिए है।] [तू सत्य है, तेरा वादा सत्य है, तेरा कथन सत्य है, तेरी मुलाक़ात सत्य है, जन्नत सत्य है, आग सत्य है, नबी सत्य हैं, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सत्य हैं और क़ियामत सत्य है।] [ऐ अल्लाह! तेरे ही आगे मैंने सिर झुकाया, तुझ पर ही भरोसा किया, तुझ पर ही ईमान लाया, तेरी ही ओर रुजू किया, तेरी मदद से झगड़ा किया और तुझे ही फ़ैसला करने वाला बनाया। अतः मेरे अगले-पिछले, छिपे-खुले सब गुनाह क्षमा कर दे।] [तू ही आगे करने वाला और तू ही पीछे करने वाला है; तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं।] [तू ही मेरा माबूद है; तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं।]
स्रोत: Al-Bukhari, cf. Al-Asqalani, Fathul-Bari 3/3 , 11/ 116, 13/371, 423, 465. See also Muslim for a shorter account, 1/532.